रूस और अमेरिका 'घर में घुसने पर क्या करेंगे' वाली टिप्पणी पर भिड़े

अभी यूक्रेन का विवाद चल ही रहा था कि रूस ने कज़ाख़स्तान में उपजी हिंसा के बीच अपने सैनिकों को भेज दिया था.

अमेरिका ने इसे लेकर भी रूस पर तीखा तंज़ किया. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने इसी महीने आठ जनवरी को कहा, ''एक बार रूसी आपके घर में आ गए तो कई बार उन्हें बाहर करना बहुत मुश्किल होता है.''

रूस के विदेश मंत्री ने एंटनी ब्लिंकन की इस टिप्पणी पर कड़ी आपत्ति जताई और पलटवार करते हुए कहा, ''कज़ाख़स्तान की त्रासदी पर अमेरिकी विदेश मंत्री ने बहुत तुच्छ बयान दिया है. अगर ब्लिंकन को इतिहास का अंदाज़ा है तो उनके दिमाग़ में कुछ बातें होनी चाहिए थी.''

रूसी विदेश मंत्रालय ने कहा, ''जब अमेरिकी आपके घर में हों तो आपका ज़िंदा बचना मुश्किल है. लूट और रेप से बचना भी मुश्किल है.''

रूसी विदेश मंत्रालय ने ब्लिंकन को आड़े हाथों लेते हुए कहा, ''उत्तरी अमेरिकी के इंडियन्स, कोरियाई, वियतनामी, इराक़ी, पनामा के लोग, युगोस्लावियन, लीबियाई, सीरियाई और तमाम ऐसे बदनसीब लोग, जिन्हें अपने घर में अमेरिका को बिन बुलाए मेहमान की तरह झेलना पड़ा, उनके पास बताने को बहुत कुछ है.''

रूस ने क्या कहा?

रूसी विदेश मंत्रालय ने लिखा, ''ब्लिंकन को पता होना चाहिए कि कज़ाख़स्तान हमारा दोस्त देश है और रूस के साथ उसकी रणनीतिक साझेदारी है. वहाँ भड़की हिंसा देश की सुरक्षा और अखंडता को बाधित करने की कोशिश थी. इसमें प्रशिक्षित और संगठित बाहरी समूहों का इस्तेमाल किया गया. कज़ाख़स्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायेव ने कलेक्टिव सिक्यॉरिटी ट्रीटी ऑर्गेनाइज़ेशन (सीएसटीओ) के तहत मदद मांगी. छह जनवरी को CSTO कलेक्टिव पीसकीपिंग फ़ोर्स भेजा गया.''

यूक्रेन को लेकर रूस और अमेरिका आमने-सामने हैं. सोमवार को जेनेवा में अमेरिका और रूस के विदेश मंत्रालय के दो राजनयिकों के बीच क़रीब साढ़े सात घंटों तक हुई वार्ता बिना किसी नतीजे पर पहुँचे ख़त्म हो गई.

इस वार्ता में सैन्य अधिकारी भी मौजूद थे. यूक्रेन पर रूस के हमले का ख़तरा बढ़ता जा रहा है और दूसरी तरफ़ अमेरिका रूस को लगातार आगाह कर रहा है कि वो इसकी भारी क़ीमत चुकाएगा.

'किसी देश को मजबूर नहीं कर सकते'

अमेरिका और यूरोप के देश यूक्रेन संकट में नेटो के मंच तले रूस के ख़िलाफ़ एक साथ हैं. यूक्रेन से लगी सीमा पर हज़ारों की संख्या में रूसी सैनिक तैनात हैं. हालांकि रूस का कहना है कि उसका हमला करने का कोई इरादा नहीं है.

अमेरिकी अधिकारियों ने रूस के साथ सोमवार को हुई वार्ता को लेकर कहा है कि वार्ता रणनीतिक सुरक्षा संवाद का हिस्सा है और यह आगे भी जारी रहेगी. इसकी शुरुआत पिछले साल राष्ट्रपति बाइडन और पुतिन के बीच हुई थी. अब इस वार्ता में यूक्रेन सबसे अहम मुद्दा हो गया है.

सोमवार की वार्ता के बाद अमेरिका की उप-विदेश मंत्री वेंडी शर्मन ने कहा, ''एक देश दूसरे देश की सीमा और उसकी विदेश नीति बल का इस्तेमाल कर नहीं बदल सकता है. एक देश अपने बल से किसी देश को मजबूर नहीं कर सकता है कि वो किस अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में रहे. हम किसी को भी नेटो की 'ओपन डोर पॉलिसी' को बाधित करने की अनुमति नहीं दे सकते. हमारी यह नीति नेटो के केंद्र में रही है.''

दूसरी तरफ़ रूसी उप-विदेश मंत्री सेर्गेई रिबकोव न कहा, ''हम इस चीज़ को सुनिश्चित करेंगे कि यूक्रेन नेटो में कभी नहीं शामिल हो पाए.''

रूस ने पूछा- आग से क्यों खेल रहे हैं?

अगर रूस कहता है कि यूक्रेन से भिड़ने का उसका कोई इरादा नहीं है तो अमेरिका का क्या जवाब होगा. इस सवाल के जवाब में वेंडी शर्मन ने कहा, ''मुझे इसका जवाब नहीं पता है. मैं स्पष्ट कर देना चाहती हूं कि बिना तनाव के रचनात्मक और कामयाब वार्ता होना बहुत कठिन है.''

रूस ने अमेरिका के सामने वार्ता से पहले कुछ मांगें रखी थीं. रूस ने इस बात की गारंटी मांगी थी कि यूक्रेन नेटो में शामिल नहीं होगा. लेकिन अमेरिका ने भी इसका जवाब बहुत तल्खी से दिया था. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा था कि कुछ मांगे ऐसी हैं, जिन्हें नहीं मानी जा सकती. नेटो ने भी कहा है कि यूक्रेन एक संप्रभु देश है और वो अपना फ़ैसला ख़ुद ले सकता है.

रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, सोमवार को जिनेवा में बैठक के बाद रूसी उप-विदेश मंत्री सेर्गेई रिबकोव ने कहा कि उन्होंने अमेरिका को समझाने की कोशिश की है वो वे आग से खेल रहे हैं.

रिबकोव ने सोमवार को कहा, ''हम गतिरोध से बचने के लिए जेनेवा आए थे. मैंने अमेरिकी पक्ष को भरपूर समझाने की कोशिश की कि वे आग से क्यों खेल रहे हैं और यह उनके हित में नहीं है. हमने उन्हें समझाने की कोशिश की है कि हमारा पक्ष क्यों सही है.''

अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों का कहना है कि रूस ने यूक्रेन की सीमा पर एक लाख 75 हज़ार सैनिकों की तैनाती कर रखी है. अमेरिका का कहना है कि यूक्रेन पर रूसी हमले की योजना अभी टली नहीं है.

पुतिन नहीं चाहते हैं कि सोवियत यूनियन के हिस्सा रहे देशों में अमेरिका और नेटो का प्रभाव बढ़े. अमेरिका भी इस बार झुकने के लिए तैयार नहीं है. अमेरिका आधिकारिक रूप से कह रहा है कि वो यूक्रेन में मिसाइल और सैन्य तैनाती करेगा. अमेरिका का कहना है कि यूक्रेन के मामले में यूरोप को भी मुखर होना होगा.

यूक्रेन नेटो का सदस्य नहीं है लेकिन नेटो देशों से उसका सहयोग काफ़ी है. यूक्रेन ने नेटो में शामिल होने की भी इच्छा जताई है. दूसरी तरफ़ पुतिन कह रहे हैं कि वे नेटो का और विस्तार नहीं चाहते हैं. पुतिन ये भी चाहते हैं कि यूक्रेन से नेटो और ईयू के सैनिक वापस जाएं.

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