एलन मस्क: ट्विटर को बेचने, ब्लू टिक हटाने जैसे तमाम सवालों पर क्या बोले

एलन मस्क ने बीबीसी को दिया इंटरव्यू

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अक्सर सुर्ख़ियों में रहने वाले ट्विटर के मालिक और टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क ने बीबीसी के नॉर्थ अमेरिका संपादक जेम्स क्लेटन को दिए ख़ास इंटरव्यू में कहा है कि वो बीबीसी का बहुत सम्मान करते हैं.

ट्विटर मुख्यालय में हुए इस इंटरव्यू के लिए मस्क ने आख़िरी समय पर हामी भरी थी.

लाखों यूज़र्स ने इस इंटरव्यू को ट्विटर पर लाइव देखा. इस दौरान उन्होंने ट्विटर और अमेरिकी चुनावों से लेकर डीप फ़ेक और आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की बात की.

मस्क से जब पूछा गया कि वो इंटरव्यू के लिए क्यों राज़ी हुए तो उन्होंने कहा, "फ़िलहाल बहुत कुछ चल रहा है. असल में मैं बीबीसी का बहुत ज़्यादा सम्मान करता हूं. ये साक्षात्कार कुछ सवाल पूछने, कुछ फ़ीडबैक पाने और क्या अलग किया जा सकता है, ये जानने का अच्छा मौक़ा है".

हाल ही में ट्विटर ने बीबीसी के अकाउंट को सरकार पोषित संस्थान बताया था जिसे लेकर बीबीसी ने एतराज़ जताया था. इस विवाद पर इंटरव्यू के दौरान मस्क ने प्रतिक्रिया दी.

मस्क ने हंसते हुए कहा, "बीबीसी को स्टेट फ़ंडेड मीडिया का टैग पसंद नहीं आया."

इस पर बीबीसी संवाददाता ने कहा कि बीबीसी ने इस टैग को सिरे से खारिज किया है. इसके बाद मस्क ने कहा कि ट्विटर का मकसद पारदर्शी और ईमानदार रहने का है लेकिन उन्होंने इस बात पर भी सहमति जताई कि टैग अपडेट किए जा सकते हैं. उन्होंने कहा कि हम टैग देने में लगातार सटीक होने की कोशिश कर रहे हैं और करते रहेंगे.

बीबीसी

उन्होंने कहा है कि इस टैग को बदल कर "मुझे लगता है कि इसे पब्लिक फ़ंडेड कहना सही होगा. इस पर अधिक आपत्ति नहीं होगी. हम सटीक होने की कोशिश कर रहे हैं."

उन्होंने इसकी पुष्टि की कि अमेरिका के एनपीआर रेडियो के लेबल को बदल कर "पब्लिक फ़ंडेड" किया जाएगा.

इससे पहले बीबीसी के ट्विटर अकाउंट में जोड़े गए नए टैग के बारे में बीबीसी ने ईमेल कर मस्क को इसे "जल्द से जल्द बदलने" की गुज़ारिश की.

मस्क ने कहा था कि वो मानते हैं कि जो मीडिया सबसे "कम पक्षपाती" है, उनमें से एक बीबीसी भी है.

उन्होंने कहा था कि वो इसमें बदलाव करेंगे ताकि बीबीसी की फ़ंडिंग की सही जानकारी दी जा सके.

उन्होंने कहा कि उनका इरादा ट्विटर को 'सबसे सटीक' प्लेटफ़ॉर्म बनाने का है. हालांकि उन्होंने ये भी कहा कि "कोई भी व्यवस्था पूरी तरह परफ़ेक्ट नहीं हो सकती."

ट्विटर से जुड़ा अनुभव

ट्विटर में उनका समय कैसा गुज़र रहा है इस सवाल पर मस्क ने कहा, "ये उबाऊ नहीं है. ये बहुत से उतार-चढ़ावों से भरा है. अब चीज़ें ठीक जा रही हैं."

उन्होंने ये भी माना कि कुछ तकनीकी समस्याएं आईं और कई बार ट्विटर ठप भी हुआ. हालांकि, ये उतने लंबे समय के लिए नहीं था और अब सब ठीक चल रहा है.

मस्क ट्विटर पर कई राजनीतिक विचार साझा करते आए हैं. कई लोग उन्हें ट्रंप का समर्थक बताते हैं.

हालांकि, बीबीसी को मस्क ने बताया कि बीते अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में उन्होंने जो बाइडन को वोट दिया था.

मस्क ने कहा, "बेशक क़रीब आधे देश ने डोनाल्ड ट्रंप के लिए वोट किया था. लेकिन मैं उनमें शामिल नहीं था."

एलन मस्क ने बीबीसी को दिया इंटरव्यू

मीडिया को ब्लूटिक देने पर बोले...

न्यूयॉर्क टाइम्स को मिले ब्लू टिक को हटाने के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में एलन मस्क ने कहा कि इस मामले में वो सभी को बराबर मानेंगे.

उन्होंने कहा, "ये एक छोटी रक़म है. मुझे नहीं पता उनकी क्या समस्या है, लेकिन हम सभी को एक समान रखना चाहेंगे."

उन्होंने कहा कि वो नहीं चाहते कि ट्विटर "ऐसे कुछ पत्रकारों को बड़ा बता कर पेश करे" जो ये तय करते हैं कि न्यूज़ क्या है. उन्होंने कहा, "मुझे उम्मीद है कि लोगों को ये चुनाव करना चाहिए न कि मीडिया को."

न्यूयॉर्क टाइम्स ने हाल में कहा था कि उसने सैद्धांतिक तौर पर ये फ़ैसला किया है कि वो पैसे देकर ब्लू टिक नहीं ख़रीदेगा.

मस्क ने ये भी साफ़ किया कि जिन्होंने ट्विटर ब्लू टिक नहीं खरीदा है, उनके प्रोफ़ाइल से अगले सप्ताह तक ब्लू टिक हट जाएगा.

बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के हिस्से ट्विटर से हटाने पर

बीबीसी संवाददाता ने मस्क से बीबीसी डॉक्यूमेंट्री के हिस्से ट्विटर से हटाए जाने पर भी सवाल पूछा कि क्या ऐसा भारत सरकार के कहने पर किया गया?

मस्क ने अपने जवाब में कहा, "मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. दरअसल भारत में सोशल मीडिया को लेकर बनाए गए नियम बेहद कड़े हैं. हम किसी देश के क़ानून के ख़िलाफ़ नहीं जा सकते. अगर हमारे सामने दो रास्ते हों- या तो हमारे कर्मचारियों को जेल जाना पड़े या फिर हम उस देश के क़ानून मानें तो ज़ाहिर सी बात है कि हम उस देश के क़ानून मानेंगे. बीबीसी भी यही करेगी."

कितने लोगों को निकाला गया?

ट्विटर से कितने लोगों को अब तक निकाला गया है इस बारे में एक सवाल के उत्तर में मस्क ने कहा कि जब उन्होंने कंपनी खरीदी थी उस वक्त उसमें 8,000 से कम लोग काम कर रहे थे, लेकिन अब कंपनी में केवल 1,500 लोग हैं.

मस्क से पूछा गया कि क्या लोगों को नौकरियों से निकालने में मज़ा आता है, तो उन्होंने कहा कि ऐसा कतई नहीं है. उन्होंने कहा, "ऐसा करना मज़े की बात नहीं है. ये कभी-कभी बहुत दुख देता है."

इंटरव्यू के दौरान मस्क ने माना कि उन्होंने जितने लोगों को नौकरी से निकाला सभी से उन्होंने निजी तौर पर बात नहीं की. मस्क ने कहा, "इतने सारे लोगों से बात करना बिल्कुल भी संभव नहीं है."

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ट्विटर बेचेंगे मस्क?

मस्क ने इंटरव्यू के दौरान ये भी कहा कि अगर उन्हें आज कोई 44 अरब डॉलर दे दे (बीते साल इसी रकम पर मस्क ने ट्विटर को ख़रीदा था) तो भी वो ट्विटर को नहीं बेचेंगे.

उन्होंने कहा कि ट्विटर ख़रीदने के बाद उनके लिए तनाव बढ़ा है और ये उनके लिए किसी पार्टी की तरह नहीं रहा.

उन्होंने कहा, "बीते कई महीनों से स्थिति बेहद तनावपूर्ण रही है. हमने कई ग़लतियां भी की हैं, लेकिन अंत भला तो सब भला. मुझे लगता है कि हम बिल्कुल सही दिशा में जा रहे हैं."

उन्होंने दावा किया कि विज्ञापनदाता अब इस सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर लौट रहे हैं. बीबीसी उनके इस दावे की पुष्टि नहीं करता.

'मैं नहीं ट्विटर सीईओ'

इंटरव्यू के दौरान एक तरफ़ बीबीसी संवाददाता जेम्स क्लेटन मस्क का इंटरव्यू ले रहे थे तो दूसरी तरफ मस्क भी सवाल पर सवाल दाग रहे थे.

एक जगह पर उन्होंने बीबीसी संवाददाता को रोका और कहा, "मैं अब ट्विटर का सीईओ नहीं हूं."

इसके जवाब में उन्होंने कहा कि उनका पालतू कुत्ता फ़्लोकी अब ट्विटर सीईओ है.

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ट्विटर पर भ्रामक पोस्ट करने वाले को लेकर क्या बोले?

2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में लोगों के वोट को प्रभावित करने वाले एक व्यक्ति से जुड़े सवाल पर मस्क उनका बचाव करते दिखे.

अमेरिका के लिए बीबीसी के डिसइन्फ़ॉर्मेशन संवाददाता माइक वेंडलिंग कहते हैं कि चुनावों के दौरान डगलस मैके नाम के एक व्यक्ति ने ट्विटर पर पोस्ट किया था कि एसएमएस पर भी वोट दिया जा सकता है.

उनका ये दावा बिल्कुल ग़लत था क्योंकि अमेरिकी चुनावों में ऐसा क़तई संभव नहीं है. इसके लिए उन्हें बीते महीने 10 साल की सज़ा सुनाई गई है.

अभियोजकों का कहना था कि डगलस मैके ट्रंप समर्थक थे और उनके इस ट्वीट को देखकर 4,900 लोगों ने दिए गए नंबर पर हिलेरी क्लिंटन के समर्थन में वोट किया. अभियोजकों का कहना था कि ऐसा कर डगलस ने लोगों के मूल अधिकारों से उन्हें वंचित रखा.

माइक वेंडलिंग कहते हैं कि इस पर मस्क ने कहा कि वो डगलस के समर्थन में हैं और मानते हैं कि उन्हें दी गई सज़ा "थोड़ी ज़्यादा हो गई."

'टिक टॉक बैन करने का समर्थन नहीं करता'

हाल में अमेरिका ने सुरक्षा कारणों से चीनी मोबाइल ऐप टिक टॉक को बैन किया है. इस मुद्दे पर मस्क ने कहा कि वो अमूमन बैन करने का समर्थन नहीं करते.

उन्होंने कहा कि टिक टॉक सबसे अधिक डाउनलोड किया गया ऐप है, लेकिन उन्होंने कभी इसका इस्तेमाल नहीं किया है.

उन्होंने कहा, "मैं चीज़ों को बैन करने के हक़ में नहीं हूं. टिक टॉक के मामले को देखें तो इससे ट्विटर को मदद मिलेगी क्योंकि अब अधिक लोग ट्विटर पर वक्त बिताएंगे. लेकिन इसके बाद भी मैं चीज़ों को बैन करने का समर्थन नहीं करता."

एलन मस्क

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एलनजेट बैन पर क्या कहा

बीबीसी संवाददाता ने एलन मस्क से सवाल किया कि एलनजेट नाम के एक ट्विटर अकाउंट को बैन करने का फ़ैसला क्या किसी एक व्यक्ति के पक्ष में लिया गया फ़ैसला नहीं था.

इस ट्विटर अकाउंट पर मस्क की निजी ज़िंदगी की जानकारी, उनके निजी जेट के आने-जाने से जुड़ी ख़बरें ट्वीट की जाती थीं.

जैक स्वीनी इस अकाउंट के ज़रिए सार्वजनिक तौर पर मौजूद फ़्लाइट ट्रैकिंग की जानकारी का पता लगा कर पोस्ट करते थे कि मस्क के निजी विमान ने कब, कहां से कहां के लिए उड़ान भरी और कहां पर लैंड किया.

बीते साल दिसंबर में मस्क ने कहा था कि वो इस अकाउंट के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करेंगे. उन्होंने कहा कि वो ऐसे अकाउंट्स को बंद करेंगे जो लोगों के बारे में रीयल-टाइम जानकारी साझा कर उनके लिए ज़ोखिम पैदा करते हैं.

इस सवाल के उत्तर में मस्क ने कहा कि ये अकाउंट व्यक्ति की सार्वजनिक तौर पर मौजूद जानकारी को उसकी निजी जानकारी के साथ मिलाकर उसे सार्वजनिक कर रहा था और इसे ग़लत इरादे से साझा करना माना जाएगा.

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चैटजीपीटी की तारीफ़ की लेकिन...

मस्क ने आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस के आधार पर बने बॉट चैटजीपीटी की तारीफ़ की और कहा कि चैटजीपीटी की आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस पर काम तो लंबे वक्त से हो रहा है, लेकिन इसके लिए 'सरल इंटरफ़ेस' की ज़रूरत थी जो चैटजीपीटी दे पाया है.

मस्क काफ़ी वक्त से कहते रहे हैं कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस लोगों के लिए ख़तरा न बने इसके लिए नियामक बनाया जाना चाहिए.

बीते महीने दुनिया के कई जाने-माने लोगों ने एक ओपन लेटर लिखकर ताक़तवर आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस सिस्टम बनाने पर रोक की मांग की थी और कहा था कि इससे मानवता को ख़तरा हो सकता है.

ओपन लेटर में हस्ताक्षर करने वालों में एलन मस्क के अलावा एपल के संस्थापर स्टीव वोज़निएक, टूरिंग पुरस्कार जीतने वाले योशुआ बेन्गियो, रिप्पल के सह संस्थापक क्रिस लार्सन जैसे नाम शामिल थे.

डीप फ़ेक पर क्या कहा?

मस्क ने माना कि वक्त के साथ फ़र्ज़ी या भ्रामक ख़बरें इस तरह से पेश की जाने लगी हैं कि ये पता करना मुश्किल होता जा रहा है कि सच क्या है और झूठ क्या है.

उन्होंने कहा, "नई तकनीक आ रही है और अब ये जानना मुश्किल है कि क्या सही है."

उन्होंने कहा, "ट्विटर में हम इसे लेकर सतर्क रहना चाहते हैं और कोशिश करेंगे कि इस मुश्किल से निपटने सकें."

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