यूक्रेन संकट के बीच रूस क्यों पहुंचे हैं इमरान ख़ान, भारत पर होगा क्या असर?

इमरान ख़ान

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    • Author, शुमाइला जाफ़री
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़, इस्लामाबाद

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान दो दिवसीय दौरे पर रूस में हैं. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के मुताबिक वो रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बुलावे पर गए हैं.

पाकिस्तान के किसी निर्वाचित नेता का 23 साल में पहला रूस दौरा ऐसे वक़्त हो रहा है जब रूस-यूक्रेन तनाव चरम पर है. इस दौरे को क्षेत्रीय रणनीति के लिहाज से काफ़ी अहम माना जा रहा है.

लेकिन पाकिस्तान को इससे क्या हासिल होगा? इस सवाल के साथ ये भी पूछा जा रहा है कि इमरान ख़ान के दौरे से भारत और रूस की सामरिक साझेदारी पर क्या असर पड़ेगा?

इमरान ख़ान के दौरे में आर्थिक और व्यापारिक एजेंडा, ज़ाहिर तौर पर होंगे लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इसका एक राजनीतिक संदेश भी है.

ये दौरा इस रूप में भी देखा जाएगा कि शीत युद्ध के दौरान पाकिस्तान जिस अमेरिकी खेमे में था, उससे अब दूर हो रहा है. पाकिस्तान अब क्षेत्रीय शक्तियों के साथ अपने संबंधों को विस्तार देना चाहता है ताकि व्यापार और ऊर्जा को लेकर सहयोग बढ़ाया जा सके.

पुतिन

दौरे का समय

इमरान ख़ान रूस के दौरे पर तब गए हैं, जब यूक्रेन के साथ तनाव युद्ध की स्थिति के क़रीब है. इमरान ख़ान के दौरे के समय को भी काफ़ी अहम माना जा रहा है.

विश्लेषकों का मानना है कि इससे एक संकेत जाएगा कि पाकिस्तान अपना पक्ष चुन रहा है और वह अमेरिका के साथ पश्चिम विरोधी खेमे का हिस्सा बन रहा है.

पाकिस्तान के यूक्रेन से भी अच्छे संबंध रहे हैं और इस दौरे का असर यूक्रेन से रिश्तों पर भी पड़ सकता है.

इस्लामाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रैटिजिक स्टडीज़ में तैमूर ख़ान रूस मामलों के विशेषज्ञ हैं. ख़ान मानते हैं कि पाकिस्तान को इस दौरे को लेकर अपने सहयोगियों को भरोसे में लेना चाहिए.

तैमूर ख़ान कहते हैं, ''यह बहुत जटिल वक़्त है. रूस का ध्यान पूरी तरह से यूक्रेन पर केंद्रित है और यह दौरे का सही वक़्त नहीं है. इस वक़्त पाकिस्तान जो चाहता है, उसे लेकर मीडिया का भी ध्यान नहीं जाएगा. अगर पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में विकल्पों को खुला रखना चाहता है और अतीत की तरह किसी खेमे में नहीं जाना चाहता है तो यह इमरान ख़ान के दौरे का सही वक़्त नहीं है. इससे ग़लत संदेश जाएगा.''

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भारत पर असर

तैमूर ख़ान मानते हैं कि पाकिस्तान और रूस के रिश्ते में गर्मजोशी आने से रूस और भारत के बीच जो सैन्य और आर्थिक साझेदारी है, उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा. ख़ान कहते हैं कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाज़ार है और हर देश चाहता है कि भारत के साथ संबंध ठीक रहे.

तैमूर ख़ान कहते हैं, ''पाकिस्तान और रूस के बीच क़रीबी से भारत का संबंध रूस से ख़राब नहीं होगा. मॉस्को दक्षिण एशिया के दोनों प्रतिद्वंद्वी देश भारत-पाकिस्तान से अलग-अलग स्तर पर संबंधों को जारी रखेगा. रूस पाकिस्तान के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं करेगा, जिससे भारत से उसकी क़रीबी पर असर पडे़.''

तैमूर कहते हैं कि भारत और पाकिस्तान के रूस से संबंधों की तुलना नहीं की जा सकती है. इसमें भारी विषमता है. मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास के आँकड़ों के अनुसार, 2020-21 में भारत का रूस से द्विपक्षीय व्यापार आठ अरब डॉलर का था. भारत और रूस 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार 30 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं.

राष्ट्रपति पुतिन पिछले साल भारत के दौरे पर आए थे और उन्होंने ऊर्जा, व्यापार के अलावा रक्षा क्षेत्र पर 28 समझौते किए थे. इसमें भारतीय सेना के लिए 600,000 रूसी असॉल्ट राइफल बनाने की बात भी शामिल है. तैमूर ख़ान कहते हैं कि रूस ने भारत को पहले ही आश्वस्त कर दिया है कि पाकिस्तान से बढ़ती दोस्ती भारत की क़ीमत पर नहीं होगी. भारत भी इस बात को समझता है.

इसके बावजूद भारत के भीतर इमरान ख़ान के दौरे को लेकर कई तरह की बातें होंगी. इससे रूस पर दबाव बनाए रखने में मदद मिलेगी.

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वैश्विक मायने

जब रूस के भारत के साथ इतने मज़बूत संबंध हैं तो वह क्यों उसके कट्टर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान से क़रीबी बढ़ा रहा है. क्या उसे पता नहीं है कि भारत के लिए यह उलझन पैदा करने वाला होगा?

राजनीतिक टिप्णीकार डॉ हसन असकारी रिज़वी कहते हैं कि इस क्षेत्र में चीज़ें उलट-पुलट हो रही हैं और रूस यथार्थवादी रुख़ अपना रहा है.

रिज़वी कहते हैं, ''रूस और भारत दोनों विकल्पों को विस्तार दे रहे हैं. 2000 के दशक की शुरुआत में भारत ने अपनी पहुँच अमेरिका और यूरोप में बढ़ाई. अब रूस वही काम कर रहा है. रूस आर्थिक और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं को लेकर नई साझेदारी बना रहा है.''

रिज़वी कहते हैं, ''क्षेत्रीय और वैश्विक राजनीतिक आयाम बदल रहे हैं. सोवियत संघ के पतन के बाद से रूस आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है. लेकिन अब एक विश्व नेता के तौर पर उभरने के लिए तैयार है. एशिया-पैसिफिक में चीन को रोकने के लिए जब भारत और अमेरिका रणनीतिक साझेदार बने तो रूस को लगा कि पाकिस्तान की तरफ़ थोड़ा मुड़ना सही रहेगा.''

रिज़वी का कहना है, ''पाकिस्तान को भी लगा रहा है कि वह अब किसी एक खेमे में लंबे समय तक नहीं रह सकता है. विदेश नीति को बहुआयामी बनाने की ज़रूरत है. ख़ास कर क्षेत्रीय स्तर पर. इस्लामाबाद अब भी अमेरिका के साथ रिश्ते को अहमियत देता है. दोनों देशों के बीच संबंध ऐतिहासिक और कई स्तरों पर रहे हैं. लेकिन पाकिस्तान सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रह सकता. पाकिस्तान ने चीन से रिश्ता मज़बूत किया है और अब रूस से करना चाहता है.''

डॉ रिज़वी को लगता है कि पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्ते में अविश्वास के बाद तनाव के कारण चीन और रूस उसकी जगह भरते दिख रहे हैं.

रिज़वी कहते हैं कि दोनों देशों के बीच अभी छोटी कोशिश हुई है, इसलिए यह कहना जल्दबाज़ी होगी कि रूस और पाकिस्तान बहुत क़रीब आ गए हैं. रिज़वी का मानना है कि इमरान ख़ान का दौरा काफ़ी अहम है और यह आने वाले दिनों में प्रभावी साबित हो सकता है.

भारत

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व्यापारिक संबंध

तैमूर ख़ान कहते हैं कि इमरान ख़ान के इस दौरे में पाकिस्तान स्ट्रीम गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को सबसे ख़ास माना जा रहा है. यह पाइपलाइन कराची से पंजाब के कासुर तक (1,100 किलोमीटर) प्रस्तावित है. इसे उत्तरी-दक्षिण पाइपलाइन भी कहा जाता है. इस पाइपलाइन के ज़रिए सालाना 12.4 अरब क्यूबिक मीटर गैस लाने की योजना है.

इसमें पाकिस्तान का 74 फ़ीसदी हिस्सा है. इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत क़रीब 2.3 अरब डॉलर है. पाकिस्तान ऊर्जा की किल्लत से जूझ रहा है. ख़ास कर सर्दियों में गैस की मांग बढ़ जाती है. इस प्रोजेक्ट के ज़रिए पाकिस्तान की ऊर्जा कमी की भरपाई की जा सकती है. हालांकि रूस की चिंता है कि उसे इस प्रोजेक्ट से तत्काल कोई सीधा फ़ायदा नहीं मिलेगा. कहा जा रहा है कि रूस की इस प्रोजेक्ट में भागीदारी व्यावसायिक से ज़्यादा रणनीतिक है.

डॉ रिज़वी कहते हैं कि पाकिस्तान और रूस के संबंधों में गर्माहट की चर्चा भले है लेकिन अभी मंज़िल दूर है. वह कहते हैं कि अभी दोनों देशों ने कुछ सांकेतिक क़दम ही उठाए हैं. रिज़वी कहते हैं, ''दोनों देशों के बीच सद्भावना है लेकिन आर्थिक सहयोग के स्तर पर कुछ ठोस नहीं है.''

वह कहते हैं, ''जिस तरह से पाकिस्तान का आर्थिक सहयोग चीन और अमेरिका के साथ है, वैसा रूस के साथ कभी नहीं होगा. लेकिन संभावनाएं पर्याप्त हैं और इस दौरे की आपसी सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका हो सकती है.''

रूस और चीन

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रक्षा क्षेत्र में साझेदारी

पाकिस्तान ऐसी साझेदारी की तलाश में है, जिससे उसकी अर्थव्यवस्था की सेहत ठीक हो. लेकिन ऐसा लगता है कि रूस इस्लामाबाद से सुरक्षा संबंध विकसित करना चाहता है. तैमूर ख़ान कहते हैं कि सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों पर जमी बर्फ़ पिघलाने वाला साबित हो सकता है. 2014 में राष्ट्रपति पुतिन ने पाकिस्तान से हथियारों को लेकर प्रतिबंध हटा लिया था. रूसी मिग-35M कॉम्बैट हेलिकॉप्टर को लेकर पाकिस्तान से एक समझौता भी हुआ था.

अफ़ग़ानिस्तान से अमेरिकी नेतृत्व वाला सैन्य गठबंधन वापस गया तब से पाकिस्तान और रूस के बीच रक्षा सहयोग बढ़ा है. इसके बाद से शीत युद्ध में अमेरिकी खेमे वाला पाकिस्तान रूस के क़रीब आता दिख रहा है. तैमूर ख़ान मानते हैं कि रूस और पाकिस्तान दोनों अफ़ग़ानिस्तान के भविष्य को लेकर एक जैसे सोचते हैं. दोनों चाहते थे कि काबुल से विदेशी सैनिक वापस जाएं.

तैमूर ख़ान कहते हैं कि चीन और रूस के बीच अच्छे संबंधों के कारण भी पाकिस्तान और रूस की क़रीबी बढ़ रही है. चीन में विंटर ओलंपिक के उद्घाटन समारोह में रूसी राष्ट्रपति पुतिन और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान दोनों पहुँचे थे. अगर यह संबंध उम्मीद के हिसाब से बढ़ता रहा तो वैश्विक राजनीति के लिए अहम साबित होगा. तैमूर ख़ान को लगता है कि पाकिस्तान चीन और रूस के संबंधों में और गर्मजोशी भर सकता है.

2018 में रूस-पाकिस्तान जॉइंट मिलिटरी कंसल्टेटिव कमिटी (जेएमसीसी) बनी थी. पहली बार ऐसा हुआ कि पाकिस्तानी सेना के अधिकारियों को रूसी सेना ने ट्रेनिंग दी. दोनों देशों के बीच कई बार आतंकवाद विरोधी सैन्य अभ्यास भी हो चुका है. राष्ट्रपति पुतिन ने जब इस्लामोफ़ोबिया के ख़िलाफ़ बोला तो पाकिस्तान में स्वागत हुआ. इमरान ख़ान ने पुतिन की जमकर तारीफ़ की थी.

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