पाकिस्तान को फ़लस्तीनी राजदूत और हमास नेता हानिया ने कहा शुक्रिया; राजदूत बोले : एक दिन साथ पढ़ेंगे अल-अक़्सा में नमाज़

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- पाकिस्तान में फ़लस्तीनी राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान के प्रयासों को सारी दुनिया याद रखेगी.
- राजदूत ने कहा-एक दिन हम साथ पढ़ेंगे अल-अक़्सा मस्जिद में नमाज़.
- हमास नेता इस्माइल हानिया ने भी रैली में पाकिस्तान का शुक्रिया अदा किया.
- कराची में रविवार को फ़लस्तीनियों के समर्थन में विशाल रैली.
- जमात-ए-इस्लामी ने कहा अगले रविवार पेशावर में भी होगी रैली.

पाकिस्तान में फ़लस्तीनी राजदूत ने पाकिस्तान की जनता, सरकार और वहाँ के नेताओं का आभार जताते हुए कहा है कि उसकी कोशिशों को न केवल फ़लस्तीनी बल्कि सारी दुनिया याद रखेगी.
राजदूत अहमद राबेइ ने रविवार को एक बयान में कहा,"हम फ़लस्तीनियों की आज़ादी को समर्थन देने, मासूम और नि:शस्त्र फ़लस्तीनी लोगों पर किए गए इसराइल के ज़ुल्म की निंदा करने के साथ-साथ फ़लस्तीनी मुद्दे के हल के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह करने के उनके (पाकिस्तान के) प्रयासों का दिल से आभार प्रकट करते हैं."
राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान ने सहमति करवाने में एक अहम भूमिका निभाई और इस "ऐतिहासिक भूमिका को न केवल फ़लस्तीनी बल्कि पूरी दुनिया याद रखेगी.''
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उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस्लामिक देशों के संगठन ओआईसी और संयुक्त राष्ट्र महासभा की आपात बैठक करवाने के लिए प्रयास किए जिसकी "बहुत प्रशंसा" हुई है.
राबेइ ने कहा कि पाकिस्तान ने 21 मई को फ़लस्तीनी एकजुटता दिवस मनाया और अपनी संसद से इसराइल की निंदा में जो प्रस्ताव पारित किया उसे भी कभी नहीं भूला जा सकेगा.
राजदूत ने कहा, ''ग़ज़ा की लड़ाई भले ख़त्म हो गई है मगर उनकी आज़ादी की लड़ाई जारी है.''
उन्होंने कहा,"अपने पाकिस्तानी भाइयों के साथ हम फ़लस्तीन को आज़ाद कराएँगे और एक दिन फ़लस्तीन की राजधानी अल-क़ुद्स अल शरीफ़ की अल-अक़्सा मस्जिद में साथ नमाज़ पढ़ेंगे."
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पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने फ़लस्तीनी राजदूत के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, "पाकिस्तान फ़लस्तीनी क्षेत्र के भाइयों को तब तक मदद करता रहेगा जब तक कि उन्हें उनके जायज़ अधिकार नहीं मिल जाते."
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के संघर्षविराम का स्वागत किए जाने वाले बयान का समर्थन करता है.
क़ुरैशी ने ट्वीट कर कहा, "यह महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने अपने बयान में क्षेत्रीय देशों की भूमिका को पहचाना जिसका पाकिस्तान भी हिस्सा है. बयान जारी करवाने में चीन, नॉर्वे और ट्यूनीशिया की कोशिशें भी सराहनीय हैं."

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फ़लस्तीनियों के समर्थन में रैली
पाकिस्तान के कराची शहर में रविवार को हज़ारों लोगों ने सड़कों पर उतर फ़लस्तीनियों के समर्थन में नारे लगाए. जमात-ए-इस्लामी की ओर से बुलाई गई इस रैली में फ़लस्तीनी झंडे लिए लोगों ने इसराइल के ख़िलाफ़ भी नारे लगाए.
रैली में हमास के नेता इस्माइल हानिया का फ़ोन पर भेजा एक संदेश भी सुनाया गया जिसमें उन्होंने "पाकिस्तान के लोगों का शुक्रिया अदा किया".
हमास नेता ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि पाकिस्तान सरकार अंतरराष्ट्रीय मंचों पर फ़लस्तीनियों के लिए आवाज़ उठाती रहेगी.
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रैली में जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख सिराजुल हक़ ने इसराइली सेना का "सफलतापूर्वक" विरोध करने के लिए फ़लस्तीनियों और हमास को बधाई दी.
उन्होंने संकट में इसराइली कार्रवाई न बंद करवा पाने के लिए पश्चिमी देशों और ख़ास तौर पर अमेरिका की भूमिका की आलोचना करते हुए कहा कि इसराइल संयुक्त राष्ट्र या अमेरिका की वजह से नहीं बल्कि निःशस्त्र फ़लस्तीनियों के विरोध की वजह से युद्धविराम के लिए मजबूर हुआ.
उन्होंने कहा कि पूरा पाकिस्तान फ़लस्तीनियों के जायज़ संघर्ष में उनके साथ खड़ा है.
जमात प्रमुख ने कराची की रैली में आए लोगों को शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि 30 मई को पेशावर में भी एक बड़ी रैली होगी.

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पाकिस्तान में फ़लस्तीनियों के लिए समर्थन
पाकिस्तान ने हाल में हुए इसराइल-फ़लस्तीनी संघर्ष में खुलकर फ़लस्तीनियों का समर्थन किया है.
कराची में पिछले सप्ताह बुधवार को भी फ़लस्तीनियों के समर्थन और इसराइल के विरोध में हज़ारों पाकिस्तानी सड़क पर उतरे थे.
प्रदर्शन में कराची पत्रकार संघ, पाकिस्तान फेडरल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट, पाकिस्तान मेडिकल असोसिएशन, नेशनल ट्रेड यूनियन एसोसिएशन और आम लोग शामिल हुए.
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इससे पहले पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी ने संसद में कहा था कि पाकिस्तानी लोगों को फ़लस्तीनियों के समर्थन में सड़क पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करना चाहिए.
पाकिस्तान ने इसराइल को एक राष्ट्र के तौर पर आज तक मान्यता नहीं दी है. पाकिस्तान का कहना है कि जब तक फ़लस्तीनियों के लिए एक स्वतंत्र देश नहीं बन जाता है तब वो इसराइल को मान्यता नहीं देगा.
पिछले साल जब बहरीन और यूएई ने इसराइल से रिश्ते सामान्य किए तो पाकिस्तान में भी बहस उठी कि जब अरब के देश ही इसराइल को गले लगा रहे हैं तो पाकिस्तान क्यों सख़्त रुख़ बनाए हुए है.
कहा जाता है कि पाकिस्तान में इस्लामिक धड़ा बहुत मज़बूत है और किसी भी सरकार के लिए इसराइल से रिश्ता सामान्य करने का फ़ैसला लेना मुश्किल है.
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