चीनः सुस्ती के संकेत, फिर भी अर्थव्यवस्था पर जिनपिंग को भरोसा क्यों

Chinese President Xi Jinping addressing his statement during the opening of the Davos Agenda 2022.

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इमेज कैप्शन, दावोस में बैठक को संबोधित करते शी जिनपिंग
    • Author, बीबीसी मॉनिटरिंग
    • पदनाम, विश्लेषण

चीन की अर्थव्यवस्था में पिछले साल 8% की गति से वृद्धि होने की ख़बर आने के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चीनी अर्थव्यवस्था में भरोसा जताया है. चीन की मीडिया में जीडीपी को लेकर उत्साह जताया गया है मगर वहीं एक दिग्गज पूर्व संपादक ने अर्थव्यवस्था में दिख रही सुस्ती के लक्षणों को कमतर आँकने को लेकर मीडिया को आगाह भी किया है.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 17 जनवरी, सोमवार को दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के अपने भाषण में देश की 8 प्रतिशत जीडीपी वृद्धि की बात की. जिसे चीन की सरकारी मीडिया चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क ने प्रसारित और चाइना डेली ने रिपोर्ट किया.

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शी जिनपिंग ने कहा, ''चीन की अर्थव्यवस्था की गति अच्छी रही है. पिछले साल हमारे देश की जीडीपी में 8 प्रतिशत की वृद्धि हुई जिसने अच्छी ग्रोथ और कम मुद्रास्फीति के दोहरे लक्ष्य को प्राप्त किया''.

उन्होंने कहा,'' घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक माहौल में बदलाव ने ज़बरदस्त दबाव पैदा किया है, लेकिन चीनी अर्थव्यवस्था के मूल सिद्धांत, मुश्किल स्थिति में डटे रहने का गुण, भारी क्षमता और लंबी स्थिरता में कोई बदलाव नहीं है. हमें चीन की अर्थव्यवस्था के भविष्य पर पूरा भरोसा है''.

चीन के मीडिया ने जीडीपी के आंकड़ों को सकारात्मक बताया है. चीन की सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र माने जाने वाले समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स के अंग्रेजी संस्करण ने इसे सुदृढ़ विस्तार करार दिया है जिसने मार्केट की उम्मीदों और बड़ी अर्थव्यवस्थाओं को भी पिछले दो साल में पछाड़ दिया है.

A woman works in a shoe factory in China

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अख़बार ने इसके लिए पश्चिमी देशों की ओर से उछाले जा रहे कीचड़ के बावजूद महामारी का मुक़ाबला करने के लिए चीन की अपनाई ज़ीरो टॉलरेंस नीति को वजह बताया है.

चीन के सरकारी ब्रॉडकास्ट सीजीटीएन ने 17 जनवरी को राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो (एनबीएस) के आँकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विकास जितनी उम्मीद थी, उससे भी बेहतर हुआ है और ये दस सालों में सबसे तेज़ है.

वहीं शंघाई स्थित समाचार वेबसाइट गुआंचा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि ''चीन की कुल जीडीपी लगातार दो सालों में 15.75 ट्रिलियन डॉलर से अधिक थी. इसमें प्रति व्यक्ति जीडीपी 12,500 डॉलर रही जो विश्व औसत से अधिक थी.''

एनबीएस के निदेशक निंग जिझे ने 17 जनवरी को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, ''हमारा देश पहले ही दुनिया की प्रति व्यक्ति जीडीपी के औसत को पार कर चुका है. शुरुआती अनुमान के अनुसार 2021 में दुनिया की प्रति व्यक्ति जीडीपी लगभग 12,100 डॉलर थी जबकि हमारी जीडीपी 12,500 डॉलर थी''.

निंग जिझे ने चेतावनी देते हुए कहा, ''साथ ही हमें गंभीरता से पता होना चाहिए कि हमारा देश अभी भी उच्च-मध्यम आय वाले देशों की लिस्ट में है. हमारी प्रति व्यक्ति जीडीपी उच्च आय वाले देशों की निचली सीमा तक नहीं पहुंची है. विकसित देशों की तुलना में अभी भी एक अंतर है. हमारा देश अभी भी दुनिया का सबसे बड़ा विकासशील देश है''.

Women work in a factory in China

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संपादक ने चिंताजनक गिरावट की चेतावनी दी

ग्लोबल टाइम्स के प्रभावशाली पूर्व एडिटर इन चीफ, हू जिजिन ने चीन के ट्विटर जैसे वीबो प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया कि जीडीपी वृद्धि के बारे में साफ तौर पर नहीं कहा जा सकता क्योंकि जीडीपी ने 2021 की आखिरी दो तिमाहियों में धीमा होने के संकेत दिखाए थे.

हू जिजिन ने आगे कहा, ''हालांकि बढ़ते दबाव के कारण पिछले साल की चौथी तिमाही में चीन की जीडीपी में केवल चार प्रतिशत और तीसरी तिमाही में 4.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, लेकिन कुल मिलाकर पिछले साल के परिणाम अच्छे थे, लेकिन रूझान अच्छा नहीं था जो कि चिंताजनक है. ज्यादा से ज्यादा लोग परेशान हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था नीचे की ओर जा रही है और चीन के अंदर, खास तौर पर आर्थिक क्षेत्र में विश्वास डगमगा रहा है''

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हू जिजिन ने कहा कि एनबीएस के आंकड़े सही थे लेकिन आंकड़ों की व्याख्या जरूरत से ज्यादा सकारात्मक थी. हू ने कहा ''चौथी तिमाही में चार प्रतिशत की विकास दर और आर्थिक माहौल को करीब से छुआ गया था. इसमें लोगों की चिंताओं का विश्लेषण नहीं था''.

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि "समस्या के बारे में बात किए बिना या समस्या को कम करके अकेले सकारात्मक बात करने से प्रोत्साहन का असर नहीं होगा, क्योंकि समस्या वहीं है और हर कोई इसे देख और महसूस कर सकता है".

शी जिनपिंग

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शी जिनपिंग ने बचाव किया

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मंच पर अपने कॉमन प्रोस्पेरिटी प्रोग्राम का बचाव किया है. इस प्रोग्राम के कारम चीन में बड़े व्यवसायों पर कड़ी कार्रवाई देखी गई है.

चीन का कहना है कि इस प्रोग्राम का उद्देश्य अमीर और गरीब के बीच की खाई को कम करना है. अगर इस पर ध्यान नहीं दिया जाए तो ये कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार के लिए खतरा पैदा कर सकता है.

इस कार्रवाई से टेक्नॉलजी, शिक्षा और मनोरंजन के क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों को नुकसान हुआ है. शी जिनपिंग ने प्रतिनिधियों से कहा, '' हम जिस कॉमन प्रोस्पेरिटी की कामना करते हैं वह 'समतावाद' नहीं है''.

उन्होंने कहा. ''हम पहले से छोटी सी चीज को बड़ा करेंगे और फिर सही संस्थागत व्यवस्था के जरिए सही मायने में बांटेंगे. जैसे समुद्र में एक बढ़ती ज्वार सभी नावों को ऊपर उठाती है, वैसे ही सभी को विकास से उचित हिस्सा मिलेगा. ये हमारे सभी लोगों को न्यायसंगत तरीके से फायदा पहुंचाएगा''.

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