यहूदी विरोध के आरोप पर बोलीं पाक मंत्री- इस्लाम और हमारे पैग़ंबर का उपहास अभिव्यक्ति आज़ादी कैसे?

सीएनएन एंकर बियाना और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

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इमेज कैप्शन, सीएनएन एंकर बियाना और पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी

पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद क़ुरैशी के एक इंटरव्यू पर भारी विवाद छिड़ गया है. कहा जा रहा है कि इसराइल का विरोध करते हुए उन्होंने कुछ यहूदी विरोधी (एंटी सिमेटिक) बातें कह दीं.

हालाँकि पाकिस्तान की सरकार ने क़ुरैशी का बचाव किया है और कहा कि उन्होंने जो कुछ बोला उसमें 'यहूदी विरोधी' जैसा कुछ भी नहीं था.

पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने यह इंटरव्यू अमेरिकी समाचार चैनल सीएनएन को दिया था.

क़ुरैशी बुधवार को इसराइल और हमास के टकराव को लेकर संयुक्त राष्ट्र में आम सभा की आपातकालीन बैठक में शामिल होने न्यूयॉर्क पहुँचे थे.

इसी दौरान उन्होंने सीएनएन की बिआना गोलोड्रीगा को इंटरव्यू दिया.

इंटरव्यू में क्या हुआ?

इंटरव्यू में बियाना ने पाकिस्तानी विदेश मंत्री से पूछा कि क्या वो निकट भविष्य में युद्धविराम की संभावना देखते हैं?

जावब में क़ुरैशी ने कहा, ''युद्धविराम को रोका नहीं जा सकता. इसराइल अपने संबंधों के बावजूद मीडिया में यह युद्ध हार रहा है. चीज़ें बदल रही हैं और लोगों का दबाव भी बढ़ रहा है.''

क़ुरैशी से पूछा गया कि वो किस संबंध की बात कर रहे हैं? इस पर पाकिस्तानी विदेश मंत्री हँसे और कहा, "डीप पॉकेट्स. डीप पॉकेट्स."

डीप पॉकेट्स का मतलब वैसे व्यक्ति या संस्थान से है, जिसके पास आर्थिक संसाधनों की कोई कमी नहीं होती.

बिआना ने पूछा कि डीप पॉकेट्स का क्या मतलब है?

इसके जवाब में क़ुरैशी ने कहा, ''वे बहुत ही प्रभावी लोग हैं. वे मीडिया को नियंत्रित करते हैं.''

इस पर बियान ने कहा, ''मैं इसे यहूदी विरोधी बयान कहूंगी.''

इसके जवाब में क़ुरैशी ने कहा, ''आप इसे देखिए कि उनका बहुत प्रभाव है. उन्हें बहुत कवरेज़ भी मिलती है. फ़लस्तीनियों के लिए नागरिक पत्रकार रिपोर्टिंग कर रहे हैं और वीडियो क्लिप शेयर कर रहे हैं.''

बिआना ने फिर पूछा, ''क्या हम दोनों पक्षों में शांति और समान मानवाधिकार को यहूदी विरोधी मंशा से आगे नहीं रख सकते हैं? हम देख रहे हैं कि दुनिया भर में यहूदी विरोधी बातें बढ़ रही हैं.''

पाकिस्तान

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इसके जवाब में क़ुरैशी ने कहा, "मैं न तो रॉकेट हमले का समर्थन कर रहा हूँ और न ही एरियल बमबारी का.''

बिआना ने फिर से पूछा, ''आपने बातचीत की शुरुआत की तो निजी तौर पर मैंने ख़ुद को अपमानित महसूस किया. आपने शुरुआत में ही कहा कि इसराइल के मीडिया में क़रीबी दोस्त और शक्तिशाली दोस्त हैं. ये यहूदी विरोध वाली भाषा है.''

इस पर क़ुरैशी ने कहा, ''पूरी दुनिया में ऐसी धारणा है. मैम, आप इसकी उपेक्षा नहीं कर सकती हैं.''

बिआना ने इसके जवाब में कहा, ''अगर आप ईमानदारी से किसी चीज़ को उठाते हैं तो आपका तरीक़ा तटस्थ होना चाहिए न इसकी झलक मिलनी चाहिए कि आप कहाँ से आए हैं.''

इस पर क़ुरैशी ने कहा, ''मैं तटस्थ हूँ और ऐसा ही रहना चाहूँगा. जिनकी जान जा रही है, उनकी मैं अनदेखी नहीं कर सकता. मेरे लिए हर मानव जीवन अहम है.''

इसी दौरान बिआना ने क़ुरैशी से पूछा कि अगर आपके लिए हर मानव जीवन की अहमियत है तो आप चीन में वीगर मुसलमानों को लेकर क्यों चुप रहते हैं जबकि दुनिया के कई देश कह रहे हैं कि चीन जनसंहार कर रहा है?

पाकिस्तानी विदेश मंत्री इस सवाल का जवाब देने में लड़खड़ाते दिखे.

उन्होंने कहा, ''देखिए, मेरी सरकार इन मुद्दों पर हमेशा बोलती है. आपको पता है कि चीन हमारा बहुत नज़दीक का दोस्त है. हम इस मामले में डिप्लोमैटिक चैनल का इस्तेमाल करते हैं. हम हर मामले पर सार्वजनिक रूप से बात नहीं कर सकते.''

बिआना ने क़ुरैशी के इस जवाब पर पूछा कि अगर चीन आपको फंड देता है तो क्या आप वीगर मुसलमानों के मानवाधिकारों पर चुप रहेंगे? आप गज़ा में मानवाधिकारों की बात ख़ूब करते हैं लेकिन वीगर पर कुछ नहीं बोलेंगे?

इसके जवाब में क़ुरैशी ने कहा, ''चाहे गज़ा हो या कश्मीर, हम मानवाधिकारों के उल्लंघन पर बोलेंगे.'' हालाँकि क़ुरैशी ने तब भी चीन और वीगर मुसलमानों का नाम नहीं लिया.

शाह महमूद कु़रैशी

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इंटरव्यू को लेकर विवाद, क़ुरैशी का विरोध और समर्थन

11 मिनट के इस इंटरव्यू के कारण शाह महमूद क़ुरैशी की सोशल मीडिया पर काफ़ी आलोचना हो रही है. उन पर आरोप लग रहा है कि उन्होंने यहूदी विरोधी बातें कही हैं.

इंटरव्यू के बाद बियाना ने ट्वीट कर कहा, "मुझे यक़ीन नहीं हो रहा है कि यह समझाना पड़ रहा है लेकिन इसमें ज़रा भी संहेद नहीं होना चाहिए कि इसराइल के लिए 'मीडिया को काबू करने' और 'डीप पॉकेट्स' जैसी बातें कहना यहूदी विरोधी है."

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जाने-माने ब्रितानी-अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन ने भी बियाना का बचाव किया है और पाकिस्तानी विदेश मंत्री की बातों को यहूदी विरोधी करार दिया है.

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उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, "अगर आप यह दावा करना चाहते हैं कि मीडिया इसराइल को लेकर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाता है, इसराइल समर्थक संस्थाएँ मीडिया में लॉबिंग करती है या फिर पश्चिमी राजनीति में इसराइल का प्रभाव है तो यह ठीक है लेकिन यह दावा करना कि इसराइल अपने 'डीप पॉकेट्स' से मीडिया को 'काबू करता है', ठीक नहीं है."

मेहदी हसन ने भी अपने दूसरे ट्वीट मे पाकिस्तान की चीन में वीगर मुसलमानों को लेकर उदासीनता पर सवाल खड़े किए.

उन्होंने पाकिस्तानी मानवाधिकार मंत्री का वो इंटरव्यू भी ट्वीट किया जिसमें उन्होंने उनसे चीन में वीगर मुसलमानों के उत्पीड़न पर सवाल पूछे थे.

हालाँकि बड़ी संख्या में लोग क़ुरैशी के बचाव में भी उतरे.

गज़ा में हिंसा

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'पैंगबर का उपहास अभिव्यक्ति की आज़ादी लेकिन इसराइल पर सवाल यहूदी विरोध?'

पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मज़ारी ने ट्वीट कर कहा, ''इस्लाम और हमारे पैग़ंबर के उपहास के साथ इस्लामोफ़ोबिया फैलाना उनके लिए अभिव्यक्ति की आज़ादी है लेकिन जब हम पश्चिम के मीडिया में इसराइली प्रभाव की बात करते हैं तो यह यहूदी विरोधी हो जाता है. उधर फ़लस्तीनियों का जनसंहार होता है और वो दावा आत्मरक्षा का करते हैं.''

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मज़ारी ने अपने दूसरे ट्वीट में कहा, ''अब वक़्त आ गया है कि फ़र्ज़ी नैरेटिव को नकारा जाए. अब बहुत हो गया. हमें इन चीज़ों से ब्लैकमेल नहीं किया जा सकता क्योंकि उस इतिहास का बोझ नहीं उठा सकते, जिसे पश्चिम के लोग हमारे कंधों पर शिफ़्ट करना चाहते हैं.''

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मज़ारी ने पूछा, ''क़ुरैशी की बात यहूदी विरोधी कैसे हो गई? यह पक्षपात और फ़र्ज़ी आरोप शर्मनाक हैं. सीएनएन सच का सामना नहीं कर सकता.''

मज़ारी के ट्वीट के जवाब में पाकिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मोईद युसूफ़ ने कहा, ''आपने बिल्कुल सही कहा. अब वक़्त आ गया है कि हम पाखंड के ख़िलाफ़ खुलकर बोलें.''

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पाकिस्तानी पत्रकार अम्मार अली जन ने ट्वीट कर कहा, ''क़ुरैशी का यह कहना है कि अमेरिका के मीडिया नैरेटिव में इसराइल का नियंत्रण है, कोई यहूदी विरोधी बात नहीं है."

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अली ने कहा, ''अमेरिका के जाने-माने बुद्धिजीवी नोम चॉम्स्की हमेशा अमेरिकी मीडिया में फ़लस्तीनियों के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये की बात हमेशा करते हैं.

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'आईएसआईएस की निंदा इस्लामोफ़ोबिया नहीं, इसराइल की निंदा यहूदी विरोधी नहीं'

पत्रकार ज़र्रार खुहरो ने क़ुरैशी के ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा, ''जिस तरह आईएसआईएस की निंदा इस्लामोफ़ोबिया नहीं है उसी तरह इसराइल की निंदा यहूदी विरोध नहीं है.''

वकील और एक्टिविस्ट जिबरान नासिर का मानना है कि सीएनएन एंकर ने 'बेवकूफ़ाना तरीके से' पाकिस्तानी विदेश मंत्री पर 'यहूदी विरोधी' बातें करने का आरोप लगाया है ताकि दुनिया का ध्यान इसराइल की उस प्रोपगैंडा मशीनरी से हट जाए जिसमें वो अपने अपराध धोता है.

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पाकिस्तान में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हाफ़िज चौधरी ने कहा कि क़ुरैशी के बयानों को "कल्पना के आधार पर यहूदी विरोधी" नहीं ठहराया जा सकता.

उन्होंने ट्वीट किया, "क़ुरैशी के बयानों को दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से जैसे तोड़ा-मरोड़ा गया उससे यही साबित होता कि वो सही बात कर रहे थे. अभिव्यक्ति की आज़ादी सबके लिए बराबर होनी चाहिए."

सीएनएन एंकर के आरोपों के जवाब में सत्तासाधी पार्टी पीटीआई ने सीएनएन और उनका 'बेहद निंदनीय व्यवहार' बताया है. पार्टी ने अपने आधिकारिक हैंडल से किए ट्वीट में पूछा है, "उनके बयान का कौन सा हिस्सा यहूदी विरोधी था?"

वीडियो कैप्शन, इसराइल-गज़ा की जंग में क्या जायज़ क्या नाजायज़?

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