सेना बनी हत्यारों का गिरोह: सीरियाई जनरल

सरकार के खिलाफ सेना के अधिकारी भी अब मोर्चा खोल रहे हैं
इमेज कैप्शन, सरकार के खिलाफ सेना के अधिकारी भी अब मोर्चा खोल रहे हैं

सीरिया के एक प्रमुख सैन्य कमांडर ने राष्ट्रपति बशर अल असद का साथ छोड़ते हुए देश की सेना पर कत्ल करने वाले गिरोह में तबदील हो जाने का आरोप लगाया है.

उन्होंने कहा है कि सेना राष्ट्र की रक्षा करने के अपने मूल मकसद से भटक गई है.

सीरियाई मिलिट्री पुलिस के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल अल अज़ीज़ अल शलाल अब राष्ट्रपति बशर अल असद के खिलाफ चल रहे विद्रोह से जुड़ गए हैं. ऐसा माना जा रहा है कि वह सीमा पार कर तुर्की पहुंच गए हैं.

सीरिया में पिछले डेढ़ साल से राष्ट्रपति असद के खिलाफ विद्रोह चल रहा है. विद्रोही लगभग 40 साल से सीरिया में सत्ता में बने हुए असद परिवार को सत्ता से बेदख़ल करना चाहते हैं और देश में राजनीतिक सुधार चाहते हैं.

पश्चिमी देशों ने विद्रोहियों के विरुद्ध बल प्रयोग पर आपत्ति जताई है लेकिन चीन और रूस सीरिया में अंतरराष्ट्रीय दखल के खिलाफ हैं.

सेना में बढ़ रहा असंतोष

जनरल शलाल ने तुर्की की सीमा पार करने के बाद कई अरबी सैटेलाइट स्टेशनों को यह इत्तिला दी कि वह सेना से असंतुष्ट होकर अलग हुए हैं. उनका कहना था कि सेना ने पूरे देश भर के गांवों और शहरों में नरसंहार को अंजाम दिया.

लेफ्टिनेंट जनरल शलाल
इमेज कैप्शन, लेफ्टिनेंट जनरल शलाल ने अपने वीडियो संदेश में सेना की आलोचना की है

विपक्षी सूत्रों का कहना है कि जनरल शलाल शुरू से ही गोपनीय तरीके से विद्रोहियों का सहयोग कर रहे थे. सीरिया में करीब दो साल पहले जब विद्रोह के हालात बनने लगे थे उसी वक्त से सेना के इस बड़े अधिकारी की मंशा को लेकर संदेह बरकरार था.

जनरल शलाल ने भी इस बात को स्वीकार किया कि दूसरे कई शीर्ष अधिकारियों में भी ऐसे बाग़ी तेवर हैं लेकिन वे सेना से खुद को अलग नहीं कर पा रहे हैं क्योंकि उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है.

संघर्ष है जारी

सीरिया में सेना और विद्रोहियों के बीच संघर्ष जारी है और ऐसी ख़बरें हैं कि विद्रोहियों ने देश के कुछ हिस्से में अपना दबदबा बनाया है.

इस बीच सीरिया के लिए नियुक्त अंतरराष्ट्रीय शांति दूत लखदर ब्राहिमी ने विपक्षी नेताओं के साथ दमिश्क में वार्ता जारी रखी है.

सरकार जहां विद्रोह को विदेशी साजिश क़रार दे रहे हैं वहीं विद्रोही, राष्ट्रपति असद से तुरंत सत्ता छोड़ने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल सीरिया में शांतिपूर्ण समझौते की गुंजाइश कम ही दिख रही है.

सीरिया में अंतरराष्ट्रीय मीडिया के रिपोर्टिंग करने पर पाबंदी है. हालांकि बीबीसी और अन्य संस्थानों को विद्रोहियों और मानवाधिकार व विपक्षी कार्यकर्ताओं से जानकारियां प्राप्त होती रही हैं.