पाकिस्तानः कोरोना वैक्सीन लेने में आनाकानी की तो सिमकार्ड होगा ब्लॉक

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पाकिस्तान के पंजाब सूबे में सरकार ने फ़ैसला किया है कि वो उन लोगों के सिम कार्ड ब्लॉक कर देगी जो वैक्सीन लेने से इनकार कर रहे हैं.
पाकिस्तान की स्थानीय मीडिया में अधिकारियों के हवाले से बताया गया है कि पंजाब सरकार ने ये क़दम कोरोना महामारी के नियंत्रण और टीकाकरण की रफ़्तार बढ़ाने के मक़सद से उठाया है.
पंजाब के स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता सैयद हम्माद रज़ा ने गुरुवार को पत्रकारों को बताया, "वो लोग जो वैक्सीन नहीं ले रहे, उनके सिम कार्ड को ब्लॉक करने के बारे में अंतिम फ़ैसला लिया गया है."
पाकिस्तान के समाचार चैनल एआरवाई के अनुसार पंजाब में स्वास्थ्य मंत्रालय ने पाया कि वो वैक्सीनेशन के तय लक्ष्य को पूरा नहीं कर पाए हैं.
पाकिस्तानी अख़बार डॉन की एक रिपोर्ट के अनुसार ये फ़ैसला देश में कोरोना महामारी पर बनाई गई केंद्रीय संस्था एनसीओसी की घोषणा के एक दिन बाद लिया गया.
संस्था ने कहा था कि देश में सरकारी और निजी, हर दफ़्तर में काम करने वाले व्यक्ति के लिए 30 जून तक वैक्सीन लेना अनिवार्य होगा.
अख़बार ये भी लिखता है कि इससे पहले पिछले सप्ताह सिंध प्रांत की सरकार ने भी एक सख़्त क़दम उठाते हुए आदेश दिया था कि अगले महीने से उन कर्मचारियों की तनख़्वाह रोक ली जाएगी जो वैक्सीन नहीं लेंगे.
हालाँकि, पाकिस्तान सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने गुरुवार को इन अफ़वाहों का खंडन किया कि सरकार लोगों को "जबरन" टीका देगी और लोगों के टीका लेने से मना करने को लेकर योजना बनाई जा रही है.
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दूसरी डोज़ लेने नहीं आए लोग
स्थानीय मीडिया में बताया जा रहा है कि पाकिस्तान में दो फ़रवरी को वैक्सीनेशन शुरू होने के बाद से लगभग तीन लाख लोग ऐसे थे जो वैक्सीन की दूसरी डोज़ लेने आए ही नहीं.
हालाँकि देश के स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने इस संबंध में मीडिया को ये भी कहा कि इसकी वजह ये भी हो सकती है कि पहली डोज़ के बाद कुछ लोगों की मौत हो गई हो या जिन्हें कोविड हो गया हो. मगर एक तबक़ा ऐसा भी हो सकता है जो नकारात्मक प्रचार की वजह से वैक्सीन नहीं ले रहा.
हालाँकि पंजाब की स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर यास्मीन राशिद ने लाहौर में बताया कि पाबंदियों और बड़े पैमाने पर टीकाकरण के अभियान की वजह से पंजाब में कोरोना संक्रमण के मामलों में काफ़ी कमी आई है.
स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में हुई बैठक में तय किया गया कि उन इलाक़ों में सारी पाबंदियाँ हटा ली जाएँगी जहाँ कम-से-कम 20 फ़ीसदी आबादी को वैक्सीन दी जा चुकी है.
साथ ही तय किया गया है कि लाहौर की बड़ी दरगाहों के बाहर मोबाइल वैक्सीनेशन कैंप लगाए जाएँगे.
ये भी तय हुआ कि जो लोग वैक्सीन ले चुके हैं वो सिनेमाघरों में जा सकेंगे. साथ ही रेस्तरां और शादी के आयोजन स्थलों को भी खोलने का फ़ैसला किया गया.

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पाकिस्तान में घटता संक्रमण
पाकिस्तान में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार कमी आती जा रही है और तीन महीने बाद पॉज़िटिविटी रेट 4% से नीचे चली गई है.
पिछले 24 घंटे में वहाँ संक्रमण के 1,303 नए मामले दर्ज हुए और 47 लोगों की मृत्यु हुई.
भारत की स्थिति से तुलना की जाए तो बीते चौबीस घंटों में भारत में संक्रमण के 91,702 नए मामले दर्ज किए गए, जबकि 3,403 लोगों की मौत हुई है.
हालाँकि, भारत में ये लगातार चौथा दिन है जब देश में चौबीस घंटों में कोरोना के एक लाख से कम मामले दर्ज किए गए हैं.

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पाकिस्तान में महामारी से अब तक 10 लाख से कम (938,737) लोग संक्रमित हुए हैं और लगभग साढ़े 21 हज़ार (21,576) लोगों की मौत हुई है.
इसकी तुलना में भारत में अब तक लगभग तीन करोड़ लोग (2,92,74,823) संक्रमित हुए हैं और साढ़े तीन लाख से ज़्यादा (3,63,079) लोगों की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है.
पाकिस्तान कोरोना महामारी की पहली और दूसरी लहर के असर से अधिक प्रभावित नहीं हुआ था.
वहाँ महामारी की पहली लहर बीते साल मई-जून के महीने में आई थी लेकिन कुछ ही हफ़्तों में इसका असर कम पड़ने लग गया था.
महामारी की दूसरी लहर बीते साल सितंबर के मध्य में आई और इस साल फरवरी के आख़िर तक रही थी.
इसके कुछ महीने बाद पाकिस्तान में संक्रमण के मामलों में फिर तेज़ी आने लगी. पाकिस्तान में मार्च के पहले सप्ताह में 16,000 एक्टिव मामले थे लेकिन अप्रैल में इनकी संख्या आठ गुना से अधिक बढ़ गई.
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सरकार ने क्या कहा
भारत में कोरोना की दूसरी लहर से कोहराम के बाद पाकिस्तान में भी चिंता बढ़ गई थी. रमज़ान का महीना होने की वजह से चुनौती और बढ़ गई थी.
पाकिस्तान में हर साल रमज़ान के महीने में मस्जिदों में इबादत करने वालों की तादाद कई गुना बढ़ जाती है.
पिछले साल महामारी के दौरान लोगों के घर पर दुआ करने से इनकार करने के बाद पाकिस्तान दुनिया का इकलौता देश था, जिसने रमजान में अपनी मस्जिदें खुली रखीं.
इस साल भी ऐसी ही स्थिति रही. रमजान के दौरान मस्जिद और इमाम बारगाह खुले रहे. हालाँकि इमरान ख़ान ने अधिकारियों से कहा कि यह तय करें कि लोग नमाज के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें और चेहरे पर मास्क लगाएँ.
तब पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने चेतावनी दी थी कि देश में प्रति क़रीब 963 लोगों पर एक डॉक्टर है, ऐसे में अगर कोरोना वायरस ने पैर फैलाए तो भयंकर आपदा आ सकती है.
अप्रैल के आख़िर में इमरान ख़ान ने ये भी कहा कि वो ऐसा कोई क़दम उठाना नहीं चाहते, जिसका बुरा असर मज़दूरों और श्रमिक वर्ग पर पड़े. हालांकि उन्होंने ये भी कहा था कि "अगर हालात भारत जैसे हो गए" तो सरकार कड़े क़दम उठाने के लिए बाध्य होगी.
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