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क़तर ने ये वादा क्या सिर्फ़ वर्ल्ड कप की मेज़बानी पाने के लिए किया था?
- Author, समीर हाशमी
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
फ़ुटबॉल वर्ल्ड कप की मेज़बानी हासिल करने के दौरान क़तर ने वादा किया था कि यह इतिहास का पहला 'कार्बन उत्सर्जन न्यूट्रल' टूर्नामेंट होगा.
लेकिन पर्यावरणविदों ने इसके दावे को लेकर संदेह जताया था. तो क्या क़तर अपने वायदे को पूरा करने में सफल रहा?
क़तर में होटल के कमरों की भारी कमी के कारण दसियों हज़ार पर्यटकों को संयुक्त अरब अमीरात समेत पड़ोसी खाड़ी देशों में ठहरना पड़ रहा है.
इन प्रशंसकों को फ़ुटबॉल मैचों तक लाने के लिए विशेष शटल उड़ानों का इंतज़ाम किया गया है.
क़तर की राजधानी दोहा से रोज़ क़रीब 500 उड़ानें आती जाती हैं. इनमें अकेले 120 उड़ानें यूएई के दुबई से हैं.
लेकिन फ़ुटबॉल प्रशंसकों को हवाई जहाज से मेज़बान देश में लाने और ले जाने के कारण होने वाले पर्यावरणीय नुक़सान पर अब सवाल उठने लगे हैं.
12 लाख प्रशंसक और 30 हज़ार कमरे
कार्बन उत्सर्जन की निगरानी करने वाली पेरिस की एक फ़र्म 'ग्रीनली' का अनुमान है कि जबसे टूर्नामेंट शुरू हुआ है, इन शटल उड़ानों की वजह से हर दिन 6,000 से 8,000 टन कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) उत्सर्जित हो रहा है.
कार्बन मार्केट वॉच नामक एक एडवोकेसी ग्रुप से जुड़े खालेब डियाब का कहना है, "इतनी अधिक उड़ानें, आयोजकों के उस वायदे से उलट हैं, जिसमें उन्होंने हवाई उड़ानों को कम से कम किए जाने की बात कही थी."
वो कहते हैं, "एक ही भौगोलिक इलाके में इतने सारे स्टेडियम बनाने के पीछे तर्क यही था कि हवाई यात्राओं से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को कम किया जा सके."
एक अनुमान के मुताबिक, इस वर्ल्ड कप में 12 लाख से अधिक दर्शक पहुंचेंगे, लेकिन क़तर के होटलों में केवल 30,000 कमरे ही हैं जिनमें 80% फ़ीफ़ा द्वारा फ़ुटबॉल टीमों, अधिकारियों और प्रायोजकों के लिए पहले ही बुक किए गए हैं.
रहने का इंतज़ाम ठीक करने के लिए आयोजकों ने खाली पड़े आपार्टमेंट, विला, फ़ैन विलेज और रेगिस्तान में पारम्परिक तरीके के बनाए टेंटों में साझा रिहाइश की पेशकश की है.
लेकिन ये विकल्प भी बहुत महंगे हैं, जिसकी वजह से फ़ुटबॉल प्रेमियों को अन्य जगहों की तलाश करनी पड़ रही है.
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भारी हवाई यातायत से बिगड़ता कार्बन उत्सर्जन संतुलन
इस समय दुबई में फुटबॉल प्रशंसकों की भारी भीड़ है. दुबई स्पोर्ट्स काउंसिल का अनुमान है कि पूरे टूर्नामेंट में 10 लाख अतिरिक्त पर्यटक उनके यहां आएंगे.
क़तर में मैच देखने और वापस जाने के लिए यात्रियों को दुबई या अन्य देशों से उसी दिन राउंड ट्रिप बुक करने की भी सुविधा दी गई है.
प्राइवेट जेट और चार्टर प्लेन की भी भारी मांग है, जो आसपास के देशों से रोज़ क़तर में उतर रहे हैं.
डियाब का कहना है कि इतने बड़े पैमाने पर इनका इस्तेमाल दिखाता है कि टूर्नामेंट को न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन बनाने का वायदा गंभीर नहीं था.
वो कहते हैं, "अगर वे चाहते तो अन्य संभावनाओं पर विचार करते, जैसे कि पड़ोसी देशों से ड्राइविंग करके आने की सुविधा देना."
लेकिन क़तर ने अपने फैसलों का बचाव किया है.
वर्ल्ड कप आर्गेनाइजिंग कमेटी के प्रवक्ता का कहना है कि 'शटल सेवाओं ने क़तर में फ़ीफ़ा वर्ल्ड तक सीधी उड़ानों को सुनिश्चित किया है.'
प्रवक्ता के अनुसार, "कई जगहों पर रुकने वाली उड़ानों के मुकाबले सीधी उड़ान कार्बन उत्सर्जन के लिहाज से बहुत किफ़ायती होती है."
क़तर की योजना है कि शटल उड़ानों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन को पूरे टूर्नामेंट के कार्बन फ़ुटप्रिंट के हिस्से के तौर पर देखा जाए.
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न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन ख़ाम ख़्याली
आयोजकों का अनुमान है कि वर्ल्ड कप में 36 लाख टन कार्बन डाई ऑक्साइड का उत्सर्जन होगा जिसमें 52% का सबसे बड़ा योगदान हवाई यात्राओं का होगा.
स्वतंत्र रिसर्चरों का कहना है ये आंकड़ा बहुत कम करके आंका गया है. 'ग्रीनली' के सीईओ एलेक्सी नार्मैंड मानते हैं कि अंत में यह आंकड़ा इससे 70% अधिक होगा.
वो कहते हैं कि "2022 का टूर्नामेंट सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन वाला होगा. वर्ल्ड कप में न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन की बात एक ख़ाम ख़्याली ही है."
इस टूर्नामेंट को न्यूनतम कार्बन उत्सर्जन वाला बनाने के लिए आयोजकों ने कई उपायों की घोषणा की है. मसलन, स्टेडियम में सोलर पावर से चलने वाले एयर कंडीशनर, कार्बन उत्सर्जन को कम करने के लिए कार्बन क्रेडिट खरीदना और शिपिंग कंटेनरों को बिल्डिंग मैटीरियल के रूप में इस्तेमाल करना आदि.
वर्ल्ड कप के लिए क़तर ने सात स्टेडियम बनवाए. 'स्टेडियम 974' को शिपिंग कंटेनरों और मॉड्यूलर स्टील से बनाया गया है और टूर्नामेंट के बाद इसे हटा दिया जाएगा. जबकि बाकी अपनी जगह पर बने रहेंगे.
कार्बन फ़ुटप्रिंट की अपनी गणना में आयोजकों का कहना है कि इन स्टेडियम का आने वाले दशकों तक इस्तेमाल किया जा सकेगा और इनके निर्माण में कम से कम कार्बन उत्सर्जन का ख़्याल रखा गया है.
नॉर्मैंड कहते हैं कि इससे उत्सर्जन की असल तस्वीर सामने नहीं आती.
उनका ये भी कहना है कि पूरी तरह सर्टिफ़ाइड न हो पाने वाले प्रोजेक्टों के कार्बन उत्सर्जन की भरपाई के लिए आयोजक कार्बन क्रेडिट ख़रीदने पर ज्यादा फ़ोकस कर रहे हैं.
भविष्य में ये रणनीति बदलनी चाहिए. वो कहते हैं, "खेल के इन विशाल कार्यक्रमों को कार्बन उत्सर्जन कम करने के मौके के रूप में देखने की ज़रूरत है न कि इससे बचने के ."
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