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सोशल मीडिया पर यूक्रेन युद्ध को फ़ेक बताने वाली ख़बरों की भरमार
बीती 24 फ़रवरी को यूक्रेन पर रूसी हमले और उसके बाद शुरू हुई जंग को एक साल पूरा हो गया है.
इस मौके पर दुनिया भर के तमाम अख़बारों और टीवी चैनलों पर विशेष ख़बरें नज़र आ रही हैं.
लेकिन सोशल मीडिया पर इस युद्ध से जुड़े तमाम आधारहीन दावे पेश किए जा रहे हैं जिनमें इसे फ़र्जी युद्ध करार देने की कोशिशें शामिल हैं.
इन सोशल मीडिया पोस्ट्स को पढ़ने-लिखने या लाइक करने वालों की संख्या लाखों में दर्ज की जा रही है.
अमेरिकी सोशल मीडिया की भूमिका
ये पोस्ट्स अमेरिका के दक्षिणपंथी सोशल मीडिया अकाउंट्स से की जा रही हैं. इनमें से कई अकाउंट्स को फॉलो करने वालों की संख्या लाखों में हैं.
इन अकाउंट्स से की गयीं पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि यूक्रेन युद्ध असल में एक फर्जी चीज़ भी हो सकता है जिसे पश्चिमी मीडिया और सरकारों ने गढ़ा हो.
वायरल होते इन दावों को फैलाने वाले अकाउंट्स में कुछ ऐसे अकाउंट भी शामिल हैं जिन्हें पहले ट्विटर से निलंबित कर दिया गया था.
अमेरिकी अरबपति व्यवसायी एलन मस्क की ओर से ट्विटर ख़रीदे जाने के बाद ही इन अकाउंट्स पर लगे प्रतिबंधों को हटाया गया था.
इस मसले से जुड़ा एक पोस्ट ट्विटर समेत दूसरी जगहों पर काफ़ी वायरल हो रहा है जिसमें दावा किया जा रहा है कि किसी तरह ये पूरा युद्ध ही फर्जी है.
इन सोशल मीडिया अकाउंट्स ने युद्ध के मोर्चे से कथित रूप से फुटेज़ नहीं आने को अपने दावों का आधार बताया है.
एक व्यक्ति ने वायरल पोस्ट में शिकायत करते हुए लिखा है कि युद्ध से जुड़ी वीडियो सामग्री उपलब्ध न होने से स्कैम की बू आती है.
14 लाख ट्विटर फॉलोअर वाले एक अकाउंट ने दावा किया है कि इस युद्ध से जुड़े वीडियो और विस्तृत जानकारी नहीं मिली.
इस पोस्ट को पूर्व अमेरिकी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइज़र माइकल फ़्लिन ने भी शेयर किया है.
उन्होंने ये पोस्ट शेयर करते हुए लिखा है - "मैं चुनौती देकर कहता हूं कि कोई इन्हें ग़लत साबित कर बताए."
हालांकि, यूक्रेन में जारी युद्ध को विस्तार से दर्ज किया गया है.
यूक्रेन युद्ध पर बीबीसी समेत दुनिया के तमाम दूसरे प्रतिष्ठित समाचार प्रसारकों ने चश्मदीद गवाहों के साथ-साथ युद्ध से जुड़ी पर्याप्त सामग्री प्रसारित की है.
इन प्रसारकों ने युद्ध से जुड़ी अहम घटनाओं से संबंधित फर्जी दावों की भी पड़ताल की है. इसके साथ ही दुनिया भर में कई सरकारों और एजेंसियों ने इस युद्ध को असली माना है.
इस युद्ध की शुरुआत से ही सोशल मीडिया में युद्ध के कई वीडियो वायरल हुए हैं जिन्हें कई पत्रकारों ने असली फुटेज़ माना है.
कीएफ़ के टॉवर को हुआ नुकसान फर्जी नहीं
रूसी आक्रमण के दो दिन बाद यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ की बहुमंजिला इमारत पर मिसाइल हमले की ख़बर आई थी.
इसके बाद बहुमंजिला इमारत की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर जारी हुई हुई थी जिसमें इमारत में एक बड़ा छेद दिखाई दे रहा था.
इस घटना को कवर करने वाले रिपोर्टर्स ने इस मामले में विस्तार से ख़बरें लिखी थीं.
पिछले कुछ दिनों में इस बहुमंजिला इमारत की एक नयी तस्वीर वायरल हुई है जिसकी अब मरम्मत कर दी गयी है.
इस नयी तस्वीर के आधार पर दावा किया गया कि इस इमारत पर कभी हमला ही नहीं किया गया था और ये पूरा युद्ध ही फर्जी है.
तर्क ये दिया गया है कि मौजूदा युद्ध के दौरान इमारत की मरम्मत किया जाना असंभव है.
इस दावे को शेयर करने वालों में एक दक्षिण पंथी पॉडकास्टर और वैक्सीन विरोधी एक्टिविस्ट शामिल हैं जिन्हें पहले ट्विटर से निलंबित कर दिया गया था.
हालांकि, रूस के नियमित मिसाइल हमलों को छोड़ दें तो कीएफ़ ने मार्च 2022 के बाद से युद्ध का सामना नहीं किया है.
क्योंकि रूसी सुरक्षाबलों ने अपने आपको कीएफ़ से निकालकर पूर्वी यूक्रेन पर अपना ध्यान केंद्रित कर लिया था.
इस इमारत की मरम्मत और पुनर्निमाण का काम पिछले साल मई में शुरू हुआ था और यूक्रेनी समाचार प्रसारकों ने इस पर विस्तृत ख़बरें भी प्रसारित की थीं.
इनमें गर्मियों और उसके बाद वाले महीनों में इमारत की मरम्मत होने से जुड़ी तस्वीरें भी शामिल थीं.
मृतकों से जुड़ा फर्जी वीडियो फिर वायरल
सोशल मीडिया पर एक नया वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक न्यूज़ रिपोर्टर बॉडी बैग्स के साथ खड़ा नज़र आ रहा है.
इस वीडियो में बॉडी बैग्स में लेटा एक शख़्स हिलता हुआ भी दिख रहा है. इस वीडियो को अब तक लाखों बार देखा जा चुका है.
इस वीडियो को सबूत के रूप में इस्तेमाल करते हुए दावा किया जा रहा है कि पश्चिमी कथानक को आगे बढ़ाने के लिए लाशों की वीडियोग्राफ़ी कराने के लिए एक्टर्स की सेवाएं ली गयीं.
एक दक्षिण पंथी ट्विटर यूज़र की ओर से इस वीडियो के साथ लिखा गया है - "हिलना बंद करें, आपको मरा हुआ दिखना है! सायओप्स?"
इस वीडियो को ट्विटर पर काफ़ी बार शेयर किया गया है. सायऑप्स से आशय साइकोलॉजिकल ऑपरेशन यानी मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल करने के लिए चलाए गए अभियान से है.
इस वीडियो को इसी तरह की दूसरी टिप्पणियों के साथ दूसरे सोशल मीडिया इन्फ़्लूएंसर्स ने फेसबुक और टिकटॉक पर शेयर किया है.
ये वीडियो ऑस्ट्रियाई अख़बार ऑस्टेरेक की कवरेज़ से उठाया गया है जिसमें रिपोर्टर पिछले साल फरवरी की शुरुआत में विएना में जलवायु परिवर्तन से जुड़े विरोध प्रदर्शन को कवर करता दिख रहा है.
इस वीडियो में एक्टिविस्ट कार्बन उत्सर्जन से इंसानी ज़िंदगी को होने वाले नुकसान को रेखांकित करते दिख रहे हैं.
ये वीडियो सिर्फ़ फर्जी नहीं है बल्कि ऐसे ही मामलों में बार-बार इस्तेमाल किया जाना वाला वीडियो है.
इससे पहले इस वीडियो को कोविड से होने वाली मौतों को फर्जी करार देने के लिए इस्तेमाल किया गया था.
ऐसे में दोनो ही मौकों पर ये वीडियो उस घटना से जुड़ा नहीं है जिसका दावा किया जा रहा है.
ज़ेलेंस्की का बॉडी डबल
सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति का एक सीक्रेट बॉडी डबल है जो पोलिश टीवी पर प्रसारित वीडियो में ग़लती से उनके जैसे ही कपड़े पहने हुए नज़र आ गया था.
एक वीडियो ऐसा भी है जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन के साथ नज़र आ रहे हैं. इस वीडियो में राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की की वेशभूषा में एक शख़्स और भी नज़र आ रहा है.
इसे भी बॉडी डबल के दावे से जोड़कर दिखाया गया है.
सोशल मीडिया पर इन पोस्ट्स को लाखों लोग देख चुके हैं. हालांकि, इन वीडियोज़ में जिस शख़्स की बात हो रही है, वो ज़ेलेंस्की के निजी अंगरक्षक 'मक्सिम डोनेट्स' हैं.
समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, डोनेट्स साल 2019 के मई महीने से जो बाइडन की सिक्योरिटी टीम के प्रमुख हैं.
और इंटरनेट पर ऐसी तमाम तस्वीरें देखी जा सकती हैं जिनमें डोनेट्स राष्ट्रपति के साथ दूसरे तरह के कपड़ों में दिख सकते हैं.
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