इमरान ख़ान ने कहा- हम सत्य और देश के लिए लड़ रहे हैं : उर्दू प्रेस रिव्यू

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- Author, इकबाल अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि वो सच्चाई और देश के लिए लड़ रहे हैं.
रविवार को पाकिस्तान के समयानुसर सुबह साढ़े ग्यारह बजे संसद यानी नेशनल असेंबली की कार्रवाई शुरू होगी और उनकी सरकार के ख़िलाफ़ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग होगी.
सदन में अविश्वास प्रस्ताव पेश किए जाने के कम से कम तीन दिन बाद और सात दिनों के भीतर उसपर वोटिंग करवाना अनिवार्य है. यह समयसीमा रविवार को ख़त्म हो रही है. जानकारों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में संख्याबल इमरान ख़ान के साथ नहीं है.
शनिवार देर रात इमरान ख़ान ने ट्वीट किया, "कर्बला में इमाम हुसैन, उनके परिजन और उनके समर्थकों ने दुनिया को सत्य और असत्य का फ़र्क़ समझाने के लिए ख़ुद से कहीं अधिक संख्या में रहे दुश्मन से टकराते हुए अपनी जान दे दी थी. आज हम लोग झूठ और ग़द्दारी के ख़िलाफ़ सत्य और देश के लिए लड़ रहे हैं."
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इमरान ख़ान के इस ट्वीट से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि सदन का विश्वास हासिल करने में उन्हें दिक़्क़त हो सकती है.
विपक्ष को अपना अविश्वास प्रस्ताव पास करवाने के लिए 172 सांसदों के समर्थन की ज़रूरत होगी और विपक्ष का दावा है कि उसके पास इस समय 196 सांसदों का समर्थन है.
लेकिन इमरान ख़ान का दावा है कि वो सदन में बहुमत हासिल कर लेंगे और उनके पास एक से ज़्यादा प्लान हैं.
हालांकि विपक्ष का कहना है कि इमरान ख़ान अपनी हार स्वीकार करने के बजाए देश को बांटने की साज़िश कर रहे हैं.
इमरान ख़ान देश को बांट रहे हैं: शहबाज़ शरीफ़
अख़बार डॉन के अनुसार प्रमुख विपक्षी दल मुस्लिम लीग (नवाज़ गुट) के अध्यक्ष और संसद में नेता प्रतिपक्ष शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि इमरान ख़ान अपनी धमकियों से क़ौम को बांट रहे हैं.
इस्लामाबाद में पत्रकारों से बात करते हुए शहबाज़ शरीफ़ ने कहा, "इमरान ख़ान सीधे तौर पर पाकिस्तान के संविधान से टक्कर ले रहे हैं. वो संविधान और क़ानून के ख़िलाफ़ रास्ते पर चल रहे हैं. अविश्वास प्रस्ताव पास हो जाने के बाद उन्हें इसका हिसाब देना होगा."
शहबाज़ शरीफ़ ने कहा कि इमरान ख़ान अपने समर्थकों को उकसा रहे हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील की है.
हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं है: केंद्रीय मंत्री फ़व्वाद चौधरी
इमरान ख़ान ने शनिवार को आम नागिरकों के सवालों का जवाब देते हुए नौजवानों से सड़कों पर उतरकर शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने की अपील की थी.
हालांकि कुछ ही देर बाद केंद्रीय सूचना एंव प्रसारण मंत्री फ़व्वाद चौधरी ने कहा कि हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं है.
फ़व्वाद चौधरी ने ट्वीट कर कहा, "तहरीक-ए-इंसाफ़ मध्यवर्ग की पार्टी है. विरोधी मीडिया घराने कैंपेन चला रहे हैं कि तहरीक-ए-इंसाफ़ के कार्यकर्ता हिंसा पर उतारू हो जाएंगे. यह आश्चर्यजनक है. सारा काम संविधान के अनुसार होगा. किसी भी तरह की हिंसा की कोई गुंजाइश नहीं है. एक सभ्य समाज का विरोध प्रदर्शन भी सभ्य होगा. हिंसक प्रदर्शन की ख़बर भी दर्जनों ख़बरों की तरह फ़ेक न्यूज़ होगी."
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इमरान ख़ान की पार्टी का सामूहिक इस्तीफ़े पर विचार
अख़बार एक्सप्रेस के अनुसार संसद में विश्वास मत हासिल नहीं कर पाने की स्थिति में इमरान ख़ान इस बात पर विचार कर रहे हैं कि क्या उनकी पार्टी के सभी सांसदों को इस्तीफ़ा दे देना चाहिए.
एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से लिखा है कि इमरान ख़ान के सलाहकारों ने उनसे कहा है कि कथित भ्रष्ट नेताओं के साथ विपक्ष में बैठने से बेहतर है कि पीटीआई और उनके सहयोगी दलों के सभी सांसद सामूहिक रूप से इस्तीफ़ा दे दें. इमरान ख़ान के सलाहकारों के अनुसार ऐसा करने से नई सरकार के लिए संकट पैदा हो जाएगा. अख़बार के अनुसार इतनी सीटों पर उपचुनाव करवाना नई सरकार के लिए आसान नहीं होगा.
अख़बार का दावा है कि इमरान ख़ान को पंजाब और ख़ैबर पख़्तूनख़्वाह प्रांतों की विधानसभा से भी सामूहिक इस्तीफ़ा देने की सलाह दी गई है.

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अटॉर्नी जनरल की इमरान ख़ान और मुख्य न्यायाधीश से मुलाक़ात
पाकिस्तान में राजनीतिक सरगर्मी के बीच शनिवार को पाकिस्तान के अटॉर्नी जनरल ख़ालिद जावेद ने इमरान ख़ान और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस उमर अता बिंदयाल से अलग-अलग मुलाक़ात की.
इस मुलाक़ात के दौरान क्या हुआ इसका कोई आधिकारिक ब्यौरा नहीं आया है लेकिन पाकिस्तान की मीडिया के अनुसार अटॉर्नी जनरल ने इमरान ख़ान को सलाह दी है कि वो कोई भी ग़ैर-संवैधानिक क़दम न उठाएं.
पाकिस्तान में इस बात पर भी बहस हो रही है कि विश्वास मत हासिल करने में नाकाम होने के बाद क्या इमरान ख़ान फ़ौरन इस्तीफ़ा दे देंगे या फिर राष्ट्रपति उन्हें तब तक अपने पद पर बने रहने के लिए कह सकते हैं जब तक अगले प्रधानमंत्री का फ़ैसला नहीं हो जाता है.
केंद्रीय गृहमंत्री शेख़ रशीद ने शनिवार को कहा था कि जब तक नए प्रधानमंत्री का चयन नहीं हो जाता है तब तक इमरान ख़ान ही प्रधानमंत्री बने रहेंगे और राष्ट्रपति उन्हें अपना काम करते रहने के लिए कह सकते हैं. लेकिन इस मामले में संविधान के जानकारों की राय बंटी हुई है.
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