इमरान ख़ान से पुतिन 'छोटी टेबल' पर क्यों मिले? चर्चा गर्म

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के रूस दौरे की चर्चा कई कारणों से हो रही है. सबसे बड़ी वजह है कि जिस दिन इमरान ख़ान मॉस्को पहुँचे उसी दिन रूस ने यूक्रेन पर हमला कर दिया.

ऐसा भी नहीं है कि इमरान ख़ान को इसका अंदाज़ा नहीं रहा होगा क्योंकि एक दिन पहले ही पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन के दो इलाक़ों को स्वतंत्र क्षेत्र के रूप में मान्यता दी थी.

इसके अलावा महीनों से यूक्रेन को लेकर तनाव चल रहा था. कई जानकार कह रहे हैं कि इमरान ख़ान को दौरा स्थगित कर देना चाहिए था.

पाकिस्तान के जाने-माने स्तंभकार फ़ारुख़ सलीम ने ट्वीट कर कहा है, ''रूस ने यूक्रेन पर हमला किया. उसने अंतरराष्ट्रीय नियम को तोड़ा है. पूरी दुनिया की राय रूस के पक्ष में नहीं है. क्या इमरान ख़ान ऐसे वक़्त में रूस का दौरा कर यूक्रेन पर उसके हमले को सही ठहरा रहे हैं?''

पाकिस्तान को क्या हासिल होगा?

फ़ारुख़ ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा है, ''पाकिस्तान और रूस का द्विपक्षीय व्यापार प्रति वर्ष महज़ 40 करोड़ डॉलर का है. रूस को जो चाहिए, वो पाकिस्तान के पास नहीं है. रूस को इलेक्ट्रिक और इंडस्ट्रियल मशीनरी चाहिए. रूस को पाकिस्तान के उत्पाद की ज़रूरत नहीं है. इमरान ख़ान के दौरे से पाकिस्तान को कुछ भी हासिल नहीं होने वाला है.''

फ़ारुख़ सलीम ने लिखा है, ''रूस की पूरी दुनिया में निंदा हो रही है. वैश्विक जीडीपी में रूस का महज़ तीन फ़ीसदी हिस्सा है. पाकिस्तान के कुल निर्यात का महज़ एक प्रतिशत रूस को जाता है. आईएमएफ़ में महज़ 2.5 फ़ीसदी वोट रूस के नियंत्रण में है. एफ़एटीएफ़ में भी रूस की भूमिका ना के बराबर है. पाकिस्तान को रूस से क्या मिलेगा?''

हालांकि यह भी कहा जा रहा है कि पाकिस्तान रूस से ऊर्जा सुरक्षा में मदद चाहता है. पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट रूस की मदद से बनाना चाहता है. यह पाइपलाइन कराची से पंजाब के कासुर तक (1,100 किलोमीटर) प्रस्तावित है. इसे उत्तरी-दक्षिण पाइपलाइन भी कहा जाता है. इस पाइपलाइन के ज़रिए सालाना 12.4 अरब क्यूबिक मीटर गैस लाने की योजना है. इसमें पाकिस्तान का 74 फ़ीसदी हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत क़रीब 2.3 अरब डॉलर है. पाकिस्तान ऊर्जा की किल्लत से जूझ रहा है.

मैक्रों का रूस दौरा और टेबल की चर्चा

इमरान ख़ान के दौरे की चर्चा एक और वजह से भी हो रही है. यूक्रेन पर हमले से पहले राष्ट्रपति पुतिन से मिलने कई देशों के नेता गए थे. इनमें फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी थे.

राष्ट्रपति मैक्रों इसी महीने सात फ़रवरी को रूस पहुँचे थे. पुतिन और मैक्रों के बीच बैठक की जो तस्वीर आई, उसकी चर्चा एक लंबी-चौड़ी टेबल के कारण होने लगी.

सोशल मीडिया पर टेबल का आकार छह मीटर लंबा बताया गया. टेबल की एक छोर पर पुतिन बैठे थे और दूसरी छोर पर मैक्रों. एक अफ़वाह यह भी उड़ी कि मैक्रों ने रूस में कोविड टेस्ट कराने से इनकार कर दिया था, इसलिए इतनी दूरी रखी गई थी.

कुछ लोगों ने सोशल मीडिया पर लंबी-चौड़ी टेबल पर तंज़ कसते हुए कहा कि मैक्रों और पुतिन के बीच वार्ता के दौरान जितनी दूरी है, उससे भी कम दूरी रूसी सैनिकों और यूक्रेन के बीच है.

कई लोगों ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से पुतिन की मुलाक़ात की तस्वीर पोस्ट की और बताया कि कोविड पाबंदी केवल मैक्रों के साथ ही क्यों है. इस टेबल को फ़्रांस और रूस के रिश्तों में आई दूरी से भी जोड़ा गया.

गुरुवार को जब पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान मॉस्को में पुतिन से मिलने गए तो सबको इंतज़ार था कि क्या वही लंबी-चोड़ी टेबल होगी? लेकिन मुलाक़ात उस लंबी-चौड़ी टेबल पर नहीं हुई. दोनों की कुर्सियों की बीच में बहुत कम फ़ासला था.

इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई कि क्या इमरान ख़ान ने रूस में कोविड टेस्ट कराया था या रूस-पाकिस्तान के बीच की यह गर्मजोशी है?

एशिया प्रोग्राम के उपनिदेशक और द विल्सन सेंटर में साउथ एशिया के असोसिएट माइकल कगलमैन ने ट्वीट कर कहा, ''इमरान ख़ान छोटी टेबल पर बैठे हैं, इसका मतलब यह हो सकता है कि उन्होंने रूसी पीसीआर टेस्ट कराया है या फिर दोनों देश में आ रही क़रीबी भी हो सकती है. एक दिन पहले ही अज़रबैजान के नेता से भी पुतिन उसी बड़ी टेबल पर मिले थे.''

इंडियन डिफ़ेंस फोरम के संपादक यूसुफ़ उंझावाला ने इमरान ख़ान और पुतिन की मुलाक़ात का वीडियो शेयर करते हुए लिखा है, ''हाल में मैक्रों समेत जिन नेताओं से पुतिन मिले थे, वो टेबल बदल गई है.''

न्यूयॉर्क टाइम्स में पाकिस्तान के संवाददाता सलमान मसूद ने लिखा है, ''पुतिन और इमरान ख़ान एक छोटी टेबल के पास बैठे हैं. पहले की मुलाक़ातों में पुतिन बड़ी टेबल पर बैठ रहे थे. यह एक अहम संकेत है.

क्या ग़लत समय पर किया रूस दौरा

पाकिस्तानी पत्रकार अनस मलिक ने पुतिन की दूसरे नेताओं और इमरान ख़ान की मुलाक़ात की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा है, ''पश्चिमी नेताओं से पुतिन लंबी-चौड़ी टेबल पर मिले जबकि इमरान ख़ान से छोटी टेबल पर. पुतिन शायद इसके ज़रिए पश्चिम को संदेश दे रहे हों.''

माइकल कगलमैन का कहना है कि इमरान ख़ान का रूस दौरा बाइडन के फ़ोन नहीं करने के कारण नहीं है. वह मानते हैं कि पाकिस्तान और रूस के बीच पिछले कुछ सालों में रिश्ते अच्छे हुए हैं और यह दौरा उसी का नतीजा है. माइकल कगलमैन कहते हैं कि बाइडन के फ़ोन को कुछ ज़्यादा ही तवज्जो दी जाती है.

माइकल कगलमैन ने ट्वीट कर कहा है, ''पाकिस्तान की सरकार ने अपने बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने रूस और यूक्रेन में जो कुछ भी हो रहा है, उसे लेकर चिंता जताई है. पाकिस्तान को उम्मीद है कि डिप्लोमैसी के ज़रिए इसे सुलझा लिया जाएगा. इमरान ख़ान ने कहा है कि टकराव किसी के हित में नहीं है.''

माइकल कगलमैन ने दूसरे ट्वीट में कहा है कि इमरान ख़ान ने रूस जाने का समय बहुत ही ग़लत चुना था.

द हेरिटेज फ़ाउंडेशन में दक्षिण एशिया के रिसर्च फ़ेलो जेफ़ एम स्मिथ ने इमरान ख़ान और पुतिन की मुलाक़ात का वीडियो ट्ववीट कर कहा है कि दोनों के बीच असहज करने वाली चुप्पी है. स्मिथ ने लिखा है- इमरान ख़ान ने ओसामा बिन लादेन को शहीद कहा था.

(कॉपी - रजनीश कुमार)

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