अमेरिका के प्रतिबंध लगाने पर रूस बोला, माकूल जवाब मिलेगा

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अमेरिका ने रूस पर साइबर हमले और दूसरी शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ करने की बात करते हुए उसके ख़िलाफ़ प्रतिबंधों की घोषणा की है और 10 राजनयिकों को निष्कासित कर दिया है.
व्हाइट हाउस ने कहा है कि इन प्रतिबंधों का मक़सद रूस की 'हानिकारक विदेशी गतिविधियों' की रोकथाम करना है.
उसने एक बयान में कहा है कि पिछले वर्ष 'सोलरविन्ड्स' की बड़ी हैकिंग के पीछे रूसी ख़ुफ़िया एजेंसियों का हाथ था.
उसने साथ ही रूस पर 2020 के अमेरिकी चुनाव में हस्तक्षेप करने का भी आरोप लगाया है.
रूस ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि वो इसका जवाब देगा.
राष्ट्रपति जो बाइडन ने गुरुवार को एक आदेश जारी किया जिसमें इन प्रतिबंधों का ब्यौरा दिया गया है. इनमें रूस के 32 अधिकारियों और लोगों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई है.
अमेरिका ने ये क़दम ऐसे वक़्त उठाया है, जब दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति है.
पिछले महीने अमेरिका ने रूस के सात अधिकारियों के ख़िलाफ़ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आलोचक एलेक्सी नवेलनी को ज़हर देने के मामले में कार्रवाई की थी. रूस इस आरोप से इनकार करता है.
मंगलवार को बाइडन ने पुतिन को फ़ोन किया था जिसमें उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रीय हितों की दृढ़ता से रक्षा करने का संकल्प जताया. उन्होंने साथ ही पुतिन के साथ एक बैठक करने का भी प्रस्ताव रखा जिसमें उन मुद्दों की पहचान की जा सके जिनमें दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं.
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प्रतिबंध
गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन ने रूस के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले को 'आनुपातिक' बताया.
बाइडन ने पत्रकारों से कहा, "मैंने राष्ट्रपति पुतिन से स्पष्ट कर दिया कि हम और भी बहुत कुछ कर सकते थे, पर मैंने वो नहीं किया. अमेरिका रूस के साथ तनाव और संघर्ष बढ़ाने का एक सिलसिला नहीं शुरू करना चाहता."
उन्होंने साथ ही कहा कि आगे का रास्ता सोची-समझी वार्ता और कूटनीतिक प्रक्रिया से निकलेगा.
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व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि नये प्रतिबंध दिखाते हैं कि रूस ने अगर 'अस्थिर करने वाली अंतरराष्ट्रीय कार्रवाइयाँ' जारी रखीं तो अमेरिका उसे इसकी एक 'रणनीतिक और आर्थिक रूप से प्रभावी क़ीमत चुकाने वाले' फ़ैसले करेगा.
उसने एक बार फिर अपना ये पक्ष दोहराया है कि साइबर हमलों के पीछे रूस सरकार का हाथ है और वो अमेरिका और उसके सहयोगी देशों में 'स्वतंत्र और निष्पक्ष लोकतांत्रिक चुनावों को' प्रभावित करने का प्रयास कर रहा है.
उसने ख़ासतौर पर रूसी विदेशी ख़ुफ़िया एजेंसी एसवीआर पर सोलरविंड्स हमलों का आरोप लगाया है.
इस हमले से साइबर अपराधियों को 18,000 सरकारी और निजी कंप्यूटर नेटवर्कों में पहुँच मिल गई थी.
पिछले साल दिसंबर में तत्कालीन अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा था कि उनका मानना है कि इस हमले के पीछे रूस का हाथ है.

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रूस की प्रतिक्रिया
प्रतिबंधों की घोषणा के थोड़ी ही देर बाद रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे 'एक शत्रुतापूर्ण क़दम' बताया जो ख़तरनाक तरीक़े से संघर्ष का पारा बढ़ाएगा.
मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "ऐसी आक्रामक हरकतों का निश्चित तौर पर एक माकूल जवाब दिया जाएगा."
रूसी विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी राजदूत को तलब किया है.
वहीं यूरोपीय संघ, नेटो और ब्रिटेन ने अमेरिकी क़दम के समर्थन में बयान जारी किये हैं.
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क्या है विवाद की पृष्ठभूमि
जो बाइडन ने फ़रवरी में विदेश नीति पर अपना पहला भाषण देते हुए कहा था कि रूस का सामना किया जाएगा.
उन्होंने कहा था, रूस की आक्रामक हरकतों से अमेरिका में उलट-पुलट होने का वक़्त चला गया है.
2014 में रूस के क्राइमिया पर कब्ज़े के समय बाइडन अमेरिका के उपराष्ट्रपति थे और तब ओबामा-बाइडन सरकार पर कुछ नहीं करने का आरोप लगा था.
मगर हाल के दिनों में जो बाइडन ने रूस को यूक्रेन में आक्रामक रवैये के लिए रूस को चेतावनी दी है. रूस वहाँ सीमा के इलाक़ों में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है.
इससे पहले डोनल्ड ट्रंप रूसी राष्ट्रपति पुतिन की आलोचना करने से बचते रहे थे.
पिछले महीने एक रिपोर्ट में अमेरिकी खुफ़िया एजेसियों ने ये निष्कर्ष दिया कि रूसी राष्ट्रपति ने शायद ट्रंप को दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव में मदद पहुँचाने के लिए ऑनलाइन मदद करने का निर्देश दिया था.
लेकिन कार्नेगी मॉस्को सेंटर के मुताबिक ट्रंप ने इसके बावजूद रूस के ख़िलाफ़ रिकॉर्ड 40 से ज़्यादा प्रतिबंध लगाए.
2018 में उन्होंने 60 रूसी राजनयिकों को निष्कासित भी किया था.
बीबीसी के सुरक्षा मामलों के संवाददाता गॉर्डन कोरेरा का विश्लेषण

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बाइ़़डन प्रशासन काफ़ी सावधानी से क़दम उठाने की कोशिश कर रहा है. अमेरिकी अधिकारी अभी रूस की कई अस्वीकार्य हरकतों के ख़िलाफ़ क़दम उठा रहे हैं ताकि वो आगे ऐसा ना करे. वो ये भी संकेत देना चाह रहे हैं कि वो ट्रंप प्रशासन की तुलना में ज़्यादा सख़्त फैसले लेंगे.
मगर वो साथ ही ये भी कह रहे हैं कि वो संबंधों में गिरावट नहीं देखना चाहते. उनका संदेश ये है कि हमारा जवाब "दृढ़ और उसी अनुपात में होगा".
सोलरविंड्स साइबर-जासूसी की घटना सबसे बड़ी चिंता की बात थी. मगर प्रतिबंध का असर और बड़ा लगे इसलिए अमेरिका ने इसकी वजहों में चुनाव में हस्तक्षेप और दूसरे मुद्दों को भी शामिल कर लिया है.
राजनयिकों के निष्कासन और कई लोगों के ख़िलाफ़ प्रतिबंध लगाने के फ़ैसले को रूस उसी तरह ख़ारिज कर देगा जैसी कि उम्मीद है. हालाँकि रूस पर लगाए गए वित्तीय प्रतिबंध इस दिशा में लिया गया थोड़ा बड़ा फ़ैसला है.
अमेरिका ने साथ ही रूस की ख़ुफ़िया गतिविधियों के बारे में बहुत ब्यौरा प्रकाशित किया है जिनमें भ्रामक जानकारियाँ फैलाने वाली रूसी कंपनियों के अलावा रूसी टेक्नोलॉजी कंपनियों का भी ज़िक्र है जो कथित तौर पर ख़ुफ़िया एजेंसियों को मदद करती हैं.
उनकी उम्मीद ये होगी कि इससे रूस के लिए ये काम करना मुश्किल हो जाएगा. मगर पिछले अनुभव बताते हैं कि रूस इससे रूकेगा, इसकी संभावना कम है.
व्हाइट हाउस ने इस बीच ये भी स्वीकार किया है कि इन दावों को साबित करने के प्रमाण कम हैं कि रूस ने अमेरिकी सैनिकों को मारने के लिए तालिबान को इनाम देने की पेशकश की थी.
इस बारे में ख़फ़िया एजेंसियों की एक रिपोर्ट पिछले साल जून में न्यूयॉर्क टाइम्स में प्रकाशित हुई थी और जो बाइडन अपने चुनाव प्रचार में इसका ज़िक्र करते हुए डोनल्ड ट्रंप पर रूस को नहीं रोक पाने का आरोप लगाया था. ट्रंप ने तब इसे "फ़ेक न्यूज़" बताया था.
गुरुवार को व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव जेन साकी ने पत्रकारों से कहा कि ख़ुफ़िया एजेंसियों को इस दावे में कम भरोसा है. समझा जाता है कि ये दावे अफ़ग़ान बंदियों से मिली जानकारियों के आधार पर किए गए थे.
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