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म्यांमार- लोकतंत्र समर्थक पिता ने सैनिक बेटे से कहा- मेरे रास्ते में आए तो भूल जाऊंगा, तुम बेटे हो!
- Author, को को ऑन्ग, चार्लेट एटवुड औऱ रेबेका हेंश्चके
- पदनाम, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस
"अगर मुझे पहले गोली चलाने का मौका मिला, तो उसके निशाने पर तुम होगे. मैं तुम्हें मार डालूंगा."
ये कहते हुए बो क्यार याइन म्यांमार की सेना में काम करने वाले अपने बेटे से बातचीत में चिल्ला उठते हैं. बो क्यार याइन पिछले साल फ़रवरी के बाद म्यांमार की सेना विरोधी संगठनों के लिए काम कर रहे हैं.
पिछले साल फ़रवरी में जिस तरह से सैन्य तख़्तापलट के जरिए म्यांमार की चनी हुई लोकतांत्रिक सरकार को सत्ता से बाहर कर दिया गया, उसके बाद जिस तरह पूरे म्यांमार में गृह युद्ध शुरू हुआ.
बो क्यार याइन सैनिक सत्ता का विरोध कर रहे संगठनों से जुड़ गए. जबकि उनका बेटा उस सेना में भर्ती हो गया, जो सत्ता पर जबरन काबिज 'जुंटा' का बचाव करती है.
अपने बेटे नी नी (Nyi Nyi) से बातचीत में गुस्से से भरे बो क्यार यहां तक कह देते हैं- "पिता होने के नाते तुम मुझे भले ही छोड़ दो, लेकिन मैं तुम्हें नहीं छोड़ूंगा. इसलिए हम तुम्हें लेकर चिंतित हैं."
बो क्यार अपने बेटे से ये बातचीत जंगल में अकेले बैठे हुए फोन पर कर रहे थे. उनकी बात ख़त्म होते ही बेटे का जवाब आता है "एक पिता के रूप में मैं भी आपके लिए चिंतित हूं. एक सैनिक बनने के लिए आप ही ने मेरा हौसला बढ़ाया."
बो क्यार के दो बेटे हैं जो फिलहाल म्यांमार की सेना में है. बड़ा बेटा तो उनके किसी फोन कॉल का जवाब नहीं देता. इसलिए वो अपने छोटे बेटे नी नी से कहते हैं वो सेना की नौकरी छोड़ दे.
इसकी वजह बताते हुए बो क्यार कहते हैं- "ये सेना घरों में आग लगाती है, उसे बर्बाद करती है. सैनिक लोगों को मारते हैं. यहां तक कि निर्दोष प्रदर्शकारियों पर गोली चलाते हैं, बिना किसी वजह के बच्चों का क़त्ल करते हैं, महिलाओं का बलात्कार करते हैं, हो सकता है, ये बातें तुम्हें नहीं पता हो"
बो क्यार की इस बात के जवाब में बेटा कहता है- "पापा, ऐसा आपको लगता है, हम इसे ऐसे नहीं देखते."
ऐसी घटनाओं को म्यांमार की सेना इसी तरह खारिज़ करती है, लेकिन म्यांमार में सैनिकों के अत्याचार की घटनाएं कोई छिपी-छिपाई नहीं, बल्कि ये सार्वजनिक हैं और इसके सबूत भी हैं.
बेटे से फ़ोन पर बातचीत ख़त्म होने के बाद बो क्यार कहते हैं, 'वो अपने दोनों बेटों को सेना की नौकरी छोड़ने के लिए राज़ी करने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन वो सुनने को तैयार नहीं. अब तो ये किस्मत पर है, कि कहीं हमारी मुलाक़ात जंग के मैदान में न हो जाए.'
अपनी इस हालत को बो क्यार एक स्थानीय कहावत के साथ समझाते हैं. वो कहते हैं- "जिस तरह बीन्स के गुच्छे में दो या तीन बीन्स ही हृष्ट-पुष्ट होते हैं, कुछ ऐसा ही परिवार में भी होता है. इसमें भी हर सदस्य काम का नहीं होता. "
बो क्यार और उनकी पत्नी यिन यिन मिंट के आठ बच्चे हैं. जब इन के दो बच्चे सेना के लिए चुने गए थे, तब इन्हें नाज़ हुआ था. खुद बो क्यार ने मिलिट्री की ट्रेनिंग से पासआउट करते दोनों बेटों की तस्वीरें यादगारी के लिए संभाल कर रखी थीं. आज इनके दोनों बेटे सेना के बड़े अधिकारी बन चुके हैं.
सेना के प्रति प्यार नफरत में कैसे बदला?
बो क्यार उन दिनों को याद करते हुए कहते हैं, "सेना में आपके घर से किसी का चुना जाना प्रतिष्ठा की बात हुआ करती थी. हमारे पूरे मध्य क्षेत्र में लोग सेना के जवानों का स्वागत फूलों से किया करते थे."
बो क्यार की पत्नी बताती हैं कि किस तरह से उनके पूरे परिवार ने खेतों में काम कर पैसों का इंतज़ाम किया ताकि दोनों बेटे सेना में भर्ती के लिए जरूरी पढ़ाई पूरी कर सकें.
अगर सिविल वार नहीं शुरु हुई होती, तो म्यांमार की सेना में नौकरी करने वाले दोनों बेटों की बदौलत परिवार की माली और सामाजिक हालत बेहतर हो सकती थी. लेकिन पिछले साल के सैन्य तख़्तापलट के बाद सबकुछ बदल गया.
बो क्यार ने अपनी आंखों के आगे लोकतंत्र समर्थक निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर सेना का अत्याचार देखा, सेना को उन्हें मारते कुचलते देखा. तब से उनके मन में सेना के प्रति जरा भी सम्मान नहीं रह गया. तभी से वो अपने बेटों को सेना छोड़ने के लिए कह रहे हैं.
बो क्यार पूछते हैं, "उन्होंने (सेना) प्रदर्शनकारियों को गोली से क्यों मारा, उन्हें क्यों प्रताड़ित किया? ये लोग बेवजह ही लोगों को क्यों मार डालते हैं."
बातचीत के दौरान बो क्यार अपनी जेब से पान और कसैली निकालकर खाते हुए कहते हैं, "इन सारी घटनाओं की वजह से उनका दिल टूट चुका है."
'लोकतंत्र बचाने की लड़ाई'
सैनिक तख़्तापलट से पहले बो क्यार एक आम किसान थे, तब गन चलाना तो दूर, उन्होंने कभी बंदूक भी नहीं पकड़ी थी. लेकिन आज वो सेना का विरोध करने वाली एक 'नागरिक सेना' की यूनिट के मुखिया हैं (leader of a civilian militia unit)
मोटे तौर पर ये पीपुल्स डिफेंस फोर्सेज (PDF) के नेटवर्क से जुड़े हैं, जो लोकतंत्र बहाली के लिए अपने से ज्यादा बड़ी और बेहतर हथियारों से लैस सेना से लड़ रहे हैं.
बो क्यार सैनिकों की तुलना कुत्ते से करते हैं, जो म्यांमार में बेहद अभद्र शब्द माना जाता है. वो कहते हैं "जब कुत्तों (सेना) का झुंड गांवों में आता है, तो वो महिलाओं का बलात्कार करते हैं, घर जलाते हैं और जो भी मिलता है उसे लूट ले जाते हैं. हमें इनके खिलाफ़ खड़ा होना ही था."
बो क्यार इन दिनों 70 लोकतंत्र समर्थक लड़ाकों की एक टुकड़ी का नेतृत्व करते हैं, जो खुद को 'वाइल्ड टाइगर्स' कहते हैं. इस टुकड़ी के पास सिर्फ तीन ऑटोमेटिक राइफ़ल्स हैं.
बो क्यार के दूसरे 4 बेटे भी उनके साथ इस लड़ाई में शामिल हैं. जो दो बेटे म्यांमार की सेना में है वो विद्रोहियों के गढ़ से महज 50 किलोमीटर दूर तैनात हैं.
यिन यिन मिंट कहती हैं- "हमें लगता था कि दो सैनिक बेटों के भरोसे हम जी लेंगे, लेकिन इन्हीं दोनों की वजह से हमारा जीना मुहाल हो रहा है"
वो दिन- जब बरसात की तरह बरस रही थीं गोलियां.
ये बीती फ़रवरी की बात है. एक दिन तड़के तीन बजे बो क्यार की पीडीएफ यूनिट को पास के गांव से एक कॉल आया. पता चला आर्मी ने गांव पर छापा मारा है. फोन पर इन्हें संदेश दिया गया- "गांव में कुत्तों की फौज आ चुकी है. प्लीज हमें बचा लीजिए."
ये संदेश सुनकर बो क्यार के मंझले बेटे मिन ऑन्ग सबसे पहले तैयार हुए. तब मां ने उन्हें रोकना चाहा, लेकिन वो जानती थीं उनके कहने से ये रुकने वाला नहीं, इसलिए उन्होंने सिर्फ अपने बेटे की सुरक्षित वापसी के लिए प्रार्थना की.
इसके बाद 'वाइल्ड टाइगर्स' के लड़ाकों का काफ़िला गांव के लिए बाइक पर सवार होकर निकला. हमेशा की तरफ काफ़िले की सबसे आगे वाली बाइक पर बो क्यार अपने बेटे मिन ऑन्ग के साथ चल रहे थे.
मुठभेड़ में मारा गया बेटा
इस बार भी वो उसी जाने पहचाने रूट पर आगे बढ़ रहे थे, जहां कुछ दिन पहले उन पर सेना ने घात लगाकर हमला किया था.
बो क्यार के तीसरे बेटे मीन नैंग बताते हैं, "हमारे पास छिपने के लिए कोई जगह नहीं थी. पेड़ वगैरह कुछ भी नहीं. उनकी तरफ़ से गोलियां इतनी तेज चल रही थीं जैसे गर्म पतीले में पॉपकॉर्न फूट रहे हों. उनके मुक़ाबले हमारे पास हथियार भी बेहद कमज़ोर थे."
वो हालात देखकर यूनिट के लीडर बो क्यार ने सबको पीछे हटने का ऑर्डर दिया. इसके बाद सारे लड़ाके धान के खलिहान में छिप गए.
उस मुठभेड़ को याद करते हुए बो क्यार बताते हैं, "मुझे लगता है उन लोगों (सेना) में से कोई एक मुझे जानता था. उन्हें महसूस हुआ कि हमले में उन्हें निशाना बनाने की कोशिश हो रही है. तब मैं पीछे मुड़ा और मैं उन पर लगातार फायरिंग करते हुए वहां से भाग निकला."
यिन यिन मिंट, जो मुठभेड़ वाली जगह से थोड़ी दूर लड़ाकों के बेस कैंप पर थी, वे साफ सुन सकती थीं कि वहां क्या हो रहा है. उसे याद करते हुए उनकी आंखें भर आती हैं. वे बताती हैं- "उस दिन बरसती गोलियों की आवाज़ ऐसे आ रही थी, जैसे मूसलाधार बारिश की आवाज़ आती है."
एक लंबा इंतजार
उस मुठभेड़ के कुछ घंटों के भीतर ही सेना ने ख़ून से लथपथ लोगों की तस्वीरें फ़ेसबुक पर डालीं. इस पर बेहद गर्व जताते हुए लिखा था- हमने 15 विद्रोहियों को मार गिराया.
उस तस्वीर में एक तस्वीर मिन ऑन्ग की थी, जो उस दिन पिता के साथ बाइक पर गांव वालों की रक्षा के लिए गए थे. मिन यॉन्ग अपनी मां के सबसे दुलारे बेटे थे.
सेना के हाथों मारे गए बेटे को याद करते हुए यिन यिन मिंट कहती हैं, "वो मेरा बहुत ध्यान रखता था. मेरी मदद के लिए किचन साफ करने के अलावा कई बार मेरे कपड़े भी धो देता था. वो वाकई मेरे लिए बहुत अच्छा था."
इसी जून में सेना ने बो क्यार के पुश्तैनी घर को वहां रखे पूरे सामान के साथ नेस्तनाबूद कर दिया था. उनके घर के साथ सेना ने गांव के 150 दूसरे घरों का भी यही हश्र किया. म्यांमार की सेना ने इस तरह की कार्रवाई पूरे देश में की. खासतौर पर सेंट्रल म्यांमार, जहां बो क्यार जैसे विद्रोहियों के बेस कैंप हैं.
इससे एक बात साफ है कि सेना को बो क्यार के विरोधी होने और उनकी तरफ से होने वाली कार्रवाइयों में शामिल होने की जानकारी है. लेकिन ये साफ नहीं है कि सेना को ये पता है या नहीं, कि बो क्यार के दो बेटे भी आर्मी में हैं.
'मैं उसकी हड्डियां भी नहीं उठा सकती थी'
यिन यिन मिंट के लिए इन सारी बर्बादियों को झेल पाना मुश्किल साबित हो रहा है. वे बताती हैं, "मेरा घर जला दिया गया, मेरा बेटा मार डाला गया. ये सब मैं बर्दाश्त नहीं कर पा रही हूं. मेरे दिमाग पर मेरा वश नहीं, मैं पागल हो रही हूं..."
सैनिक तख्तापलट के बाद म्यांमार में 11 लाख लोग विस्थापित हुए हैं, करीब 30 हज़ार घरों को जलाया जा चुका है. राजनीतिक क़ैदियों के लिए काम करने वाली एसोसिएशन के मुताबिक इस दौरान सेना के हाथों 2 हजार 500 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं.
मृतकों का ये आंकड़ा 10 गुना ज्यादा तक पहुंच सकता है, अगर ACLED नाम के कनफ़्लिक्ट मॉनिटरिंग ग्रुप के आंकड़ों पर यकीन करें. सेना ने लड़ाई के कई मोर्चों पर अपनी हार क़ुबूल की, लेकिन इसकी पूरी डिटेल नहीं बताई.
बो क्यार के परिवार को उनके बेटे मिन ऑन्ग की डेड बॉडी 2 दिन की मशक्कत के बाद भी नहीं मिली. ये मुमकिन इसलिए भी नहीं था, क्योंकि जहां लाशें रखी गई थीं वहां सैनिकों का बेहद सख़्त पहरा था.
मिंट बताती हैं- "मैं उसकी हड्डियां भी नहीं उठा सकती थी. इसे लेकर मैं बेहद गुस्से में हूं. मैं उनसे लड़ना चाहती हूं, लेकिन जानती हूं एक महिला और वो भी 50 साल से ऊपर की होने की वजह से, वो मुझे नहीं उठा ले जाएंगे."
'वो तुम हो, या कोई और, हम ज़िंदा नहीं छोड़ेंगे'
बो क्यार को लगता है कि सेना के खिलाफ़ लोगों के प्रतिरोध की जीत होगी और वो अपना नेस्तनाबूद किया हुआ घर फिर से बसा पाएंगे.
लेकिन जिस तरह गृह युद्ध के हालात बिगड़ते जा रहे हैं, बो क्यार का इंतज़ार लंबा होता दिख रहा है. दो बेटों के सेना नहीं छोड़ने की जिद के बाद परिवार भी बंटा हुआ है.
बो क्यार अपने सैनिक बेटे से कहते हैं, "हम तुम्हारी सेना से इसलिए नहीं लड़ रहे, क्योंकि हम लड़ना चाहते हैं. लेकिन हमारे पास लड़ने के सिवा कोई चारा नहीं, क्योंकि तुम्हारे कुत्ते ऑफिसर्स हम पर जुल्म ढा रहे हैं. इन्हीं लोगों की वजह से तुम्हारा भाई मारा गया."
इसके जवाव में नी नी कुबूल करते हैं कि उसे भाई के मारे जाने की जानकारी है.
तब बो क्यार गुस्से में उससे पूछते हैं- तो तुम आते क्यों नहीं? जाओ, देख जाओ आपना गांव, अपना घर, किस तरह सब राख में बदल दिया गया है. हम तुम्हारी तस्वीरें भी नहीं बचा पाए, इस बात का दर्द तुम समझ पाओगे?"
इसके बाद बो क्यार अपने बेटे को चेतावनी देते हुए कहते हैं, "अगर तुम मेरे इलाक़े में आते हो और हमारे साथ लड़ाई में उतरते हो, तो समझो मैं तुम्हें क्या, किसी को भी नहीं छोड़ूंगा. मैं तुम्हारे साथ नहीं, बल्कि अपने लोगों के साथ खड़ा हूं."
ये कहते हुए बो क्यार फोन काट देते हैं.
*नोट- इस रिपार्ट में जगहों और व्यक्तियों के नाम और उनके बारे में जानकारियां उनकी पहचान सुरक्षित रखने के लिए बदले गए हैं.
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