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क़तर ने माना, फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप की तैयारियों में हुई 400 से 500 मजदूरों की मौत: प्रेस रिव्यू
- क़तर ने प्रवासी मजदूरों की मौत से जुड़े आधिकारिक आंकड़े जारी नहीं किए थे
- क़तर अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की आलोचना के बाद अपने यहां क़फाला सिस्टम ख़त्म कर चुका है जो नियोक्ताओं को विशेष अधिकार देती है
- क़तर ने न्यूनतम मजदूरी 260 अमेरिकी डॉलर तय की है
फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप के मेज़बान के एक शीर्ष अधिकारी ने पहली बार ये स्वीकार किया है कि विश्वकप की तैयारियों में 400 से 500 मजदूरों की मौत हुई है.
ये पहला मौका है जब क़तर ने मजदूरों की मौतों को लेकर इतना बड़ा आंकड़ा दिया है. अब तक दिए गए आंकड़े इससे काफ़ी कम हुआ करते थे.
अंग्रेजी अख़बार बिज़नेस स्टेंडर्ड में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, क़तर के शीर्ष नेता हसन अल-थवाडी ने ब्रितानी पत्रकार पियर्स मॉर्गन को दिए इंटरव्यू में ये बात स्वीकार की है.
थवाडी ने कहा है, "ये आंकड़ा लगभग 400 से 500 के बीच है. मेरे पास सटीक संख्या तो नहीं है, लेकिन इस पर चर्चा हुई है. लेकिन साफ़ कहूँ तो एक शख़्स की मृत्यु भी बहुत ज़्यादा है."
थवाडी के मुताबिक़, मृतकों में वर्ल्ड कप के लिए स्टेडियम, सड़कें और होटल जैसे आधारभूत ढांचा खड़ा करने वाले मजदूर शामिल थे.
इससे पहले वर्ल्ड कप की तैयारियों के दौरान जान गंवाने वालों की संख्या 37 से 40 के क़रीब बताई जाती थी. इसके साथ ही क़तर कहता आया है कि इन लोगों की मौत हार्ट अटैक जैसी वजहों से हुई हैं.
साल 2010 में फ़ुटबॉल विश्व कप आयोजित कराने की मेज़बानी हासिल करने के बाद से क़तर ने अपने आधारभूत ढांचे को खड़ा करना शुरू किया है.
इसे अब तक का सबसे महंगा वर्ल्ड कप भी माना जा रहा है क्योंकि कुछ ख़बरों के मुताबिक़ इस पर 200 अरब डॉलर से भी ज़्यादा ख़र्च हुआ है.
अडानी समूह 23 हज़ार करोड़ में करेगा धारावी का कायाकल्प
अडानी समूह को एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती कही जाने वाली धारावी स्लम के पुनर्विकास का ठेका मिल गया है. ये परियोजना पिछले बीस सालों से अटकी हुई थी.
टाइम्स ऑफ़ इंडिया में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, धारावी पुनर्विकास प्राधिकरण के सीईओ एसवीआर श्रीनिवास ने बताया है कि इस परियोजना के लिए डीएलएफ़ और श्री नमन समूह ने भी बोली लगाई थी.
डीएलएफ़ ने 2025 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. वहीं, श्री नमन की बोली को तकनीकी वजहों से ख़ारिज कर दिया गया. मंगलवार को सबसे ऊंची 5,069 करोड़ रुपये की बोली होने की वजह से अडानी समूह को ये ठेका मिल गया है. इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में सचिव स्तर की बैठक होगी जिसमें मुख्य बोली लगाने वाले के नाम पर औपचारिक रूप से मुहर लगाई जाएगी.
साल 2018 में अडानी इंफ्रास्ट्रक्चर ने इस परियोजना के लिए 4529 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी. लेकिन तब दुबई की एक कंपनी सेकलिंक समूह को ये ठेका दे गया था क्योंकि उसने 7500 करोड़ रुपये की बोली लगाई थी.
हालांकि, इस बिड को बाद में रद्द कर दिया गया. उस वक़्त बोली लगाने की शुरुआती कीमत 3150 करोड़ रुपये थी. इस बार इसे घटाकर 1600 करोड़ रुपये कर दिया गया था ताकि ज़्यादा बिडर्स को आकर्षित किया जा सके.
ये प्रोजेक्ट धारावी नोटिफाइड एरिया के तहत आने वाले 178 हेक्टेयर के साथ-साथ 62 हेक्टेयर क्षेत्र में लागू होगा. इस इलाके में कम से कम 58000 लोग रहते हैं. ये प्रोजेक्ट अगले सात साल में पूरा होना है.
सुप्रीम कोर्ट में बोली केंद्र सरकार, वैक्सीन मौतों के लिए वो ज़िम्मेदार नहीं
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दिए अपने हलफनामे में कहा है कि कोविड वैक्सीन से होने वाली मौतों के लिए उसे ज़िम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता.
जनसत्ता में प्रकाशित ख़बर के मुताबिक़, केंद्र का जवाब उस याचिका पर था जिसमें वैक्सीन लेने के बाद दो लड़कियों की मौत हो गई थी.
केंद्र ने अपने जवाब में कहा है कि टीकाकरण कार्यक्रम के तहत लगाए जा रहे टीके तीसरे पक्ष ने तैयार किए हैं. हमारे अलावा दूसरे देशों की नियामक संस्थाओं ने भी इसकी समीक्षा की है.
सरकार का कहना था कि एक-दो मौतों के लिए उसे ज़िम्मेदार ठहराना क़ानूनी तौर पर जायज़ नहीं है.
सरकार का कहना था कि ऐसा कोई दस्तावेज़ नहीं है कि जो ये साबित करे कि इस तरह की मौतों के लिए वो ज़िम्मेदार है.
स्वास्थ्य मंत्रालय ने हलफ़नामे में कहा कि वैक्सीन लेने की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है. कोई भी इसे अपनी इच्छा से ही लेता है.
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