भारत और रूस मिलाएंगे दोस्ती का हाथ, क्या अमरीका होगा नाराज़

इमेज स्रोत, Getty Images
- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दो दिन के दौरे पर भारत में हैं.
इस दौरान पुतिन और भारतीय प्रधानमंत्री के बीच महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय और प्रांतीय मुद्दों पर शिखरवार्ता होगी.
इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.
पोस्ट X समाप्त
बताया जा रहा है भारत रूस से सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण एस-400 एयर डिफेन्स सिस्टम खरीदने वाला है और इससे संबंधित समझौते पर इस दौरे के दौरान समझौता होगा.
विघटन के पहले का सोवियत संघ भारत का गहरा मित्र हुआ करता था. लेकिन बीते कुछ सालों में जैसे-जैसे वैश्विक व्यवस्थाओं में बदलाव आते गए भारत का रुख़ अमरीका का तरफ झुकता गया.
माना जा रहा है कि अब एस-400 एयर डिफेन्स सिस्टम के साथ भारत फिर से अपने पारंपरिक मित्र रूस के साथ बेहतर संबंध बनाएगा.

इमेज स्रोत, EPA
भारत चाहता है रूस से बेहतर संबंध
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह कहते हैं, "बीते एक दशक (2005 के आसपास से) जैसे जैसे भारत का रुझान अमरीका की तरफ बढ़ा, उसका रुझान दूसरे देशों के साथ, ख़ास कर रूस की तरफ कम हुआ."
"साथ ही सुरक्षा के लिहाज़ से भारत ने अमरीका और अन्य देशों से हथियार खरीदना शुरु किया जिसका असर भारत-रूस संबंधों पर पड़ा."
प्रोफ़ेसर स्वर्ण सिंह बताते हैं कि जब मोदी भारत के प्रधानमंत्री बने उस वक्त रूस ने चीन के साथ गैस पाइपलाइन के लिए 400 बिलियन डॉलर का तीस साल का एक समझौता किया था. इसके बाद से रूस और चीन के संबंधों में बदलाव आया.
वो कहते हैं कि चीन और पाकिस्तान से रूस की नज़दीकी भारत के लिए हमेशा से परेशानी का कारण रही है.
"भारत हमेशा कोशिश करता रहा है कि वो रूस को जतलाए कि वो भारत का ख़ास मित्र है. एस-400 समझौते का सांकेतिक महत्व ये है कि ये चीन और पाकिस्तान को इशारा है कि रूस अभी भी हमारा ख़ास दोस्त है."
"साथ ही ये अमरीका को भी एक इशारा है कि हम आपके दोस्त हैं लेकिन हम आपकी सारी बातें मानने वाले नहीं हैं."

इमेज स्रोत, Reuters
एस-400 औऱ अमरीका की नाराज़गी
लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए भारत रूस से एस-400 खरीदना चाहता है. एस400 दुनिया का सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है.
सुरक्षा मामलों के जानकार उदय भास्कर बताते हैं, "जितने भी शक्तिशाली देश हैं जिनके पास भी मिसाइलें हैं वो मिसाइल डिफेंस सिस्टम या एयर डिफेंस सिस्टम भी लगाते हैं. उदाहरण के तौर पर अमरीका, रूस और चीन के पास ऐसे सिस्टम हैं."
"मैं कह सकता हूं कि अपने क्षेत्रीय परेशानियों को देखते हुए भारत को इसकी ज़रूरत तो है."

इमेज स्रोत, EPA
हालांकि उदय भास्कर बताते हैं कि इससे अमरीका के भारत से नाराज़ होने का ख़तरा है. कहा जा रहा है कि अगर भारत ने इस सौदे की घोषणा कर दी तो अमरीका के लिए यह बहुत निराशाजनक होगा.
बीते साल अमरीका दूसरे देशों पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित ने एक नया कानून बनाया है कैटसा (काउंटरिंग अमेरीकाज़ एडवर्सरीज़ थ्रू सैंकशंस ऐक्ट) जिसके तहत वो भारत पर प्रतिबंध लगा सकते हैं.
चीन ने रूस से एस400 एयर डिफेन्स सिस्टम खरीदा और अमरीका के उस पर प्रतिबंध लगा दिए. भारत को उम्मीद है कि उसे अमरीका थोड़ी छूट देगा हालांकि इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है.

इमेज स्रोत, Reuters
उदय भास्कर कहते हैं कि भारत के लिए अमरीका और रूस - दोनों देशों के साथ बेहतर संबंध बनाना ज़रूरी है और उसे इसके बारे में सोचना होगा.
वो कहते हैं, "भारत को एक राजनीतिक और सामरिक निर्णय लेना होगा कि अमरीका के साथ अपने संबंधों को किस तरह सुरक्षित रखना चाहते हैं और अपने पुराने मित्र रूस के साथ भी बेहतर संबंध रखने हैं."
फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि दो दोस्तों ने सालों बाद एक दूसरे की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया है.
हम बस यही उम्मीद कर सकते हैं कि अमरीका की नाराज़गी का सर इस पर नहीं पड़ेगा.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)












