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समुद्र की वो लुटेरी जिससे 'थर्राता' था चीन
अगर आपसे कहा जाए कि दुनिया में सबसे ख़तरनाक और ताक़तवर समुद्री लुटेरा कौन था तो आप शायद लॉन्ग जॉन सिल्वर या ब्लैक बियर्ड का नाम लेना चाहेंगे.
ये दोनों समुद्री लुटेरों की दुनिया के दो सबसे मशहूर किरदार हैं. कंधे पर तोता और हाथ में चमचमाती तलवार रखने वाले लॉन्ग जॉन सिल्वर स्कॉटिश लेखक रॉबर्ट लुइस स्टीवेंसन की लोकप्रिय किताब 'ट्रेज़र आइलैंड' के पात्र हैं.
वहीं, ब्लैक बियर्ड नाम से मशहूर समुद्री लुटेरे का असली नाम एडवर्ड टीच था. माना जाता है कि ब्लैक बियर्ड एक ब्रितानी समुद्री लुटेरे थे जिन्होंने वेस्ट इंडीज़ से लेकर उत्तरी अमेरिका के ब्रितानी उपनिवेशों से लगते समुद्री क्षेत्र में लूटपाट की.
लेकिन अगर सबसे ताक़तवर समुद्री लुटेरे की बात की जाए तो ब्लैक बियर्ड या किसी अन्य खूंखार लुटेरे का नाम नहीं लिया जा सकता.
क्योंकि दुनिया में सबसे ताक़तवर समुद्री लुटेरा कोई पुरुष नहीं बल्कि एक महिला थी जिसका नाम सुनकर ही दक्षिण चीन सागर में सफर करने वाले कांप जाया करते थे.
इस महिला का नाम था - जेंग ये सो.
कौन थीं जेंग ये सो
जेंग ये सो को समुद्री लुटेरों की दुनिया की सम्राज्ञी कहा जाता है. क़रीब 1775 में चीन के तटीय इलाके ग्वांग्डोंग में पैदा होने वाली जेंग ये सो का असल नाम शी येंग था.
वो एक ऐसे दौर में बड़ी हुईं जब आर्थिक असमानता और अशांति अपने चरम पर थीं. ग्वांग्डोंग में रहने वाले कई परिवार ख़राब आर्थिक हालातों के चलते साल में कुछ समय के लिए प्रतिबंधित चीजों की तस्करी किया करते थे.
इतिहासकारों का मानना है कि शी येंग सिर्फ़ छह साल की उम्र में ही सेक्स वर्कर बन गईं थीं.
उस दौर में झेंग यी एक पाइरेट थे और चिंग और ग्वेन आन साम्राज्यों के ख़िलाफ़ लड़ रहे थे.
वो वियतनाम के सूर्यवंशी राजाओं के वारिसों के समर्थन में लड़ रहे थे और उनके रिश्तेदार झेंग की उस दौर के प्रमुख पाइरेट थे.
पानी पर तैरते वैश्यालय में काम करते हुए शी येंग को अपने ग्राहकों से बेहद अहम जानकारियां मिलीं. लोग उनके साथ वक़्त बिताते हुए अक्सर ऐसे राज़ उगल दिया करते थे जो कभी-कभी उनकी ही मौत का कारण बनते थे.
धीरे-धीरे शी येंग ने ऐसी जानकारियां उन लोगों को बेचना शुरू किया जो उनके बदले में भारी पैसा देने को तैयार थे. इस तरह शी येंग ने कुछ समय में ही भारी दौलत और अपने आसपास के क्षेत्र में प्रभाव कायम किया.
मशहूर लुटेरे से की शादी
अपने एक आक्रमण के दौरान झेंग यी की मुलाक़ात शी येंग से हुई और दोनों को प्यार हो गया.
झेंग यी ने वादा किया कि उनकी जीती हुई आधी संपत्ति पर उसका हक़ होगा. शी येंग को ये सौदा पसंद आया और उन्होंने तुरंत शादी के लिए हां कर दी. शादी के समय उनकी उम्र 26 साल थी.
इसके बाद से ही उन्हें जेंग ये सो कहा जाने लगा क्योंकि इसका अर्थ झेंग की पत्नी होता है.
शादी के एक साल बाद ही झेंग यी के रिश्तेदार झेंग की को ग्वेन साम्राज्य की सेना ने पकड़ लिया. उसे वियतनाम सीमा के पास जियांगपिंग में पकड़ा गया था और वहीं क़त्ल कर दिया गया.
इस मौक़े का फ़ायदा उठाकर झेंग यी ने झेंग की के नेतृत्व में काम कर रहे सभी डाकुओं को अपने साथ मिला लिया और स्वयं उनके नेता बन गए.
झेंग यी और जेंग ये सो ने कुछ समय में ही एक ताक़तवर जोड़े का दर्ज़ा हासिल कर लिया. उन्होंने प्रतिबंधित चीजों की तस्करी करने वालों को अपने नियंत्रण में ले लिया.
झेंग यी चीन के समंदर में सक्रिय सभी लुटेरों को एक झंडे के नीचे लाना चाहते थे ताकि पुर्तगाली, चीनी, ब्रितानी और फ़्रांसीसी सैनिकों का मुक़ाबला किया जा सके.
डाकुओं को एकजुट करने में जेंग ये सो ने अहम भूमिका निभाई. उन्होंने डाकुओं के नेताओं से बातचीत की. देह व्यापार के दौरान के संबंधों ने भी उनकी मदद की.
झेंग और जेंग ये सो के प्रयासों से 1805 में चीन के सागर में सक्रिय सभी लुटेरे एक साथ आ गए. उनकी पहचान छह अलग-अलग रंगों के झंडों से थी.
ये रंग थे- लाल, काला, नीला, सफ़ेद, पीला और बैंगनी.
इन डाकुओं ने समुद्र को अपने-अपने हिस्से में बांट लिया. ये सब झेंग यी के नेतृत्व में लड़ने को तैयार हो गए थे. 19वीं सदी की शुरुआत में झेंग यी एक मज़बूत पाइरेट नेता बन गए, जिनके साथ 70 हज़ार से अधिक पाइरेट और 1200 से अधिक जहाज़ थे. उनकी ताक़त के पीछे जेंग ये सो ही थीं.
झेंग यी ने मछुआरा परिवार के लड़के झांग बाओ साइ को गोद ले लिया था.
लेकिन साल 1807 में झेंग यी की मौत हो गयी जिसके बाद असल मायनों में जेंग ये सो की ताक़त बढ़ना शुरू हुई.
इस दिशा में जेंग ये सो ने सबसे पहले चेंग यी के दो बड़े सरदारों का समर्थन हासिल किया. और अपने दत्तक पुत्र चेंग पाओ को उसके दत्तक पिता चेंग यी की पुरानी स्क्वैड्रन की कमान दिलवाई.
लेकिन बात यहीं नहीं थमी.
जेंग ये सो ने अपनी ताक़त बढ़ाने के लिए अपने ही दत्तक पुत्र चेंग पाओ से शादी कर ली जिनकी उम्र उस समय बीस से तीस बरस के बीच रही होगी.
इसके बाद जेंग ये सो की ताक़त इतनी बढ़ गयी कि उन्होंने अपने प्रभाव के क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए कई नियम-क़ायदे बनवाए जिनका वह सख़्ती से पालन करवाया करती थीं.
कायरों को मौत की सज़ा
इन नियम - कानूनों में डरपोकों को मौत की सज़ा सुनाने का प्रावधान था. यही नहीं, अपने हिस्से से ज़्यादा की 'लूट' की रकम लेने वालों और अनुशासनहीनता दिखाने वालों को भी जान से मारने का प्रावधान था.
यही नहीं, आज्ञा बग़ैर गायब होने पर समुद्री लुटेरों के कान काटे जा सकते थे. और समुद्री लूट के दौरान पकड़ी गयी महिलाओं के साथ शोषण या बलात्कार करने पर मौत की सज़ा देने का प्रावधान था.
बेशुमार दौलत और ताक़त से लैस जेंग ये सो ने कुछ समय बाद अपना ध्यान नमक के व्यापार पर केंद्रित किया. ये उस दौर की बात है जब नमक का व्यापार काफ़ी फायदे का सौदा हुआ करता था.
जेंग ये सो के समुद्री लुटेरों ने नमक लेकर जा रहे जहाज़ों पर बार-बार इतने हमले किए कि एक समय में ग्वांग्डोंग सरकार के 270 में से सिर्फ 4 जहाज़ जेंग ये सो के नियंत्रण से बाहर रह गए.
इसके बाद जेंग ये सो ने अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए पासपोर्ट सिस्टम की शुरुआत की जिसके तहत नमक के व्यापारियों को सुरक्षित रास्ते के लिए एक रकम देनी पड़ती थी.
धीरे-धीरे दक्षिण चीन सागर के इस इलाके से गुज़रने वाले व्यापारिक एवं मछली मारने वाले जहाज़ों समेत हर तरह के जहाज़ों को सुरक्षा शुल्क देने के लिए विवश होना पड़ा.
यही नहीं, उन्होंने इस शुल्क को लेने के लिए टैक्स ऑफ़िस तक बनाए.
ताक़त पर नियंत्रण कैसे रखती थीं
जेंग ये सो अपने प्रतिद्वंदियों को नियंत्रण में रखने के लिए अलग-अलग तरह की रणनीतियों का सहारा लेती थीं.
उनके प्रतिद्वंदी समुद्री लुटेरों को खाने-पीने से लेकर तमाम दूसरे तरह की चीजों के लिए तटवर्ती गांवों पर निर्भर रहना पड़ता था.
जेंग ये सो ने इन गांवों में अपनी जगह मज़बूती से बनाई हुई थी ताकि गांवों से उन्हें किसी तरह की मदद न मिल सके.
ऐसे में जब कोई समुद्री लुटेरा जेंग ये सो को चुनौती देने की कोशिश करता था तो इसके नतीज़े उसके हित में नहीं हुआ करते थे.
ऐसे मौकों पर जिंगल्स का इस्तेमाल किया जाता था जो कि ढाई-तीन मीटर के मस्कट जैसे हथियार हुआ करते थे. इन्हें चलाने में दो - तीन लोग लगा करते थे.
यही नहीं, जेंग ये सो के लोग नुकीले भालों के साथ दुश्मन जहाज़ों की ओर भी तैरा करते थे ताकि जहाज़ों को नुकसान पहुंचाया जा सके.
ब्रिटेन और पुर्तगाल से मांगी मदद
साल 1809 तक जेंग ये सो इतनी ताक़तवर हो गयीं कि उनकी सैन्य और आर्थिक शक्ति ने चीनी सरकार को भी परेशान कर दिया. और समुद्री लुटेरों की समस्या के निदान के लिए चीनी सरकार ने ब्रितानी और पुर्तगाली नौसेनाओं से मदद मांगी.
इसके बाद नौसेनाओं और समुद्री लुटेरों के बीच कई जंगें हुईं जिनमें समुद्री लुटेरे विजयी रहे. लेकिन 1810 तक जेंग ये सो और उनकी टीम ने सरकार के साथ समझौता कर लिया जिसके एवज़ में सरकार उन्हें मोटी पेंशन देने के लिए तैयार हुई.
जेंग ये सो ने इसके बाद क्या किया, इस बारे में ज़्यादा जानकारी उपलब्ध नहीं है. हालांकि, इतना ज़रूर पता है कि चांग पाओ की मौत के बाद वह ग्वांगडोंग वापस चली गयी थीं. और उनकी मौत 69 साल की उम्र में किसी बीमारी से हुई.
(इस लेख को बीबीसी के कार्यक्रम 'आइडियाज़' के एक अंक से लिया गया है.मूल वीडियो देखने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें)
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