सऊदी राजकुमार को जमाल ख़ाशोज्जी हत्या मामले में मिली अमेरिका से ये राहत

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अमेरिका ने कहा है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को पत्रकार जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या के मुक़दमे में संरक्षण हासिल है.
सऊदी अरब की सरकार के आलोचक जमाल ख़ाशोज्जी की अक्तूबर 2018 में तुर्की की राजधानी इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास में हत्या कर दी गई थी.
अमेरिका की ख़ुफ़िया एजेंसियों का दावा है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ही जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या का आदेश दिया था.
लेकिन कोर्ट में अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि सऊदी अरब के प्रधानमंत्री की नई भूमिका के कारण मोहम्मद बिन सलमान को छूट हासिल है.
कोलंबिया के एक डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में दाख़िल दस्तावेज़ में अमेरिका के न्याय मंत्रालय ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय क़ानून में किसी राष्ट्राध्यक्ष को छूट मिलने की बात पूरी तरह स्थापित है.
37 वर्षीय मोहम्मद बिन सलमान को इस साल सितंबर में ही प्रधानमंत्री की भूमिका मिली है. मोहम्मद बिन सलमान ख़ाशोज्जी की हत्या में अपनी किसी भी तरह की भूमिका से इनकार करते हैं.
लेकिन जो बाइडन की सरकार इस बात पर ज़ोर दे रही है कि ये क़दम मोहम्मद बिन सलमान के निर्दोष होने को निर्धारित नहीं करता.

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अंतरराष्ट्रीय क़ानून के मुताबिक़
व्हाइट हाउस की नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के एक प्रवक्ता ने कहा- ये एक क़ानूनी क़दम है जिसे विदेश मंत्रालय ने उठाया है और ये अंतरराष्ट्रीय क़ानूनों के स्थापित सिद्धांतों के अनुरूप है. इसका केस के गुण-दोष से कोई मतलब नहीं.
जमाल ख़ाशोज्जी की पूर्व मंगेतर हेटिस सेंगिज़ ने इसके बाद ट्विटर पर लिखा- इस फ़ैसले से जमाल की आज फिर मौत हो गई.
जमाल ख़ाशोज्जी के मामले में सऊदी अरब ने कहा था कि वॉशिंगटन पोस्ट के पूर्व पत्रकार की मौत एजेंट्स की एक टीम के ऑपरेशन के दौरान हुई, ये एजेंट्स उन्हें सऊदी अरब लौटने के लिए मनाने गए थे.
हालाँकि अमेरिका अधिकारियों के मुताबिक़ सीआईए ने ये निष्कर्ष निकाला कि ये लगभग निश्चित है कि क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इस मामले में भागीदार थे.
जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या की दुनियाभर में आलोचना हुई थी और इसका सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की छवि को भी नुक़सान पहुँचा था.
सऊदी अरब का अब तक आधिकारिक रूप से यही कहना रहा है कि पत्रकार ख़ाशोज्जी की हत्या सऊदी अरब के एजेंटों ने कर दी थी लेकिन उन्हें सिर्फ़ यह कह कर भेजा गया था कि उन्हें ख़ाशोज्जी को सऊदी अरब लाना है.
सऊदी की एक अदालत ने इस मामले में पाँच लोगों को पहले फांसी की सज़ा सुनाई थी, लेकिन बाद में अदालत ने उनकी सज़ा को 20 साल क़ैद की सज़ा में तब्दील कर दिया था.
2019 में यूएन के एक विशेष अधिकारी एग्नेस कैलामार्ड ने सऊदी सरकार पर जानबूझकर पूर्व निर्धारित योजनाबद्ध तरीक़े से ख़ाशोज्जी की हत्या करने का आरोप लगाया था और सऊदी सरकार के मुक़दमे को इंसाफ़ के ठीक विपरीत क़रार दिया था.
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रिश्तों पर असर
जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या ने सऊदी अरब और अमेरिका के रिश्तों पर भी असर डाला है.
जब जो बाइडन 2019 में राष्ट्रपति पद के लिए प्रचार कर रहे थे, उस समय उन्होंने वादा किया था कि वे सऊदी अरब को अलग-थलग कर देंगे.
राष्ट्रपति बनने के बाद शुरू में जो बाइडन ने मोहम्मद बिन सलमान के बारे में बात करने से भी इनकार कर दिया था.
लेकिन जुलाई में सऊदी अरब के दौरे से पहले बाइडन ने ये कहना शुरू किया कि वे सऊदी अरब के साथ रिश्तों को नई दिशा में लाना चाहते हैं.
जब बाइडन सऊदी अरब गए, तो मोहम्मद बिन सलमान के साथ गर्मजोशी से मिलने की उनकी तस्वीर की ख़ूब आलोचना भी हुई.
आलोचकों ने ये कहा कि बाइडन का मोहम्मद बिन सलमान से ऐसे मिलना जमाल ख़ाशोज्जी की हत्या मामले में सऊदी अरब की बात को सच मानने जैसा है.
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ख़ाशोज्जी की हत्या कैसे हुई थी?
59 साल के सऊदी पत्रकार अक्टूबर 2018 में इस्तांबुल स्थित सऊदी वाणिज्य दूतावास के दफ़्तर गए थे जहां उन्हें अपने कुछ निजी दस्तावेज़ लेने थे. उन दस्तावेज़ों के आधार पर वो अपनी तुर्की मंगेतर हतीजे जेंग्गिज़ से शादी कर सकते थे.
कथित तौर पर ऐसा माना जाता है कि क्राउन प्रिंस के भाई प्रिंस ख़ालिद बिन सलमान ने उन्हें आश्वस्त किया था कि तुर्की में सऊदी वाणिज्य दूतावास के दफ़्तर में जाना बिल्कुल सुरक्षित होगा.
प्रिंस ख़ालिद उस समय अमेरिका में सऊदी अरब के राजदूत थे. हालांकि प्रिंस ख़ालिद इस बात को मानने से इनकार करते हैं कि उनकी पत्रकार ख़ाशोज्जी से किसी भी तरह का कोई संपर्क हुआ था.
सऊदी अरब के अभियोजकों के अनुसार, शुरूआती संघर्ष के बाद ख़ाशोज्जी को भारी मात्रा में ड्रग दिया गया था और ड्रग के ओवरडोज़ के कारण उनकी मौत हो गई थी.
उसके बाद उनके मृत शरीर को टुकड़े-टुकड़े किया गया और सऊदी दूतावास के बाहर मौजूद एक स्थानीय सूत्र को उनका शरीर दे दिया गया था. हालांकि ख़ाशोज्जी की बॉडी आज तक नहीं मिल पाई है.
तुर्की ख़ुफ़िया विभाग ने अपने पास इस हत्याकांड के दौरान हुई बातचीच की ऑडियो रिकॉर्डिंग होने का दावा किया था और फिर तुर्की ने ही इस ऑडियो क्लिप को सार्वजनिक कर दिया था जिसके बाद लोगों को इसकी जानकारी मिली.
एक समय में ख़ाशोज्जी सऊदी शाही परिवार के बहुत क़रीबी थे और उनके सलाहकार भी थे, लेकिन फिर उनके संबंध ख़राब हो गए और वो साल 2017 में अमेरिका चले गए और वहां निर्वासन में रहने लगे.
अमेरिका से ही वो वाशिंगटन पोस्ट में एक मासिक कॉलम लिखते थे जिनमें वो अक्सर सऊदी क्राउन प्रिंस की नीतियों की आलोचना करते थे.
अपने पहले ही कॉलम में ख़ाशोज्जी ने लिखा था कि उन्हें इस बात का डर था कि असहमति को दबाने की कोशिश में उन्हें भी गिरफ़्तार किया जा सकता था जिसकी देखरेख उनके अनुसार ख़ुद क्राउन प्रिंस कर रहे थे.
अपने आख़िरी कॉलम में उन्होंने यमन में सऊदी अरब के हस्तक्षेप की आलोचना की थी.
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