काबुल: होटल पर हमला करने वाले तीन चरमपंथी मारे गए, क्या चीनी नागरिक थे निशाने पर?

अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल में एक होटल के क़रीब गोलीबारी और धमाके की ख़बर है. समाचार एजेंसी एएफ़पी के अनुसार इस होटल में ज़्यादातर चीनी कारोबारी ठहरते हैं.

ये हमला मध्य क़ाबुल के शहर-ए-नौ में हुआ है.

तालिबान के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह ने ट्वीट के ज़रिए जानकारी दी है कि हमला करने वाले तीनों चरमपंथी मारे गए हैं.

ज़बीउल्लाह ने ट्वीट में लिखा, "काबुल के एक होटल में हमला हुआ था. तीनों हमलावर मारे गए हैं. होटल में मौजूद सभी गेस्ट सुरक्षित निकाल लिए गए हैं. सिर्फ़ दो विदेशी मेहमानों को चोट आई है क्योंकि वे नीचे कूद गए थे."

इससे पहले तालिबान प्रशासन के प्रवक्ता ज़बीउल्लाह मुजाहिद ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बातचीत में हमले की पुष्टि की है लेकिन उन्होंने इससे अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया था.

चीनी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने चश्मदीदों का हवाला देते हुए बताया कि ये घटना एक गेस्ट हाउस के पास हुई और इस गेस्ट हाउस में चीनी नागरिक रहते हैं.

शिन्हुआ ने काबुल स्थित चीनी दूतावास के हवाले से कहा है कि चीन सारी घटना पर करीबी नज़र रख रहा है और साथ ही मदद के लिए ज़रूरी क़दम उठा रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान में अगस्त 2021 में तालिबान के लौटने के बाद इस्लामिक स्टेट के लड़ाके चरमपंथी हमले करते रहे हैं. इससे पहले देश के भीतर विदेशी नागरिकों पर भी हमले हुए हैं.

सोशल मीडिया पर कुछ स्थानीय मीडिया के वीडियो शेयर किए जा रहे हैं, जिनमें लोगों को इमारत की खिड़की से बाहर कूदते और आसपास भागते देखा जा सकता है.

इस हमले के निशाने पर चीन के नागरिक थे या मक़सद किसी भी विदेशी नागरिक को नुकसान पहुँचाना था ये फ़िलहाल साफ़ नहीं है.

उधर एक प्रत्यक्षदर्शी ने समाचार एजेंसी एएफ़पी को बताया, "धमाका बहुत ज़ोरदार था और उसके बाद अंधाधुंध गोलियां चलने की आवाज़ें आईं."

हालांकि, स्थानीय लोगों ने रॉयटर्स को बताया कि धमाके के बाद लगातार गोलीबारी होती रही.

स्थानीय निवासियों के अनुसार जिस इमारत में हमला हुआ है वहां अधिकतर चीनी और विदेशी लोग ठहरते थे.

इससे पहले समाचार एजेंसी एएफ़पी ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि हमलावर इमारत के अंदर दाखिल हुए थे. उस वक्त तक हमलावरों की संख्या के बारे में जानकारी नहीं थी.

अब तालिबान प्रशासन ने कहा है कि हमलावर तीन थे और तीनों की ही मौत हो चुकी है.

पिछले कुछ महीनों में अफ़ग़ानिस्तान में कई जगह गोलीबारी और धमाके हुए हैं. इनमें से कई हमलों की ज़िम्मेदारी इस्लामिक स्टेट के चरमपंथियों ने ली है.

अगस्त 2021 में अमेरिकी सेना की अफ़ग़ानिस्तान से वापसी के बाद वहां तालिबान का शासन है. तालिबान लगातार ये दावा कर रहा है कि वो देश में मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था बहाल करने की कोशिश कर रहा है.

अफ़ग़ानिस्तान के साथ 76 किलोमीटर की सीमा साझा करने वाले चीन ने अभी तक औपचारिक तौर पर तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है लेकिन चीन उन कुछ देशों में शामिल है जिसने अफ़ग़ानिस्तान के साथ अपने कूटनीतिक संबंध जारी रखे हैं.

तालिबान के शासन में चीन ने अफ़ग़ानिस्तान में अपने अनुकूल माहौल बनाने की पुरज़ोर कोशिश की हैं. इसके पीछे चीन के अपने कुछ हित हैं.

अफ़गानिस्तान में चीन के आर्थिक हित

चीन की रोड एंड बेल्ट परियोजना जैसी कई महत्वाकांक्षाए हैं और उसके लिए सेंट्रल एशिया में बड़े पैमाने पर इन्फ़्रास्ट्रक्टर और कम्युनिकेशन की ज़रूरत होगी.

अगर अफ़गानिस्तान में चीन को पर्याप्त सहयोग नहीं मिलेगा तो यह इस क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने की उसकी योजनाओं को प्रभावित कर सकता है.

इसी तरह चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर भी एशिया में उसका एक बड़ा इन्फ़्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है लेकिन पाकिस्तान में चीनी अधिकारियों पर हमले होते रहते हैं. ऐसे में तालिबान से हाथ मिलाकर चीन क्षेत्र में अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहता है.

चीन ने एनक कॉपर माइन और अमू दरिया एनर्जी जैसे निवेश अफ़गानिस्तान में किए हैं.

साथी ही अफ़गानिस्तान में सोना, कॉपर, ज़िंक और लोहे जैसी क़ीमती धातुओं का भंडार है. इसलिए वहाँ अपने लिए प्रतिकूल माहौल बनाकर चीन भविष्य में निवेश की संभावनाओं को कम नहीं करना चाहेगा.

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