काबुल डायरी: अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के राज का आँखों देखा हाल

- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, काबुल से
चौदह अगस्त की रात जब हम काबुल के अपने होटल के कमरे में काम कर रहे थे तभी बाहर से गोलियाँ चलने की आवाज़ें आने लगीं, जब हमने जानना चाहा कि बाहर क्या हो रहा है तो हमें बताया गया कि तालिबान अफ़गानिस्तान पर अपने क़ब्ज़े का एक साल पूरा होने की खुशी में हवा में गोलियाँ चला रहे हैं.
हमें सलाह दी गई कि हम कमरे के अंदर ही रहें, बाहर न जाएं.
एक साल पहले जब तालिबान काबुल के दरवाज़े पर खड़े थे, तो आपको वो तस्वीरें याद होंगी कि कैसे लोग एयरपोर्ट की तरफ़ भाग रहे थे और यहाँ से बाहर निकलने की कोशिश कर रहे थे. हवाईअड्डे पर धमाके में कितने ही लोगों की मौत हो गई थी. आपको ये भी याद होगा कि कैसे लोग हवाई जहाज़ के पहिए से लटक कर देश से निकल जाना चाहते थे, उन्हें ऊँचाई से गिरकर दम तोड़ते हुए लोगों ने देखा था.
तालिबान ने सत्ता में आने के बाद वादा किया था कि वे लड़कियों की शिक्षा का पहले की तरह विरोध नहीं करेंगे, औरतों का सम्मान होगा वगैरह-वगैरह. लेकिन हालात पर ग़ौर करने पर महसूस होता है कि वह महज़ एक बयान था, हक़ीक़त बहुत नहीं बदली है.
तालिबान के सत्ता में आने के एक साल बाद लोग शांति की उम्मीद कर रहे हैं, और बुरे आर्थिक हालात, बेरोज़गारी, भोजन की कमी और कितनी ही परेशानियों से जूझ रहे हैं.

'हम डिप्रेस्ड हैं'
काबुल के शहरे नौ इलाक़े हमें एक 19 साल का लड़का मिला जो नौकरी की तलाश में था और उसे नौकरी नहीं मिल रही थी.
एक अन्य व्यक्ति का दावा था कि तालिबान के आने या उसके पहले के हालात में कोई फ़र्क़ नहीं आया है.
एक महिला ने मुझसे बताया कि अफ़गानिस्तान में "पढ़ाई पर रुकावटें हैं. हम दफ़्तरों में काम नहीं कर सकते. हाल ही में आरियाना विमानों पर महिलाओं के काम करने पर पाबंदी लगा दी गई. हम डिप्रेस्ड हैं. सुरक्षा थोड़ी बेहतर है, लेकिन महिलाओं के लिए नौकरियों के मौके नहीं हैं. हमारी आर्थिक स्थिति शून्य है. ज़्यादातर परिवारों के घर कमाने वाला नहीं है. विधवा महिलाएँ काम नहीं कर सकतीं."
एक यूनिवर्सिटी छात्र ने हमसे कहा, "युवाओं के लिए ज़िंदगी बहुत मुश्किल है क्योंकि विश्वविद्यालयों में तालिबान का व्यवहार अच्छा नहीं है. जैसे कि एक युवा विश्वविद्यालय गया और उसने कान में इयरफ़ोन लगाया तो उसे झापड़ मार दिया जाता है कि आप ऐसा क्यों कर रहे हैं. ये अच्छा नहीं है."
हमें एक दूसरे व्यक्ति ने बताया कि लोग भीख माँगने पर मजबूर हैं.

तालिबान का डर
काबुल में लोग कई बार तालिबान के डर से कैमरे पर बात करने से कतराते हैं और कैमरा ऑफ़ होने के बाद फिर खुलकर बातें करते हैं.
लोग पूछ रहे हैं कि जब अफ़गानिस्तान में युद्ध खत्म हो गया है, उसके बावजूद शांति क्यों नहीं है.
पंद्रह अगस्त के दिन यहाँ सड़कों पर हर जगह तालिबान के सफ़ेद झंडे नज़र आ रहे हैं. यहां मसूद स्क्वेयर पर कई तालिबान या तालिबान समर्थक इकट्ठा हुए हैं और खुशियाँ मना रहे हैं.
पिछले कुछ घंटों में मसूद स्क्वेयर पर और तालिबान इकट्ठा हुए हैं और वहाँ वो अपनी जीत की खुशी में बिना संगीत के गाना गा रहे हैं और तालिबान के झंडे फहरा रहे हैं.
थोड़ी-थोड़ी दूर पर चेकप्वाइंट पर कहीं-कहीं तो सख़्त तलाशी हो रही है, तो कहीं-कहीं गाड़ियों को आगे जाने दिया जाता है.

सोशल मीडिया पर ट्रेंड
जिस तरह बीते साल भर तालिबान के विरोधी इस्लामिक स्टेट के धड़े ने तालिबान पर हमले किए हैं, उसे देखते हुए आशंका बढ़ गई है कि 15 अगस्त के दिन काबुल या शहर के बाहर बड़ा हमला हो सकता है.
ये तनाव आप सड़कों पर पहरा दे रहे हथियारबंद तालिबान के चेहरों पर देख सकते हैं.
सुबह रिपोर्टें मिली थीं कि तालिबान मोटर साइकिलों पर चक्कर लगा रहे हैं. यहाँ चिकन बाज़ार में दुकानों को बंद करवा दिया गया है और तालिबान स्थानीय लोगों के साथ बहुत आक्रामक तरीक़े से पेश आ रहे हैं और उनसे कह रहे हैं कि वो जगह को छोड़ दें.
सोशल मीडिया पर जहां #EndTalibanOccupation ट्रेंड कर रहा है तो यहां काबुल की सड़कों पर हमें गाड़ियां, मोटरसाइकिलें दिखीं जिन पर बैठे तालिबान या तालिबान समर्थक नारे लगा रहे थे.
उनके हाथों में हथियार, या चेहरे पर वही गॉगल्स थे जो अमेरिकी सैनिक देश से निकलते वक़्त छोड़ गए थे.

अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई
एक व्यक्ति से मैंने पूछा कि ये देश किधर जा रहा है तो बहुत सीधा जवाब नहीं मिला, उन्होंने कहा, "जहाँ अल्लाह ले जाए."
अफ़ग़ानिस्तान में लड़ाई शायद ख़त्म हो गई है, लेकिन शांति नहीं है.
यहाँ आपको विदेशी सैनिक नज़र नहीं आएँगे, लेकिन उनकी जगह, उनकी गाड़ियां, उनका साज़ो-सामान ज़रूर नज़र आते हैं, जो अब तालिबान की संपत्ति बन चुके हैं.
अर्थव्यवस्था की बुरी हालत है. अंतरराष्ट्रीय फ़ंडिंग बंद है. पिछले कुछ महीनों में सूखे और भूकंप ने परिवारों के लिए भुखमरी जैसे हालात पैदा कर दिए हैं.
लोग अपने घर का सामान बेच रहे हैं. कालीन फ़्रिज, जो कुछ वो बेच पाएँ, बेच रहे हैं, ताकि रोटी ख़रीद सकें.

हालात और ख़राब होने शुरू हो जाएँगे...
परसों हमने देखा कि महिलाओं के विरोध प्रदर्शन पर किस तरह तालिबान ने हवा में फ़ायरिंग की, जब वो शिक्षा और काम करने के अधिकार की माँग कर रही थीं.
यहां महिलाएँ सिर्फ़ कुछ सेक्टरों में काम कर सकती हैं और लड़कियों की सेकेंडरी स्कूलों में पढ़ाई बंद है. इस वजह से महिलाएं और आम लोग भीख मांगने को मजबूर हैं क्योंकि घर में कोई कमाने वाला नहीं है.
कुछ हफ्तों में यहां ठंड बढ़नी शुरू हो जाएगी जिससे डर है हालात और ख़राब होने शुरू हो जाएँगे.
अफ़ग़ानिस्तान में भीषण सर्दी पड़ती है, रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से तेल-गैस की ऊँची क़ीमतों को देखते हुए लगता है कि पहले से बदहाल लोगों के लिए अपने घरों को कड़ाके की ठंड से गर्म रख पाना मुश्किल हो जाएगा.
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