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यूक्रेन पर हमला: चीन के लिए यह संकट क्यों बहुत बड़ी चुनौती है?
- Author, स्टीफ़न मैकडॉनल
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़, बीजिंग
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने जब यूक्रेन के पूर्वी हिस्से पर हमले का एलान किया, उसके कुछ घंटे पहले अमेरिका ने रूस और चीन की तीखी आलोचना की. अमेरिका ने इन दोनों देशों पर 'गंभीरता से अनुदार विश्व व्यवस्था' बनाने के लिए गठजोड़ करने का आरोप लगाया.
अमेरिका के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता नेड प्राइस ने यह भी कहा कि चीन के लिए यूक्रेन संकट एक मौक़ा था जिसका इस्तेमाल उसने व्लादिमीर पुतिन को अपनी ओर खींचने के लिए किया.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने फ़रवरी की शुरुआत में शीतकालीन ओलंपिक के उद्घाटन समारोह के लिए चीन के दौरे पर गए व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच हुई 'नो लिमिट्स' संधि का भी ज़िक्र किया.
नेड प्राइस ने संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों से कहा, "आपको चीन से पूछना होगा कि क्या उन्होंने रूस पर अपने अच्छे प्रभाव का पूरा इस्तेमाल किया."
इस तरह, यूक्रेन और रूस के बीच का ताज़ा संकट कई मोर्चों पर चीन के सामने तगड़ी चुनौती पेश कर रहा है.
पुतिन ने विंटर ओलंपिक ख़त्म होने का किया इंतज़ार
शीतकालीन ओलंपिक में जब दुनिया के कुछ ही नेताओं में भाग लिया, तब व्लादिमीर पुतिन चीन के दौरे पर गए और उस दौरान दोनों देशों के बीच अब तक के सबसे मधुर राजनयिक रिश्ते देखे गए.
सबसे अहम बात जो गौर करने वाली है कि व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन के दो क्षेत्रों को अलग देश के रूप में मान्यता देने और यूक्रेन पर हमला करने के लिए शीतकालीन ओलंपिक के ख़त्म होने (20 फ़रवरी) तक का इंतज़ार किया.
हालांकि चीन ने अपने सार्वजनिक बयानों में सभी पक्षों से यूक्रेन में तनाव कम करने का अनुरोध किया है.
हाल में, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन के साथ यूक्रेन के ताज़ा हालात पर चर्चा की थी. उस दौरान दोनों ने माना कि वहां के हालात 'बदतर हो रहे हैं' इसलिए उन्होंने 'सभी पक्षों से संयम बरतने' का बार-बार अनुरोध किया.
लेकिन अब जब रूस ने इस तरह के सभी अपीलों को ठुकराते हुए यूक्रेन पर हमला बोल दिया है, तब चीन का आधिकारिक रुख़ क्या होगा?
चीन सोच रहा है कि ताज़ा संकट में युद्ध का समर्थन करते हुए दिखना उसके लिए उचित नहीं हो सकता. वहीं वह रूस के साथ अपने सैनिक और सामरिक संबंधों को मज़बूत भी करना चाहता है.
उधर यूक्रेन का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार देश चीन है और चीन के लिए सबसे आदर्श स्थिति तो यही होगी कि वो यूक्रेन के साथ अपने अच्छे संबंध बनाए रखे, लेकिन ऐसा कर पाना काफ़ी मुश्किल हो सकता है. ख़ासकर तब जब यूक्रेन पर हमला करने वाले रूस के साथ उसके संबंध बहुत गहरे हों.
चीन को यदि रूसी आक्रमण का समर्थक माना गया तो पश्चिमी यूरोप से उसके मौजूदा कारोबार को झटका लगने की आशंका है.
इसके अलावा, चीनी नेताओं की लगातार कोशिश होती है कि वो दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करते हुए न दिखें, ताकि कह सकें कि दूसरे देश भी उनके आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करें.
लेकिन अमेरिका के पूर्व ख़ुफ़िया अधिकारी जॉन कल्वर ने ट्विटर पर लिखा, "यूक्रेन के कुछ हिस्सों पर रूस का क़ब्ज़ा, या राजधानी कीएफ़ पर हमला चीन के उस रुख़ के ख़िलाफ़ है कि किसी देश की संप्रभुता सबसे बढ़कर है."
नागरिकों के सामने मामले को ठीक से रखने की चुनौती
चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी की सबसे बड़ी चिंता इस बात की है कि दुनिया को लेकर देशवासियों के नज़रिए को वो किस तरह पेश करे.
इस वजह से वो प्रेस और सोशल मीडिया में यूक्रेन संकट पर हो रही बातचीत में हेरफेर और उस पर नियंत्रण कर रहा है.
इस पूरे मामले में ताइवान को खींच लाने में बहुत ज़्यादा समय नहीं लगा. चीन की कम्युनिस्ट पार्टी ताइवान को 'दुष्ट प्रांत' के रूप में देखती है जिसे चीन की मुख्य भूमि के साथ एक हो जाना चाहिए.
चीन में ट्विटर के विकल्प वीबो पर कई लोगों ने लिखा, "यह ताइवान को अपने में मिला लेने का सबसे अच्छा मौक़ा है!"
हाल में चीन की सरकार ने जब रूस पर प्रतिबंध लगाने के विचार को ख़ारिज किया, तो उसे पता था कि यदि उसने ताइवान को बलपूर्वक मिलाने की कोशिश की, तो उसे भी ऐसे ही प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है. यदि ऐसा हुआ तो वो चीन के लिए काफ़ी ख़तरनाक और महंगा साबित होगा.
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने बीजिंग में एक नियमित प्रेस बातचीत में इस बारे में बात की. उन्होंने कहा कि चीन कभी नहीं सोचता कि प्रतिबंध किसी समस्या को हल करने का सबसे अच्छा तरीका हो सकता है.
पुतिन के तर्क में छिपी चीन की चुनौतियां
लेकिन यदि चीन के नागरिक यूक्रेन पर हमला करने के रूस के तर्क को जोड़ते हुए उसे अपने देश में भी लागू करने लगें, तो इससे चीन की मौजूद सीमा को लेकर उसकी सरकार का समूचा तर्क ख़ारिज हो सकता है.
व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि वो यूक्रेन के अंदर मौजूद रूस की बात करने वालों को आज़ाद कर रहे हैं. ऐसे में चीन के मंगोलियाई, कोरियाई, किर्गिज़ और अन्य दूसरे मूल के लोगों का क्या, जो अब चीन का हिस्सा हैं?
चीन के लिए और अधिक ख़तरा तब हो सकता है, जब तिब्बती लोग या वीगर समुदाय, अपनी वृहत स्वायत्तता या आज़ादी की मांग फिर से करने लगें?
इसलिए चीन की शी जिनपिंग की सरकार चाहेगी कि ऐसा न होने पाए और यह किसी भी चीज़ से ज़्यादा अहम है.
इसलिए चीन की कम्युनिस्ट पार्टी व्लादिमीर पुतिन के फ़ैसलों को देश के सामने किस तरह से पेश कर रही है, इसे समझने के लिए हमें चीन के सोशल मीडिया पर आ रहे कॉमेंट्स को पढ़ना चाहिए.
सोशल मीडिया वेबसाइट वीबो पर चीन के सरकारी प्रेस के अपने अकाउंट्स हैं और वहां रूस और यूक्रेन को लेकर आ रहे कॉमेंट्स को नियंत्रित किया जा रहा है.
वहां किए गए कॉमेंट्स कुछ इस तरह से हैं:
'पुतिन लाजवाब हैं!'
'मैं रूस का समर्थन और अमेरिका का विरोध करता हूं. मैं बस यही कहना चाहता हूं.'
'अमेरिका हमेशा से दुनिया में गड़बड़ी पैदा करना चाहता है!'
इस वेबसाइट पर जहां कई लोग शांति क़ायम करने की मांग कर रहे हैं, वहीं अमेरिका को निशाना बनाने वाले कॉमेंट्स को जमकर फैलाया जा रहा है.
रूस की आलोचना वाले पोस्ट पर लगाम
चीन के वैसे लोग जो यूक्रेन में रूस की महत्वाकांक्षाओं को लेकर वाक़ई सवाल खड़ा कर रहे हैं, उन्हें खोजने के लिए आपको अलग-अलग वीबो अकाउंट्स की तलाश करनी होगी.
एक ने लिखा, ''मुझे समझ नहीं आता कि इतने लोग आख़िर रूस और पुतिन का समर्थन क्यों करते हैं. क्या हमले को उचित क़रार दिया जा सकता है? हमें किसी भी प्रकार के युद्ध का विरोध करना चाहिए!''
वहीं एक दूसरे शख़्स ने लिखा, "पुतिन यूक्रेन के अलगाववादी इलाक़ों की आज़ादी को मान्यता देते हैं, जो साफ़ तौर पर दूसरे देश के घरेलू मामलों में हस्तक्षेप है."
इस आख़िरी पोस्ट में ठीक वैसी ही राय ज़ाहिर की गई है जिसके बारे में चीन की सरकार नहीं चाहती कि उसके नागरिक ऐसी राय रखें या व्यक्त करें.
ये कुछ कॉमेंट्स सोशल मीडिया के बहुत बड़े संसार के सार की तरह हैं जिससे चीन की सरकार फ़िलहाल जूझ रही है.
यूक्रेन में स्थित चीन के दूतावास ने वहां रह रहे अपने नागरिकों को एक संदेश भेजा है. चीनी दूतावास ने उन्हें सलाह दी है कि चीन के लोग 'चीन की ताक़त' दिखाते हुए अपनी कार पर अपने देश का झंडा लगाएं और 'एक दूसरे की मदद करें.'
चीन के विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग से गुरुवार के संवाददाता सम्मेलन में पूछा गया कि क्या यूक्रेन में अभी जो हो रहा है वो एक हमला है. इस पर उनका जवाब था कि इसका 'ऐतिहासिक संदर्भ बहुत जटिल है' और अभी जो रहा है वो 'कई वजहों के चलते' हुआ है.
इस तरह यूरोप में बहुत बड़ी उथल-पुथल मची है. चीन के सामने आई चुनौतियों से निपटने के लिए शी जिनपिंग को कई बड़े फ़ैसले लेने पड़ सकते हैं.
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