You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
पाकिस्तान जाकर किरन बन गईं मुसलमान, बच्चे कर रहे इंतज़ार
किरन बाला 12 अप्रैल को बैसाखी का त्योहार मनाने पाकिस्तान गई थीं, लेकिन 16 अप्रैल के बाद से उनका कोई अता-पता नहीं है.
33 साल की किरन सिख समुदाय से थीं और तक़रीबन 1800 दूसरे सिखों के साथ पाकिस्तान गई थीं.
किरन के पति का इंतक़ाल हो चुका है और वो होशियारपुर के गढ़शंकर की रहने वाली हैं.
उनके इस तरह अचानक लापता होने से भारत में रह रहा उनका परिवार परेशान है और उन्हें डर है कि कहीं किरन पाकिस्तान में किसी 'मुसीबत में तो नहीं फंस' गईं.
लाहौर के गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के सचिव गोपाल सिंह चावला ने अमृतसर के पत्रकार रविंदर सिंह रॉबिन को फ़ोन पर बताया, "हां, हमें पता चला है कि किरन जत्थे के साथ आई थीं, लेकिन अब उनकी कोई ख़बर नहीं है. अगर इस बारे में कोई शिकायत दर्ज की जानी है तो ये प्रशासन की तरफ़ से होगा, इसमें हमारी कोई भूमिका नहीं है.''
उन्होंने आगे कहा, "हमें ये भी पता चला है कि उन्होंने इस्लाम कबूल कर लिया था और हम इसका विरोध करते हैं."
किरन गढ़शंकर में अपनी आठ साल की बेटी, दो छोटे बेटों और सास-ससुर के साथ रहती थीं.
उनके पिता तरसेम सिंह गांव के एक गुरुद्वारे में ग्रंथी (पुजारी) हैं. उनका कहना है कि उन्होंने अपनी बेटी से तीन दिन पहले ही फ़ोन पर बात की थी.
उन्होंने बताया, "किरन ने कहा कि वो वापस नहीं आएंगी. मैंने सोचा कि वो मज़ाक कर रही है, लेकिन जब मुझे पता चला कि वो लाहौर जाकर मुसलमान बन गई है तो मेरे होश उड़ गए. मैं चाहता हूं कि वो वापस आ जाए और अपने बच्चों की देखभाल करे."
तरसेम सिंह ने कहा, "मुझे लगता है कि या तो उसे पाकिस्तानी ख़ुफ़िया एजेंसियों ने पकड़ लिया है या वो किसी मुसीबत में फंस गई है. वो एसजीपीसी की सदस्य है, एसजीपीसी को उसे वापस लाना चाहिए."
वहीं एसजीपीसी के सचिव दलजीत सिंह का कहना है कि उन्हें इस घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं मिली है.
इस्लामाबाद के मदरसा जामिया नइमिया के प्रबंधक रग़िब नईमी ने बीबीसी संवाददाता शुमाइला ज़ाफ़री को बताया कि "किरन बाला नाम की एक सिख महिला ने 16 अप्रैल को मदरसे में आकर इस्लाम क़बूल करने की इच्छा जताई थी."
उन्होंने ये भी बताया कि "क़ादरी मुबशहर ने पहले ये सुनिश्चित किया कि वो बिना किसी दबाव के अपनी मर्ज़ी से इस्लाम कुबूल करना चाहती है और फिर उनका धर्मांतरण कराया."
वहीं इस्लामाबाद में मौजूद भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें इस बारे में कुछ भी मालूम नहीं है.
भारत में पाकिस्तान के प्रवक्ता ख़्वाज़ा माज़ तेह ने कहा कि उन्हें भी इस बारे में कुछ पता नहीं है. हालांकि उन्होंने ये माना कि दिल्ली हाई कमिशन से पाकिस्तान जाने के लिए वीज़ा मिला था.
यह भी पढ़ें:
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)