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अफ़ग़ानिस्तान ने तोड़ी ग़ुलामी की ज़ंजीरें: इमरान ख़ान
राजधानी काबुल पर तालिबान के क़ब्जे के बाद अफ़ग़ानिस्तान में अफ़रा-तफ़री मची है जहां जहां लोग जान बचाने के लिए उड़ान भरते विमान पर भी लटक रहे हैं. ऐसे दृश्यों के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान ने ग़ुलामी की ज़ंजीरें तोड़ दी हैं.
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने सोमवार को इस्लामाबाद में एक कार्यक्रम के दौरान कहा, ''अफ़ग़ानिस्तान ने ग़ुलामी की ज़ंजीरें तो तोड़ दी, लेकिन जो ज़हनी ग़ुलामी की ज़ंजीरे हैं वो नहीं टूटती.''
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री का ये बयान ऐसे समय आया है जब इससे एक दिन पहले ही तालिबान लड़ाकों ने राजधानी काबुल पर कब्ज़ा कर लिया, जिसके साथ अफ़ग़ानिस्तान के लोगों में तालिबान शासन के पुराने दिनों की यादें ताज़ा हो गई हैं.
जानीमानी लेखिका तसलीमा नसरीन ने इमरान ख़ान को उनके इस बयान के लिए आड़े हाथों लिया है. उन्होंने एक ट्वीट करके कहा है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान तालिबान से मोहब्बत करते हैं. वो कहते हैं कि तालिबान ने ग़ुलामी की ज़ंजीरें तोड़ दी हैं. क्या होता यदि इमरान ख़ान के दो बेटों की जगह दो बेटियां होतीं और वो ब्रिटेन की जगह अफ़ग़ानिस्तान में रहतीं.
वहीं पाकिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री फ़वाद चौधरी ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान से जुड़े हर घटनाक्रम का असर पाकिस्तान की सियासत और रणनीति पर हुआ है.
उन्होंने कहा कि ''तमाम हालातों को बीच पाकिस्तान को अपना रास्ता तलाशना पड़ा और अभी जो हालात पैदा हो रहे हैं, उसमें हम काबुल में एक समावेशी सरकार की बात कर रहे हैं जिसमें सारे राजनीतिक दल और अफ़ग़ानिस्तान के लोग शामिल हों.''
उन्होंने कहा, ''हम कोशिश कर सकते हैं, हमने तालिबान को अमरीका के साथ बैठाया, उनके बीच बातचीत शुरू करवाई. हमने अफ़ग़ान हुकूमत और तालिबान के बीच बातचीत करवाई. लेकिन अगर तालिबान वहां एक के बाद सूबे फ़तह कर रहे हैं तो सवाल पाकिस्तान से नहीं करना चाहिए, अमेरिका और नेटो को सवाल अफ़ग़ान सरकार से करना चाहिए.''
इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा, "हम ये मानते हैं कि बातचीत से राजनीतिक समझौता ही आगे का रास्ता है. हम अफ़ग़ानिस्तान में लगातार गृह-युद्ध नहीं देख सकते हैं. हम अफ़ग़ान लोगों को केवल जीवित ही नहीं बल्कि फलते-फूलते देखना चाहते हैं."
पाकिस्तान की बड़ी धार्मिक पार्टियों जमात-ए-इस्लामी और जमीयत-उलेमा-ए-इस्लाम ने अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान को उनकी हाल की कामयाबियों के लिए बधाई दी है और उन्हें पूरा सहयोग देने की बात की है.
तालिबान और अफ़ग़ानिस्तान के बारे में इमरान ख़ान के बेबाक बोल
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान, अफ़ग़ानिस्तान और तालिबान के बारे में अपने बयानों की वजह से पहले भी सुर्ख़ियाँ बटोरते रहे हैं.
इसी साल एक साक्षात्कार में उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा था कि ''अमेरिका ने अफ़ग़ानिस्तान में स्थिति बिगाड़ी. मेरे जैसे लोग जो अफ़ग़ानिस्तान के इतिहास को जानते हैं और वे कहते रहे कि इसका कोई सैन्य समाधान नहीं निकल सकता. इसके लिए मेरे जैसे लोगों को अमेरिका विरोधी कहा जाता था. मुझे तालिबान ख़ान भी कहा गया."
''तालिबान कोई सैन्य संगठन नहीं है'
प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने यहां तक कहा था कि ''तालिबान कोई सैन्य संगठन नहीं है. वो आम नागरिक हैं.'' वो ये कहते रहे हैं कि ''तालिबान वहाँ की सरकार का हिस्सा होगा."
पाकिस्तान के तालिबान के साथ नज़दीकी संबंध रहे हैं और अमेरिका से 'डील' करने में पाकिस्तान इन रिश्तों को इस्तेमाल करता रहा है.
हालांकि तालिबान अपने ऊपर पाकिस्तान के प्रभाव को नकारते हैं और उसे अपना एक अच्छा पड़ोसी देश मानते हैं.
पाकिस्तान में तीस लाख से अधिक अफ़ग़ानिस्तान शरणार्थी भी हैं और दोनों देशों के बीच ढाई हज़ार किलोमीटर लंबी सीमा भी हैं.
अफ़ग़ानिस्तान की तत्कालीन अशरफ़ ग़नी सरकार पाकिस्तान पर तालिबान की मदद करने और अफ़ग़ानिस्तान में दख़ल देने के आरोप लगाती रही है.
इसी सिलसिले में बीते जुलाई में अफ़ग़ानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान के बीच ताशकंद में कहासुनी भी हो गई थी.
कॉपी - संदीप सोनी
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