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पाकिस्तान में 30 रुपए महंगा हुआ पेट्रोल, इमरान ख़ान ने फिर बांधे भारत की तारीफ़ों के पुल
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने देश में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में क़रीब 30 रुपए की बढ़ोतरी किए जाने पर अपनी सरकार पर क़रारा प्रहार किया है.
उन्होंने गुरुवार की देर रात सोशल मीडिया साइट ट्विटर पर किए दो ट्वीट में पाकिस्तान की शहबाज़ शरीफ़ सरकार को आयातित सरकार कहकर निशाना साधा है.
इमरान ख़ान ने मौजूदा सरकार पर आरोप लगाया है कि पाकिस्तान 'विदेशी मालिकों के सामने आयातित सरकार की ग़ुलामी की क़ीमत अब चुकाने लगा है.
उनके अनुसार, 'इसके चलते पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों में अब 20% या 30 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हो गई, जो देश के इतिहास में एक बार में की गई सबसे तेज़ बढ़ोतरी है.'
इमरान ख़ान ने शरीफ़ सरकार को अक्षम और असंवेदनशील बताते हुए दावा किया कि सरकार ने 30% सस्ता तेल के लिए रूस के साथ किए हमारे क़रार को आगे नहीं बढ़ाया.
उन्होंने दूसरे ट्ववीट में लिखा, 'इसके विपरीत अमेरिका का सामरिक साझेदार भारत रूस से सस्ता तेल ख़रीदकर, ईंधन की क़ीमतें 25 रुपए कम करने में सफल रहा है. अब हमारा देश ठगों के गुट के चलते महंगाई की एक और डोज़ से जूझेगा.'
तेल महंगा होने की वजह
पाकिस्तान के वित्त मंत्री मिफ़्ताह इस्माइल ने गुरुवार को एक संवाददाता सम्मेलन में पेट्रोलियम उत्पादों की क़ीमतों में क़रीब 30 फ़ीसदी की बढ़ोत्तरी का एलान किया. बढ़ी हुई क़ीमतें गुरुवार आधी रात से लागू हो गई हैं.
एलान के अनुसार, अब देश में पेट्रोल 180 रुपए (पाकिस्तानी मुद्रा), डीज़ल 174 रुपए, केरोसिन 156 रुपए और लाइट डीज़ल 148 रुपए बढ़कर हो गया है. उनका यह एलान आईएमएफ़ यानी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ क़तर में सरकार की बातचीत के असफल हो जाने के बाद हुआ है.
आईएमएफ़ की मदद
पाकिस्तान सरकार की कोशिश थी कि देश की बदहाल अर्थव्यवस्था को सुधारने के लिए उसे आईएमएफ से मदद मिल जाए. लेकिन आईएमएफ ने सरकार से कहा है कि उन्हें कोई कर्ज़ लेने के पहले देश में ठोस नीतिगत फ़ैसले उठाने होंगे. उनमें ईंधन की क़ीमतों पर दी जा रही सब्सिडी को ख़त्म करना भी शामिल है.
वित्त मंत्री इस्माइल ने गुरुवार को कहा कि आईएमएफ ने पाकिस्तान से कहा है कि पेट्रोलियम उत्पादों पर दी जा रही सब्सिडी को ख़त्म करना होगा, साथ ही अन्य ठोस नीतिगत क़दम भी उठाने होंगे. उनके अनुसार, ऐसे हालात में ईंधन की क़ीमतों का बोझ सरकार पर डालना ज़रूरी हो गया है.
पिछली सरकार ने फरवरी अंत में नए वित्त वर्ष के बजट तक पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों के बढाने पर रोक लगाने का एलान किया था. उस फ़ैसले को नई गठबंधन सरकार ने भी अभी तक बरक़रार रखा था.
हालांकि क़ीमतें न बढ़ाने के फ़ैसले से सरकार को ईंधन पर अरबों रुपए की सब्सिडी देनी पड़ रही थी, जिसका देश के खज़ाने पर नकारात्मक असर पड़ रहा था.
रूस से सस्ता तेल दिलाने का दावा कितना सही
इमरान ख़ान का यह दावा कि वे पाकिस्तान को रूस से सस्ता तेल दिलाने की कोशिश कर रहे थे. पाकिस्तान में पिछले कुछ हफ़्तों से ये विवाद चर्चा में रहा है.
देश के मौजूदा ऊर्जा मंत्री ख़ुर्रम दस्तगीर ख़ान का दावा है कि इमरान ख़ान सरकार ने रूस के साथ रियायती दरों पर कच्चा तेल ख़रीदने के लिए कोई बातचीत नहीं की थी.
लेकिन इमरान ख़ान सरकार में ऊर्जा मंत्री रहे हम्माद अज़हर ने ट्विटर पर रूस के ऊर्जा मंत्री को लिखा गया एक सरकारी पत्र साझा किया था, जिसमें रूस से कच्चे तेल, डीज़ल और पेट्रोल को रियायती दरों पर आयात करने का प्रस्ताव था.
हालांकि सरकार का दावा है कि रूस की ओर से ऐसी किसी प्रगति का कोई संकेत नहीं मिला, जिसमें वो पाकिस्तान को रियायती दरों पर तेल देने जा रहा था.
बीबीसी से बात करते हुए, हम्माद अज़हर ने कहा कि यह पत्र रूस के अनुरोध पर लिखा गया था, क्योंकि रूस 30 प्रतिशत कम दरों पर तेल की सप्लाई करने के लिए ख़रीदारों की तलाश में है. उनके अनुसार, पाकिस्तान तेल उत्पादों का एक प्रमुख आयातक है, इसलिए रूस पाकिस्तान को भी तेल बेचना चाहता है.
हम्माद अज़हर के सरकारी पत्र के बारे में पाकिस्तान के ऊर्जा मंत्रालय ने बीबीसी से बात करते हुए पुष्टि की कि जब पूर्व ऊर्जा मंत्री ने आधिकारिक पत्र जारी कर दिया है, तो इसका मतलब है कि पाकिस्तान की तरफ़ से ऐसा पत्र लिखा गया है.
वहीं इस बारे में बीबीसी से बात करते हुए आर्थिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार ख़ुर्रम हुसैन ने कहा कि भारत रूस से तेल आयात करता है, लेकिन यह भारत की ऊर्जा ज़रूरतों का 10 से 12 प्रतिशत है और यह लंबे समय से रूस से आयात किया जा रहा है.
इमरान ख़ान सरकार पर हैं हमलावर
प्रधानमंत्री के पद से हटाए जाने के बाद से ही इमरान ख़ान नई सरकार पर हमलावर हैं. पहले तो पद पर रहते हुए ही उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें पद से हटाए जाने की साज़िशें अमेरिका और अन्य देशों से हो रही हैं.
नई सरकार के शपथ लेते ही इमरान ख़ान उसे 'आयातित' बताते आए हैं और अब पेट्रोलियम उत्पादों के महंगा होते ही उसे असंवेदनशील और 'ठगों का गुट' कहने लगे हैं.
सरकार से मंज़ूरी नहीं मिलने के बावजूद इमरान ख़ान इन दिनों अपने समर्थकों के साथ इस्लामाबाद पहुंचने पर आमादा हैं. उनके 'लॉन्ग मार्च' अभियान के चलते पाकिस्तान में राजनीतिक तनाव बढ़ गया है.
हालांकि इमरान ख़ान अपने इस मार्च से क्या हासिल करना चाहते हैं और इसके लिए वो किसी भी हद तक जाने के लिए क्यों तैयार हैं, इस पर जानकारों की राय बंटी हुई है.
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