पराग अग्रवाल को ट्विटर की डोर थमा क्या करना चाहते हैं जैक डोर्सी?

- Author, जेम्स क्लेटन
- पदनाम, उत्तर अमेरिका टेक्नोलॉजी संवाददाता
जैक डोर्सी को सिलिकॉन वैली के उन चुनिंदा लोगों में गिना जाता है जिनमें टेक्नोलॉजी को लेकर जूनून है.
अगर वो किसी फ़िल्म का किरदार होते तो आपको वो अपनी सोच से चलने वाले व्यक्ति लगते. वो उन लोगों में शुमार हैं जो ईमानदार और आदर्शवादी हैं और मानते हैं कि तकनीक दुनिया में शांति और खुशहाली ला सकती है.
वो खुले विचारों वाले ऐसे व्यक्ति लग सकते हैं जिन्हें समझना कभी-कभी मुश्किल लग सकता है, लेकिन तकनीक की दुनिया में उन्हें असल में एक दूरदर्शी माना जाता है.
ये पहली बार नहीं है जब जैक डोर्सी ने ट्विटर से इस्तीफ़ा दिया है. वो इससे पहले भी एक बार ऐसा कर चुके हैं.
साल 2009 में ट्विटर छोड़ कर जाने के बाद उन्होंने स्क्वायर नाम की एक डिजिटल पेमेन्ट्स कंपनी बनाई थी, जो काफी हद तक सफल भी रही है. लेकिन इसके बाद 2015 में वो एक बार फिर ट्विटर लौट आए.
इस सप्ताह सोमवार तक वो एक साथ दोनों कंपनियां चला रहे थे जो निवेशकों को अधिक पसंद नहीं आ रहा था.
सीईओ पद छोड़ने की वजह
बीते साल ट्विटर में बड़ा निवेश करने वाली कंपनी इलियॉट मैनेजमेन्ट ने जैक डोर्सी के सामने दोनों में से किसी एक को चुनने का विकल्प रखा था. इस कंपनी का कहना था कि ट्विटर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को अपना पूरा वक्त ट्विटर को ही देना चाहिए.
ये एक बड़ी वजह है कि ट्विटर से जैक डोर्सी के इस्तीफ़े की घोषणा के बाद कंपनी के शेयर की क़ीमत गिरी नहीं.
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लंबे वक्त से ट्विटर के निवेशकों की ये राय है कि बड़ा यूज़र बेस होने के कारण कंपनी और अधिक राजस्व कमा सकती है, लेकिन वो ऐसा कर नहीं पा रही है. उनका मानना था कि अगर कंपनी का मुख्य कार्यकारी अधिकारी अपना पूरा ध्यान केवल एक कंपनी पर लगाएं तो ऐसा करना संभव है.
अगर गूगल और फ़ेसबुक के साथ ट्विटर की तुलना की जाए तो ये इस खेल में छोटा खिलाड़ी है.
कुछ लोग ट्विटर की धीमी ग्रोथ के पीछे जैक डोर्सी को बड़ा कारण मानते हैं. डोर्सी ट्विटर को बनाने वालों में तो हैं लेकिन यूज़र एक्सपीरिएंस की क़ीमत पर वो इससे अधिक पैसा नहीं कमाना चाहते.
लेकिन अगर डोर्सी की कोशिशों को देखें तो उन्होंने अधिक राजस्व कमाने के तरीकों को लेकर प्रयोग किए हैं. हाल में उन्होंने कंपनी का राजस्व बढ़ाने को लेकर अहम घोषणा की थी और कहा था कि 2023 तक कंपनी के मॉनिटाइज़ेबल यूज़र्स की संख्या को 31.5 करोड़ तक करेगी और कंपनी की आय को दोगुना करेगी.
कोरोना महामारी के दौरान कंपनी हज़ारों नए यूज़र्स को ट्विटर से जोड़ने में सफल रही है लेकिन अभी भी ये उसके लक्ष्य से काफी कम है.
डोर्सी के बाद कंपनी का डोर संभालने वाले पराग अग्रवाल के सामने अब इस लक्ष्य को पूरा करने की ज़िम्मेदारी है.

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पराग की चुनौती
भारतीय मूल के पराग अग्रवाल पहले ट्विटर के चीफ़ टेक्नोलॉजी ऑफ़िसर रहे हैं और कंपनी के भीतर उन्होंने काफी इज़्ज़त कमाई है. ट्विटर की बागडोर संभालने के लिए उन्हें 'सुरक्षित विकल्प' माना जा रहा है और उनके सामने लक्ष्य भी बड़ा है.
ट्विटर को बेहतर मॉनिटाइज़ करने का जैक डोर्सी का दायित्व अब सीधे-सीधे पराग के कंधों पर है. लेकिन ट्विटर फ़ेसबुक नहीं है और फ़ेसबुक के मुक़ाबले ये यूज़र्स के बारे में कम जानकारी इकट्ठा करता है. ऐसे में विज्ञापनदाताओं के ये डेटा अधिक काम का नहीं है.
साथ ही आप यूज़र्स को उतने ही विज्ञापन दिखा सकते हैं जितने में वो ये प्लेटफॉर्म छोड़ कर न जाएं. ऐसे में राजस्व बढ़ाने के साथ-साथ तेज़ी से ग्रोथ भी करते रहना मुश्किल काम हो सकता है.
क्रिप्टोकरेंसी को लेकर जूनून
क्रिप्टोकरेंसी, ख़ास कर बिटकॉइन को लेकर जैक डोर्सी बेहद उत्साहित हैं. उन्होंने हाल में एक डेडिकेटेड क्रिप्टो टीम बनाई है ताकि वो ये देख सके कि डिजिटल पैसा और डिसेन्ट्रलाइज़्ड ऐप्स को कंपनी कैसे काम में ला सकती है.
इस टीम को पराग अग्रवाल के साथ काम करना था, जो इस बात का संकेत था कि कंपनी के विकास को लेकर जैक डोर्सी का जो विज़न था उसमें डिजिटल करेंसी का बड़ा योगदान हो सकता है.
लेकिन हाल में दिनों में ट्विटर राजनीति से जुड़े मसलों में शामिल रहा है और इस मुश्किलों को झेलना भी अब पराग की ज़िम्मेदारी बन गया है.
डेमोक्रेट नेताओं का कहना है कि फ़ेक न्यूज़ पर लगाम लगाने के लिए ट्विटर ने अधिक कुछ नहीं किया है. उनका ये भी कहना है कि हेट स्पीच को पहचान कर उस पर लगाम लगाने में ट्विटर का सिस्टम बेहतर नहीं है.
हालांकि रिपब्लिकन नेताओं का कहना है कि ग़ैर-रूढ़िवादियों को लेकर ट्विटर पक्षपाती रवैया अपनाता है, और कैपिटल हिल में हुए दंगों के बाद पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर बैन लगाने का उसका फ़ैसला यही दिखाता है.

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ट्विटर का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी बनने के बाद पराग अग्रवाल रातोंरात चर्चा में आ गए हैं और इस बात में कोई संदेह नहीं कि जल्द ही उन्हें अमेरिकी कांग्रेस के सामने पेश होने के लिए बुलाया जा सकता है.
2010 में किए अपने एक ट्वीट को लेकर वो पहले ही चर्चा में हैं. इस ट्वीट को लेकर कुछ लोग कह रहे हैं कि ये इस बात का सबूत है कि कंपनी के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी वापपंथी रूझान वाले हैं.
अपने उस ट्वीट में उन्होंने लिखा था, "अगर वो मुसलमान और चरमपंथियों के बीच अंतर नहीं करने वाले हैं तो फिर मुझे गोरे लोगों और नस्लवादियों में अंतर क्यों करना चाहिए?"
वहीं ड़ोर्सी ने अपने इस्तीफ़े की घोषणा करते हुए जो पोस्ट किया है उसमें उन्होंने उन लोगों पर निशाना साधा है जो कंपनी की स्थापना करने के बाद अधिक वक्त तक कंपनी के साथ जुड़े रहते हैं.
उन्होने लिखा है, "इस बारे में काफी चर्चा होती है कि कंपनी को बनाने वाले उसकी अध्यक्षता करें. लेकिन मैं मानता हूं कि आपका काफी हद तक ये सीमित कर देता है और नाकामी का कारण होता है."
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माना जा रहा है कि उनके इस बयान से उन्होंने फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग पर निशाना साधा है. हालांकि टेस्ला के संस्थापक रहे एलन मस्क डोर्सी की बात से सहमत होंगे क्योंकि हाल में वो भी कह चुके हैं कि टेस्ला का बॉस बनना उन्हें पसंद नहीं है.
लेकिन उन्होंने जो बात कही उसका महत्व इससे कहीं अधिक है. बिल गेट्स, जेफ़ बेज़ोस, सर्गेई ब्रिन, लैरी पेज, स्टीव जॉब्स और अब डोर्सी - तकनीक को लेकर जूनून रखने वाले और कंपनियां बनाने वाले तकनीक के जगत के कई दिग्गज ऐसे 'सुरक्षित हाथों' में अपनी कंपनी की बागडोर सौंप चुके हैं जो उनकी तरह नहीं है.
और शायद ट्विटर को भी इसी की ज़रूरत थी.
रही बात जैक डोर्सी की तो वो अभी युवा हैं और केवल 45 साल के हैं. पिछली बार जब वो कुछ वक्त के लिए ट्विटर छोड़ कर गए थे उन्होंने स्क्वायर नाम की कंपनी बनाई थी जिसका मूल्य अब 100 अरब डॉलर हो चुका है.
हो सकता है कि डोर्सी को आपको ऐसे व्यक्ति लगते हों जिन्हें गंभीरता से न लिया जाए लेकिन उन्होंने अब तक जो काम किया है उसे देखते हुए ये कहा जा सकता है कि उन्हें हक है कि उनके फ़ैसले को गंभीरता से लिया जाए.
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