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भारत में क़ैद समीरा की पाकिस्तान वापसी का रास्ता खुला, नागरिकता प्रमाण पत्र जारी
- Author, मोहम्मद ज़ुबैर ख़ान
- पदनाम, पत्रकार, बीबीसी उर्दू के लिए
पाकिस्तान के गृह मंत्री शेख़ रशीद के अनुसार, भारत में क़ैद पाकिस्तानी महिला समीरा को पाकिस्तानी नागरिकता प्रमाण पत्र जारी कर दिया गया है.
गृह मंत्री शेख़ रशीद के मुताबिक़, समीरा के परिवार का एनएडीआरए (नेशनल डाटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑथोरिटी) के जरिए वेरिफ़िकेशन करने के बाद विदेश मंत्रालय को पत्र भेज दिया गया है.
शेख़ रशीद के अनुसार, नई दिल्ली में मौजूद पाकिस्तानी उच्चायोग समीरा की नागरिकता की पुष्टि के साथ-साथ उनके यात्रा दस्तावेज़ भी जारी करेगा जिसके बाद समीरा और उनकी चार साल की बेटी की पाकिस्तान वापसी संभव हो सकेगी.
ग़ौरतलब है कि मुस्लिम लीग (नवाज़) के सीनेटर इरफ़ान सिद्दीक़ी ने भारत में क़रीब चार साल से क़ैद समीरा का मुद्दा सीनेट में उठाया गया था. उन्होंने कहा था कि मुस्कान की तरह पाकिस्तान की बेटी समीरा के बारे में भी कुछ सोचा जाए.
उन्होंने सीनेट के नेता डॉक्टर शहज़ाद वसीम से कहा था कि वह इस मामले को सरकार के सामने उठाएं. इसके बाद सीनेट के अध्यक्ष ने इसके लिए कार्ययोजना बनाने का आदेश दिया था.
दूसरी ओर, भारत के कर्नाटक के बेंगलुरू शहर के 'स्टेट होम फ़ॉर वूमेन' में पिछले छह महीने से डिपोर्ट होने का इन्तज़ार करने वाली पाकिस्तानी महिला, समीरा ने अपनी वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता एडवोकेट सुहाना बिस्वपटना के ज़रिए अपना संदेश बीबीसी तक पहुंचाया है.
उन्होंने कहा, "मैंने जो ग़लती की है क़ानून के हिसाब से मैं उसकी सज़ा भुगत चुकी हूं, लेकिन मेरे दुख कम होने का नाम नहीं ले रहे. परिवार वाले पहले ही मुझसे नाता तोड़ चुके थे, लेकिन अब भारत में मेरे पति ने भी मुझसे मुंह मोड़ लिया है. इस समय मेरा एकमात्र सहारा मेरा देश पाकिस्तान है."
समीरा ने अपनी वकील के ज़रिए पाकिस्तान सरकार से मांग की थी कि वह जल्द से जल्द भारत सरकार को उनके पाकिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि करे ताकि वह अपनी बेटी के साथ घर लौट सकें.
एडवोकेट सुहाना बिस्वपटना का कहना है कि क़ानूनी काम के सिलसिले में समीरा से उनकी मुलाक़ात होती रहती है. वो कहती हैं, "वह बहुत निराश हैं और अपनी चार साल की बेटी को लेकर चिंतित है. उनक बेटी अक्सर बीमार रहती है."
समीरा की वकील के मुताबिक़ भारत में बिना वीज़ा के दाख़िल होने के जुर्म में वह अब तक लगभग चार साल क़ैद की सज़ा काट चुकी हैं. क़ैद के शुरुआती दिनों में ही जेल में उनकी बेटी का जन्म हुआ था. मौजूदा वक्त में उन्हें एक ऐसे केंद्र में रखा गया है जहां उन विदेशियों को रखा जाता है, जो अपने-अपने देशों में डिपोर्ट होने से पहले क़ानूनी समस्याओं का सामना रहे होते हैं.
समीरा की वकील के मुताबिक़, क़रीब छह महीने से पाकिस्तान से नागरिकता का क़ानूनी सर्टिफ़िकेट न मिलने की वजह से, समीरा इस डिटेंशन सेंटर में हैं.
क़तर में शादी और भारत में निवास
एडवोकेट सुहाना बिस्वपटना के अनुसार, पांच भाइयों की बहन समीरा पाकिस्तान के कराची शहर की रहने वाली है. उनके माता-पिता पिछले कई सालों से क़तर में रह रहे हैं.
सुहाना बिस्वपटना के मुताबिक़, समीरा का जन्म क़तर में ही हुआ था लेकिन उनका और उनके परिवार का कराची और पाकिस्तान से रिश्ता कभी नहीं टूटा था.
समीरा की वकील के मुताबिक़, क़तर में ही समीरा का संपर्क भारत के एक मुस्लिम युवक से हुआ था. दोनों ने शादी करने का फ़ैसला किया.
सुहाना कहती हैं कि जब समीरा के परिवार वालों को इस बात का पता चला कि समीरा एक भारतीय युवक से शादी करने जा रही है, तो उन्होंने न सिर्फ़ शादी का विरोध किया बल्कि समीरा के साथ सख़्ती भी की. आख़िर में समीरा ने अपनी मर्ज़ी से शादी कर ली. शादी के बाद अपने पति के कहने पर 2016 में समीरा किसी तरह बिना वीज़ा के भारत आ गईं.
शुरुआत में कुछ दिन तो अच्छे गुज़रे, लेकिन फिर अधिकारियों ने उन्हें और उनके पति को गिरफ्तार कर लिया. उनके पति पर बिना वीज़ा के उन्हें भारत में प्रवेश दिलाने में मदद करने का आरोप लगाया गया था.
2017 के आख़िर में क़ैद के दौरान ही, समीरा ने एक बच्ची को जन्म दिया और कुछ ही दिनों में उनके पति को ज़मानत पर रिहा कर दिया गया. कराची में रहने वाली समीरा की एक क़रीबी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि समीरा ने अगले दो साल जेल में बिताए.
इस महिला के मुताबिक़ समीरा अपने पति से कहती थी कि वह जुर्म क़बूल कर लेगी लेकिन वह (पति) इसके लिए राज़ी नहीं हुआ, क्योंकि उनका मानना था कि अपराध क़बूल करने के बाद समीरा को डिपोर्ट कर दिया जाएगा. उसके पति के मुताबिक़ वे कोशिश कर रहे थे कि समीरा को न केवल रिहा किया जाए बल्कि उन्हें भारत में रहने की भी इजाज़त मिल जाए.
रिश्तेदार महिला के मुताबिक़ क़रीब दो, तीन साल बाद अचानक समीरा के पति ने उनसे (समीरा) से संपर्क करना बंद कर दिया और जब समीरा मोबाइल के ज़रिये संपर्क करती तो कोई जवाब नहीं मिलता था.
रिश्तेदार महिला के मुताबिक़ घर वाले तो उसे पहले ही छोड़ चुके थे, लेकिन पति से संपर्क टूटने के बाद उन्हें (समीरा को) कुछ भी पता नहीं चल पाता था, कि उनका केस कहां तक पहुंचा है.
इसके बाद एक एनजीओ प्रतिनिधिमंडल के प्रतिनिधि के रूप में, समीरा का संपर्क एडवोकेट सुहाना बिस्वपटना से हुआ, जो उन्हें जेल में मिलती हैं और उनकी अदालती कार्रवाई को आगे बढ़ा रही हैं.
बाद में समीरा ने अपना गुनाह क़बूल कर लिया, जिसके लिए उन्हें तीन साल की सज़ा सुनाई गई थी. उनकी ये सज़ा अब तक पूरी हो चुकी थी. उन पर जुर्माना भी लगाया गया जिसकी राशि की व्यवस्था भी उनकी वकील ने ही की थी.
पाकिस्तान वापसी में रुकावट
रिश्तेदार महिला के अनुसार, जब समीरा को पता चला कि उनके पति की अब उनमें कोई दिलचस्पी नहीं है, तो उन्होंने भारत से डिपोर्ट होकर पाकिस्तान वापस जाने का फ़ैसला किया.
एडवोकेट सुहाना बिस्वपटना का कहना है कि हमारे राज्य के कई उच्च अधिकारी चाहते हैं कि समीरा का दर्द कम हो, इसलिए कुछ लोगों ने व्यक्तिगत रूप से भी उनकी मदद की थी और इसी वजह से समीरा जेल से तो रिहा हो गईं, लेकिन अब डिटेंशन सेंटर में हैं.
समीरा के डिपोर्ट होने में अब एकमात्र रुकावट पाकिस्तान की तरफ़ से उनकी पाकिस्तानी नागरिकता का आधिकारिक प्रमाण पत्र है
'नई जिंदगी शुरू करना चाहती हैं समीरा'
एडवोकेट सुहाना बिस्वपटना के अनुसार समीरा को उनकी ग़लती की सज़ा मिल चुकी है और अब उनका अधिकार है कि नई ज़िंदगी शुरू करने के लिए समाज, क़ानून और संस्थाएं उनकी मदद करें.
उनके अनुसार, समीरा को दिल्ली में मौजूद दूतावास से दो बार कांसुलर सेवा मिली और दूतावास का रवैया समीरा के प्रति हमदर्दी वाला रहा.
समीरा की महिला रिश्तेदार का कहना है, "समीरा के पास अब अपनी बेटी के अलावा कुछ नहीं बचा है. वो अपनी बेटी के लिए एक नई ज़िंदगी की शुरुआत करना चाहती है. उसे ये मौक़ा मिलना चाहिए."
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