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रूस और यूक्रेनः किसकी सेना कितनी मज़बूत?
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पूर्वी यूक्रेन में सेना भेजने के आदेश दे दिए हैं. उन्होंने यूक्रेन में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले दो इलाक़ों को स्वतंत्र राज्य के तौर पर मान्यता देने के बाद ये क़दम उठाया है.
रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि उनकी सेना वहाँ "शांति बनाए रखने के लिए" जा रही है. अमेरिका ने इसे बकवास बताया है.
इसके बाद अब तस्वीरें आ रही हैं कि रूसी सेना यूक्रेन के इन दो इलाक़ों की ओर बढ़ रही है. रूस ने पिछले कई महीनों से यूक्रेन की सीमा पर लगभग दो लाख ( 190,000) सैन्यकर्मियों को तैनात कर रखा था. इन्हीं में से सैन्य टुकड़ियाँ अब यूक्रेन की सीमा पार कर दाख़िल होंगी.
रूसी सेना के इस जमावड़े में टैंक और गोला-बारुद तो है ही, उन्हें वायुसेना और नौसेना का भी सहयोग मिल रहा है.
वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति ने कहा है कि उनके देश को "ना तो किसी बात का और ना किसी व्यक्ति का" डर है.
रूसी सैनिकों की संख्या कितनी है?
ऐसा अनुमान है कि यूक्रेन और उसके आस-पास रूसी सैनिकों की संख्या हाल के सप्ताह में एक लाख से एक लाख 90 हज़ार के बीच हो सकती है.
पिछले शुक्रवार को अमेरिका ने कहा था कि यूक्रेन और उसके आस-पास रूस ने 169,000 से 190,000 के बीच सैनिक तैनात कर रखे हैं.
यूरोपीय सुरक्षा और सहयोग संगठन ओएससीई में अमेरिकी राजदूत माइकल कारपेंटर ने कहा था- "इस संख्या में यूक्रेन की सीमा के आसपास, और बेलारूस में तथा कब्ज़ा किए हुए क्षेत्र क्राइमिया में तैनात सैनिक शामिल हैं. इनके अलावा इस संख्या में इन इलाक़ों में रूसी सुरक्षा गार्ड और अन्य घरेलू सुरक्षाकर्मी भी शामिल हैं. साथ ही पूर्वी यूक्रेन में रूस की अगुआई वाली सेनाएँ भी इस संख्या में शामिल हैं."
वहीं इससे पहले ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वॉलेस ने कहा था कि रूसी थल सेना के 60% सैनिक रूस और बेलारूस की सीमा के पास जुटे हुए हैं.
उधर यूक्रेन के रक्षा मंत्री ने ये संख्या 149,000 बताई थी.
इस सबके बारे में रूस ने कुछ स्पष्ट नहीं कहा है. संयुक्त राष्ट्र में रूस के उप-राजदूत दमित्री पोलांस्की ने कहा - "ये सब हमारे पश्चिम के साथियों के दिमाग़ की उपज है."
पिछले सप्ताह रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा था कि उनके दक्षिण और पश्चिम के ज़िलों की कुछ सैन्य टुकड़ियों ने अपना अभ्यास ख़त्म कर लिया है और वो अपने स्थायी ठिकानों पर लौट रहे हैं.
मगर सैन्य संगठन नेटो का कहना था कि उसे ज़मीन पर इसका कोई सबूत नहीं दिखा है.
नेटो महासचिव जेन्स स्टोल्टनबर्ग ने तब कहा था, "इसके उलट, ऐसा लगता है रूस सैन्य बंदोबस्त बढ़ाता जा रहा है."
पश्चिम के अधिकारियों ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया है कि अभी जो ख़ुफ़िया जानकारी मिल रही है उससे ऐसा लगता है रूसी सैनिक उस रेंज में पहुँच चुके हैं जहाँ से यूक्रेन पर हमला बोला जा सकता है.
उनका कहना है कि उनकी दो-तिहाई सेना सीमा से 50 किलोमीटर से भीतर के दायरे में हैं.
सैटेलाइट से मिली तस्वीरों से भी संकेत मिलता है कि कुछ रूसी सैन्य टुकड़ियाँ यूक्रेन की सीमा के पास छोटे समूहों में बँट गई हैं.
हालाँकि, कई जानकारों का मानना है कि यूक्रेन पर पूरी तरह धावा बोल देने, फिर उसके अधिकतर या सारे हिस्से पर कब्ज़ा करने के लिए रूस को अभी जितने सैनिक तैनात हैं, उससे बहुत ज़्यादा सैनिकों को जुटाना होगा.
यूक्रेन की सैन्य क्षमता और नेटो का साथ
रूस की तुलना में यूक्रेन की सेना बहुत छोटी है मगर उसे उत्तर अटलांटिक सैन्य संगठन नेटो की मदद मिल रही है.
अमेरिका ने यूक्रेन के भीतर तो कोई सेना नहीं भेजी है मगर उसके पास पोलैंड और रोमानिया में नेटो की सेना का हाथ मज़बूत करने के लिए 3,000 अतिरिक्त सैनिक भेजे हैं, और 8,500 अन्य सैनकों को अलर्ट पर रखा है.
अमेरिका ने साथ ही 20 करोड़ डॉलर के हथियार भेजे हैं जिनमें जेवलिन टैंक-रोधी मिसाइल और स्टिंगर लड़ाकू विमान-रोधी मिसाइल शामिल हैं. उसने साथ ही नेटो के सदस्य देशों को अमेरिका में बने हथियार यूक्रेन को देने की भी अनुमति दे दी है.
वहीं ब्रिटेन ने यूक्रेन को 2,000 कम-दूरी के टैंक-रोधी मिसाइल दिए हैं, 350 और सैनिकों को पोलैंड को भेजा है, और एस्टोनिया में 900 अतिरिक्त सैनिकों को भेजकर अपनी सैन्य क्षमता दोगुना कर दी है.
ब्रिटेन ने अपने और लड़ाकू विमानों को दक्षिणी यूरोप भेजा है और एक नौसैनिक जहाज़ को भी नेटो के अन्य लड़ाकू जहाज़ों के साथ भूमध्यसागर की निगरानी के लिए भेज दिया है.
उसने साथ ही अपने 1,000 सैनिकों को अलर्ट कर दिया है ताकि हमला होने की सूरत में वो यूक्रेन में किसी मानवीय संकट के समय मदद कर सकें.
डेनमार्क, स्पेन, फ़्रांस और नीदरलैंड्स ने भी अपने लड़ाकू विमानों और जहाज़ों को पूर्वी यूरोप और पूर्वी भूमध्यसागर में रवाना कर दिया है.
और उधर फ्रांस की भी योजना है कि वो रोमानिया में नेटो की सेना की अगुआई करे और अपने सैनिक वहाँ भेजे, मगर नेटो का कहना है कि इसकी पूरी योजना को अंतिम रूप देने में कई सप्ताह लग जाएँगे.
नेटो ने पिछली बार यूक्रेन के लिए क्या किया था?
2014 में यूक्रेन के लोगों ने वहाँ रूस-समर्थक राष्ट्रपति को हटा दिया जिसके बाद रूस ने यूक्रेन के दक्षिणी प्रांत काइमिया पर क़ब्ज़ा कर लिया था.
उसने साथ ही पूर्वी यूरोप के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा करने वाले रूस-समर्थक अलगाववादियों को भी मदद दी थी.
उस वक़्त नेटो ने हस्तक्षेप नहीं किया था, मगर उसने तब पहली बार इसके जवाब में पूर्वी यूरोप के कई देशों में अपनी सेना तैनात कर दी थी.
नेटो ने एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया और पोलैंड में बटालियन स्तर की चार बहुराष्ट्रीय टुकड़ियाँ और रोमानिया में एक बहुराष्ट्रीय ब्रिगेड तैनात की हुई है.
उसने साथ ही बाल्टिक देशों और पूर्वी यूरोप में वायु क्षेत्र की निगरानी भी बढ़ा दी है ताकि किसी रूसी विमान के नेटो सदस्य देशों की वायु सीमा का उल्लंघन करने पर उसे पकड़ सके.
रूस इस बात से नाराज़ रहता है और चाहता है कि ये सेनाएँ बाहर निकल जाएँ.
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