यूएई के साथ हुए आर्थिक समझौते से भारत को क्या-क्या फ़ायदे होंगे?

संयुक्त अरब अमीरात

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इमेज कैप्शन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ यूएई के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद
    • Author, अर्चना शुक्ला
    • पदनाम, बीबीसी न्यूज़

भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने और दोनों देशों के बीच का कारोबार 100 अरब डॉलर के पार ले जाने के लिए दोनों देशों के बीच शुक्रवार 18 फ़रवरी को एक ऐतिहासिक समझौते पर दस्तख़त किए गए.

दोनों देशों के बीच हुआ यह समझौता एक 'व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता' (सीईपीए) है. यह भारत का किसी भी अरब देश (मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के देश) से हुई पहली सीईपीए संधि भी है.

सीईपीए संधि के तहत सामानों का कारोबार बढ़ाने के साथ सेवाओं का व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी ज़ोर दिया जाता है. इसके लिए टैरिफ़ (कस्टम और आयात शुल्क) कम करने के अलावा व्यापार के रास्ते में आने वाली अड़चनें दूर करने पर ज़ोर रहता है.

भारत और यूएई के बीच हुआ यह सीईपीए इस लिहाज से ख़ास है कि इसके लिए दोनों देशों ने काफ़ी तेज़ी से बातचीत की प्रक्रिया पूरी की.

इसे म​हज़ 88 दिनों में पूरा किया गया है, जो कि एक रिकॉर्ड है. दुनिया में अभी तक किसी भी सीईपीए को इतने कम समय में अंज़ाम नहीं दिया जा सका है.

पांच साल में व्यापार ढाई गुना करने का लक्ष्य

यूएई के साथ भारत का कारोबार नए मुक़ाम तक ले जाने के लिए इस समझौते में रक्षा, ऊर्जा, जलवायु और डिजिटल व्यापार जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के इंतज़ाम किए गए हैं.

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मौक़े पर अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख़ मोहम्मद बिन ज़ायद के साथ एक संयुक्त वर्चुअल शिखर सम्मेलन में भाग लिया.

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सम्मेलन को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, "बाज़ार तक पहुंच बढ़ने से अगले 5 सालों में, दोनों देशों के बीच सामानों का द्विपक्षीय कारोबार 100 अरब डॉलर और सेवाओं का कारोबार 15 अरब डॉलर तक पहुंच जाने की उम्मीद है."

इस तरह, दोनों देशों के बीच हुए इस व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते का महत्व यह है कि इसके ज़रिए अगले पांच साल में दोनों देशों के बीच सामानों का व्यापार ढाई गुना तो सेवाओं का व्यापार दो गुना करने का लक्ष्य रखा गया है.

फ़िलहाल यूएई, भारत का तीसरा और भारत, यूएई का दूसरा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है. 2021 में दोनों देशों का द्विपक्षीय व्यापार क़रीब 43 अरब डॉलर तक पहुंच गया.

इसमें भारत का निर्यात 17 अरब डॉलर रहा, तो आयात 26 अरब डॉलर का हुआ. भारत द्वारा बड़े पैमाने पर मंगाए जाने वाले पेट्रोलियम उत्पादों के चलते व्यापार का यह संतुलन अभी यूएई के पक्ष में झुका है.

मालवाहक जहाज़

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बाक़ी देशों में भी होगा फ़ायदा

भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि भारत के निर्यातकों के बड़े तबके के लिए यूएई एक अच्छा रास्ता है और अब वे पश्चिम एशिया के देशों, अफ्रीका और यूरोप के कुछ हिस्सों तक भी पहुंच सकेंगे.''

भारत इस समय ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, इसराइल जैसे कई और देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने के लिए बातचीत कर रहा है. माना जा रहा है कि यूएई के साथ हुए इस समझौते से बाक़ी समझौतों को भी गति मिलेगी.

इस समझौते को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में भारत के पूर्व दूत जयंत दासगुप्ता ने एक मीडिया संस्थान से बातचीत की.

उन्होंने कहा, "खाड़ी सहयोग परिषद यानी जीसीसी के सदस्य भी इसी तरह की सीईपीए संधि करना चाहते हैं. यूएई के साथ यह संधि हो जाने के बाद पूरी संभावना है कि जीसीसी से भी बातचीत तेज़ होगी और अगले 6 महीने में यह पूरी हो जाएगी. ऐसा होने पर भारत की पहुंच खाड़ी के सभी देशों तक हो जाएगी."

मालूम हो कि खाड़ी सहयोग परिषद में यूएई के अलावा सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान और क़तर सहित कुल छह देश हैं.

कपड़ा उद्योग

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किन सेक्टरों को मिलेगा फ़ायदा

इस संधि के बाद, भारत से होने वाले निर्यात के क़रीब 90 फ़ीसदी सामान पर यूएई आयात शुल्क घटा देगा. फ़िलहाल यूएई भारत से आने वाले सामान पर 5 फ़ीसदी का आयात शुल्क लगाता है.

इस सौदे में निर्यातकों और कारोबारियों को किसी ख़ास उत्पाद की मात्रा में आने वाली अचानक उछाल से बचाने के लिए एक स्थायी सुरक्षा तंत्र का भी इंतज़ाम किया गया है.

इस संधि की वजह से आयात शुल्क घटने और पश्चिम एशिया के बाज़ार मिलने से भारत के रत्न और आभूषण, कपड़ा, चमड़े के सामान, खाद्य उत्पाद, कृषि और मेडिकल उत्पाद उद्योगों को फ़ायदा मिलने की उम्मीद है.

सोने के आयात पर दोनों देशों द्वारा आयात शुल्क को कम करने से सबसे ज़्यादा लाभ भारत के जूलरी सेक्टर को होने वाला है. भारत हर साल 200 टन तक के सोने के आयात पर कम आयात शुल्क लेने पर सहमत हो गया है. भारत ने 2020-21 में यूएई से क़रीब 70 टन सोने का आयात किया था.

हालांकि, कई सेक्टरों को इस समझौते के नुक़सान से बचाने के लिए इस समझौते से बाहर रखा गया है.

ऐसे क्षेत्रों में डेयरी, फल, सब्ज़ियां, अनाज, चाय, कॉफ़ी, चीनी, तंबाकू, कोक, प्राकृतिक रबर, टायर, फुटवियर, खिलौने, प्लास्टिक, एल्युमीनियम और तांबे के स्क्रैप, चिकित्सा उपकरण, ऑटो और ऑटो के कल पुर्जे आदि शामिल हैं. हालांकि इन्हें प्रोडक्शन लिंक्ड इनसेंटिव स्कीम के तहत लाभ दिया जाएगा.

दुबई

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इस समझौते के मुख्य बिंदु:-

नए व्यापार, निवेश और इनोवेशन डायनेमिक्स की विकास गति तेज़ करने के लिए इस समझौते के संयुक्त विज़न स्टेटमेंट ने दोनों देशों के संबंधों के भविष्य की दिशा तय कर दी है.

1. आर्थिक साझेदारी

आर्थिक साझेदारी के तहत यूएई के जेबेल अली फ्री जोन में डेडिकेटेड इंडिया मार्ट की स्थापना होगी तो भारत में यूएई की कंपनियों के लिए एक डेडिकेटेड इनवेस्टमेंट ज़ोन बनाया जाएगा. साथ ही एक ज्वाइंट फूड कॉरिडोर भी बनाने पर सहमति बनी है.

यूएई के अबू धाबी में लॉजिस्टिक्स और सर्विसेज़, फार्मास्यूटिकल्स, चिकित्सा उपकरण, कृषि, एग्रीटेक, स्टील और एल्युमीनियम जैसे क्षेत्रों में उद्योगों के लिए उन्नत टेक्नोलॉजी ज़ोन बनाए जाएंगे, जहां भारतीय निवेशकों के लिए निवेश के नए मौक़े बनेंगे.

2. ​रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र

समुद्र के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाए जाएंगे, डिफ़ेंस के क्षेत्र में लेन-देन जारी रहेगा, अनुभवों को साझा किया जाएगा, प्रशिक्षण और क्षमता बढ़ाने के लिए प्रयास होते रहेंगे.

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों ही स्तरों पर ''चरमपंथ और आतंकवाद के साथ सीमा पार से चलाए जाने वाले और आतंकवाद'' से मिलकर लड़ने की प्रतिबद्धता को स्वीकार किया गया है.

3. ऊर्जा साझेदारी

भारत यूएई के अहम ऊर्जा कारोबार साझेदारों में से एक है. समझौते के तहत यूएई ने भारत की बढ़ती ऊर्जा मांग पूरी करने के लिए सहयोग देने का वचन दिया है. भारत के सामरिक पेट्रोलियम भंडार कार्यक्रम में निवेश करने वाला पहला अंतरराष्ट्रीय साझेदार यूएई ही होगा.

इस समझौते में ऊर्जा के उपयोग में हो रहे बदलाव का समर्थन करते हुए 'लो कार्बन फ़्यूचर' के लिए मिलकर काम करने पर सहमति दी गई है.

कार चार्जिंग

4. जलवायु परिवर्तन रोकने के प्रयास और ग्रीन एनर्जी

ऊर्जा उपयोग में हो रहे बदलाव और जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते के पालन के लिए एक दूसरे के स्वच्छ ऊर्जा मिशनों का समर्थन किया जाएगा.

साथ ही संयुक्त हाइड्रोजन टास्क फोर्स भी बनाई जाएगी, ताकि नई तकनीकों की खोज हो सके. इस मामले में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.

5. टेक्नोलॉजी

अहम टेक्नोलॉजी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाया जाएगा. ई-कॉमर्स और ई-पेमेंट सॉल्यूशंस को दोनों देश बढ़ावा देंगे.

इसके अलावा, फ़िनटेक, एडुटेक, हेल्थकेयर, लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन, एग्रीटेक, चिप डिज़ाइन और ग्रीन एनर्जी पर ज़्यादा ध्यान देते हुए दोनों देशों के स्टार्ट-अप को बढ़ावा दिया जाएगा.

यूएई में भारत के प्रसिद्ध शिक्षा संस्थान आईआईटी की स्थापना की जाएगी.

6. कौशल सहयोग

यूएई के श्रम बाज़ार के लिए कुशल लोगों की ज़रूरत को भारत से पूरा किया जाएगा. इसके लिए दोनों देश आपसी सहमति से पेशेवर मानक और कौशल ढांचे का विकास करेंगे.

7. स्वास्थ्य सहयोग

टीकों की आपूर्ति बेहतर करने और भारत के हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर के विकास में सहयोग देने के लिए यूएई अनुसंधान, उत्पादन और विकास के कामों में अपना निवेश बढ़ाएगा.

वंचित देशों की स्वास्थ्य ज़रूरतें पूरी करने के लिए सहयोग देने पर भी सहमति देनों देशों के बीच बनी है.

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