अर्दोआन पांच साल और सत्ता में रहे तो तुर्की में क्या बदलेगा?

रेचेप तैय्यप अर्दोआन

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    • Author, ओर्ला गुएरिन
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्तांबुल
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  • तुर्की में 20 साल से रेचेप तैय्यप अर्दोआन सत्ता में हैं.
  • तुर्की के इतिहास में ये पहली बार होगा जब राष्ट्रपति चुनने के लिए दूसरे दौर का मतदान करना पड़ेगा.
  • देश में मंहगाई दर आसमान छू रही है और बढ़कर 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
  • पहले दौर के चुनाव में राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन, 49.5 प्रतिशत वोट लेकर अपने प्रतिद्वंदीकमाल कलचदारलू से आगे थे
  • जीत के लिए 50%फ़ीसदी से अधिक मत ज़रूरी, किसी उम्मीदवार को इतने मत नहीं मिले इसलिए दूसरे चरण का मतदान
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लगभग दो दशक सत्ता में रहने के बाद और क़रीब दर्जन भर चुनावों का सामना कर चुके तुर्की के दबंग नेता रेचेप तैय्यप अर्दोआन को, लोगों को समझा-बुझाकर अपने पाले में लाने का हुनर बख़ूबी आता है.

जब वो राजधानी इस्तांबुल में टैक्सी ड्राइवरों के एक आयोजन में पहुंचे तो ऐसा लगा कि अर्दोआन की हुकूमत से लोगों का दिल अभी भरा नहीं है.

वहां मौजूद भीड़ को अर्दोआन ने कुछ इस तरह क़ाबू में कर रखा था, मानो उन्होंने उन पर कोई जादू चलाया हो.

लोग उनके एक-एक इशारे पर जिस तरह जोश में नारे लगा रहे थे, तालियां बजा रहे थे और विपक्ष को कोस रहे थे, उससे ऐसा लग रहा था मानो ये कोई ऑर्केस्ट्रा हो जिसका हर यंत्र अर्दोआन के इशारे पर बज उठता था.

ये आयोजन इस्तांबुल में बने एक कन्वेंशन सेंटर में हो रहा था जिसे उस दौर में बनाया गया था, जब अर्दोआन इस्तांबुल के मेयर हुआ करते थे.

इस जनसभा में उत्साह उस वक़्त अपने चरम पर पहुंच गया जब जाते-जाते राष्ट्रपति अर्दोआन ने अपना आख़िरी जुमला कहा, 'एक देश, एक झंडा, एक मातृभूमि, एक राष्ट्र.'

इस वक्त तक यहां मौजूद कई उम्रदराज़ टैक्सी ड्राइवर खड़े होकर हवा में मुट्ठियां लहरा रहे थे या फिर हाथ उठाकर अर्दोआन को सलामी दे रहे थे.

तुर्की में चुनाव

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तुर्की में चुनाव

  • 14 मई को तुर्की में संसदीय और राष्ट्रपति पद के चुनाव में मतदान हुए.
  • 69 साल के रेचेप तैय्यप अर्दोआन 20 साल सत्ता में रहने के बाद एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं.
  • उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं 74 साल के विपक्षी नेता कमाल कलचदारलू.
  • तुर्की में 600 सीटों वाली संसद के अलावा दो राउंड में राष्ट्रपति चुनाव होते हैं.
  • पहले राउंड में किसी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत न मिलने पर रन-ऑफ़ राउंड होता है. इसमें जिन दो उम्मीदवारों को पहले राउंड में सबसे अधिक वोट मिलते हैं उनके बीच मुक़ाबला होगा.
  • रन-ऑफ़ राउंड में 28 तारीख़ मतदान होना है.
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सिर पर पारंपरिक तरीक़े से अबाया लपेटे हुए एक महिला आयसे ओज़्दोआन जनसभा में अर्दोआन के पहुंचने से काफी पहले अपने टैक्सी ड्राइवर पति के साथ वहां पहुंची थीं. वो कहती हैं कि वो अपने नेता के हर लफ़्ज़ को अच्छे से सुनना चाहती थीं. उनकी सीट के बगल में एक बैसाखी रखी हुई थी. आएसे को चलने में दिक़्क़त होती है, लेकिन वो ख़ुद को इस जनसभा से दूर नहीं रख पाई थीं.

आएसे कहती हैं, "मेरे लिए अर्दोआन ही दुनिया हैं. पहले हमारे लिए अस्पताल जाकर इलाज कराना मुमकिन नहीं था, लेकिन आज हम आसानी से अस्पताल जा सकते हैं. हमारे पास यातायात के साधन हैं. हमारे पास अब सब-कुछ है. उन्होंने सड़कों को दुरुस्त किया है, मस्जिदें बनवाई हैं, हाई स्पीड ट्रेन और अंडरग्राउंड रेलवे लाइन बिछाकर देश को तरक़्क़ी की राह पर ले गए हैं."

राष्ट्रपति अर्दोआन के राष्ट्रवादी संदेश ने भीड़ में शामिल कई और लोगों को अपनी तरफ आकर्षित किया था. इस रैली में 58 बरस के कादिर काव्लिओग्लू भी शामिल थे. कादिर पिछले 40 साल से मिनीबस चला रहे हैं.

वो कहते हैं, "हम अपने मुल्क से और अपनी जन्मभूमि से बहुत प्यार करते हैं. इसलिए हम पूरी मज़बूती से राष्ट्रपति के पीछे चल रहे हैं. हम उनके हर क़दम पर उनके साथ हैं. चाहे आलू-प्याज़ की क़ीमतें बढ़ें या फिर ये सस्ती हों, हमारे राष्ट्रपति ही हमारी उम्मीद हैं."

अर्दोआन

बंटा हुआ मुल्क

इस महीने की शुरुआत में जब तुर्की में राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान हुआ तो यहां बढ़ती महंगाई सबसे बड़ा मुद्दा था, लोगों की जेबें ख़ाली थीं. चीज़ों की क़ीमतें आसमान छू रही हैं और महंगाई की दर बढ़कर 43 प्रतिशत तक पहुंच गई है.

इसके बावजूद तुर्की की अर्थव्यवस्था और बहुत-सी अन्य चीज़ों पर अपना नियंत्रण रखने वाले राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन, 49.5 प्रतिशत वोट लेकर अपने प्रतिद्वंदियों से काफ़ी आगे चल रहे थे.

राष्ट्रपति चुनाव में अर्दोआन के सबसे बड़े प्रतिद्वंदी हैं कमाल कलचदारलू, जो कई विपक्षी दलों के साझा उम्मीदवार हैं. चुनाव में उन्हें 44.9 प्रतिशत वोट मिले थे.

ज़ाहिर है कि इस बार के चुनावों में तुर्की के मतदाताओं का ध्रुवीकरण हो चुका है और दोनों प्रतिद्वंदियों के बीच फासला केवल 4 फ़ीसदी मतों का है, लेकिन इसे पाट पाना लगभग असंभव है.

राष्ट्रपति चुनाव में कट्टर राष्ट्रवादी पार्टी से ताल्लुक रखने वाले एक उम्मीदवार सिनान ओआन को अप्रत्याशित रूप से 5.2 प्रतिशत वोट मिले थे. इसकी वजह से चुनावी मुक़ाबला दूसरे दौर के मतदान की तरफ़ बढ़ गया.

कलचदारलू

रविवार को दूसरे दौर की वोटिंग होनी है. दूसरे दौर के मतदान से पहले सिनान ओआन ने अर्दोआन का समर्थन करने का ऐलान कर दिया है.

माना जा रहा है कि इस बार के चुनाव में अर्दोआन एक बार फिर बाज़ी मार ले जाएंगे. हालांकि, पहले दौर के नतीजों से उन्हें एक सबक़ ज़रूर मिला है, वो ये कि ओपिनियन पोल पर कतई भरोसा न करें.

तुर्की भयंकर आर्थिक संकट से जूझ रहा है. इसी साल तुर्की में एक के बाद एक, दो भयंकर भूकंप आए जिसमें कम से कम पचास हज़ार लोगों की जान गई. सरकार पर राहत और बचाव काम में भी ढिलाई बरतने के आरोप लगे थे. लेकिन इसके बावजूद अर्दोआन जनता की पहली पसंद बने हुए दिखते हैं. आख़िर इसकी वजह क्या है?

इस्तांबुल के कादिर हास यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंधों के प्रोफ़ेसर सोली ओज़ेल कहते हैं कि, "मुझे लगता है कि अर्दोआन ऐसे मज़बूत नेता हैं जिनकी लोकप्रियता पर आलोचनाओं से कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. वो जनता से भी जज़्बाती तौर पर जुड़े हुए हैं. आप इस बात से इनकार नहीं कर सकते कि उनके व्यक्तित्व में ताकत की झलक है. ये ऐसी ख़ूबी है जो उनके विरोधी कमाल कलचदारलू में नहीं नज़र आती."

कमाल कलचदारलू युवा मतदाताओं का अभिवादन करते हुए

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विपक्ष का यू-टर्न

कमाल कलचदारलू छह विपक्षी दलों के गठबंधन के साझा उम्मीदवार हैं. पहले लोगों को उनसे उम्मीद मिलती थी. वो आज़ादी और लोकतंत्र का वादा करते थे.

तुर्की के एक पत्रकार के मुताबिक़, "पहले दौर में मिली निराशा के बाद, कलचदारलू ने बड़ी तेज़ी से दक्षिणपंथी रुख़ अपना लिया है. अब वो घर के हर सदस्य का ख़याल रखने वाले बुज़ुर्ग कम, और कट्टर राष्ट्रवादी ज़्यादा नज़र आते हैं."

वो कहते हैं, "ऐसा लगता है कि अब होड़ इस बात की लगी है कि कौन कितना नीचे गिर सकता है."

हाल ही में एक चुनावी रैली में कमाल कलचदारलू ने कहा, "मैं घोषणा करता हूं कि राष्ट्रपति चुना जीत गया तो सभी शरणार्थियों को उनके देश वापस भेजूंगा."

कंधे तक लंबे काले बाल रखने वाले और कानों में बाली पहने मर्त कहते हैं कि अब समाज के लिए ख़तरा बढ़ता जा रहा है.

वो कहते हैं, "अर्दोआन ख़ुद अपने हर कार्यक्रम में, अपने हर भाषण में, हमें शिकार की तरह पेश करते हैं. हर गुज़रते दिन के साथ सरकार हमें मुल्क का दुश्मन बनाती जा रही है."

मर्त कहते हैं कि, "सरकार जो कहती है, उसका असर आम लोगों पर भी पड़ता है. आप देख सकते हैं कि जो आपके सबसे क़रीब होते हैं, वो भी ऐसी बातों के बहकावे में आ जाते हैं. यहां तक कि आपके परिवार के लोग भी इसके बहकावे में आते हैं. अगर यही सिलसिला चलता रहा, तो आगे क्या होगा? हमें हमेशा चौकस रहना होगा. हम हर वक़्त तनाव और ख़ौफ़ से घिरे रहेंगे."

तुर्की में महंगाई

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तुर्की में एक नई अर्थव्यवस्था

अपने हाव भाव से बहुत कुछ कह जाने वाली ज़ैनेब को एक नए दौर की उम्मीद है लेकिन वो कहती हैं कि शायद ये नया दौर कभी नहीं आएगा.

ज़ैनेब कहती हैं, "मैं 21 साल की हूं और वो (अर्दोआन) यहां पिछले 20 बरस से सत्ता में हैं."

वो कहती हैं, "मैं बदलाव चाहती हूं और अगर बदलाव नहीं आता तो मुझे दुख होगा, मैं डरकर रहूंगी. वो हम पर और अधिक हमले करेंगे, वो हमारे और हक़ छीन लेंगे. वो हम पर और भी बहुत-सी पाबंदियां लगा देंगे. फिर भी हम कुछ न कुछ करते रहेंगे, अपनी लड़ाई लड़ते रहेंगे."

ज़ैनेब

इस सप्ताह रविवार को तुर्की के मतदाता राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर के लिए मतदान करेंगे.

तुर्की के इतिहास में ये पहली बार होगा जब लोगों को अपना राष्ट्रपति चुनने के लिए दूसरे दौर का मतदान करना पड़ेगा, वो भी तब जब उनका देश दोराहे पर खड़ा है.

इस बात को क़रीब सौ साल हो चुके हैं, जब मुस्तफ़ा कमाल अतातुर्क ने तुर्की को एक सेकुलर गणराज्य बनाया था.

रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने वादा किया है कि चुनाव जीतने पर 'तुर्की एक नई सदी' देखेगा. अर्दोआन के समर्थक मानते हैं कि वो देश का और विकास करेंगे और उसे मज़बूत बनाएंगे.

लेकिन उनके आलोचक कहते हैं कि अर्दोआन जीते, तो कमाल अतातुर्क की विरासत और कमज़ोर होगी, मुल्क में इस्लामीकरण बढ़ेगा और, तुर्की का भविष्य अंधेरे की ओर बढ़ता जाएगा.

कमाल कलचदारलू और रेचेप तैय्यप अर्दोआन

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रेचेप तैय्यप अर्दोआन

  • फरवरी 1954 में काले सागर के तट के पास एक शहर में जन्म.
  • पिता कोस्ट गार्ड थे. जब अर्दोआन 13 साल के थे, परिवार इस्तांबुल शिफ्ट हो गया.
  • इस्तांबुल के मरमाना यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट में डिग्री ली. प्रोफ़ेशनल फुटबॉल भी खेला.
  • वेलफ़ेयर पार्टी से जुड़े, 1994 में इस्तांबुल के मेयर चुने गए.
  • नस्लीय हिंसा भड़काने वाली कविता सार्वजनिक तौर पर पढ़ने के लिए जेल की सज़ा हुई. मेयर पद से इस्तीफ़ा देना पड़ा.
  • अगस्त 2001 में अब्दुल्ला गुल के साथ मिलकर जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी (एकेपी) बनाई.
  • 2002 में संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की, 2003 में प्रधानमंत्री बने.
  • 2003 से 2014 तक लगातार तीन बार देश के प्रधानमंत्री रहे.
  • 2014 में और फिर 2018 में राष्ट्रपति चुने गए.

कमाल कलचदारलू कौन हैं?

  • 17 दिसंबर 1948 को तुर्की के तुनसेली में जन्म.
  • परिवार का सरनेम काराबुलुत. पिता ने सरनेम बदलकर कलचदारलू कर लिया.
  • गाज़ी यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में डिग्री ली.
  • बाद में सिविल सर्विस में कदम रखा.
  • 1994 में तुर्की की इकोनॉमिक ट्रेंड पत्रिका ने 'ब्यूरोक्रेट ऑफ़ द ईयर' ख़िताब दिया.
  • 1999 में सिविल सर्विस से इस्तीफ़ा देकर राजनीति में कदम रखा.
  • मई 2010 से रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी का नेतृत्व.
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