सिंगापुर में तंगराजू सुपैया की फांसी पर क्यों मचा है हंगामा

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एक किलो गांजे की तस्करी के मुख्य दोषी को फांसी की सज़ा दिए जाने के ख़िलाफ़ सिंगापुर में विवाद पैदा हो गया है.
सामाजिक कार्यकर्ता इसके विरोध में आ गए हैं जबकि ब्रिटेन के एक अरबपति सर रिचर्ड ब्रैनसन ने मौत की सज़ा पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है.
तंगराजू सुपैया को दोषी ठहराए जाने के बाद फांसी की सज़ा बुधवार को दिए जाने का आदेश दिया गया है.
सिंगापुर में दुनिया का सबसे कड़ा नशा विरोधी क़ानून है और अधिकारियों का कहना है कि ये समाज की सुरक्षा के लिए ज़रूरी है.
लेकिन सामाजिक कार्यकर्ता इस तरह की मौत की सज़ा का विरोध करते रहे हैं.
अभी पिछले साल ही 22 अप्रैल 2022 को एक अन्य ड्रग तस्कर नागेंद्रन धर्मलिंगम को फांसी दे दी गई थी.
उनके बचाव पक्ष ने दलील दी थी नागेंद्रन मानसिक रूप से बीमार हैं इसलिए उन्हें फांसी न दी जाए. लेकिन अदालत ने इस याचिका को ख़ारिज कर दिया गया.
नागेंद्रन को तीन चम्मच हिरोइन के साथ पकड़ा गया था और वो 2010 से ही मौत की सज़ा का इंतज़ार कर रहे थे.
क्या है तंगराजू सुपैया का मामला?
46 साल के तंगराजू सुपैया को एक किलो गांजा सिंगापुर से मलेशिया पहुंचाने में दोषी पाया गया था.
हालांकि गांजे के साथ उन्हें नहीं पकड़ा गया लेकिन अभियोजन पक्ष का कहना था कि इस पूरी तस्करी का मास्टर माइंड वही थे. सरकारी वकील का ये भी कहना था कि जो दो मोबाइल नंबर ट्रेस किए गए थे, वे भी तंगराजू के ही थे.
लेकिन तंगराजू का दावा है कि इस मामले से जुड़े अन्य लोगों से उनकी कोई बात नहीं हुई. उनका एक फ़ोन खो गया था और इस बात से भी इनकार किया कि दूसरा फ़ोन उनका था.
ड्रग तस्करों के लिए सिंगापुर में मौत की सज़ा का और 'कूरियर' के लिए कम सज़ा का प्रावधान है.
तंगराजू की अंतिम अपील की सुनवाई करते हुए जज अभियोजन पक्ष की उस दलील से सहमत दिखे कि तंगराजू ने ही गांजे की डिलीवरी कराने में मुख्य भूमिका निभाई थी.
और इसके साथ ही अदालत ने उनकी सज़ा कम करने से इनकार कर दिया.

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अरबपति सर रिचर्ड ब्रैनसन ने क्या कहा?
ब्रिटिश अरबपति सर रिचर्ड ब्रैनसन ने इसी तरह के मामले में पिछले साल दी गई मौत की सज़ा की भी आलोचना की थी और कहा था कि 'नागेंद्रन धर्मलिंगम का मामला कई स्तरों पर हैरान करने वाला था.'
तंगराजू के मामले में सर रिचर्ड ब्रैनसन ने लिखा, "संदिग्ध सबूतों के आधार पर सिंगापुर एक निर्दोष आदमी की हत्या करने जा रहा है."
उन्होंने लिखा, "मौत की सज़ा देश की प्रतिष्ठा पहले से ही एक काले धब्बे की तरह है. इस तरह से दोषी दिए जाने के बाद फांसी की सज़ा देना हालात को और बिगाड़ेगा."
हालांकि उनके आरोपों को ख़ारिज़ करते हुए सिंगापर के गृह मंत्रालय ने कहा कि 'उनका दावा ग़लत है.'
मंत्रालय ने उन पर 'सिंगापुर के जजों और न्याय व्यवस्था के प्रति सम्मान न दिखाने का आरोप लगाया.'
परिवार ने क्यों कहा- फांसी के बाद भी लड़ते रहेंगे?
बीते रविवार को तंगराजू सुपैया के परिजनों ने कहा कि पिछले हफ़्ते फ़ांसी का नोटिस जारी होने के बाद वे चांगी जेल में मिलने गए थे और उनकी मुलाक़ात के दौरान तंगराजू शीशे के पार हिम्मत बांधे खड़े थे.
उनकी भांजी सुभाषिनी इलांगो ने बताया, "वो मेरी मां के सामने निश्चिंत चेहरा बनाए हुए खड़े थे क्योंकि वो नहीं चाहते थे कि मां रो पड़े. उन्होंने इस दिन के लिए मानसिक रूप से खुद को तैयार कर लिया है. उन्हें लगता है कि उनके साथ नाइंसाफ़ी हुई है और जो उन्होंने किया नहीं उसके लिए उन्हें फांसी पर चढ़ा दिया जाएगा."
तंगराजू के परिवार ने कहा कि वो अगर उन्हें फांसी की सज़ा हो भी जाती है तो भी वे सिंगापुर की न्यायिक व्यवस्था में सुधार के लिए अपना अभियान जारी रखेंगे.
तंगराजू की बहन लीला ने कहा, "अगर इस तरह की नाइंसाफ़ी मेरे भाई के साथ होती है तो मैं नहीं चाहूंगी कि ऐसा किसी और के साथ भी हो, इसलिए मैं अपना संघर्ष जारी रखूंगी."
ग़ौरतलब है कि सिंगापुर के पड़ोसी देश थाईलैंड और मलेशिया में ड्रग तस्करी के लिए इतने कड़े क़ानून नहीं हैं. थाईलैंड में गांजे के व्यापार को वैधता दे दी गई है जबकि मलेशिया में गंभीर अपराधों के लिए फांसी की सज़ा को ख़त्म कर दिया गया है.
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