यूक्रेन संकट: पुतिन से मिलने को बाइडन हुए तैयार, क्या निकलेगा हल

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अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन यूक्रेन संकट को लेकर रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ वार्ता के लिए "सैद्धांतिक" तौर पर सहमत हो गए हैं.
व्हाइट हाउस ने कहा है कि फ़्रांस की ओर से प्रस्तावित ये सम्मेलन तभी आयोजित किया जाएगा जब रूस यूक्रेन पर हमला नहीं करेगा.
उम्मीद की जा रही है कि इस वार्ता के ज़रिए यूरोप के सबसे बुरे सुरक्षा संकटों में से एक का कूटनीतिक समाधान खोजने में मदद मिल सकती है.
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ख़ुफ़िया जानकारी के अनुसार रूस कभी भी यूक्रेन पर सैन्य कार्रवाई कर सकता है. हालांकि, रूस ने इस दावे को ख़ारिज किया है.
इमैनुएल मैक्रों और व्लादिमीर पुतिन के बीच दो फ़ोन कॉल पर क़रीब तीन घंटे की बातचीत के बाद फ़्रांस के राष्ट्रपति की ओर से इस सम्मेलन का प्रस्ताव पेश किया गया है.
पुतिन और मैक्रों ने मॉस्को के समयानुसार सोमवार तड़के दूसरी बार फ़ोन पर बात की. इसके बाद मैक्रों ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन से भी 15 मिनट की बातचीत की.
फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय की ओर से बताया गया है कि इस संभावित सम्मेलन से जुड़ी बाकी तैयारियों को लेकर गुरुवार को होने वाली अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और उनके रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव की बैठक के दौरान चर्चा की जाएगी.
व्हाइट हाउस की ओर से ये भी कहा गया है कि रूस "यूक्रेन पर जल्द ही बड़े पैमाने पर हमला करने की तैयारी कर रहा है". व्हाइट हाउस ने कहा कि यदि ऐसा होता है तो अमेरिका भी रूस पर गंभीर कार्रवाई करने के लिए तैयार है.
अमेरिकी कंपनी मैक्सर ने कहा है कि नई सैटलाइट तस्वीरों में यूक्रेन की सीमा के पास रूस ने कई नए बख्तरबंद वाहनों और सैनिकों की तैनाती बढ़ाई है, जो यहां सैन्य तैयारी में आई तेज़ी का संकेत देते हैं.

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बढ़ रहा तनाव, क्या होने के आसार
बाइडन प्रशासन का अनुमान है कि रूस ने यूक्रेन के आसपास तक़रीबन 1 लाख 90 हज़ार सैनिकों को तैनात किया हुआ है. इसमें पूर्वी यूक्रेन के दोनेत्स्क और लुहान्स्क में मौजूद विद्रोही गुट भी शामिल हैं.
फ़्रांस के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, मैक्रों के साथ पहली फ़ोन कॉल के दौरान रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने इस संकट के कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देने पर सहमति जताई. इसलिए अब जल्द से जल्द सम्मेलन आयोजित करने के लिए कार्य किया जा रहा है.
क्रेमलिन की ओर से कहा गया है कि पुतिन ने तनाव बढ़ाने के लिए यूक्रेन की सेना को ज़िम्मेवार ठहराया है. वहीं, यूक्रेन ने इस दावे को ये कहते हुए ख़ारिज कर दिया है कि मॉस्को उकसावे वाली कार्रवाई कर रहा है जिसका मकसद बहाने से कीव पर हमला करना है.
हालांकि, फ़्रांस के राष्ट्रपति ने कहा कि दोनों ही नेता नॉर्मंडी फ़ॉर्मैट के ज़रिए वार्ता बहाल करने पर सहमत हो गए हैं. नॉर्मंडी फ़ॉर्मैट डोनबास में संघर्ष को हल करने के लिए बनाया गया एक समूह है जिसमें रूस, यूक्रेन, फ़्रांस और जर्मनी शामिल हैं.
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने कहा कि पुतिन की मैक्रों के प्रति दिखाई प्रतिबद्धता स्वागत योग्य है. ये दिखाता है कि वे अभी भी शायद इस समस्या का कूटनीतिक हल खोज लेंगे. लेकिन जॉनसन ने पुतिन से ये भी कहा कि वो "यूक्रेन की सीमा से सैनिकों को वापस बुलाएं".
इससे पहले रूस ने बेलारूस में अपने सैन्य अभ्यास में तेज़ी लाने की बात कही थी. बेलारूस में सैन्य अभ्यास के लिए 30 हज़ार सैनिक तैनात हैं. ये अभ्यास रविवार को ख़त्म होना था. बेलारूस की ओर से जारी बयान में पूर्वी यूक्रे में "लगातार बिगड़ती स्थितियां" भी इस अभ्यास के आगे बढ़ने की एक वजह है.
सीएनएन के साथ बातचीत के दौरान अमरीकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने कहा कि "हम जो देख रहे हैं, वो बताता है कि ये गंभीर है और किसी भी समय हमला हो सकता है."
उन्होंने कहा, "जब तक वास्तव में टैंक घूमते नहीं दिख रहे, विमान नहीं उड़ रहे...हम हर मौके का इस्तेमाल करेंगे और हर पल ये देखना होगा कि क्या कूटनीति अभी भी राष्ट्रपति पुतिन को सैन्य कार्रवाई आगे बढ़ाने से रोक सकती है."

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भयानक लड़ाई की 'आशंका'
ब्लिंकन की ओर से ये टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब अमरीका में कुछ अपुष्ट मीडिया रिपोर्टों में ये कहा गया है कि वॉशिंगटन का मानना है कि जल्द ही हमला किया जा सकता है.
सीबीएस न्यूज़ ने बताया कि अमेरिका के पास ख़ुफिया जानकारी है कि सीमा पर मौजूद रूसी कमांडरों को हमला करने का आदेश मिल गया है और अब वो हमले को अंजाम देने के तरीकों की योजना बना रहे हैं.
रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि हमले की शुरुआत साइबर अटैक से होगी और इसके बाद रूस मिसाइलें दागना और हवाई हमले शुरू करेगा. आखिर में ज़मीन पर मौजूद सेना कीव की घेराबंदी करेगी.
एक ख़ुफिया अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि रूस की क़रीब 75 प्रतिशत सेना यूक्रेन की सीमा पर तैनात है.
लेकिन यूक्रेन के रक्षा मंत्री एलेक्सी रेज़नीकोव ने कहा कि "कल या बाद में" हमला होने की आशंका न के बराबर है क्योंकि अभी तक सीमा के पास रूस ने हमला करने के लिए अलग समूह नहीं बनाए हैं.
रूस के राष्ट्रपति पुतिन ये मांग कर रहे हैं कि यूक्रेन को नेटो में शामिल न किया जाए. वहीं, पश्चिमी देशों का कहना है कि इससे रूस को कोई ख़तरा नहीं है.
ऐसी भी आशंकाएं हैं कि रूस की सैन्य कार्रवाई पूर्वी यूक्रेन में हुए उस ख़ूनख़राबे से भी ज़्यादा भयावह हो सकती है जिसमें 14 हज़ार लोगों की जान चली गई थी.
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