पुतिन ने दी चेतावनी- अमेरिका और अन्य देश 'लक्ष्मण रेखा' न पार करें

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रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन ने पश्चिमी देशों को चेतावनी दी है कि वो रूस के साथ लक्ष्मण रेखा पार न करें. पुतिन ने आरोप लगाया कि बेलारूस में विद्रोह की साज़िश की गई. उन्होंने इसकी आलोचना की है.
राष्ट्रपति पुतिन ने अपने सालाना राष्ट्रीय संबोधन में ये चेतावनी दी. इस समय यूक्रेन और विपक्षी नेता एलेक्सी नवेलनी को लेकर पश्चिमी देशों के साथ रूस का तनाव चल रहा है.
उन्होंने कहा, "अन्यायपूर्ण प्रतिबंधों का इस्तेमाल अब अधिक ख़तरनाक दिशा में आगे बढ़ रहा है, जैसे बेलारूस में तख़्तापलट का प्रयास."
पुतिन ने बेलारूस के राष्ट्रपति एलेक्ज़ेंडर लुकाशेंको का समर्थन किया, जो विरोध का सामना कर रहे हैं.
17 अप्रैल को बेलारूस के अधिकारियों ने ये जानकारी दी थी कि उन्होंने अमेरिका के समर्थन से राष्ट्रपति लुकाशेंको को मारने की साज़िश को नाकाम कर दिया है. रूस की संघीय जाँच एजेंसी एफ़एसबी ने कहा था कि उसने इस साज़िश में कथित रूप से शामिल बेलारूस के दो लोगों को हिरासत में लिया है.
लेकिन तख़्तापलट के दावे को निर्वासित विपक्षी नेता स्वेतलाना तिकानोवस्क्या ने ख़ारिज करते हुए इसे एक उकसावे की संज्ञा दी.
स्वेतलाना तिकानोवस्क्या के समर्थन में पिछले साल से बड़े प्रदर्शन हुए हैं. पिछले साल लुकाशेंको ने चुनाव में जीत का दावा किया. हालाँकि उन पर चुनाव में धांधली के आरोप लगे. प्रदर्शन में बड़ी संख्या में शामिल लोगों की पिटाई हुई और उन्हें पुलिस ने हिरासत में ले लिया.
पश्चिम को चेतावनी

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रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने संबोधन में कहा कि उनका देश सभी के साथ अच्छा संबंध चाहता है, लेकिन पश्चिमी देशों की ओर से लगातार रूस को निशाना बनाने की कोशिश हो रही है.
पुतिन ने कहा, "हम रिश्तों को सामन्य करने की कोशिशें ख़त्म नहीं करना चाहते, लेकिन अगर कोई हमारे अच्छे इरादों को हमारी कमज़ोरी समझता है तो हमारी प्रतिक्रिया उसी तरह कठोर होगी."
उन्होंने कहा कि वे हर मामलों में ख़ुद ये तय करेंगे कि इसकी सीमा क्या है.
यूक्रेन को लेकर भी रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बना हुआ है. ऐसी ख़बरें हैं कि रूस ने यूक्रेन के साथ लगे विवादित इलाक़ों में अपने एक लाख से ज़्यादा सैनिकों को तैनात किया है.
बड़ी संख्या में सेना क्राइमिया में है. वर्ष 2014 में रूस ने क्राइमिया को यूक्रेन से छीनकर अपने में मिला लिया था.
रूस पूर्वी यूक्रेन के अलगाववादियों को अपना समर्थन देता है और रूसी सैनिकों की बढ़ती संख्या से इस इलाक़े में रूसी दख़ल की आशंका जताई जा रही है.
अपने भाषण में रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देश बेलारूस या यूक्रेन के बारे में नहीं सोचते थे, जब वहाँ प्रदर्शन चल रहे थे. यूक्रेन की राजधानी कीएफ़ के मेडन स्क्वेटर में फ़रवरी 2014 में रूस समर्थक राष्ट्रपति विक्टर यानुकोविच के ख़िलाफ़ बड़े प्रदर्शन हुए थे और यानुकोविच को रूस भागना पड़ा था.
पुतिन ने चेतावनी देते हुए कहा कि रूस के ख़िलाफ़ किसी उकसाने वाली कार्रवाई करने वालों को पछताना पड़ेगा और ऐसा उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ होगा.
पिछले सप्ताह अमेरिका ने रूस पर गंभीर आरोप लगाते हुए 10 रूसी राजनयिकों को निलंबित कर दिया था. रूस ने भी बदले की कार्रवाई की. इसी तरह के आरोप प्रत्यारोप चेक गणराज्य और पोलैंड के साथ भी हुए.
नवेलनी के समर्थन में प्रदर्शन

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व्लादिवोस्तोक और पूर्वी रूस के अन्य शहरों में पुतिन के बड़े आलोचक समझे जाने वाले एलेक्सी नवेलनी के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं.
नवेलनी गंभीर रूप से बीमार हैं और राजधानी मॉस्को से 180 किलोमीटर दूर जेल के एक अस्पताल में भर्ती हैं.
पूरे देश में नवेलनी के कई समर्थकों को पुलिस ने गिरफ़्तार किया है और उन्हें हिरासत में रखा गया है. इनमें नवेलनी के वकील लुबोफ़ सोबोल और प्रवक्ता कीरा यारमिश शामिल हैं.
अधिकारियों का कहना है कि नवेलनी के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शन ग़ैर क़ानूनी हैं.
कोरोना पर भी चर्चा

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पुतिन ने अपने संबोधन में कोरोना पर भी चर्चा की. उनके भाषण का पहला हिस्सा कोरोना पर ही केंद्रित था.
उन्होंने कहा कि वैक्सीनेशन बहुत ज़रूरी है, क्योंकि दूसरा कोई रास्ता नहीं है.
उन्होंने रूस के सभी लोगों से वैक्सीन लेने की अपील की.
पुतिन ने उम्मीद जताई कि सर्दियों तक उनका देश कोरोना के ख़िलाफ़ इम्युनिटी हासिल कर लेगा.
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