पाकिस्तान: भगवान कृष्ण की मूर्ति जन्माष्टमी पर कैसे टूटी, प्रत्यक्षदर्शियों ने क्या बताया ?

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- Author, हुदा इकराम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, इस्लामाबाद
पाकिस्तान के सिंध प्रांत के खिपरो इलाक़े में जन्माष्टमी उत्सव के दौरान भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति टूटने को लेकर आयोजकों ने पुलिस पर सवाल उठाए हैं.
आयोजकों का कहना है कि पुलिस लाठीचार्ज के बाद सोमवार को वहां भगदड़ की स्थिति बन गई और इसी दौरान मूर्ति टूट गई.
वहीं, पुलिस अधिकारियों ने आरोप को ग़लत बताते हुए कहा है कि स्थानीय लोगों ने कोविड-19 के नियमों का पालन करने का भरोसा दिया था लेकिन वहां नियम का पालन नहीं हो रहा था. इस वजह से पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा.
हालांकि, इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं की गई है. पाकिस्तान में बीते कुछ महीनों के दौरान हिंदू मंदिरों पर हमले बढ़े हैं.
क्या हुआ था?
सिंध के इस इलाके में हिंदू कोहली समुदाय के लोग हर साल जन्माष्टमी उत्सव का आयोजन करते हैं. सामान्य दिनों में उत्सव का आयोजन एक हफ़्ते का होता और इस दौरान कई धार्मक गतिविधियां होती हैं.
सोमवार की घटना को लेकर बताया जा रहा है कि इस साल सिंध में कोरोना की वजह से पाबंदियां जारी हैं और स्थानीय प्रशासन ने आयोजकों से कहा था कि वो कार्यक्रम का आयोजन सीमित तरीके से करें. उत्सव के बाद उन्हें 'शाम छह बजे से सुबह आठ बजे तक मेला लगाने की इजाज़त दी गई थी.'
पांबदियों के तहत एक समय में ढाई सौ से तीन सौ लोगों को ही मंदिर जाने की अनुमति थी. भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति मंदिर के बजाए खुली जगह में रखी गई थी, जिससे लोग कोरोना नियमों का पालन करते हुए दर्शन-पूजा कर सकें.
कोहली समुदाय ने इसे लेकर पुलिस को लिखित रूप में भरोसा दिया था. लेकिन आयोजकों पर आरोप हैं कि उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया.

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प्रत्यक्षदर्शी ने क्या कहा?
हिंदू समुदाय के लोग इन आरोपों को ग़लत बताते हैं.
ऑल कोहली एसोसिएशन की स्थानीय इकाई के अध्यक्ष दिया राम कोहली ने बीबीसी को बताया, "पुलिस और प्रशासन ने जो नियम तय किए थे लोग उनका पालन कर रहे थे लेकिन पुलिस उन्हें उत्सव मनाने नहीं दे रही थी. "
कोहली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की स्थानीय अल्पसंख्यक शाखा के प्रमुख भी हैं. उनके मुताबिक वो पूरी घटना के प्रत्यक्षदर्शी भी हैं.
उन्होंने बताया, "पुलिस ने जब दखल देना शुरु किया, उस वक़्त वहां कोई दुकानदार नहीं था. जो समय तय किया गया था, स्थानीय दुक़ानदार उसी के मुताबिक पहुंचे. वहां सिर्फ़ एक महिला थी जो हाथ से बने कुछ खिलौने लेकर बैठी थी. वो हर साल आती है. इसलिए पुलिस को उसके वहां होने की पहले से ही जानकारी थी."
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कोहली ने कहा, "पुलिस ने लोगों पर लाठीचार्ज किया. इससे भगदड़ की स्थिति बन गई. इस अफरा-तफरी के बीच मूर्ति टूट गई. "
उन्होंने कहा कि ये घटना भले ही 'इरादतन न हो लेकिन ऐसा पुलिस की मौजूदगी की वजह से हुआ.' वो वहां मौजूद रहे अधिकारियों को जिम्मेदार बताते हैं.

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पुलिस ने क्या कहा?
संगहार के एसएसपी ने इस घटना को लेकर एक बयान जारी किया है और इसमें आयोजकों को कठघरे में खड़ा किया है.
इस बयान के मुताबिक आयोजकों ने लिखित आश्वासन दिया था कि लोग कोविड-19 नियमों का पालन करेंगे और कार्यक्रम में हिस्सा लेने वालों की संख्या तीन सौ लोगों से कम रहेगी.
बयान में कहा गया है कि आयोजकों ने अपने कहे पर अमल नहीं किया. वहां बड़ी संख्या में लोग जमा हुए. वहां सामान बेचने वाले लोग भी थे और उस जगह ने एक मेले का रूप ले लिया था. पुलिस ने इसे लेकर चेतावनी भी दी थी और कहा था कि दुकानदारों को हटा दें नहीं तो कार्रवाई की जाएगी. इस बीच भीड़ की वजह से वहां रखी मूर्ति टूट गई.
बयान में आगे कहा गया है कि आयोजक अपने ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पुलिस पर दोष मढ़ रहे हैं. इस घटना के विरोध में स्थानीय लोगों ने कुछ समय के लिए सड़क पर जाम भी लगाया. लेकिन अधिकारियों का समझाने के बाद जाम हट गया. इस मामले में कोई शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है.

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सरकार की प्रतिक्रिया
सिंध के मुख्यमंत्री के मानवाधिकार मामलों के विशेष सहयोगी वीर जी कोहली ने बीबीसी को बताया कि पुलिस वहां स्थानीय दुकानदारों से कहने के लिए आई थी कि वो जल्दी से जल्दी जगह खाली कर दें. उनके देर तक रहने से और लोगों आएंगे और कोविड से जुड़े नियम टूटेंगे.
कोहली ने कहा, "लोगों को अफवाह फैलाने से बचना चाहिए."
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उन्होंने कहा कि वो पूरे दिन वहां थे और जैसे बताया जा रहा है, उन्होंने वहां वैसा कुछ नहीं देखा था और पुलिस अपना काम कर रही थी.
वीर जी कोहली ने ये भी कहा कि इस बार हिंदुओं को आयोजन के लिए कम जगह दी गई थी. इसलिए वहां भीड़ ज़्यादा लग रही थी. उन्होंने बताया कि मूर्ति उसी दिन सुबह मिट्टी से बनाई गई थी और कमजोर थी.

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बढ़े हैं हमले
पाकिस्तान में बीते एक साल के दौरान हिंदुओं के सात प्रमुख मंदिरों पर हमला और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं.
अगस्त में ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गणेश मंदिर में तोड़फोड़ और आगजनी की घटना हुई थी. ये घटना रहीम यार ख़ान ज़िले में हुई थी.
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बीते साल इस्लामाबाद में भगवान श्रीकृष्ण के निर्माणाधीन मंदिर को निशाना बनाया गया था. ये इस तरह की पहली घटना थी. बीते साल अगस्त में कराची में हनुमान मंदिर में तोड़फोड़ की गई. अक्टूबर में सिंध प्रांत में श्रीराम मंदिर में तोड़फोड़ हुई.
दिसंबर के महीने में ख़ैबर पख्तूनख्वा में भीड़ ने एक मंदिर गिरा दिया. मार्च में रावलपिंडी में सौ साल पुराने मंदिर पर भीड़ ने हमला किया.
जनवरी में सिंध में ही माता रानी भटियानी देवी मंदिर को नुक़सान पहुंचाया गया.
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