इस्तीफ़ा नहीं दूंगा, आख़िरी गेंद तक मुक़ाबला करूंगा: इमरान ख़ान

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अविश्वास प्रस्ताव का सामना कर रहे पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि वो इस्तीफ़ा नहीं देंगे और विश्वास मत के बाद और मज़बूती से लौटेंगे.
राष्ट्रीय टीवी पर देश को लाइव संबोधित करते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "मैं आख़िरी गेंद तक मुक़ाबला करता हूं. मैंने कभी ज़िंदगी में हार नहीं मानी, वोट का जो भी नतीजा हो, मैं उसके बाद और मज़बूती से सामने आऊँगा. मैं चाहता हूं कि मेरी सारी क़ौम देखे कि कौन जाकर अपने जमीर का सौदा करेगा."
इमरान ख़ान ने कहा, "उन्हें बीस-बीस करोड़ में ख़रीदा जा रहा है. मैं पूछना चाहता हूं कि हम अपने नौजवानों को क्या सबक दे रहे हैं. ये पूरे देश के सामने हो रहा है कि हमारे सांसदों की बोली लग रही है."
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इमरान ख़ान ने आरोप लगाया है कि उन्हें सत्ता से बाहर करने के लिए विदेश से साज़िश हो रही है. उन्होंने कहा, "मैं इस साज़िश को कामयाब नहीं होने दूंगा. जब तक मुझमें ख़ून है मैं इस साज़िश का मुक़ाबला करूंगा."
इमरान ख़ान ने आरोप लगाया है कि उनकी पार्टी के कई नेता पैसे लेकर विपक्ष के साथ मिल गए हैं. उन्होंने कहा कि देश की जनता सब जानती है और इन लोगों को माफ़ नहीं करेगी.
इमरान ख़ान ने कहा, "ये लोग सिर्फ़ और सिर्फ़ जमीरों का सौदा कर रहे हैं. ये अपने मुल्क की संप्रभुता को बेच रहे हैं. ये देश को बेच रहे हैं."
इमरान ख़ान ने कहा कि इन लोगों को देश की जनता कभी माफ़ नहीं करेगी और इन्हें गद्दारों के रूप में याद किया जाएगा.
नवाज़ शरीफ़ पर आरोप

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इमरान ख़ान ने अपने भाषण में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ पर आरोप लगाया कि वो नेपाल में छुपकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला करते थे.
इमरान ख़ान ने कहा, "नवाज़ शरीफ़ का ज़िक्र बरखा दत्त की किताब में है कि वो नेपाल में नरेंद्र मोदी से छुप-छुप कर मिल रहे थे. अपनी फ़ौज से बचने के लिए. जनरल राहिल शरीफ़ को नरेंद्र मोदी दहशतगर्द कह रहे थे और नवाज़ शरीफ़ से दोस्ती चल रही थी."
अमेरिका पर आरोप लगाते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि एक तरफ़ तो अमेरिका दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ युद्ध कर रहा था और दूसरी तरफ़ पाकिस्तान के बेक़सूर लोगों पर ड्रोन हमले कर रहा था.
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अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान में दहशतगर्दी के ख़िलाफ़ युद्ध के दौरान ड्रोन हमलों में बेक़सूर लोगों के मारे जाने का आरोप लगाते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "हमारे इलाक़ों में ड्रोन हमले हुए, कितने ही बेक़सूर लोग मारे गए. एक ड्रोन हमले में मदरसे के अस्सी बच्चे मारे गए. शादियों के पंडालों पर ड्रोन हमले हुए. मैं हमेशा से इसकी मुख़ालफ़त करता रहा हूं. जब मैं ये कहता था कि ये पाकिस्तान की जंग नहीं है, तब मुझे तालिबान ख़ान कहा जाता था."
उन्होंने कहा, "जनरल मुशर्रफ के कार्यकाल में 11 ड्रोन अटैक हुए थे. जब ये दस साल सत्ता में थे तो इनके कार्यकाल में चार सौ ड्रोन हमले पाकिस्तान में हुए हैं. एक बार इनके मुंह से नहीं निकला कि हम इसकी आलोचना करते हैं. अफ़ग़ानिस्तान में जब बमबारी में बेक़सूर लोग मारे जाते थे तब अशरफ़ गनी उनकी आलोचना करते थे. लेकिन यहां चार सौ ड्रोन हमलों पर किसी ने एक आलोचना नहीं की."
विदेशी साज़िश

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इमरान ख़ान ने कहा कि एक विदेशी ताक़त है जो चाहती है कि इमरान ख़ान सत्ता से बाहर हो जाएं.
एक अधिकारिक पत्र का हवाला देते हुए इमरान ख़ान ने कहा कि इस पत्र में लिखा है कि यदि "इमरान ख़ान सत्ता से बाहर हो जाते हैं तो फिर हमारे संबंध बहाल हो जाएंगे."
बाहरी ताक़त के दख़ल का हवाला देते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "ये चाह ये रहे हैं कि अगर ये अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सत्ता में आ जाएं तो सबकुछ ठीक हो जाएगा. क्या देश में ये उन लोगों को सत्ता में आने की अनुमति देंगे जिन पर नैब के मुक़दमे हो. क्या वो उसे सत्ता में आने देंगे जिसे पाकिस्तान की अदालत ने दोषी बताया है और जो देश के बाहर भागा हुआ है. बीबीसी की दो डॉक्यूमेंट्री आई हैं इनकी चोरी पर."
पत्र का हवाला देते हुए इमरान ख़ान ने कहा, "ये एक अधिकारिक दस्तावेज़ है. जिसमें ये कहा गया- कि अगर इमरान ख़ान प्रधानमंत्री रहता है तो हमारे आपके साथ संबंध ख़राब हो जाएंगे, और आपको मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा."
इमरान ख़ान ने कहा कि वो चाहते थे कि पाकिस्तान की विदेश नीति आज़ाद रहे और किसी से संबंध ख़राब ना हों. उन्होंने कहा, "मैंने पहले दिन से ये कहा कि पाकिस्तान की विदेश नीति पाकिस्तानियों के लिए हो. हम ऐसी कोई विदेश नीति नहीं बनाएंगे जिसमें दूसरों का तो फ़ायदा हो और हमारा ना हो. भारत ने जब कश्मीर का दर्जा बदला, 05 अगस्त 2019 को तब मैं हिंदुस्तान के ख़िलाफ़ हर स्तर पर बोला, उससे पहले मैंने भारत के साथ बात करने की हर कोशिश की."
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