फ्रांस राष्ट्रपति चुनाव: इमैनुएल मैक्रों जीते पहला राउंड, कौन है टक्कर में?

मैक्रों और ले मरीन

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फ्रांस में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है जिसमें मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का सामना दक्षिणपंथी नेता मरिन ले पेन से है.

राष्ट्रपति पद के चुनाव के तहत हुई पहले राउंड की वोटिंग में मैक्रों ने बाज़ी मारी है. और दूसरे नंबर पर दक्षिणपंथी पार्टी नेशनल फ्रंट की नेता मरिन ले पेन रही हैं.

इस राउंड में तीसरे नंबर पर लंबे समय से आक्रामक समाजवादी की भूमिका निभा रहे ला फ़्रांस इनसोमाइज़ पार्टी के नेता शां लू मेलेनकॉन रहे हैं.

किसे मिले कितने वोट?

अब तक हुए पहले चरण के मतदान में एन मार्श पार्टी के उम्मीदवार और मौजूदा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जीत दर्ज की है. लेकिन ओपिनियन पोल्स के मुताबिक़, आगामी 24 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के चुनाव में मामला क़रीबी हो सकता है.

इस चुनाव में उनके सामने धुर दक्षिणपंथी नेता मरिन ले पेन हैं जिन्हें पहले राउंड के चुनाव में कुल 23.15 फीसद वोट मिले हैं. वहीं, इस राउंड में जीत दर्ज करने वाले मैक्रों को 27.84 फीसद वोट मिले हैं. इस राउंड में शां लू मेलेनकॉन को 21.95 फीसद वोट मिले हैं.

नतीजे आने के बाद मेलेनकॉन ने अपने समर्थकों को चेतावनी देते हुए कहा है कि मेरिन ले पेन को एक भी वोट नहीं जाना चाहिए.

हालांकि, उन्होंने स्पष्ट रूप से राष्ट्रपति मैक्रों का समर्थन करने का आह्वान भी नहीं किया.

मरिन ले पेन

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ले पेन का सामना कैसे कर रहे हैं मैक्रों?

इस जीत के बाद मैक्रों ने ले पेन की पार्टी नेशनल फ्रंट के गढ़ माने जाने वाले क्षेत्र डेनीन का दौरा किया जिसे फ्रांस के आर्थिक रूप से सबसे कमजोर इलाकों में गिना जाता है.

चुनाव के इस माहौल में जहां अब तक इमैनुएल मैक्रों रूस-यूक्रेन युद्ध पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे थे.

वहीं, ले पेन और उनकी पार्टी फ्रांस में बढ़ती महंगाई के मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचने की कोशिश कर रही थी.

इसे ध्यान में रखते हुए मैक्रों ने डेनीन, कार्विन और लेंस आदि इलाकों का दौरा किया जहां नैशनल फ्रंट के उम्मीदवारों ने अच्छा प्रदर्शन किया है.

फ्रांस सरकार के एक मंत्री क्लेमेंट बियूने ने कहा है कि ये वो इलाका है जिसने दशकों तक आर्थिक नुकसान झेला है. और इन इलाकों में नेशनल फ्रंट को अच्छा समर्थन मिल रहा है.

इसी बात को ध्यान में रखते हुए मैक्रों इन इलाकों में पहुंचे थे ताकि वे लोगों के बीच ये बता सकें कि उनकी सरकार ने उद्योगों को पुनर्जीवित करने के साथ-साथ नई नौकरियां पैदा करने के लिए कितने कदम उठाए हैं.

मैक्रों के भाषण से ये स्पष्ट हो गया है कि वह आने वाले दिनों में ले पेन पर रूस के साथ क़रीबी रिश्तों को लेकर हमला बोलेंगे.

हालांकि, ले पेन पहले ही यूक्रेन पर रूस की कार्रवाई की निंदा कर चुकी हैं. लेकिन साल 2017 में हुए चुनाव से पहले उन्होंने पुतिन से मुलाक़ात की थी और उनकी पार्टी ने रूस से कर्ज लिया था.

राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों

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ले पेन ने किया टैक्स घटाने का वादा

ले पेन ने वादा किया है कि वह टैक्स में कमी लाएंगी और 30 साल से कम उम्र के लोगों के लिए आयकर ख़त्म कर देंगी.

उनके चुनाव प्रचार में राष्ट्रवाद पर कम ध्यान केंद्रित किया गया है लेकिन वह ये चाहती हैं कि इमिग्रेशन के मुद्दे पर जनमत संग्रह किया जाए, यूरोपीय संघ में आमूलचूल परिवर्तन लाया जाए और सार्वजनिक इलाकों में हिजाब पहनने पर पाबंदी लगाई जाए.

मरिन ले पेन

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कौन कितना लोकप्रिय

बता दें फ्रांस में 18-24 साल की उम्र वर्ग वाले चार में से एक मतदाता मैक्रों का समर्थन करते हैं.

वहीं, मैक्रों की लोकप्रियता सबसे ज़्यादा 65 वर्ष से ज़्यादा उम्र वाले लोगों के बीच में है.

अगर ले पेन की बात करें तो वह सबसे ज़्यादा लोकप्रिय 35 से 64 उम्रवर्ग वाले मतदाताओं के बीच हैं.

ओपिनियन पोल के मुताबिक़, इस चुनाव में मैक्रों की जीत की गुंजाइश 51 फीसद है. वहीं, मरिन ले पेन के जीतने की गुंजाइश 49 फीसद है.

फ्रांसीसी अख़बार में छपी ख़बर

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कैसे होता है राष्ट्रपति पद का चुनाव

फ्रांस में राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया दूसरे देशों से कुछ अलग है.

जनता के चुने हुए प्रतिनिधि पहले राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों का चुनाव करते हैं. इसके बाद मतदान होता है.

पहले चरण में यदि किसी उम्मीदवार को 50 फीसदी या उससे ज्यादा मत नहीं मिलते तो दूसरे चरण का मतदान होता है.

फ्रांस में पहले ऐसा कभी नहीं हुआ कि पहले चरण में किसी उम्मीदवार को 50 प्रतिशत मत मिले हों.

दूसरे चरण में पहले चरण में अव्वल रहने वाले दो उम्मीदवारों के बीच मुक़ाबला होता है.

जीतने वाला उम्मीदवार एलसी पैलेस यानी फ्रांस के राष्ट्रपति भवन में शपथ लेता है.

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