अफ़ग़ानिस्तान पर क्या लिख रहा है पाकिस्तान का मीडिया?

तालिबान लड़ाकों के नेता

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अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर रविवार को क़ब्ज़े के बाद पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर तालिबान का नियंत्रण हो चुका है. अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी देश छोड़कर चले गए हैं.

पाकिस्तान के उर्दू अख़बार 'नवा-ए-वक़्त' ने 'अफ़ग़ान नेताओं का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान विदेश मंत्रालय के दफ़्तर पहुँचने की ख़बर लगाई है.

अफ़ग़ान नेताओं का प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान में

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अख़बार के अनुसार, विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने पाकिस्तान में अफ़ग़ान प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए कहा, "हमें अफ़ग़ानिस्तान और क्षेत्र की बेहतरी के लिए रणनीति विकसित करने के लिए मिलकर काम करना चाहिए. हमारा अंतिम लक्ष्य एक शांतिपूर्ण, एकजुट, लोकतांत्रिक, स्थिर और समृद्ध अफ़ग़ानिस्तान है. मुझे पूरी उम्मीद है कि हम सब मिलकर शांति और सुलह को आगे बढ़ा सकते हैं. अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्पष्ट रूप से अफ़ग़ानिस्तान में शांति और सुलह के पक्ष में है. अफ़ग़ान नेतृत्व को इस ऐतिहासिक अवसर का उपयोग अफ़ग़ानिस्तान में व्यापक आधार वाले और व्यापक राजनीतिक समाधान का मार्ग प्रशस्त करने के लिए करना चाहिए."

मुल्ला अब्दुल ग़नी बरादर

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'एक्सप्रेस न्यूज़' ने तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रमुख मुल्ला अब्दुल ग़नी बिरादर का बयान प्रकाशित किया है. मुल्ला अब्दुल ग़नी बिरादर ने कहा है कि अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की सेवा और उनकी जान माल की रक्षा करना उनकी ज़िम्मेदारी है.

'दुनिया' अख़बार ने लिखा है कि तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी काबुल पर क़ब्ज़ा करने के बाद आम माफ़ी का एलान कर दिया है. जबकि अशरफ़ ग़नी देश छोड़ कर फ़रार हो गए हैं. अफ़ग़ान गृह मंत्रालय ने देश में कर्फ़्यू लागू कर दिया है.

अख़बार के अनुसार अफ़ग़ानिस्तान में शांति के साथ सत्ता के हस्तांतरण की बातचीत चल रही है.

अख़बार ने आगे लिखा है कि तालिबान की बदर 313 यूनिट ने काबुल का कंट्रोल संभाल लिया है और विशेष यूनिट को राष्ट्रपति हाउस की सुरक्षा पर तैनात कर दिया गया है.

काबुल एयरपोर्ट

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दैनिक 'जंग' ने काबुल हवाई अड्डे पर हुई फ़ायरिंग की ख़बर को जगह दी है. दैनिक जंग के अनुसार काबुल के हामिद करज़ई हवाई अड्डे पर भीड़ को हटाने के लिए अमेरिकी फ़ौज ने हवाई फ़ायरिंग की है, जिसमे पाँच लोगों की मौत हो गई है.

दैनिक 'जंग' लिखता है, "अमेरिकी पदाधिकारियों के अनुसार काबुल हवाई अड्डे पर अमेरिकी सेना ने मिल्ट्री फ्लाइट्स में अफ़ग़ान अवाम को चढ़ने से रोकने के लिए हवाई फ़ायरिंग की है."

अंग्रेज़ी अख़बार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' लिखता है कि तालिबान ने काबुल में राष्ट्रपति भवन पर नियंत्रण करने के बाद अफ़ग़ानिस्तान में युद्ध समाप्ति की घोषणा कर दी है. जबकि सोमवार को पश्चिमी देशों ने हवाई अड्डे पर अफ़रा-तफ़री के बीच अपने नागरिकों को निकालने के लिए संघर्ष किया है.

'द नेशन' ने काबुल के एक उच्च अधिकारी के हवाले से ख़बर लगाई है कि तालिबान केवल दस दिनों में देशव्यापी सैन्य जीत पर मुहर लगाने के लिए काबुल पहुँच गए हैं, लेकिन राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी रविवार को तालिबान को सत्ता सौंपने से पहले ही देश छोड़ कर चले गए हैं.

'डेली टाइम्स' ने काबुल में फंसी पीआईए की फ्लाइट के पाकिस्तान आने की ख़बर को जगह दी है.

डेली टाइम्स ने एक प्राइवेट न्यूज़ चैनल के हवाले से ख़बर दी है कि पीआईए के दो विमान अफ़ग़ानिस्तान में फंसे पाकिस्तानी नागरिकों को लेने के लिए गए थे, लेकिन ये दोनों विमान वहीं फंस गए थे. इन दोनों विमानों को अब उड़ान भरने की परमिशन मिल गई है और ये इस्लामाबाद पहुँच गए हैं. इन दोनों विमानों में कुल 499 यात्री थे.

डॉन ने तालिबान के राजनीतिक कार्यालय के प्रवक्ता मोहम्मद नईम के हवाले से लिखा है कि ''हम किसी को भी अपनी ज़मीन किसी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल नहीं होने देंगे और न हम किसी को नुक़सान पहुँचाना चाहते हैं.''

बाक़ी दुनिया का मीडिया अफ़ग़ानिस्तान के घटनाक्रम पर क्या लिख रहा है?

रूसी मीडिया ने काबुल के घटनाक्रम को विस्तार से छापा है. रूसी मीडिया ने काबुल के इतने जल्दी तालिबान के हाथों में जाने की संभावित वजहों और तालिबान के अगले कदमों पर कयास लगाए हैं.

रशियन सोसाइटी ऑफ पॉलिटिकल एनालिस्ट के विश्लेषक आंद्रेई सेरेंको के मुताबिक, ''अमेरिकी प्रशासन ने ग़नी सरकार को सैन्य मदद देने से अचानक इंकार कर दिया और तालिबान पर हवाई हमले नहीं करने का फ़ैसला किया. इसका एक मतलब ये हो सकता है कि अमरीका और तालिबान के बीच (पाकिस्तान के साथ) कोई सीक्रेट डील हो गई हो.''

लेकिन ''जो भी हो, अमेरिका को बड़ा भारी नुकसान होगा. अफ़ग़ानिस्तान में जो भी हुआ है, उससे सहयोगियों की नज़र में अमेरिका का दबदबा कम हो जाएगा.''

ईरान के नेटवर्क वन ने एक अमेरिकी जर्नलिस्ट के हवाले से लिखा है कि ''अमेरिका ने 20 से ज्यादा वर्षों में 88 अरब डॉलर खर्च करके अफ़ग़ान सेना को ट्रेनिंग दी जो एक महीने भी नहीं टिक सकी.''

तालिबान लड़ाके

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राजधानी काबुल पर तालिबान के नियंत्रण और राष्ट्रपति अशरफ़ ग़नी के अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाने के बाद ईरान ने पूर्व राष्ट्रपति हामिद करज़ई के सत्ता हस्तांतरण परिषद बनाने की प्रस्तावित योजना का समर्थन किया है.

अफ़ग़ान शरणार्थी

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ईरान के निवर्तमान विदेश मंत्री मोहम्मद ज़रीफ़ ने अपने शांतिपूर्ण प्रयास जारी रखने की बात कही है. ईरान हाल के दिनों में सीमा पर उमड़े अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए कैम्प लगाने की योजना बना रहा है.

तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोआन ने कहा है कि ''ईरान के रास्ते अफ़ग़ान शरणार्थियों की बड़ी संख्या तुर्की की ओर आ रही है. ख़ित्ते को ध्यान में रखते हुए हम हर प्रयास जारी रखेंगे.''

उन्होंने उम्मीद जताई है कि अफ़ग़ानिस्तान में जल्द से जल्द स्थिरता आएगी.

अफ़ग़ान शरणार्थियों की फाइल फोटो

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ख़बरें हैं कि तुर्की में अफ़ग़ान शरणार्थियों के ख़िलाफ़ हाल के हफ्तों में विरोध के स्वर उठे हैं. तुर्की से कहा जा रहा है कि वो ईरान के साथ बात करके अफ़ग़ान शरणार्थियों के लिए संभावित 'बफ़र-ज़ोन' तैयार करे.

तालिबान लड़ाके

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अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान की मौजूदा स्थिति के लिए यूरोपियन प्रेस ने कमज़ोर अफ़ग़ान देश और पश्चिमी देशों की नाकामी को ज़िम्मेदार बताया है.

जर्मनी के अख़बारों ने जहां अफ़ग़ानिस्तान से लोगों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने को प्रमुखता दी है, वहीं फ्रांस के अख़बारों ने तालिबान की हैरान करने वाली जीत को पश्चिमी देशों के ख़ुफ़िया तंत्र की विफलता से जोड़ा है.

अशरफ़ ग़नी और जो बाइडन की फाइल फोटो

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रूसी अख़बारों ने जहां इसे 'अमेरिका के लिए ऐतिहासिक पराजय' बताया है, वहीं इसराइली अख़बारों को लगता है कि काबुल के घटनाक्रम से अमेरिका की वैश्विक नीति बुरी तरह प्रभावित हुई है और इससे मध्य पूर्व में अमेरिका की स्थिति बदल सकती है.

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