इमरान ख़ान को पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, डिप्टी स्पीकर का फ़ैसला असंवैधानिक, नेशनल असेंबली बहाल

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस उमर अता बांदियाल

इमेज स्रोत, Pakistan SC

इमेज कैप्शन, पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस उमर अता बांदियाल

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर क़ासिम सूरी के फ़ैसले को असंवैधानिक क़रार दे दिया है.

अदालत ने नेशनल असेंबली को भी बहाल कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट का ये फ़ैसला इमरान ख़ान सरकार के लिए बड़ा झटका है.

छोड़िए YouTube पोस्ट
Google YouTube सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में Google YouTube से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले Google YouTube cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट YouTube समाप्त

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फ़ैसले में ये भी कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान राष्ट्रपति को नेशनल असेंबली को भंग करने की सलाह नहीं दे सकते थे.

सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को 9 अप्रैल, शनिवार को, असेंबली का सत्र बुलाने का आदेश भी दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि असेंबली में अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग कराई जाए.

कड़ी सुरक्षा में फ़ैसला

इससे पहले इस फ़ैसले के मद्देनज़र सुप्रीम कोर्ट की सुरक्षा कड़ी कर दी गई थी. अदालत के बाहर दंगारोधी बल भी तैनात किए गए हैं.

सुप्रीम कोर्ट के चीफ़ जस्टिस उमर अता बांदियाल की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय बैंच ने ये फ़ैसला सुनाया है.

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के कोर्ट रूम नंबर एक में ये फ़ैसला सुनाया गया.

बैंच में चीफ़ जस्टिस के अलावा जस्टिस इजाज़ुल अहसान, जस्टिस मज़रह आलम मियांखेल, जस्टिस मुनीब अख़्तर और जस्टिस जमाल ख़ान मंडोखेल शामिल थे.

पांचों जजों की बैंच ने एकमत से ये फ़ैसला सुनाया गया है.

सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला इमरान ख़ान के लिए बड़ा झटका है

इमेज स्रोत, EPA

इमेज कैप्शन, सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला इमरान ख़ान के लिए बड़ा झटका है

इससे पहले अदालत में सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के चीफ़ जस्टिस ने कहा था कि डिप्टी स्पीकर क़ासिम ख़ान सूरी के अविश्वास प्रस्ताव को रद्द करने के फ़ैसले में ख़ामियां हैं.

अपना फ़ैसला सुरक्षित रखते हुए अदालत ने कहा था कि 'वास्तविक सवाल ये है कि आगे क्या होगा.' अदालत ने ये भी कहा था कि "हमें राष्ट्र हित का ध्यान रखना है."

अदालत के फ़ैसले से पहले विपक्ष के नेता शहबाज़ शरीफ़ ने अदालत से नेशनल असेंबली को बहाल करने की अपील की थी.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने डिप्टी स्पीकर के अविश्वास प्रस्ताव को खारिज करने और फिर नेशनल असेंबली को भंग करने के फ़ैसले पर अपना आदेश सुरक्षित कर लिया था.

चुनाव आयुक्त को तलब किया

सुप्रीम कोर्ट ने फ़ैसले सुनाने से पहले अदालत ने पाकिस्तान के मुख्य चुनाव आयुक्त को तलब किया. रिपोर्टों के मुताबिक अदालत के समक्ष चुनाव आयोग ने कहा कि वो तीन महीनों के भीतर चुनाव कराने के लिए तैयार हैं.

फ़ैसले में खामी

मामले की सुनवाई के दौरान पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने इमरान ख़ान सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर डिप्टी स्पीकर के वोटिंग नहीं कराने पर कहा है कि इस फ़ैसले में ख़ामी है.

पाकिस्तान सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश उमर अता बांदियाल ने कहा, ''एक बात साफ़ है कि आदेश सही नहीं है. अगला क़दम क्या होगा?"

लोकतंत्र सबसे बेहतरीन बदला हैः बिलावल भुट्टो

पूर्व प्रधानमंत्री बेनेज़री भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो ने अदालत के फ़ैसले के बाद ट्वीट करते हुए कहा कि लोकतंत्र सबसे बेहतरी बदला है.

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, "लोकतंत्र सबसे बेहतरीन बदला है, जिया भुट्टो, जिया अवाम, पाकिस्तान ज़िंदाबाद"

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

वहीं अदालत के फ़ैसले पर टिप्पणी करते हुए विपक्ष के नेता मौलाना फ़ज़लुर्रहमान ने कहा, "ये अवाम की जीत है, पिसी हुई क़ौम की जीत है, अदालत ने क़ौम की उम्मीदों पर पूरा उतरते हुए संतोषजनक फ़ैसला दिया है. कल हम अब जुमे की नमाज़ के दौरान दो रक़ात शुक्राने की नमाज़ पढ़ेंगे और पाकिस्तान की बेहतरी के लिए दुआएँ करेंगे."

डिप्टी स्पीकर ने अविश्वास प्रस्ताव खारिज किया था

पाकिस्तान में बीते रविवार (3 अप्रैल, 2022) को प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होनी थी लेकिन संसद के डिप्टी स्पीकर ने वोटिंग न कराकर इसे असंवैधानिक क़रार देते हुए रद्द कर दिया.

उन्होंने इसके लिए संविधान के अनुच्छेद पांच का हवाला दिया.

डिप्टी स्पीकर क़ासिम सूरी ने अविश्वास प्रस्ताव रद्द करते हुए कहा था कि चुनी हुई सरकार को किसी विदेशी ताक़त को साज़िश के ज़रिए गिराने की इजाज़त नहीं दी जा सकती.

इसके तुरंत बाद इमरान ख़ान ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति से संसद भंग करने की सिफ़ारिश की जिसे राष्ट्रपति ने स्वीकार करते हुए आदेश जारी कर दिया.

इसके साथ ही पाकिस्तान में संसद भंग हो गई और इमरान ख़ान कार्यवाहक प्रधानमंत्री बन गए.

इस पूरे मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और कोर्ट को तय करना था कि अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग न करने का स्पीकर का फ़ैसला संवैधानिक है या नहीं.

अब सुप्रीम कोर्ट ने इस फ़ैसले को असंवैधानिक क़रार देते हुए पलट दिया है.

शहबाज़ शरीफ़

इमेज स्रोत, AFP

अब तक क्या-क्या हुआ?

दरअसल, लंबे समय से विपक्षी पार्टियों ने इमरान सरकार के ख़िलाफ़ मोर्चा खोल रखा है. विपक्षी दलों ने मिलकर एक गठबंधन बनाया पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट. ये गठबंधन एक बार पहले भी इमरान सरकार के ख़िलाफ़ अविश्वास प्रस्ताव लाया था लेकिन संख्या बल इमरान ख़ान के पक्ष में रहा.

लेकिन, इस बार लाए गए अविश्वास प्रस्ताव में इमरान ख़ान के हारने की संभावना जताई जा रही थी. सदन में विश्वास बहाल करने के लिए सदन में उनके पास पर्याप्त संख्या नहीं थी. अटकलें ये भी थीं कि वो अविश्वास प्रस्ताव से पहले ही इस्तीफ़ा दे देंगे लेकिन उन्होंने कहा कि वो आख़िरी बॉल तक बैटिंग करेंगे.

पाकिस्तान की सेना का भी इमरान ख़ान को समर्थन नहीं दिख रहा था. पिछले महीने उन्होंने भारत की सरकार और सेना की तारीफ़ करते हुए पाकिस्तान के विपक्ष और सेना पर निशाना साधा था. ऐसे में उनकी विदाई तय मानी जा रही थी.

प्रधानमंत्री इमरान ख़ान

इमेज स्रोत, WAKIL KOHSAR/ GETTY IMAGES

इमरान ख़ान का पलटवार

लेकिन, अविश्वास प्रस्ताव से पहले 27 मार्च को इस्लामाबाद में एक सभा में इमरान ख़ान ने कहा कि उनकी सरकार को एक दूसरे मुल्क़ की ओर से लिखित रूप से धमकी दी गई है. उन्होंने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उनके रूस जाने से अमेरिका खुश नहीं था. उन्होंने अपने ख़िलाफ़ विदेशी साजिश होने का आरोप लगाया.

दो अप्रैल को इमरान ख़ान ने एक बार फिर लोगों को संबोधित किया और लोगों के सवालों के जवाब दिए. इस दौरान इमरान ख़ान ने कहा कि ये साबित हो गया है कि विपक्ष के साथ मिलकर विदेश से उनके ख़िलाफ़ साजिश रची गई है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा समिति और कैबिनेट ने वो डॉक्यूमेंट देखा है.

इमरान ख़ान ने कहा, "ये जो मैं आपको कहा रहा हूं कि ये ऑफ़िशियल डॉक्यूमेंट है कि इमरान ख़ान को आप अगर हटाएंगे तो अमेरिका के ताल्लुक़ात आपसे अच्छे होंगे. जैसे ही आप इमरान ख़ान को हटाएंगे हम आपको माफ़ कर देंगे." हालांकि, अमेरिका ने इन आरोपों से इनक़ार किया है.

इस दौरान उन्होंने शहबाज़ शरीफ़ पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी मिलीभगत इस साज़िश में है और शहबाज़ अमेरिका की 'ग़ुलामी' के लिए तैयार हैं.

रविवार को जब नेशनल असेंबली का सम्मेलन शुरू हुआ तो केंद्रीय क़ानून मंत्री फ़वाद चौधरी ने असेंबली में इस मुद्दे को उठाते हुए डिप्टी स्पीकर से अपील की कि वो इस अविश्वास प्रस्ताव को ख़ारिज कर दें क्योंकि इसे विदेशी ताक़तों के कहने पर लाया गया है.

इसके बाद डिप्टी स्पीकर क़ासिम सूरी ने फ़ैसला देते हुए सत्र को अनिश्चितकाल तक के लिए स्थगित कर दिया और इसके बाद प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने राष्ट्रपति को नेशनल असेंबली भंग करने की सिफ़ारिश कर दी जिसे राष्ट्रपति ने मंज़ूर कर लिया.

पाकिस्तान में विपक्ष के नेता

इमेज स्रोत, ANADOLU AGENCY/ GETTY IMAGES

इमेज कैप्शन, पाकिस्तान में विपक्ष के नेता

पाकिस्तान में फिर से चुनाव

विपक्षी नेता सरकार के इस क़दम से ख़ासे नाराज़ थे. शहबाज़ शरीफ़ ने विधानसभा भंग करने के प्रस्ताव को लेकर इमरान ख़ान पर ''गंभीर राजद्रोह'' का आरोप भी लगाया है.

इमरान ख़ान संसद भंग करवाकर फिर से चुनाव में जाने की तैयारी कर रहे थे.

पाकिस्तान के कई लोग इमरान ख़ान के इस फ़ैसले को संविधान का उल्लंघन बता रहे हैं. वहीं, कई लोगों का ये भी कहना है कि उनके पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं था.

चुनाव होने तक पाकिस्तान में कार्यवाहक सरकार काम करेगी. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद अविश्वास प्रस्ताव लाया जाएगा, जिसके बाद विपक्ष की सरकार का गठन भी हो सकता है.

कार्यवाहक सरकार का गठन अनुच्छेद 224 के तहत किया जाता है, जिसके उपखंड के मुताबिक़ अगर अनुच्छेद 58 के तहत संसद भंग हो जाए तो देश के राष्ट्रपति.. प्रधानमंत्री और नेशनल असेंबली में विपक्ष के नेता की सलाह से कार्यवाहक सरकार का गठन करेंगे.

और इस काम के लिए उनके पास असेंबली के भंग होने से लेकर सिर्फ़ तीन दिन का वक़्त होता है. प्रधानमंत्री इमरान ख़ान और विपक्ष के नेता शहबाज़ शरीफ़ अगर एक नाम पर सहमत नहीं होते हैं तो फिर ये मामला एक आठ सदस्यों वाली पार्लियामेंट्री कमिटी के पास जाता.

हालांकि, शहबाज़ शरीफ़ ने इस प्रक्रिया को असंवैधानिक बताते हुए इसमें हिस्सा लेने से इनक़ार किया था.

ये भी पढ़ें

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)