क़ारी अमजद उर्फ़ मुफ़्ती मज़ाहिम: तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के इस नेता को अमेरिका ने क्यों घोषित किया ग्लोबल टेररिस्ट

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- Author, अज़ीज़ुल्लाह ख़ान
- पदनाम, बीबीसी उर्दू डॉट कॉम, पेशावर
अमेरिका ने प्रतिबंधित संगठन तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के उपाध्यक्ष और संगठन के "प्रतिरोध विभाग" के प्रमुख क़ारी अमजद उर्फ़ मुफ़्ती मज़ाहिम को वैश्विक आतंकवादियों की सूची में शामिल कर लिया है.
उनके अलावा चरमपंथी संगठन अल-क़ायदा से जुड़े तीन अन्य नेताओं को भी इस सूची में शामिल करने की घोषणा की गई है.
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि ये चारों लोग अपने अपने संगठनों में नेतृत्व की भूमिका निभाते हैं जिसके कारण इन्हें इस सूची में शामिल किया गया है.
इन लोगों में क़ारी अमजद उर्फ़ मुफ़्ती मज़ाहिम के अलावा उपमहाद्वीप में अल-क़ायदा के तीन नेता ओसामा महमूद, आतिफ़ याहया गोरी और मोहम्मद मारूफ़ शामिल हैं.
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा जारी बयान में आगे कहा गया है कि अफ़ग़ानिस्तान से आतंकवाद के सभी प्रयासों को ख़त्म करने के लिए अमेरिका अपने सभी आतंकवाद विरोधी अधिकारों का इस्तेमाल करेगा.
बयान में यह भी कहा गया है कि अमेरिका कभी भी इस बात की इजाज़त नहीं देगा कि अफ़ग़ानिस्तान को फिर से आतंकवाद के लिए एक मंच के रूप में इस्तेमाल किया जाये.
इस फ़ैसले के सामने आने के बाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के प्रवक्ता ने 'अफ़सोस ज़ाहिर' करते हुए कहा कि उनके संगठन ने पाकिस्तान, अमेरिका और अन्य ताक़तों को यह स्पष्ट कर दिया है कि वे धार्मिक और राष्ट्रीय मूल्यों के लिए लड़ रहे हैं. उनका कोई भी बाहरी एजेंडा नहीं है.
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क़ारी अमजद उर्फ़ मुफ़्ती मज़ाहिम कौन हैं?
अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि क़ारी अमजद पाकिस्तान के ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत में चरमपंथियों और उनकी हिंसक गतिविधियों के लिए ज़िम्मेदार हैं.
ग़ौरतलब है कि कुछ दिन पहले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की ओर से व्हॉट्सऐप पर एक बयान जारी किया गया था, जिसमें संगठन के सदस्यों को पाकिस्तान में हमले शुरू करने के लिए कहा गया था. यह बयान संगठन के रक्षा विभाग की ओर से संगठन के प्रवक्ता ने जारी किया था और बयान के आख़िर में 'मुफ़्ती मज़ाहिम' का नाम लिखा था.
वरिष्ठ पत्रकार और विश्लेषक मुश्ताक़ यूसुफ़ज़ई ने बीबीसी को बताया कि हालांकि क़ारी अमजद तालिबान में सक्रिय थे, लेकिन वह संगठन में ज्यादा लोकप्रिय नहीं थे. उन्हें टीटीपी के उपाध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने का मुख्य कारण ये है कि उनका संबंध मलकंद डिवीज़न से है.
उन्होंने कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान सैन्य अभियानों और अन्य ऑपरेशंस में मलकंद डिवीज़न के ज़्यादातर तालिबान नेता मारे जा चुके हैं, हो सकता है कि इसीलिए उन्हें इस महत्वपूर्ण क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने के लिए उप प्रमुख का पद दिया गया हो.
क़ारी अमजद ख़ैबर पख़्तूनख़्वा प्रांत के दिर जिले के रहने वाले हैं.
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दिर जिले के स्थानीय लोगों ने बीबीसी को बताया कि क़ारी अमजद ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने इलाक़े से ही प्राप्त की और बाद में धार्मिक अध्ययन के लिए दिर के जिंदोल इलाक़े में स्थित एक मदरसे में दाखिला लिया. उनके पिता सरक़ारी स्कूल में शिक्षक थे.
नाम न छापने की शर्त पर एक अधिक़ारी ने बताया कि क़ारी अमजद अपनी युवावस्था में यानी साल 2007-08 में तालिबान में शामिल हो गया था. उस दौरान इस क्षेत्र में चरमपंथ अपने चरम पर था और संगठन में शामिल होने के बाद उन्होंने हिंसक गतिविधियों में अहम भूमिका निभाई थी.
हालांकि, इस इलाक़े में सुरक्षा बलों के अभियानों के चलते क़ारी अमजद साल 2010 में अफ़ग़ानिस्तान चले गए थे और फिर ऐसी ख़बरें भी आईं थीं कि कुछ सालों बाद क़ारी अमजद पाकिस्तान लौट आये हैं. लेकिन कार्रवाई के डर से वह जल्द ही वापस अफ़ग़ानिस्तान चले गए थे.
एक सूत्र ने बताया कि क़ारी अमजद का एक भाई सुरक्षाबलों के साथ हुई झड़प में मारा गया था, लेकिन बीबीसी औपचारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं कर सका. स्थानीय लोगों के मुताबिक़, दोबारा अफ़ग़ानिस्तान जाने के बाद उनका अपने इलाक़े से कम ही संपर्क रहा है.
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इस कार्रवाई से क्या फ़ायदा होगा?
अमेरिकी विदेश विभाग के बयान के मुताबिक़, इस कार्रवाई के बाद इन चारों व्यक्तियों की अगर अमेरिका में कोई प्रोपर्टी या किसी तरह के वित्तीय हित हैं, तो उन्हें ब्लॉक कर दिया गया है. इसके अलावा इस सूची में शामिल होने के बाद कोई भी अमेरिकी नागरिक या संस्थाएं इन व्यक्तियों के साथ किसी तरह का लेन-देन या कारोबार नहीं कर सकेंगे.
विश्लेषक मुश्ताक़ यूसुफ़ज़ई ने बीबीसी को बताया कि आमतौर पर अमेरिका द्वारा उठाए गए इस तरह के क़दमों का तहरीक-ए-तालिबान के नेताओं पर कोई असर नहीं पड़ता है, क्योंकि अमेरिका में उनका न तो कोई हित या संपत्ति होते हैं और न ही किसी तरह का कोई अकाउंट होता है जो प्रभावित हो सके.
उन्होंने कहा कि इस तरह कार्रवाई से तालिबान संगठन के भीतर ऐसे व्यक्तियों की सुरक्षा बढ़ा दी जाती है जिनका नाम इस तरह की सूची में डाल दिया जाता है.
उन्होंने कहा कि पहले तहरीक-ए-तालिबान के प्रमुख मुफ़्ती नूर वली का नाम भी इस सूची में शामिल था, जिसके बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई थी और उन्होंने आम लोगों से मिलना और बातचीत करना बंद कर दिया था.
मुश्ताक़ युसुफ़ज़ई के मुताबिक़ एक बात यह भी होती है कि जिसका नाम इस लिस्ट में आ जाता है, संगठन में उसकी अहमियत बढ़ जाती है.
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टीटीपी की बढती कार्रवाईयां
याद रहे कि पाकिस्तान सरकार के साथ टीटीपी की बातचीत का सिलसिला पिछले साल अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद शुरू हुआ था और इस साल जून में तालिबान ने अनिश्चितकालीन युद्धविराम की घोषणा की थी.
हालांकि, युद्धविराम केवल कुछ ही महीनों तक चला और 28 नवंबर को तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान की तरफ़ से एक बयान जारी किया गया, जिसमें संगठन के सदस्यों को देश भर में हमले करने का आदेश दिया गया था.
दो दिन पहले क्वेटा में टीटीपी की तरफ़ से किये गए आत्मघाती हमले में पुलिसकर्मियों को निशाना बनाया गया था. इसके अलावा उत्तरी वज़ीरिस्तान, चारसद्दा और अन्य इलाक़ों में भी सुरक्षाबालों और पुलिस पर हमले किए गए हैं. पाकिस्तान के गृह मंत्री राणा सनाउल्लाह ने भी शुक्रवार को तालिबान की बढ़ती गतिविधियों का ज़िक्र किया था.
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