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चीनी मीडिया का दावा, मध्यपूर्व में नेटो जैसा संगठन तैयार करने की कोशिश में हैं बाइडन
- Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
- पदनाम, .
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन मध्यपूर्व एशियाई देशों के दौरे पर हैं. लेकिन बाइडन के इस दौरे का असर चीन में भी देखने को मिल रहा है.
चीन के मीडिया ने अमेरिकी राष्ट्रपति के इस दौरे पर तीखी प्रतिक्रिया ज़ाहिर की है. चीनी मीडिया ने बाइडन पर ये आरोप लगाया है कि वो चीन, ईरान और रूस जैसे दैशों को घेरने के लिए 'नेटो का मध्यपूर्व संस्करण' तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं.
बाइडन के मध्यपूर्व एशिया दौरे का पहला पड़ाव इसराइल की राजधानी यरुशलम था. 15 जुलाई को इसराइली कब्ज़े वाले वेस्टबैंक में उनकी मुलाक़ात फलिस्तीनी राष्ट्रपति मोहम्मद अब्बास से हो रही है. बाद में वे खाड़ी सहयोगी परिषद के एक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए वो सऊदी अरब पहुंच रहे हैं.
13 से 16 जुलाई तक चलने वाली बाइडन की इसी यात्रा पर चीनी मीडिया ने कड़ी टिप्पणी की है. चीन के सरकारी चैनल सीसीटीवी (चाइना सेंट्रल टेलीविज़न) ने 9 जुलाई को वाशिंगटन पोस्ट में बाइडन के लिखे एक लेख का हवाला दिया है, जिसे उन्होंने अपनी मध्यपूर्व एशियाई दौरे के ठीक पहले लिखा था. बाइडन ने इस लेख में अपने दौरे को अमेरिकी सुरक्षा और चीन को चुनौती देने के लिहाज़ से महत्वपूर्ण बताया था. सीसीटीवी ने चीन विरोधी रुख को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका की कड़ी आलोचना की है.
चीन के ऑनलाइन समाचार पोर्टल शंघाई ऑब्जर्वर के मुताबिक़ निंग्शिया यूनिवर्सिटी में चीन इंस्टीट्यूट फॉर अरब स्टडीज के निदेशक ली शाओज़ियान ने बाइडन के इस लेख की कड़ी आलोचना की है.
ली शाओज़ियान का मानना है कि अमेरिका वैश्विक महाशक्ति की रेस में चीन को सबसे बड़ी चुनौती मानता है. उसकी नज़रें चीन पर ही टिकी हैं. बाइडन मध्य पूर्व में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के प्रभाव को कम करने के साथ ही अमेरिका की 'इंडो-पैसिफिक रणनीति' को बढ़ावा देना चाहते हैं.
ये कारण भी है कि वो मध्यपूर्व देशों से अपने संबंध बेहतर करना चाहते हैं.
चीन की सरकारी न्यूज़ एजेंसी चाइना न्यूज़ सर्विस ने भी जहां इस बात पर ज़ोर दिया है कि अमेरिका ईरान, रूस और दूसरे अन्य देशों पर लगाम लगाने के लिए मध्यपूर्व में सैन्य गठबंधन तैयार करने की कोशिश में जुटा है. वहीं 'नेटो के मध्यपूर्व संस्करण' की संभावनाओं को ये एजेंसी नकारती है.
'बाइडन प्रशासन मध्य पूर्व देशों के साथ अपने रिश्ते की एक नई शुरुआत करना चाहता है, लेकिन उनकी कई नीतियां ट्रम्प युग जैसी ही हैं. विरासत में मिली ट्रंप की 'अमेरिका फर्स्ट नीति' को कितने मध्यपूर्व देश स्वीकार करेंगे? जवाब साफ़ है.'
सऊदी अरब से 'तेल की भीख' मांगता अमेरिका
इस बीच चीन की ही शेनजेन सैटेलाइट टीवी ने बाइडन के सऊदी अरब दौरे पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि अमेरिका तेल के लिए सऊदी से भीख मांग रहा है.
चीन के सैन्य अख़बार नेशनल डिफेंस जर्नल ने भी बाइडन का मज़ाक उड़ाते हुए लिखा है कि वो ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के बीच अपने स्वाभिमान के साथ समझौता कर मध्य पूर्व से तेल मांगने जा रहे हैं.
नेशनल डिफेंस जर्नल में छपे एक ब्लॉग में कहा गया है कि बाइडेन की यात्रा का मूल उद्देश्य सऊदी अरब को तेल का उत्पादन बढ़ाने की गुज़ारिश करना है, ताकि कीमतों में हो रही वृद्धि को रोका जा सके. लेकिन अमेरिका इसके लिए अभी भी अकेले सऊदी अरब पर निर्भर नहीं रह सकता. विश्व के सभी देशों के संयुक्त प्रयास से ही इस संकट का समाधान हो सकता है.
चाइना डेली ने अपने संपादकीय में टिप्पणी की है कि अगर अमेरिका में तेल संकट नहीं गहराता तो बाइडन मध्यपूर्व दौरे पर नहीं जाते, क्योंकि मध्यपूर्व के मामले अमेरिका की प्राथमिकता नहीं हैं.
बाइडन की यात्रा के परिणामों पर विश्लेषकों ने जताया संदेह
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अंग्रेज़ी संस्करण के मुताबिक़ कुछ विश्लेषकों ने ये संदेह जताया है कि बाइडन की इस यात्रा का कोई खास परिणाम नहीं होने वाला. वहीं मध्यपूर्व के वो क्षेत्रीय मुद्दे जिन पर बाइडन चर्चा करने वाले हैं, उन मुद्दों के निपटारन की भी कोई खास उम्मीद नहीं नज़र आ रही.
इसराइल इंस्टीट्यूट फॉर रीजनल फॉरेन पॉलिसीज के प्रमुख निम्रोद गोरेन ने शिन्हुआ को बताया कि इस यात्रा को इसराइल-सऊदी संबंधों में 'एक क्रमिक प्रक्रिया के हिस्से के रूप में देखा जाएगा' . गज़ा स्थित राजनीतिक विश्लेषक तलाल ओकल ने कहा कि बाइडन इस बात से वाकिफ़ हैं कि क्षेत्र में शांति प्रक्रिया शुरू करने के लिए 'फिलिस्तीनी-इजरायल संघर्ष का मुद्दा' अभी नहीं सुलझने वाला.
सीसीटीवी से बातचीत में एक ईरानी राजनीतिक विश्लेषक ने कहा, 'ईरान के नेतृत्व वाले प्रतिरोध मोर्चे के ख़िलाफ नेटो जैसा गठबंधन स्थापित करने का अमेरिकी प्रयास 'सिर्फ़ एक मजाक प्रतीत होता है. अमेरिका अपने अरब सहयोगियों को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अत्याधिक तेल की आपूर्ति कर सके'.
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