यूक्रेन पर रूस के हमले का छठा दिन, जानिए क्या-क्या हुआ

कीएव के लोग बंकरों में समय गुज़ार रहे हैं

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यूक्रेन पर रूस के आक्रमण को छह दिन पूरे हो गए हैं. छठे दिन यूक्रेन के लोगों की आँख हवाई हमले का अलर्ट देने वाले सायरनों से खुली.

साथ ही रूस की सेना के बड़े काफ़िले के राजधानी कीएव की तरफ़ बढ़ते कद़मों में लोगों की सांसें थाम दीं.

सैटेलाइट से मिली तस्वीरों में रूस का 60 किलोमीटर से लंबा सैन्य काफ़िला राजधानी कीएव की तरफ़ बढ़ता दिखा.

मंगलवार को कीएव में एक टीवी टावर पर हुए हमले में पाँच लोग मारे गए.

इस हमले से कुछ देर पहले ही रूस ने चेतावनी दी थी कि कीएव पर हमले की तैयारी की जा रही है. रूस ने यूक्रेनी नागरिकों को सैन्य ठिकानों से दूर रहने की चेतावनी भी दी थी.

पेट्रोल बम से हमला करता एक यूक्रेनी नागरिक

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रिपोर्टों के मुताबिक़ टीवी टावर के पास स्थित बेबिन यार नरसंहार स्मारक के क़रीब मिसाइल गिरी.

ये स्मारक यूरोप की सबसे बड़ी सामूहिक क़ब्र पर बना है. 1941 में यहाँ नाज़ी जर्मनी के डेथ स्क्वॉड ने 33 हज़ार से अधिक यहूदी लोगों की हत्या की थी.

खार्कीएव में ख़ौफ़ का माहौल

यूक्रेन के दूसरे सबसे बड़े शहर ख़ार्कीएव के मुख्य इलाक़े में भी मिसाइलें गिरीं. इस हमले में कम से कम दस लोग मारे गए.

इस हमले के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने रूस पर युद्ध अपराध करने के आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि जहाँ मिसाइल हमला किया गया वहाँ कोई सैन्य ठिकाना नहीं था.

ख़ार्कीएव के लोग शहर छोड़कर भाग रहे हैं और अपनी कहानियां सुना रहे हैं.

ख़ार्कीएव में स्थानीय प्रशासन की इमारत पर रूस का हमला

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यहाँ मौजूद बीबीसी संवाददाता जोएल गुंटर ने हेयरड्रैसर का काम करने वाली एलेक्सांड्रा से बात की जो अपने बेटे के साथ शहर छोड़कर जा रही थीं.

एलेक्सांड्रा ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि एक दिन वो अपने शहर लौट पाएंगी. यूक्रेन के अधिकतर लोग ये कह रहे हैं कि उन्होंने अपनी ज़मीन और अपने शहर से इतना लगाव पहले कभी महसूस नहीं किया था.

नो फ्लाइ ज़ोन बनाने की संभावना नहीं है.

यूक्रेन के लोग यूक्रेन के आसमान में नो फ्लाई ज़ोन स्थापित करने की मांग कर रहे हैं.

मंगलवार को ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन की एक प्रैस कांफ्रेंस में एक यूक्रेनी महिला ने गुज़ारिश करते हुए कहा, "यूक्रेन के लोग पश्चिमी देशों से अपने आसमान की सुरक्षा करने की गुहार लगा रहे हैं. हम नो फ्लाई ज़ोन की स्थापित करने की गुहार लगा रहे हैं."

रूस के हमलों में यूक्रेन के नागरिकों की मौतों की संख्या बढ़ रही है. रूस हवा से हमले कर रहा है. लेकिन पश्चिमी देशों के यूक्रेन में नो फ़्लाई ज़ोन स्थापित करने का कोई संकेत नहीं है.

रईसों पर प्रतिबंधों की आलोचना

वीडियो कैप्शन, रूस की अर्थव्यवस्था पश्चिमी देशों की ओर से लगाए प्रतिबंधों का दबाव महसूस कर रही है.

रूस में कई बड़े कारोबारी राष्ट्रपति पुतिन के मित्र हैं. इनके लिए ओलिगार्क शब्द का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे रईस कारोबारियों पर पश्चिमी देशों ने प्रतिबंध लगाए हैं.

यूक्रेन में पैदा हुए अरबपति कारोबारी मिख़ाइल फ्रीडमैन ने लंदन में एक प्रेसवार्ता में कहा कि इस युद्ध का दोनों तरफ़ विनाशकारी असर हो रहा है.

रूस के सबसे अमीर लोगों में शामिल मिख़ाइल का कहा कि रईसों पर प्रतिबंध लगाने का रूस के यूक्रेन पर हमला करने के निर्णय पर कोई असर नहीं होगा.

हालांकि मिख़ाइल ने सीधे तौर पर किसी की आलोचना नहीं की. उन्होंने कहा कि व्यक्तिगत आलोचना करने से उनके और अनकी कंपनी के कर्मचारियों के लिए ख़तरा पैदा हो सकता है.

क्या पुतिन ने ग़लत आकलन किया है?

पुतिन

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बीबीसी के वरिष्ठ पत्रकार जॉन सिंपसन के मुताबिक़ यूक्रेन पर आक्रमण के पहले सप्ताह के दौरान यूक्रेन ने पूरी ताक़त से लड़ाई लड़ी है. ये राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आकलन के विपरीत रहा है.

जॉन सिंपसन का नज़रिया-

युद्ध के पहले सप्ताह के दौरान यूक्रेन राष्ट्रपति पुतिन के आकलन, या हो सकता है कि जैसा कि पुतिन के जनरलों ने उन्हें भरोसा दिया था, के मुक़ाबले बहुत मज़बूती से लड़ा है. लेकिन ये एक बहुत लंबे और विनाशकारी युद्ध की शुरुआत भर हो सकता है.

पुतिन ने उम्मीद की होगी कि रूसी सेना के आक्रमण के कुछ दिन के भीतर ही कीएव गिर जाएगा. पुतिन ने निश्चित तौर पर ये उम्मीद तो की ही होगी कि विभाजित और डरे हुए पश्चिमी देश इसे स्वीकार कर लेंगे क्योंकि वो उसी ज़मीन को दोबारा हासिल कर रहे हैं जो उनकी नज़र में ऐतिहासिक तौर पर रूस का हिस्सा रही है.

लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. यूक्रेन बहुत मज़बूती से रूस के सामने खड़ा है और पश्चिमी देशों, ख़ासकर जर्मनी की प्रतिक्रिया पुतिन के आकलन से कहीं अधिक कठोर रही है.

रूस की अर्थव्यवस्था पर ग़हरी चोट पहुँची है.

युद्ध में रूस को भारी नुकसान हो रहा है

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पुतिन के अच्छे दोस्त चीन को अब लगने लगा है कि पश्चिम में उठा ये ग़ुस्सा कहीं एक दिन उसकी तरफ़ ना हो जाए और कहीं चीन की अर्थव्यवस्था को ग़हरी चोट न पहुंच जाए.

चीन ने रूस के आक्रमण से पहले ही दूरी बना ली है.

अब पुतिन को नए विकल्प देखने होंगे. पुतिन ने हमेशा ही पीछे हटने से इनकार किया है. ऐसा लगता है कि वो अब और शक्ति से हमला करेंगे और ऐसा करने के लिए उनके पास पर्याप्त हथियार हैं.

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