सीरिया में बशर अल-असद फिर बने राष्ट्रपति, विपक्ष ने रूस और ईरान को घेरा

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सीरिया के राष्ट्रपति चुनाव में बशर अल-असद ने ज़बरस्त जीत हासिल कर लगातार चौथी बार सत्ता अपने हाथ में बरक़रार रखी है.
देश में बुधवार को हुए चुनावों में असद को 95.1% मत मिले.
उन्हें चुनौती देने वाले दो उम्मीदवारों में से महमूद अहमद मारी को 3.3% और अब्दुल्ला सालौम अब्दुल्ला को 1.5% मत हासिल हुए.
सीरिया के विपक्षी दलों ने इस चुनाव को पाखंड बताते है. अमेरिका और यूरोपीय देशों ने कहा है कि ये चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष नहीं था.
बशर अल-असद ने नतीजों से पहले ही, मतदान के दिन कह दिया था कि पश्चिम की प्रतिक्रिया उनके लिए "ज़ीरो" है.
दमिश्क में अपना मत डालने के बाद असद ने कहा था, "सीरिया वैसा नहीं है जैसा वो बेचने की कोशिश कर रहे हैं, जहाँ एक शहर दूसरे से लड़ रहा है, एक समुदाय दूसरे का विरोधी है, या जहाँ गृह युद्ध छिड़ा हुआ है. आज हम चुनाव से ये साबित कर रहे हैं कि सीरिया की जनता एक है."
सीरियाई राष्ट्रपति ने बुधवार को दमिश्क से सटे एक इलाक़े में मतदान के बाद ये कहा था. ये इलाक़ा एक समय विद्रोहियों का गढ़ था जिसे 2018 में सीरियाई सेनाओं ने दोबारा अपने क़ब्ज़े में लिया. तब वहाँ एक केमिकल हमला होने के भी आरोप लगे थे.
सीरिया पिछले एक दशक में संघर्ष से तबाह हो चुका है जिसका शुरूआत मार्च 2011 में हुई जब वहाँ लोकतंत्र के समर्थन में प्रदर्शन शुरू हुए जिन्हें असद सरकार ने ताक़त का इस्तेमाल करते हुए दबाने की कोशिश की.
इस संघर्ष में अब तक 388,000 लोगों की जान जा चुकी है. सीरिया की आधी आबादी को लड़ाई के कारण अपने घरों से भागना पड़ा है. सीरिया के लगभग 60 लाख लोग अभी शरणार्थी बनकर विदेशों में रहने को मजबूर हैं.

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सरकार ने कहा सब सामान्य, विपक्ष ने कहा पाखंड
सीरिया के राष्ट्रपति चुनाव में सरकार के नियंत्रण वाले इलाकों और विदेशों में कुछ सीरियाई दूतावासों में मतदान करवाए गए. सीरिया सरकार का कहना है कि चुनाव का होना ये दिखाता है कि सीरिया में सब सामान्य है और देश के भीतर और बाहर एक करोड़ 80 लाख लोग मतदान में हिस्सा ले सकते हैं.
हालाँकि देश में विद्रोहियों के नियंत्रण वाले प्रांत इदलिब में चुनाव के विरोध में एक बड़ा प्रदर्शन हुआ. वहीं निर्वासन में रह रहे देश के विपक्षी नेताओं ने इसे पाखंड बताया.
सीरियन निगोशिएशन कमीशन के प्रवक्ता याह्या अल-अफ़रीदी ने कहा कि ये चुनाव "सीरियाई जनता का अपमान" दिखाता है.
उन्होंने कहा, "ये रूस और ईरान की सहायता से सरकार का, राजनीतिक प्रक्रिया को समाप्त करने के लिए लिया गया फ़ैसला है. इससे ज़ुल्म जारी रहेगा."
फ़्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और अमेरिका ने मतदान से पहले एक संयुक्त बयान जारी कर इस चुनाव को "अवैध" बताया था और कहा था कि संयुक्त राष्ट्र की निगरानी के बिनान ये "ना स्वतंत्र होगा ना निष्पक्ष".
बयान में कहा गया, "हम सीरियाई लोगों की आवाज़ों का समर्थन करते हैं, जिनमें वहाँ के नागरिक संगठन और विपक्ष शामिल हैं, जिन्होंने चुनाव प्रक्रिया को अवैध बताकर इसकी निंदा की है."
सीरिया सरकार ने चुनाव ऐसे समय करवाए जब वो संयुक्त राष्ट्र की अगुआई में एक नए संविधान का मसौदा बनाने के लिए काम कर रही है. इस नए संविधान का मुख्य मक़सद यूएन की निगरानी में वहाँ स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव करवाना है जिसमें लाखों शरणार्थियों समेत सभी सीरियावासी हिस्सा ले सकें.
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ताक़तवर होते असद
55 वर्षीय बशर अल-असद वर्ष 2000 से ही सीरिया के राष्ट्रपति बने हुए हैं.
इससे पहले उनके पिता हाफ़िज़ अल-असद ने सीरिया पर एक चौथाई सदी से ज़्यादा वक़्त तक राज किया था.
सीरिया में इससे पहले 2014 में चुनाव हुए थे. तब वहाँ देश भर में लड़ाई छिड़ी थी और विपक्ष ने चुनाव में शामिल होने से इनकार कर दिया था.
इस एकतरफ़ा चुनाव में 88% वोट हासिल कर असद लगातार तीसरी बार सत्ता में बने रहे थे.
इस चुनाव के बाद लड़ाई का पलड़ा राष्ट्रपति असद के पक्ष में झुक गया. सीरियाई सेना की मदद के लिए रूस और ईरान आगे आ गए. रूस ने हवाई हमलों से साथ दिया तो ईरान ने अपने समर्थन वाली मिलिशिया को मदद के लिए भेजा.
हालाँकि, सीरिया में अभी भी ज़्यादातार हिस्सों पर विद्रोहियों, जिहादियों और कुर्दों के नेतृत्व वाली सेनाओं का नियंत्रण है. सीरिया में अभी संकट के राजनीतिक समाधान की कोई संभावना नज़र नहीं आती.
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