इमरान ख़ान बोले- सेक्स अपराध और भ्रष्टाचार मुस्लिम जगत की सबसे बड़ी बुराई

इमरान ख़ान

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि लगातार बढ़ता भ्रष्टाचार और सेक्स क्राइम (यौन अपराध) मुस्लिम जगत के सामने दो सबसे बड़ी चुनौती हैं.

उन्होंने रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही.

न्यूज़ एजेंसी पीटीआई की ख़बर के मुताबिक़, रियासत-ए-मदीना, सोसायटी एंड एथिकल रीवाइवल' विषय पर दुनिया भर के शीर्ष मुस्लिम विद्वानों के साथ हुई एक सेमीनार में चर्चा के दौरान उन्होंने ये बात कही.

इस परिचर्चा का आयोजन हाल ही में स्थापित नेशनल रेहमतुल-लिल-अलअमीन अथॉरिटी (एनआरएए) ने किया था.

इससे पहले बीते साल अक्टूबर महीने में इमरान ख़ान ने इस अथॉरिटी का गठन ये शोध करने के लिए किया था कि पैगंबर साहब के जीवन के संदेश को लोगों तक कैसे पहुंचाया जाए. इस आयोजन में शामिल हुए विद्वानों ने भी अपने विचार पेश किये.

परिचर्चा में शामिल कई विद्वानों ने युवाओं को सोशल मीडिया के प्रभाव से बचाने और आस्था व धार्मिक मूल्यों को उनके जीवन का हिस्सा बनाने के संदर्भ में अपने विचार भी दिए.

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सेक्स क्राइम पर बोले इमरान ख़ान

इस मौक़े पर पीएम इमरान ख़ान ने कहा कि समाज में दो तरह के अपराध हैं. पहला भ्रष्टाचार और दूसरा सेक्स क्राइम. हमारे समाज में सेक्स क्राइम तेज़ी से पांव पसार रहा है, मसलन, रेप और बाल यौन शोषण की घटनाएं. और सिर्फ़ एक फ़ीसदी मामले ही दर्ज होते हैं.

इमरान ख़ान ने अप्रत्यक्ष रूप से पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज़ पार्टी के मुखिया नवाज़ शरीफ़ पर हमला करते हुए कहा, "मेरा मानना है कि शेष 99 फ़ीसदी के ख़िलाफ़ समाज को लड़ना होगा. भ्रष्टाचार के मामले में भी ऐसा ही है. समाज को भ्रष्टाचार को अस्वीकार करना होगा. दुर्भाग्य से जब आपका नेतृत्व समय के साथ भ्रष्ट होता जाता है तो वे भ्रष्टाचार को स्वीकार्य बना देते हैं."

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ़ 72 साल के हो चुके हैं और साल 2019 नवंबर से वह लंदन में रह रहे हैं.

दरअसल, लाहौर हाईकोर्ट ने उन्हें चार सप्ताह के लिए, इलाज के मद्देनज़र लंदन जाने की अनुमति दी थी. तीन बार पीएम रह चुके शरीफ़, उनकी बेटी मरियम और दामाद मुहम्मद सफ़दर को जुलाई 2018 में एवेनफ़ील्ड प्रॉपर्टी मामले में दोषी ठहराया गया था.

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नवाज़ शरीफ़ का मामला

नवाज़ शरीफ़ को भी दिसंबर 2018 में अल-अज़ज़ीया स्टील मिल्स मामले में दोषी पाते हुए सात साल क़ैद की सना सुनाई गयी थी लेकिन उन्हें दोनों ही मामलों में ज़मानत दे दी गई. इसके साथ ही उन्हें लंदन जाकर इलाज कराने के लिए भी अनुमति दे दी गई.

'द डॉन' अख़बार ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय विद्वानों के विचार सुनने के दौरान ही इमरान ख़ान ने इस बात के भी संकेत दिये कि वह आने वाले समय में भी विद्वानों से इस तरह की परिचर्चा करेंगे.

अपने संबोधन मे इमरान ख़ान ने मुस्लिम युवाओं को इंटरनेट पर मौजूद अशलील सामग्री से बचने की आवश्यकता पर भी ज़ोर दिया.

इस सेमीनार में शामिल हुए मुस्लिम विद्वानों ने मॉडर्निटी के नकारात्मक प्रभाव से निपटने के लिए मुस्लिम देशों के सामूहिक प्रयास का सुझाव दिया.

जॉर्ज वाशिंगटन विश्वविद्यालय में इस्लामिक स्टडीज़ के यूनिवर्सिटी प्रोफ़ेसर डॉ. सैय्यद हुसैन नसर ने कहा, "आज की दुनिया, ख़ासतौर पर युवाओं के लिए अनिश्चितता से भरी और कहीं अधिक ख़तरनाक जगह बन चुकी है."

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भ्रष्टाचार का मुद्दा

इस मौक़े पर उन्होंने इस्लाम के ख़िलाफ़ नकारात्मक टिप्पणी करने वाले पश्चिमी तत्वों की निंदा की. उन्होंने इसे धर्म पर हमले के समान बताया.

एक अमेरिकी विद्वान शायख़ हमज़ा यूसुफ़ ने कहा कि भ्रष्टाचार, सड़े सेब की तरह है. उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार समाज को बर्बाद कर सकता है.

उन्होंने कहा कि कुरान में भी लोगों पर और समाज पर भ्रष्टाचार के प्रभाव के बारे में बताया गया है.

उन्होंने अपने विचार रखते हुए कहा कि इस्लाम में पुरुषों को महिलाओं और बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी दी गई है. उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि युवाओं को महिलाओं का सम्मान करना सिखाया जाना चाहिए.

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आपको उस जगह बिल्कुल नहीं जाइए, जहां आपको नहीं होना चाहिए. यह बात सबसे पहले और मुख्य रूप से पुरुषों पर लागू होती है और हम पीड़ित को दोषी नहीं ठहरा सकते हैं. लेकिन साथ ही महिलाओं को भी यह समझ रखने की ज़रूरत है कि बाहर भेड़िए हैं और वो असल में हैं.

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कैंब्रिज मुस्लिम कॉलेज के डीन डॉक्टर अब्दाल हक़ीम मुराद ने कहा कि मोबाइल पर मौजूद जानकारी आज के समय की सबसे बड़ी चुनौती है. ख़ासतौर पर युवा पीढ़ी के संदर्भ में.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ मलेशिया के डॉक्टर ओस्मान बकर ने अंतर-धार्मिक और अंतर-सांस्कृतिक संवाद की ज़रूरत पर ज़ोर दिया. उन्होंने उम्मीद जताते हुए कहा कि इससे समाज में स्थिरता आएगी.

यूएई की फ़तवा काउंसिल के अध्यक्ष शेख़ अब्दुल्लाह बिन बाय्याह ने कहा, "हम वैश्विकरण के युग में हैं और सोशल मीडिया, इंटरनेट का युवाओं पर बहुत असर पड़ा है."

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