काबुल से बस 50 किलोमीटर दूर तालिबान, पूरे अफ़ग़ानिस्तान में तबाही, अफ़रातफरी

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तालिबान विद्रोहियों ने शुक्रवार को देश के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर क़ब्ज़ा कर लिया है. तालिबान लड़ाके काबुल की सीमा से लगी लोगार की प्रांतीय राजधानी फूल-ए-आलम में भी घुस गए हैं.
इसे तालिबान की बड़ी जीत माना जा रहा है क्योंकि लोगार से काबुल सिर्फ़ 50 किलोमीटर दूर है और यहां से काबुल केवल दो घंटे में पहुंचा जा सकता है.
जहां एक ओर तालिबान लड़ाके अफ़ग़ानिस्तान की राजधानी की ओर बढ़ रहे हैं. वहीं, काबुल पहुंच रहे शरणार्थियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है.
काबुल में भारी अफ़रातफ़री और डर का माहौल
शुक्रवार को तालिबान ने जिस आक्रामकता से अपने अभियान को आगे बढ़ाया, उसके बाद काबुल समेत पूरे अफ़ग़ानिस्तान में अफ़रातफ़री मची हुई है.
ज़्यादातर लोगों को ये नहीं पता है कि कल या अगले कुछ घंटों में उनके साथ क्या होने वाला है. लोग अपने शहरों, कस्बों और घरों से भाग रहे हैं ताकि तालिबान लड़ाकों से बच सकें.
इन लोगों के लिए राजधानी काबुल वो अंतिम स्थान है जहां उनकी जान बच सकती है. ऐसे में हज़ारों लोगों की भीड़ काबुल पहुंच रही है.
संयुक्त राष्ट्र ने अफ़ग़ानिस्तान के पड़ोसी देशों से भी अपनी सीमाएं खुली रखने का आग्रह किया है.
इसी बीच विश्व खाद्य कार्यक्रम ने एक भारी मानवीय आपदा आने की चेतावनी जारी की है क्योंकि खाद्य सामग्री की भारी किल्लत है.

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'तालिबान लड़ाकों ने लगाई घर को आग'
काबुल में शरण लेने के लिए पहुंच रहे ऐसे कई लोग सड़क पर खुले आसमान के नीचे रात गुज़ारने के लिए मजबूर हैं.
सेव द चिल्ड्रन के मुताबिक़, अपने घरों से भागकर काबुल में शरण लेने वालों में 72 हज़ार बच्चे शामिल हैं.
कुंदुज़ प्रांत से भागकर काबुल पहुंचने वाले स्ट्रीट वेंडर 35 वर्षीय असदुल्लाह ने बीबीसी को बताया कि "हमारे पास रोटी या अपने बच्चे के लिए दवाई ख़रीदने तक के लिए पैसे नहीं हैं."
तालिबान लड़ाकों ने असदुल्लाह का घर जला दिया था जिसके बाद उन्हें भागकर काबुल आना पड़ा.
वह कहते हैं, "हमारा पूरा घर और सामान जल गया. ऐसे में हम काबुल आए हैं और अल्लाह से मदद की गुहार लगा रहे हैं."
काबुल शहर के बाहरी इलाकों में तात्कालिक कैंप बनाए गए हैं. इसके साथ ही खाली पड़े गोदामों में भी कई लोगों के सोने की ख़बरें आई हैं.

कंधार पर जीत क्यों अहम है?
अफ़ग़ानिस्तान के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर तालिबान लड़ाकों का कब्जा इस संघर्ष में काफ़ी अहम माना जा रहा है.
छह लाख लोगों की आबादी वाला ये शहर कभी तालिबान का गढ़ हुआ करता है. इसके साथ ही अपने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, कृषि और औद्योगिक उत्पादन के लिहाज़ से भी यह शहर महत्वपूर्ण है.
तालिबान लड़ाकों ने नजदीकी शहर लश्कर गाह पर भी क़ब्ज़ा कर लिया है. इसके साथ ही अफ़ग़ानिस्तान की कुल प्रांतीय राजधानियों में से एक तिहाई पर तालिबान लड़ाकों का कब्जा हो गया है.

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भारी तबाही, दहशत और मौत का मंज़र
संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक़, बीते एक महीने में एक हज़ार से ज़्यादा आम लोगों की मौत हुई है. तालिबान ने पिछले कुछ दिनों में मीडिया चीफ़ समेत कई राजनीतिक हत्याओं को भी अंजाम दिया है.
अफ़ग़ानिस्तान की एक महिला फ़िल्म मेकर साहरा करीमी ने काबुल में बीबीसी को बताया है कि ऐसा लग रहा है कि दुनिया ने अफ़ग़ानिस्तान से मुंह मोड़ लिया है.
करीमी आशंका जताती हैं कि ये काले, घुप्प अंधेरे से भरे दौर की शुरुआत हो सकती है.

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महिलाओं में तालिबान का ख़ौफ़
नब्बे के दशक में तालिबान सरकार में महिलाओं को पूरा शरीर ढकने वाला बुरका पहनना होता था. दस साल से ज़्यादा उम्र की लड़कियों की पढ़ाई प्रतिबंधित थी.
और बर्बर सजाएं देने का प्रावधान था जिनमें सार्वजनिक रूप से मृत्यु दंड देना भी शामिल था.
करीमी कहती हैं, "मुझ पर ख़तरा मंडरा रहा है लेकिन अब मैं अपने बारे में नहीं सोचती. मैं अपने देश के बारे में सोचती हूं... मैं अपनी पीढ़ी के बारे सोचती हूं जिसने इन बदलावों को लाने के लिए बहुत कुछ किया है. मैं ख़ूबसूरत बच्चियों के बारे में सोचती हूं. इस देश में हज़ारों खूबसूरत, युवा और काबिल महिलाएं हैं."
कंधार पर तालिबान के क़ब्ज़े से ठीक पहले अफ़ग़ानी लड़कियों के लिए काम करने वाली एक एनजीओ की कार्यकारी निदेशक पश्ताना दुर्रानी ने बीबीसी से बात की.
दुर्रानी बताती हैं कि वह अपनी ज़िंदगी पर मंडरा रहे ख़तरे की वजह से डरी हुई हैं क्योंकि वह महिलाओं की शिक्षा को लेकर काफ़ी मुखर रही हैं.
वह कहती हैं, "हमारे साथ जो लड़कियां थीं वह पहले ही भाग गयी हैं. मुझे नहीं पता कि अब मेरी छात्राएं कहां हैं. मैं व्यक्तिगत रूप से उनकी ज़िंदगियों को लेकर डरी हुई हूं. अगर उनकी शादी किसी तालिबान लड़ाके से हो गयी तो क्या होगा. उनकी ज़िंदगी का हश्र क्या होगा?"
शुक्रवार को अपना घर छोड़कर भागने वाली दुर्रानी कहती हैं, "मैं आज सुबह ही अपना घर खो चुकी हूं. मैं वो सब कुछ खो चुकी हूं जो मेरे पिता ने मेरे लिए छोड़ा था- उनकी विरासत, ज़मीन, किताबें और यादें. अब खोने के लिए क्या बचा है."
दुर्रानी अफ़ग़ान सरकार पर मुल्क और अवाम का सौदा करने का आरोप लगाती हैं.
वे पूछती हैं, "वह क्या कर रहे थे? सब कुछ इतनी आसानी से तबाह कैसे हो सकता है?"
लेकिन दुर्रानी ये भी कहती है कि पश्चिमी देशों ने अफ़ग़ान सरकार को अफ़ग़ानी लोगों से ज़्यादा महत्व देकर लोगों को निराश किया है.
वह कहती हैं, "अफ़ग़ानिस्तान में शामिल सभी लोगों और नेतृत्व इसके लिए ज़िम्मेदार है. मुझमें अब कोई उम्मीद शेष नहीं है."

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शुक्रवार को अफ़ग़ानिस्तान में क्या क्या हुआ?
शुक्रवार को जहां तालिबान विद्रोहियों ने एक और देश के दूसरे सबसे बड़े शहर कंधार पर नियंत्रण कर लिया वहीं काबुल से महज़ 50 किलोमीटर दूर लोगर की प्रांतीय राजधानी में भी वो घुस गए.
उधर ब्रिटेन के रक्षा सचिव बेन वालेस ने चेतावनी दी कि तालिबान के तेज़ी से बढ़ने के साथ ही अफ़ग़ानिस्तान "गृहयुद्ध की ओर बढ़ रहा है." तो अमेरिकी सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी के नेता मिच मैककोनेल ने एक बयान में वहां की स्थिति की तुलना विएतनाम में हुई हार से की.
अमेरिका और ब्रिटेन ने अफ़ग़ानिस्तान के अपने दूतावासों में कर्मचारियों की संख्या कम करने की घोषणा की है. तो रूस के दूत ने कहा है कि मॉस्को अभी ऐसी किसी योजना पर काम नहीं कर रहा है.
वहीं अफ़ग़ानिस्तान के एक एनजीओ ने देश में और अधिक आम लोगों के मरने की आशंका जताई है.
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