दुनिया में बढ़ता कोरोना का ख़तरा, भारत क्या तैयारियां कर रहा है?

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- Author, दिलनवाज़ पाशा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दुनिया भर में फैल रहे कोविड संक्रमण के बीच भारत सरकार ने भी किसी भी परिस्थिति से निबटने की तैयारियां तेज़ कर दी हैं.
बुधवार को भारत ने चीन, थाईलैंड और चार अन्य देशों से आने वाले यात्रियों के लिए पहली जनवरी से आरटी-पीसीआर टेस्ट अनिवार्य कर दिया है.
पहली जनवरी, सुबह दस बजे के बाद से चीन, थाईलैंड, सिंगापुर, हांगकांग, जापान और दक्षिण कोरिया से आने वाले यात्रियों के लिए सफ़र शुरू करने से पहले आरटी-पीसीआर टेस्ट अनिवार्य कर दिया है.
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा से पहले यात्रियों को एयर सुविधा पोर्टल पर अपनी रिपोर्ट अपलोड करनी होगी.
इससे पहले भारत सरकार ने 24 दिसंबर को एयरपोर्टों पर पहुंच रहे यात्रियों के औचक कोविड परीक्षण की शुरुआत कर दी थी. एयरपोर्ट पर भारत के बाहर से पहुंचने वाले दो प्रतिशत यात्रियों के टेस्ट किए जा रहे हैं. बीते तीन दिनों में ही क़रीब छह हज़ार टेस्ट एयरपोर्टों पर किए गए हैं.

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चीन और अन्य पूर्वी एशियाई देशों में कोविड संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं. ऐसे में आशंका ज़ाहिर की गई है कि भारत में भी जनवरी में रोज़ाना सामने आने वाले कोविड के मामलों की संख्या बढ़ सकती है.
बुधवार को भारत में कोविड के 268 नए मामले दर्ज किए गए जबकि बीते सप्ताह का औसत रोज़ाना 200 मामले है.
भारत सरकार ने भी संभावित कोविड संक्रमण से निबटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं.
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दवा कंपनियों के साथ बैठक
गुरुवार को स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने दवा निर्माताओं और फार्मा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ वर्चुअल बैठक की. स्वास्थ्य मंत्री ने दवा कंपनियों से किसी भी स्थिति के लिए तैयार रहने के लिए कहा है.
चीन और दुनिया के दूसरे हिस्सों में बढ़ते कोविड संक्रमण के पीछे ओमिक्रॉन का बीएफ.7 वैरिएंट है. विशेषज्ञों के मुताबिक भले हे ये वैरिएंट कम घातक हो लेकिन इसमें कोविड की नई लहर पैदा करने की क्षमता है.
हालांकि भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि संक्रमण दर अधिक होने के बावजूद इस वायरस की वजह से अस्पतालों में भर्ती होने के मामले कम रहेंगे.
इसी बीच भारत के अस्पताल भी किसी भी स्थिति से निबटने की तैयारी कर रहे हैं.
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भारत में स्थिति चीन से अलग
दिल्ली के जीटीबी अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर सुभाष गिरी कहते हैं, "हालांकि भारत में चीन जैसी स्थिति होने की आशंका बहुत कम है लेकिन हम फिर भी किसी भी परिस्थिति से निबटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं. अब हमारे पास पहले से बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर भी है और अनुभव भी."
डॉ. गिरी कहते हैं, "चीन और दूसरे देशों में जो वायरस फैल रहा है वहां की परिस्थिति हमारे देश से अलग है. चीन और उन देशों में जीरो कोविड नीति का पालन किया गया है जिसकी वजह से वहां लोगों में हर्ड इम्यूनिटी (समूची आबादी में प्रतिरोधक क्षमता) नहीं विकसित हो पाई है. अब जब वो देश को खोल रहे हैं तो कोविड फैल रहा है क्योंकि पहले उस आबादी तक ये वायरस पहुंचा ही नहीं था. इसलिए ही वहां अधिक मामले सामने आ रहे हैं और उनकी गंभीरता भी अधिक है. इसके अलावा चीन में लगाई गई वैक्सीन के नतीजों की भी पुष्टि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नहीं हुई है. "
चीन के मुक़ाबले में भारत की परिस्थितियों को अलग बताते हुए डॉ. सुभाष गिरी कहते हैं, "भारत में लगभग समूची आबादी को वैक्सीन लग चुकी है. लगभग एक चौथाई आबादी को बूस्टर डोज़ भी लगा है. इसके अलावा भारत के लोग बचपन से ही कई तरह के वायरस का सामना करते रहे हैं ऐसे में उनकी प्रतिरोधक क्षमता बेहतर है. इस लिहाज से कहा जा सकता है कि भारत में चीन जैसी परिस्थिति नहीं होगी."
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अस्पतालों की तैयारी
डॉ. गिरी कहते हैं, "अगर भारत में बीएफ7 की लहर आती है भी तो इससे मरने वालों या अस्पताल में भर्ती होने वालों की तादाद बहुत कम रहेगी. हमारा अनुमान है कि बहुत कम संख्या में लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत होगी."
भारत में जब कोविड की दूसरी लहर आई थी तब भारत की स्वास्थ्य सेवाएं इससे निबटने के लिए विकसित हो रहीं थीं. ऑक्सीजन सप्लाई और वेंटीलेटर युक्त बिस्तरों की क़िल्लत हुई थी.
डॉ. गिरी कहते हैं कि तब से अब तक अस्पताल की क्षमताओं को बढ़ाया गया है.
वो कहते हैं, "जीटीबी अस्पताल में पहले 750 बेड थे अब 1100 बेड हैं. इनके अलावा फ्लोटिंग बेड भी हैं जहां ऑक्सीजन सप्लाई की जा सकती है. यानी अब हमारे पास ही लगभग 1500 बेड हैं जिन पर हम ऑक्सीजन दे सकते हैं."
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दूसरी लहर में ऑक्सीजन की क़िल्लत के बाद ऑक्सीजन क्षमताओं को भी बढ़ाया गया है.
डॉ. गिरी के मुताबिक जीटीबी अस्पताल में भी ऑक्सीजन क्षमता को लगभग ढाई गुणा बढ़ा दिया गया है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं होगी और अस्पताल जरूरत पड़ने पर दूसरे अस्पतालों को भी ऑक्सीजन दे सकेगा.
अस्पतालों और स्वास्थ्य सेवाओं की तैयारी को परखने के लिए भारत मे मंगलवार को देशव्यापी मॉकड्रिल भी की गई थी. इस ड्रिल में देश भर से बीस हज़ार से अधिक हेल्थ सेंटरों ने हिस्सा लिया था.
इस ड्रिल के बाद जारी की गई जानकारी के मुताबिक भारत ममें इस समय 2.79 लाख आइसोलेटड बिस्तर, 2.45 लाख ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड, 64711 आईसीयू बेड और 49236 वेंटीलेटर सपोर्ट वाले आईसीयू बेड उपलब्ध हैं.
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भारत में कब तक आ सकती है लहर?
अभी तक कोविड की जो लहरें आई हैं यदि उनके पैटर्न को देखा जाए तो भारत में अगले 30-40 दिन में कोविड मामले बढ़ने की आशंका नज़र आती है.
अभी तक आईं कोविड की तीन लहरों के दौरान सबसे पहले कोविड संक्रमण में अचानक बढ़ोतरी चीन और पूर्वी एशियाई देशों में देखी गई.
इसके बाद अगले दस दिन में यूरोप और उससे अगले दस दिन में अमेरिका में मामले बढ़े.
इन तीनों लहरों को भारत पहुंचने में 30 से 35 दिन तक लगे थे. ऐसे में भारत में स्वास्थ्य विशेषज्ञ ये मान रहे हैं कि यदि यही पैटर्न रहा तो भारत में जनवरी के अंत तक कोविड के मामले बढ़ने की आशंका बन सकती है.
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क्या कर रहे हैं दुनियाभर के देश?
अमेरिका ने चीन से आने वाले यात्रियों का कोविड टेस्ट अनिवार्य कर दिया है. इटली ने भी ऐसा ही क़दम उठाया है. हालांकि इन क़दमों का असर सीमित ही रहने की आशंका ज़ाहिर की जा रही है.
लेखक और हेल्थकेयर अधिवक्ता हैरी नेलसन ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि सरकार के उठाए जा रहे ये क़दम बहुत हद तक प्रभावी नहीं होंगे.
उन्होंने कहा, "एक तरह से कहा जाए तो समस्या का पिटारा खुल चुका है. उत्तर-पूर्वी अमेरिका में सामने आ रहे कोविड के सभी नए मामलों में पचास फ़ीसदी से अधिक चीन से आए वैरिएंट के हैं. जबकि देश में कुल मामलों में लगभग बीस प्रतिशत इस वैरिएंट के हैं. ऐसे में मुझे लगता है कि चीन से आ रहे यात्रियों के कोविड टेस्ट करने से रफ़्तार कुछ हद तक धीमी हो सकती है लेकिन इससे मूलरूप से परिस्थितियों में कुछ ख़ास बदलाव नहीं होगा. सिर्फ़ कुछ समय मिल जाएगा."
दूसरी तरफ़ यूरोपीय संघ के अधिकारियों ने गुरुवार को बैठक की है. चीन ने अगले सप्ताह से विदेश से आ रहे यात्रियों को कोविड नियमों से राहत देने की घोषणा की है. उसके बाद ये ही ये बैठक हुई है.
इस बैठक में इटली ने अन्य यूरोपीय देशों से कहा है कि वह भी उसकी तरह चीन से आ रहे यात्रियों का कोविड टेस्ट अनिवार्य करें, हालांकि अधिकतर देशों की राय इससे अलग रही.
अन्य देशों का कहना है कि अभी ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है.
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यूरोपीय संघ के अधिकतर हिस्से में एक जगह से दूसरी जगह आसानी से जाया जा सकता है और सीमाओं पर सख़्त नियंत्रण लागू नहीं है.
यूरोपीय संघ के स्वास्थ्य अधिकारी गुरुवार सुबह हुई बैठक में किसी एक नतीजे पर नहीं पहुंच सके हैं और उन्होंने कहा है कि इस विषय पर आगे बातचीत की जाएगी.
वहीं जापान ने भी चीन से आने वाले यात्रियों के लिए कोविड टेस्ट अनिवार्य कर दिया है.
इसी बीच चीन का कहना है कि पश्चिमी देश समस्या को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं.
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वांग वेनबिन ने कहा है, "हम हमेशा से ये मानते रहे हैं कि कोविड के प्रति सभी देशों की प्रतिक्रिया विज्ञान पर आधारित होनी चाहिए और अनुपातिक होनी चाहिए जिससे सामान्य लोगों का एक-दूसरे से मिलना प्रभावित ना हो. हम ये मानते हैं कि उठाए जा रहे क़दम वैश्विक स्पलाई चेन और औद्योगिक चेन की स्थिरता को मज़बूत करें और कोविड 19 से लड़ने के साझा प्रयासों को मज़बूत करें."
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