ईरान के सैनिक और तालिबान सरहद पर क्यों भिड़े?

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- Author, मोहम्मद आज़म
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
ईरान और अफ़ग़ानिस्तान की सीमा पर दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच झड़प हुई है. ईरान और अफ़ग़ानिस्तान दोनों ही देशों ने इस बात की पुष्टि की है कि बुधवार को दोनों देशों के बीच सीमा क्षेत्र में झड़प हुई.
हालांकि दोनों ही पक्षों का ये कहना है कि अब स्थिति नियंत्रण में है. इस घटना में किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है.
ईरान के अधिकारियों का कहना है कि बुधवार को जो हुआ वो मामूली झड़प है. वहीं अफ़ग़ानिस्तान तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा कि यह घटना सीमा पर ग़लतफ़हमी के कारण हुई थी और इसे रोकने के लिए क़दम उठाए गए थे.
सीमा पर झड़प के वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, जिसमें तालिबान को लड़ते हुए देखा जा सकता है.
वहीं ईरान की समाचार एजेंसी तसनीम के मुताबिक़, ये झड़पें ईरानी सैनिकों और तालिबान के बीच भी हुईं.
विश्लेषकों का कहना है कि ईरान और अफ़ग़ानिस्तान के बीच सीमावर्ती इलाक़ों में हुई झड़प को दोनों देशों के बीच टकराव नहीं कहा जा सकता क्योंकि द्विपक्षीय संबंधों में कोई तनाव नहीं है.
पाकिस्तान और ईरान की तरह अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के बीच भी लंबी सीमा है.
ईरानी अधिकारियों और तालिबान अधिकारियों का कहना है कि संघर्ष अफ़ग़ानिस्तान के निमरोज़ प्रांत और ईरान के सिस्तान प्रांत के सीमावर्ती इलाक़े में हुआ है.
दोनों देशों के ये प्रांत पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के चाघी ज़िले की सीमाओं को भी साझा करते हैं.
चाघी ज़िले के एक वरिष्ठ पत्रकार अली रज़ा का कहना है कि निमरोज़ और सिस्तान दोनों में अधिकांश आबादी अलग-अलग बलूच जनजातियों की है.
अली रज़ा के मुताबिक, निमरोज़ में स्थानीय लोगों से बात करने से पता चला कि संघर्ष की वजह ईरानी किसानों और अफ़ग़ानिस्तानी कारोबारियों के बीच हुई झड़प थी.
इन झड़पों से जुड़े जो वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किए गए हैं, उनमें भारी हथियारों का इस्तेमाल होता दिख रहा है.
एक वीडियो में गोलियों की आवाज़ सुनाई दे रही है, वहीं दूसरे में तालिबान जैसे दिखने वाले लोग दीवार के पास खड़े हैं जबकि दीवार के दूसरी तरफ से धुआं उठता दिख रहा है.
एक वीडियो में दिख रहे लोग पश्तो बोल रहे हैं और 'अल्हम्दुलिल्लाह' कह रहे हैं.

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क्या कहते हैं दोनों देशों के अधिकारी?
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए ने ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सईद खतीबज़ादा के हवाले से कहा है कि सिस्तान क्षेत्र में सीमा विवाद को सीमा पर तैनात बलों ने हल कर दिया था और अब झड़पें ख़त्म हो गई हैं.
उन्होंने कहा कि सीमावर्ती इलाक़े में रहने वाले लोगों के बीच सशस्त्र संघर्ष हुआ था जिसे वहां तैनात सैनिकों ने हल कर दिया था.
आईआरएनए के मुताबिक, खतीबज़ादा ईरान के सिस्तान क्षेत्र और अफ़ग़ानिस्तान के निमरोज़ प्रांत में हुई झड़पों के मद्देनजर मीडिया को बयान दे रहे थे.
खतीबज़ादा ने कहा कि संघर्ष बुधवार शाम को सीमा पर स्थानीय लोगों के बीच हुआ, जिसे दोनों पक्षों के सीमा बलों ने शांतिपूर्वक नियंत्रित कर लिया था.
वहीं ईरान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान के हेलमंद क्षेत्र में किसानों के बीच झड़पें हुई हैं.
आईआरएनए के मुताबिक, इस तरह की झड़प इलाक़े में आम बात है और ये तब होती हैं जब किसान अपनी ज़मीन पर नहीं लौट पाते हैं.
इस बीच, अफ़ग़ान तालिबान के प्रवक्ता जबीउल्लाह मुजाहिद ने भी कहा कि अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के बीच सीमा पर हुई घटना को नियंत्रित कर लिया गया है.
तालिबान और ईरान के संबंध
ईरान में राजदूत और अफ़ग़ानिस्तान में उप राजदूत के रूप में काम कर चुके पूर्व पाकिस्तानी राजनयिक आसिफ़ दुर्रानी का कहना है कि उन्हें हालिया झड़पों के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, लेकिन अमेरिका के अफ़ग़ानिस्तान से हटने के बाद से ईरान और तालिबान के बीच संबंधों में सुधार हुआ है.
उन्होंने कहा कि अमेरिका में 9/11 के हमले से पहले ईरान तालिबान के ख़िलाफ़ था. 9/11 के बाद, ईरान ने अमेरिका की मदद की और पूर्व अफ़ग़ान राष्ट्रपति हामिद करज़ई को सत्ता में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
उन्होंने कहा कि जब अमेरिका ने ईरान को उत्तर कोरिया की तरह "एक्सिस ऑफ़ इविल" कहा तो ईरान ने सोचा कि तालिबान अमेरिका से बेहतर विकल्प है.

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उन्होंने कहा कि पिछले 15 सालों में अफ़ग़ान तालिबान और ईरान के बीच संबंधों में सुधार हुआ है और "हमने देखा कि तालिबान ने ईरान के साथ सीमा को पूरी तरह से शांतिपूर्ण रखा जब अमेरिकी सेना अफ़ग़ानिस्तान में थी."
"जब अमेरिका ने बलूचिस्तान के चाघी ज़िले में तालिबान के पूर्व नेता मुल्ला अख्तर मंसूर पर ड्रोन हमला किया, तो वह ईरान से पाकिस्तान में घुस गया."
दुर्रानी ने कहा, "जब तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान पर क़ब्ज़ा कर लिया तो ईरान ने एक तरह से सावधानी के साथ तालिबान का स्वागत किया."
"ईरान अफ़ग़ानिस्तान या अन्य पार्टियों में ताजिक तत्वों को परेशान नहीं करना या देखना चाहता है, लेकिन जब ईरान ने देखा कि तालिबान ने पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर नियंत्रण कर लिया है, तो ईरान की प्रतिक्रिया संतुलित थी."
उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच कोई सीमा विवाद नहीं था. यदि वहां झड़प हुई है तो इसके पीछे स्थानीय मुद्दा ही होगा.
बलूचिस्तान के एक वरिष्ठ विश्लेषक प्रिंस ज़ुल्फिक़ार ने भी कहा कि पिछली तालिबान सरकार के तहत अफ़ग़ानिस्तान और ईरान के बीच समस्याएं थीं लेकिन अब उनके बीच ऐसा कुछ नहीं है.
"इस बात से कोई इनकार नहीं है कि तालिबान और ईरान के बीच बौद्धिक और न्यायशास्त्रीय (धार्मिक भी) मतभेद हैं, लेकिन वे इस समय गंभीर नहीं हैं."
उन्होंने कहा कि अफ़ग़ानिस्तान के निमरोज़ प्रांत और उससे सटे ईरानी क्षेत्र में हुई झड़पों को दोनों देशों के बीच संघर्ष के रूप में वर्णित नहीं किया जा सकता है.
स्थानीय मुद्दों को लेकर दोनों पक्षों में भले ही थोड़ी नोकझोंक हुई हो, लेकिन इन मुद्दों को सुलझाया जा सकता है.
उन्होंने कहा कि तालिबान इस बात को जानते हैं कि वे इस समय कई समस्याओं का सामना कर रहे हैं, इसलिए वे ईरान या किसी अन्य पड़ोसी देश के साथ संबंध ख़राब करना नहीं चाहेंगे.
"तालिबान अच्छी तरह से जानता है कि ईरान एक स्थिर और बड़ा देश है. वो किसी धार्मिक मसले पर ईरान से उलझने के बजाए अपने आंतरिक मुद्दों को हल करने पर ध्यान केंद्रित करेंगे."
ज़ुल्फिक़ार कहते हैं कि दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़प को तालिबान सरकार की नीति नहीं कहा जा सकता है.
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