बांग्लादेश की पीएम शेख़ हसीना ने भारत दौरे से पहले रोहिंग्या मुसलमानों पर कही ये बात

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बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख़ हसीना सोमवार पाँच सितंबर को चार दिवसीय भारत दौरे पर दिल्ली पहुँच रही हैं.
शेख़ हसीना की इस यात्रा को कई मायनों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जानकारों का मानना है कि शेख़ हसीना की इस यात्रा के दौरान चरमपंथ और सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर कुछ ठोस प्रगति दिख सकती हैं.
न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने भारत यात्रा से पहले उनका साक्षात्कार किया. इस साक्षात्कार में उन्होंने भारत के साथ संबंधों, रोहिंया संकट जैसे तमाम मुद्दों पर अपनी राय साझा की.
भारत के साथ संबंधों पर शेख़ हसीना ने कहा कि बांग्लादेश, भारत के सहयोग और समर्थन को हमेशा याद रखता है.
शेख़ हसीना ने कहा, "भारत हमारा विश्वसनीय साथी है. साल 1971 के युद्ध के दौरान भारत ने जिस तरह बांग्लादेश का सहयोग किया, वह हमेशा याद है. साथ ही 1975 में जब मैंने अपने परिवार के सभी सदस्यों को खो दिया था, तब तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री ने हमें भारत में आश्रय दिया था."
उन्होंने कहा कि बांग्लादेश और भारत दो क़रीबी पड़ोसी हैं और हम हमेशा पड़ोसी के साथ अपनी दोस्ती को महत्व देते हैं.
शेख़ हसीना ने कहा, "यह दोस्ती किसी सत्ता के लिए नहीं है, ये हमारे लोगों के लिए है. हमारी प्राथमिकता है कि दोनों देशों के बीच व्यापार को कैसे और बेहतर बनाया जाए."

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चीन के साथ संबंधों पर भी बोलीं शेख़ हसीना

शेख़ हसीना ने अपनी विदेश नीति पर भी बात की.
उन्होंने कहा, "हमारी विदेश नीति बहुत स्पष्ट है- "सभी से मित्रता, किसी से भी द्वेष नहीं". हम राष्ट्रपिता मुजीबुर्रहमान की सोच का पालन करते हैं."
क्या छोटे देश बड़े देशों के बीच कहीं दबकर रह जाते हैं? ऐसे में बांग्लादेश अपने रिश्तों को कैसे देखता है?
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इस सवाल पर शेख़ हसीना ने कहा, "मेरा मानना है कि हमें अपने लोगों के जीवन-स्तर को बेहतर बनाने के लिए काम करने पर ध्यान देना चाहिए. ये सोचने पर ध्यान देना चाहिए कि हम कैसे उनके लिए काम कर सकते हैं...अपने लोगों की बेहतरी के लिए काम करने पर ध्यान देना चाहते हैं. हमारा सिर्फ़ एक ही दुश्मन है- ग़रीबी. तो ऐसे में हम सभी को मिलकर काम करने की ज़रूरत है. हमें अपने लोगों को बेहतर जीवन देने के लिए काम करने की ज़रूरत है. "
उन्होंने कहा, "अगर चीन और भारत के बीच कोई समस्या है तो मैं उसमें नहीं पड़ना चाहती. मैं अपने देश का विकास चाहती हूं."
उन्होंने कहा, "भारत हमारा पड़ोसी है. हमारे बीच बहुत अच्छे संबंध हैं. कुछ समस्याएं हैं लेकिन हमने ज्यादातर का समाधान भी निकाला है. यदि पड़ोसी देशों के बीच कोई समस्या है तो उसे द्विपक्षीय तरीक़े से हल किया जा सकता है."

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रोहिंग्या संकट पर क्या बोलीं बांग्लादेश की पीएम

रोहिंग्या संकट को लेकर लंबे समय से बहस चली आ रही है और उन्हें समय-समय पर वापस भेजने की मांग भी होती रहती है. लेकिन बांग्लादेश की पीएम इस पर अलग विचार रखती हैं?
शेख हसीना ने कहा, "यह हमारे लिए एक बड़ा बोझ है. भारत एक बहुत बड़ा देश है और आसानी ने उन्हें आसरा दे सकता है. यहां बहुत अधिक संख्या में भी वे नहीं हैं लेकिन हमारे देश में 1.1 मिलियन (11 लाख) रोहिंग्या हैं. हम अंतरराष्ट्रीय समुदायों और अपने पड़ोसी देशों के साथ चर्चा कर रहे हैं. जिससे रोहिंग्या वापस घर आ सकें. हम उन्हें आश्रय देने की पूरी कोशिश कर रहे हैं."
उन्होंने कहा, "मानवीय आधार पर हम उन्हें हर ज़रूरत की चीज़ मुहैया कराने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन आख़िर वो कितने लंबे समय तक इस तरह टेंट्स में रहेंगे. इससे पर्यावरण पर असर पड़ रहा गै, कुछ लोग ड्रग ट्रैफ़िकिंग में शामिल हो रहे हैं, हथियारों की तस्करी, औरतों की ख़रीद-फरोख़्त जैसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में वे जितनी जल्दी घर लौटते हैं तो ये बांग्लादेश के लिए तो अच्छा होगा ही, साथ ही म्यांमार के लिए भी."
शेख़ हसीना ने कहा कि वो इस मुद्दे पर सभी से बात कर रहे हैं. "उस समय संकट था तो हमने उन्हें शरण दी लेकिन आख़िर कब तक....?"

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पीएम मोदी की तारीफ़

शेख़ हसीना ने पीएम मोदी के पिछले बांग्लादेश दौरे के लिए उन्हें धन्यवाद कहा. उन्होंने कहा कि उस समय कोरोना-काल था लेकिन बावजूद इसके भारत के पीएम और राष्ट्रपति ने बांग्लादेश का दौरा किया, जिसके लिए हम उनके बहुत शुक्रगुज़ार हैं.
शेख़ हसीना ने कोविड महामारी के दौरान बांग्लादेश की जनता के लिए वैक्सीन-मैत्री पहल के तहत भारत की ओर से दी गई वैक्सीन-सहायता पर भी टिप्पणी की.
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उन्होंने कहा, "मैं भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वैक्सीन मैत्री पहल के लिए धन्यवाद करना चाहती हूं. भारत ने सिर्फ़ बांग्लादेश ही नहीं दूसरे दक्षिण एशियाई देशों को भी वैक्सीन उपलब्ध कराई."
शेख़ हसीना ने कहा, "रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हमारे बहुत से छात्र भी यूक्रेन में फंसे हुए थे. भारत ने जब अपने छात्रों को वहां से निकाला तब हमारे छात्रों को भी वहां से निकाला, इसके लिए मैं प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करती हूं."
श्रीलंका से तुलना पर भी बोलीं शेख़ हसीना

हाल के समय में कई मौक़ों पर कई परिस्थितियों के संदर्भ में बांग्लादेश की तुलना श्रीलंका से की गई. ख़ासतौर पर आर्थिक मोर्चे को लेकर.
बांग्लादेश की आर्थिक स्थिति पर उन्होंने कहा, "हमारी अर्थव्यवस्था अभी भी बहुत मज़बूत है. हमने कोरोना महामारी का सामना किया, यूक्रेन-रूस युद्ध का भी प्रभाव पड़ा लेकिन बांग्लादेश समय पर ऋण चुकाता रहा है. मुझे नहीं लगता कि हमें कभी श्रीलंका जैसी स्थिति का सामना करना पड़ेगा."
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भारत के साथ विवादों पर बांग्लादेश का रुख़

भारत-बांग्लादेश सीमा पर मवेशियों की तस्करी पर पीएम हसीना ने कहा, "इस पर चर्चा जारी है. मवेशी तस्करी की घटनाओं में कमी आई है. कभी-कभी कुछ घटनाएं होती हैं. दोनों देशों के सुरक्षा बलों के बीच इसे लेकर बैठकें भी होती रहती हैं, हमें आश्वासन मिला है कि ऐसी घटनाएं कम होंगी."
तीस्ता नदी विवाद को लेकर भी शेख़ हसीना ने अपनी बात रखी.
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उन्होंने कहा, "हम नीचे की ओर स्थित हैं, पानी भारत से आ रहा है. इसलिए भारत को और उदारता दिखानी चाहिए. इससे दोनों देश लाभान्वित होंगे. कभी-कभी हमारे लोगों को बहुत नुकसान होता है, खासकर तीस्ता नदी के कारण."
हालांकि उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि बातचीत से इन मसलों का हल निकाला जा सकता है.
उन्होंने पीएम मोदी का ज़िक्र करते हुए कहा कि भारत के पीएम मोदी इन मसलों को सुलझाने के लिए काफी उत्सुक हैं और सकारात्मक हैं.
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