चीन की सीपीईसी परियोजना में हो रही देरी से क्यों बेचैन है पाकिस्तान?

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बीते माह पाकिस्तान के कराची शहर में तीन चीनी नागरिकों की हत्या के बाद से दोनों देशों के रिश्ते पहले की तरह नहीं रहे हैं. पाकिस्तान के सीनेट डिफ़ेंस कमेटी ने माना है कि इस हमले के बाद चीन का भरोसा हिल गया है.
डॉन न्यूज़ की ख़बर के अनुसार डिफ़ेंस कमिटी के चेयरमैन सीनेटर मुशाहिद हुसैन ने कहा, "अपने नागरिकों और परियोजनाओं की रक्षा करने की पाकिस्तान की क्षमता पर से चीन का विश्वास गंभीर रूप से हिल गया है."
सीनेटर मुशाहिद उस प्रतिनिधिमंडल का भी हिस्सा थे जो बीते सप्ताह चीनी दूतावास पहुंचा था. इस प्रतिनिधिमंडल ने कराची यूनिवर्सिटी परिसर में बीते माह हुए आत्मघाती हमले में चीनी नागरिकों की जान जाने पर शोक ज़ाहिर किया था. मुशाहिद चीनी पक्ष के मन में उठते सवालों के बारे में चर्चा कर रहे थे.
कराची यूनिवर्सिटी में हुआ हमला बीते एक साल के अंदर पाकिस्तान में चीनी नागरिकों पर तीसरा अटैक था.
मुशाहिद ने कहा, "इसने (हमले) ने चीन के मन में गंभीर चिंता और आक्रोश पैदा किया है, जिसे समझा जा सकता है. इसके अलावा, हमलों का पैटर्न एक जैसा है और ये स्पष्ट हो गया है कि पाकिस्तान की ओर से सुरक्षा के वादे महज़ शब्द भर हैं, जो ज़मीनी स्तर पर हो रही जवाबी कार्रवाई से ज़रा भी मेल नहीं खाते हैं."
सुरक्षा इंतज़ामों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे सुरक्षा एजेंसियां सो रही हैं. उन्होंने कहा, "अगर इस तरह के हमले जारी रहते हैं, तो न सिर्फ़ चीनी बल्कि दूसरे विदेशी निवेशक भी पाकिस्तान में अपनी मौजूदगी पर विचार करने के लिए मजबूर होंगे."
कराची हमले के बाद सोशल मीडिया पर ये भी अफ़वाहें थीं कि चीनी मज़दूर बड़ी संख्या में पाकिस्तान छोड़कर जा रहे हैं. हालांकि, डॉन न्यूज़ ने चीनी सूत्रों के हवाले से इन दावों को ख़ारिज किया है.

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हमले के बाद चीन की प्रतिक्रिया क्या थी?
बीजिंग में प्रेस कॉन्फ़्रेंस के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिजियान झाओ ने आशा व्यक्त करते हुए कहा, "आतंकी ताकतों की दोनों देशों के पारस्परिक भरोसे और सहयोग को कमज़ोर करने की साजिश सफल नहीं होगी."
चीन के सरकार समर्थित अख़बार ग्लोबल टाइम्स ने कराची हमले के बाद प्रकाशित अपनी संपादकीय में कहा है कि "पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने चीनी नागरिकों की सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की है लेकिन समस्या के मूल कारणों का निदान किए बिना हमेशा चूक होती रहेगी."
फंड जारी करने से बच रहा चीन
समाचार एजेंसी एएनआई ने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से दावा किया है कि सीपीईसी परियोजनाओं में हो रही देरी की वजह से पाकिस्तान और चीन दोनों ही देशों में हताशा बढ़ रही है.
ख़बर के अनुसार सीपीईसी के तहत बड़े प्रोजेक्ट्स को फंड मिलने में दिक्कत हो रही है. वहीं, पाकिस्तान सरकार सीपीईसी अथॉरिटी को भी ख़त्म कर दिया है, जिसका गठन बिना रुकावट तेज़ी से विकास के लक्ष्य को हासिल करने के लिए किया गया था.
ख़बर के अनुसार चीन वादे के मुताबिक बुनियादी ढांचे से जुड़ी परियोजनाओं के लिए फंड जारी करने में आनाकानी कर रहा है और चीनी कंपनियों ने भी सीपीईसी परियोजनाओं के लिए बिजली उत्पादन बंद कर दिया है. ये कंपनियां बकाए के भुगतान की मांग कर रही हैं.

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सीपीईसी कर्ज़ पर ऊंची ब्याज़ दर, कमज़ोर प्रोजेक्ट्स और सीपीईसी बुनियादी ढांचे पर हमले कुछ ऐसे बड़े मुद्दे हैं, जिसकी वजह से इस परियोजना के पूरे होने का सपना साकार नहीं हो रहा है.
दूसरी ओर पाकिस्तान भी अपने राजस्व का बड़ा हिस्सा सीपीईसी परियोजनाओं के कर्ज़ चुकाने में खर्च कर रहा है. हालांकि, इसके बावजूद ये परियोजनाएं या तो लंबित हैं या फिर विफल रही हैं. चीन की ओर से कई बड़े प्रोजेक्ट्स के आखिरी चरण में फंड रोके जाने से भी पाकिस्तान पर दबाव बढ़ा है.
ख़बर के अनुसार चीनी कंपनियों ने भुगतान न होने की वजह से बिजली उत्पादन घटाने का फैसला लिया है. रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान का मौजूदा आर्थिक घाटा ही 13.2 अरब डॉलर तक पहुंच गया है और ये मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती 9 महीनों में बढ़कर सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी का 5 से 6 फ़ीसदी तक जा सकता है.
बीते माह हुआ था कराची हमला
26 अप्रैल को कराची यूनिवर्सिटी के कन्फ़्यूशियस सेंटर के बाहर आत्मघाती बम धमाके को अंजाम दिया गया. इसमें तीन चीनी शिक्षकों की मौत हुई थी.
इस हमले को उस वक़्त अंजाम दिया गया जब शिक्षकों को लेकर जा रही बस कन्फ़्यूशियस सेंटर की ओर मुड़ रही थी.
इस धमाके में सेंटर के नवनियुक्त निदेशक एवं दो शिक्षकों की मौत हो गई. इसके साथ ही वैन के पाकिस्तानी ड्राइवर की भी विस्फोट में मौत हो गई.

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शारी बलोच उर्फ़ बरमश को बलोच लिबरेशन आर्मी की आत्मघाती हमलावर बताया गया. पाकिस्तान के अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी की मजीद ब्रिगेड ने इस हमले की ज़िम्मेदारी ली थी.
केवल तीन परियोजनाएं ही पूरी हुईं
पाकिस्तान के अख़बार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने सीपीईसी अधिकारियों के हवाले से दावा किया है कि ग्वादर पोर्ट पर पाकिस्तान ने अभी तक सिर्फ़ तीन परियोजनाओं को ही पूरा किया है, जिसकी लागत 30 करोड़ डॉलर से अधिक है. वहीं, 2 अरब डॉलर के मूल्य वाले दर्जन भर से अधिक योजनाएं अभी भी लंबित पड़ी हैं. इनमें पानी की आपूर्ति और बिजली से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं.
ख़बर के अनुसार सीपीईसी अथॉरिटी ने बीते महीने ही पाकिस्तान की नई सरकार को स्टेटस रिपोर्ट सौंपी है.
अब तक केवल तीन परियोजनाओं को ही सीपीईसी अथॉरिटी ने पूरा माना है. इनमें 40 लाख डॉलर की लागत वाला ग्वादर स्मार्ट पोर्ट सिटी मास्टर प्लान भी शामिल है, जिसे अलग से परियोजना नहीं माना जाता है.
ख़बर में ये भी कहा गया है कि यहां बिजली की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए ईरान से बिजली आयात की जा रही है. हैरानी की बात ये है कि इस परियोजना को साल 2017 तक पूरा हो जाना था.
क्या है सीपीईसी परियोजना?
चीन पाकिस्तान में 62 अरब डॉलर का निवेश करके एक आर्थिक गलियारा तैयार कर रहा है जिसे अंग्रेज़ी में चाइना-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरिडोर कहा जाता है.
ये आर्थिक गलियारा चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव का एक अहम अंग है. इसकी शुरुआत साल 2013 में हुई थी. लेकिन पाकिस्तान की दिनोंदिन बिगड़ती माली हालत की वजह से इसके तहत आने वाले कई बड़े प्रोजेक्ट सालों तक शुरू नहीं हुए.

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इसके तहत चीन दशकों से पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में पड़ने वाले ग्वादर बंदरगाह को विकसित करने की कोशिश कर रहा है.
बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, तमाम विकासशील परियोजनाओं के बावजूद ग्वादर के रहने वाले पीने के पानी की बूँद-बूँद को तरस रहे हैं. इसलिए भी पाकिस्तान में चीन की इस परियोजना का विरोध होता है.
पाकिस्तान में चीनी नागरिक कब-कब निशाना बनाए गए
26 अप्रैल, 2022 को कराची आत्मघाती बम धमाके में तीन चीनी नागरिकों की मौत
14 जुलाई, 2021 को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में बम धमाके में दस चीनी नागरिकों की मौत
14 जुलाई, 2021 को ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में बम धमाके में 26 अन्य चीनी नागरिक घायल हुए
28 जुलाई, 2021 में कराची में चीनी नागरिक की गाड़ी पर गोलियां बरसाई गईं
11 मई, 2019 को ग्वादर के पांच सितारा होटल पर चरमपंथियों का हमला हुआ जिसमें चीनी लोग ठहरे हुए थे
23 नवंबर, 2018 में चीनी वाणिज्य दूतावास पर हमला, चार लोगों की मौत
11 अगस्त, 2018 में दालबंदीन, बलुचिस्तान में हुए आत्मघाती में तीन चीनी इंजीनियर घायल हुए
फरवरी - 2018 में कराची में दो चीनी नागरिकों पर गोलियां चलाई गयीं, एक चीनी नागरिक की सिर पर गोली मारकर हत्या
मई - 2017 में क्वेटा से अगवा करने के बाद चीनी दंपति की हत्या
जुलाई - 2007 में पेशावर में तीन चीनी नागरिकों की हत्या
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