‘लड़को मलाला की शादी की चिंता छोड़ो, उसने तालिबान की नहीं सुनी आपकी क्या सुनेगी’ -ब्लॉग

मलाला

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नोबेल पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफ़ज़ई ने कुछ दिन पहले फ़ैशन मैगज़ीन वोग को एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें उन्होंने शादी, रिलेशनशिप और पार्टनरशिप के बारे में बात की थी. उसके बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया.

शादी के बारे में मलाला की टिप्पणी पर हुई हाय-तौबा पर पढ़ें पाकिस्तान के वरिष्ठ पत्रकार और लेखक मोहम्मद हनीफ़ का ब्लॉग.

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हमारे घरों में लड़कों का मसला कोई भी हो हमारे पास समाधान एक ही होता है.

लड़का परीक्षा में फ़ेल हो गया, तो शादी करवा दो. अगर लड़के को नौकरी नहीं मिल रही है, तो उसकी शादी कर दो. अगर लड़का छोटा मोटा नशा करने लगा है, सारा दिन बाथरुम से बाहर नहीं निकलता है तो, बस उसकी शादी कर दो सब ठीक हो जाएगा.

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नहीं पता कि किस हक़ीम ने हमें बताया है कि दुनिया की सभी बीमारियों का इलाज शादी है.

आपके माता-पिता ने भी ऐसा ही किया होगा. कभी उन्हें अकेले अलग-अलग बिठाकर पूछ लेना कि उन्होंने क्या कमाया और क्या मिला?

इसी तरह हमारी लड़की मलाला, जो किसी तार्रुफ़ की मोहताज़ नहीं हैं, वो भी शादी के बारे में बात कर बैठी.

जब वह छोटी थी तो तालिबान चरमपंथी उसके शहर में आए. कहा कि लड़कियों के लिए स्कूल बंद हैं. कहा कि लड़कियां पढ़ नहीं पाएंगी.

मलाला ने कहा,"मैं पढ़ूंगी और स्कूल भी जाऊंगी."

चरमपंथियों ने स्कूल की वैन को रोका और उसका नाम पूछते हुए उसके सिर और चेहरे पर गोलियां दाग़ दीं.

बचाने वाला मारने वाले से बड़ा होता है.

लड़की बच भी गई और पढ़ती भी रही.

साथ ही उन्होंने दुनिया भर में ग़रीब, बेसहारा लड़कियों की शिक्षा के लिए इतना पैसा जुटा दिया कि जितना पैसा हमारे महान सेठों ने अपने पूरे जीवन में नहीं दिया.

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'कोरोना को भूलकर मलाला के पीछे'

अब मलाला ने एक फ़ैशन मैग़ज़ीन को इंटरव्यू दिया है और इंटरव्यू लेने वाले भी हमारे ही भाई-बहन होंगे.

उन्होंने भी मलाला से शादी के बारे में बताने के लिए कहा.

मलाला ने जवाब दिया, "मुझे समझ में नहीं आता कि यह शादी इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? अगर कोई पसंद है तो उसके साथ रह लें."

अब हमारी पूरी कौम गर्मी के ताप और कोरोना महामारी को भूलकर मलाला के पीछे पड़ गई है कि देखो यह लड़की क्या कह रही है!

हमारा धर्म, हमारा समाज, हमारी पारिवारिक व्यवस्था, पति-पत्नी का पवित्र रिश्ता सब जलाकर राख कर गई है.

एक विवाद खड़ा हो गया.

विरोध करने वालों में ज़्यादातर मेरे जैसे शादीशुदा अंकल थे. जो लोग कभी एक साथ बैठ जाएं तो उनके पास अपनी पत्नियों की बुराई करने के अलावा कोई और बात नहीं होती है.

लेकिन साथ ही, हमारे उन युवाओं के खून ने भी जोश मारा, जिनकी ज़िंदगी में सबसे बड़ी उपलब्धि ही यही होती है कि उन्होंने एक बार अपने पिता को स्मार्टफोन लेकर देने को राज़ी कर लिया था.

ये लड़के 13 साल की उम्र से अपनी फूफी की बेटी पर नज़र रखे बैठे होते हैं और उनके जीवन का अज़ीम मिशन होता है कि लड़की बड़ी हो जाए तो फिर उससे शादी की जाए.

भले ही मेरी फूफी की बेटी बड़ी होकर अमेरिका जाना चाहे, लेकिन हम उसे डोली में बिठाकर ही छोड़ेंगे.

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'शादी के इंतज़ार में सेल्फ़ी'

शादी का इंतज़ार करते हुए, बेकार बैठे यह सेल्फ़ी लेते रहते हैं.

सोशल मीडिया पर जहां लड़की नज़र आयी उसे लाइक करते हैं और फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज देते हैं लेकिन अक्सर कोई जवाब नहीं आता है. फिर जब जवाब नहीं आता, तो उसे किसी काफ़िर की औलाद कहते हैं.

इसी तरह इनको मलाला जहां भी नज़र आ जाए, उनको कुछ होने लगता है और हर कोई चिल्लाने लगता है- "देश के लिए उसने क्या किया?"

इन लड़कों को यकीन होता है कि अगर किसी लड़की ने उनसे शादी नहीं की तो वो सनी लियोनी या मियां ख़लीफ़ा हैं.

अब मां-बाप तो बेचारे यह भी नहीं पूछ सकते कि ये दोनों तुम्हारी फूफी की बेटियां नहीं हैं तो फिर तुम उनसे कहां मिलते रहे.

लड़कों, मैं तुम्हारा दर्द समझता हूं लेकिन तुम भी कुछ अकल को हाथ मारो. अगर आप सेल्फ़ी लेना बंद कर के और कुछ सर्च करें तो आपको पता चल जाएगा कि मलाला वास्तव में क्या चाहती हैं.

उन्होंने ज़्यादातर काम लड़कियों की तालीम के लिए किया है लेकिन उनका संदेश लड़कों के लिए भी सीधा है- ज़्यादा पर्सनल मत लो, लेकिन उन्होंने बात स्पष्ट की है और मैंने भी यह बात एक स्कूल के बाहर लिखी पढ़ी थी.

बात यह है, 'जीना होगा, मरना होगा, पप्पू, तुमको पढ़ना होगा.'

मलाला की शादी की चिंता छोड़ो. अगर आपके नसीब में फूफी की बेटी है तो वह आपको मिल ही जाएगी.

अब परीक्षाएं सर पर हैं. लड़कियों को सेल्फ़ी भेजना बंद करो. किताबें खोलो, तैयारी करो, अल्लाह ख़ैर करेगा. बाकी रहीं मलाला, अगर उसने तालिबान की नहीं सुनी, तो वह आपकी क्यों सुनेगी?

रब राखा!

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