चीन को बच्चों की किताबों में छपे कार्टूनों पर क्यों गुस्सा आया?

    • Author, केरी एलन
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

चीन की सरकार यहां के प्राइमरी स्कूलों में पढ़ाई जानी वाली किताबों में छपे कार्टूनों से खफ़ा है. कई प्राइमरी स्कूलों की किताबों में छपे कार्टून हटा दिए गए हैं. इन सामग्रियों को आपत्तिजनक माना जा रहा था.

चीन में स्कूली किताबों में काफी वक्त से कार्टूनों का इस्तेमाल किया जा रहा था लेकिन इस साल मई में सरकारी मीडिया के प्रकाशन 'ग्लोबल टाइम्स' ने जब बच्चों की किताबों में छपे इन कार्टूनों को 'भद्दा, नस्लीय, अजीब और अश्लील' बताया तो हंगामा मच गया.

प्रकाशक को उस वक़्त इस पर माफ़ी मांगनी पड़ी थी. साथ ही ये वादा करना पड़ा था कि इन कार्टूनों को फिर से बनाया जाएगा. अब तक हज़ारों किताबों की समीक्षा की जा चुकी है. इन चित्रों को बनाने वाले कलाकारों और प्रकाशकों को लताड़ लगाई गई है या उन्हें नौकरी से हटा दिया गया है.

'ग्लोबल टाइम्स' अख़बार ने कहा है कि चित्रों में लड़कों के चित्रों में एड़ियों में 'टैटू' दिख रहे हैं. एक लड़की ने 'खरगोश जैसी ड्रेस' पहन रखी है. उन चित्रों पर भी आपत्ति की गई है, जिनमें बच्चों को 'अमेरिकी झंडा' पहनाया गया है.

चीनी लोगों के सौंदर्य-बोध को बदनाम करने के आरोप

इन कार्टूनों के आलोचकों का कहना है कि ये चित्र जानबूझकर 'चीनी लोगों के सौंदर्यबोध को बदनाम' कर रहे हैं. 'ग्लोबल टाइम्स' के मुताबिक कई लोग प्रकाशकों को गैर ज़िम्मेदार बता रहे हैं.

इन किताबों को देखने के लिए 320 विशेषज्ञों की एक टीम बनाई गई थी. इस टीम ने लगभग दो हज़ार किताबों को खंगाला ताकि माकूल बदलाव किया जा सके. सोमवार को नए चित्र सामने आए. इन्हें चीन की नेशनल टेक्स्ट बुक कमेटी ने मंजूरी दे दी है.

चाइना डेली अख़बार ने कहा है कि इस तरह चीनी लोगों के 'सौंदर्य-बोध को बदनाम' करने वाले 27 लोगों को किसी न किसी तरह से सज़ा दी गई है.

प्रकाशकों और संपादकों को मिली सज़ा

सज़ा पाने वाले लोगों में हुआंग क्विवांग जैसे लोग शामिल हैं. वह पीपुल्स एजुकेशन प्रेस के प्रमुख हैं. उन्हें गंभीर 'चेतावनी' दी गई है. प्रमुख संपादक गुओ गेई को तो बर्खास्त कर दिया गया है. इस स्कैंडल के बाद तीन चित्रकारों को नौकरी से निकाल दिया गया है. चीनी मीडिया ने सोमवार को चेतावनी देते हुए कहा है कि काम में लापरवाही के आरोप में अभी और लोगों को नौकरी से निकाला जाएगा.

चीन में किताबों में इस बदलाव को सोशल मीडिया पर काफी तारीफ़ मिल रही है. हालांकि, ज़्यादातर टिप्पणियां चीन की पार्टी और सरकार की ओर से वित्त-पोषित सोशल मीडिया पर दिख रही हैं. इन प्लेटफॉर्मों पर सरकार समर्थित पोस्ट ही किए जाते हैं.

मई में किताबों में सुधार को लेकर शुरू में कुछ भ्रम की स्थिति थी. ट्विटर जैसे ही सोशल मीडिया साइना वीबो ने कहा था कि 'सौंदर्य-बोध सापेक्ष चीज' है. इस मीडिया में सक्रिय यूज़रों के बीच सरकार के इस कदम को लेकर भ्रम था.

कुछ लोगों का कहना है कि इस कदम से चीन का बदलता रुख जाहिर होता है. मिसाल के तौर पर चीन और अमेरिका के बढ़ते तनाव की वजह से अमेरिका के झंडे जैसी टी-शर्ट पहनने वाले बच्चे की तस्वीर को लोग स्वीकार नहीं करेंगे.

यह पहली बार नहीं है, जब चीन के लोगों की संस्कृति को इस तरह दिखाने पर लोग आहत हुए हैं. नवंबर में चीन के एक फोटोग्राफर ने फ्रेंच लग्ज़री ब्रांड डियो के लिए खींची गई एक तस्वीर के बारे में अपनी 'अज्ञानता' को लेकर माफी मांगी थी.

लोगों का गुस्सा इस बात पर था कि एक चीनी महिला को पश्चिमी स्टीरियोटाइप में दिखा कर चीन के लोगों का अपमान किया गया है.

2019 में एक चीनी मॉडल की तस्वीर पर विवाद हुआ. इसमें कहा गया कि ज़ारा के कैंपेन में झाइयों वाले चेहरे की चीनी महिला की तस्वीर दिखा कर चीनी लोगों को 'बदसूरत' के तौर पर दिखाया जा रहा है.

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