लिंक्डइन पर आया 'स्टे-एट-होम मॉम' विकल्प क्या आसान बनाएगा महिलाओं की ज़िंदगी

- Author, होली हॉन्डरिच
- पदनाम, बीबीसी न्यजू़, वॉशिंगटन
बच्चे की डिलीवरी के बाद फिर से नौकरी पर आने वाली महिलाओं को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है. इन चुनौतियों को कम करने के लिए प्रोफ़ेशनल नेटवर्किंग साइट लिंक्डइन ने हाल ही में एक नया फ़ीचर शुरू किया है.
इसमें कामकाजी माता-पिता अपने लिए जॉब के सेक्शन में ''स्टे-एट-होम मॉम'' और ''स्टे-एट-होम डैड'' शीर्षक (जॉब टाइटल) चुन सकते हैं. इनका मतलब है: 'घर पर रहने वालीं मां' और 'घर पर रहने वाले पिता'.
हैदर बोलेन लगभग 11 सालों तक अपने दो बच्चों को बड़ा करने के बाद जनवरी 2020 में दोबारा काम करने के लिए तैयार हुई थीं.
उनके रेज़्यूमे में मास्टर डिग्री और स्टारबक्स में उनके सफल कॉरपोरेट करियर का ज़िक्र था. लेकिन पिछले 11 सालों से वो सिर्फ़ एक मां की ज़िम्मेदारियां निभा रही थीं और ये ऐसी ज़िम्मेदारी थीं जिसे कंपनियां काम की श्रेणी में नहीं रखतीं.
हैदर ने नौकरी की तलाश के लिए लिंक्डइन पर लॉगइन किया था लेकिन उन्हें उन 11 सालों को समझाने के लिए कोई सही शब्द नहीं मिल पाया. तब वहां ड्रॉप डाउन मेन्यू में ''स्टे-एट-होम मॉम'' का कोई विकल्प नहीं था.
तब उन्हें लगा कि कॉरपोरेट दुनिया को घर पर बिताए उन 11 सालों को समझाना बहुत मुश्किल होगा.
अमेरिका के कई नियोक्ताओं के लिए उनका बच्चों को, अपने घर के ख़र्चों को संभालने और दो अंतरराष्ट्रीय जगहों के बीच सामंजस्य बैठाने (एम्सटर्डेम जाना और वहां से आना) में लगा वो समय उनके करियर में आया एक बड़ा अंतराल है.

होममेकर और फ़ैमिली सीईओ
करियर में वापस लौटने वाले कुछ माता-पिता पारिवारिक ज़िम्मेदारियों में लगे उस समय के लिए 'होममेकर' शब्द का इस्तेमाल करते हैं. कुछ लोग 'फ़ैमिली सीईओ' या 'चीफ़ होम ऑफ़िसर' शब्दों को चुनते हैं.
हैदर ने अपने लिए फ़ैमिली सीओओ (चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफ़िसर) शब्द चुना था लेकिन वो नहीं चाहतीं थीं कि महिलाओं को अपने अनुभव को सही ठहराने के लिए ऐसे दिखावटी शब्दों का इस्तेमाल करना पड़े.
वो कहती हैं, ''हमें इसे लेकर ऐसी बेवक़ूफ़ी करने की क्या ज़रूरत है. आख़िर हमारे ऊपर एक मां की ज़िम्मेदारियां थीं.''
बैटर मार्केटिंग द्वारा प्रकाशित एक आर्टिकल में हैदर बोलेन ने अपनी इस परेशानी के बारे में लिखा था. उन्होंने इसे महिलाओं के लिए एक 'अंतनिर्हित पूर्वाग्रह' कहा.
कुछ हफ़्तों बाद ही लिंक्डइन ने कुछ नए जॉब टाइटल्स (नौकरी के लिए शीर्षक) लाने की घोषणा की.
इसी के तहत 'स्टे-एट-होम मॉम' और 'स्टे-एट-होम डैड' शीर्षक लाए गए ताकि नौकरी में आए इस अंतराल को बेहतर तरीक़े से परिभाषित करने का विकल्प मिल सके.
बोलेन कहती हैं, "ये बदलाव एक बड़ी शुरुआत है".
लेकिन बच्चों की देखभाल के लिए नौकरी छोड़ने वाली महिलाओं के लिए वापसी करना आसान नहीं होता. नौकरी में आये उस अंतराल का उन्हें काफ़ी नुक़सान उठाना पड़ता है.

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परिवारों के लिए मुश्किल स्थिति
प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक़ अमेरिका में पाँच में से एक माता-पिता बच्चे होने के बाद घर पर ही रहने का फ़ैसला करते हैं.
पिता बनने के बाद घर पर रहने वाले पुरुषों की संख्या में थोड़ी बहुत ही बढ़ोतरी हुई है. साल 1989 में ये संख्या 4% थी जो 2016 में बढ़कर 7% हो गई. लेकिन, इस मामले में आज महिलाओं की संख्या चार गुना ज़्यादा है.
अमेरिका औद्योगिक देशों में एकमात्र ऐसा देश है जहां अनिवार्य वैतनिक पारिवारिक अवकाश (पेड फ़ैमिली लीव) नहीं है.
राष्ट्रीय स्तर पर बने नियमों के मुताबिक़ कंपनियों के लिए 12 सप्ताह की अवैतनिक छुट्टियां देना ज़रूरी है. राज्यों और कंपनियों के कुछ अपने नियम भी हो सकते हैं, लेकिन अमेरिका में कई महिलाओं को वैतनिक छुट्टियां नहीं मिलती हैं.
वेंडरबिल्ट यूनिवर्सिटी में लॉ एंड इकोनॉमिक्स की प्रोफ़ेसर जेनिफ़र बेनेट शिनॉल कहती हैं, "बच्चे को जन्म देने के बाद कई महिलाओं को नौकरियां छोड़नी पड़ती हैं क्योंकि उनके पास छुट्टियां नहीं होतीं और ऐसे में बच्चे की परवरिश मुश्किल होती है. इस देश में हम परिवारों को एक मुश्किल स्थिति में मजबूर करते हैं."
बच्चे होने के बाद जो महिलाएं नौकरी छोड़ देती हैं, उनमें से एक-तिहाई महिलाएं पाँच सालों के अंदर वापस काम पर लौटना चाहती हैं. लेकिन, लंबे अंतराल के बाद फिर से नौकरी ढूंढने वाली महिलाओं के लिए बाज़ार में ख़ासा उत्साह नहीं होता है.
साल 2018 में हुए एक सर्वे के मुताबिक किसी इंटरव्यू में पुरानी नौकरी से निकाले गए जितने लोगों को चुना गया, उनके मुक़ाबले घर पर रहे माता-पिताओं की संख्या आधी थी. नियोक्ताओं का कहना होता है कि वो लंबे अंतराल के बाद आए बेरोज़गार माता-पिताओं के मुक़ाबले कम भरोसेमंद, कम योग्य और कम प्रतिबद्ध होते हैं.

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कमाने की क्षमता पर असर
जिन महिलाओं को नौकरी मिल भी जाती है, उन्हें इसका भारी ख़मियाज़ा भुगतना पड़ता है. एक अन्य अध्ययन के मुताबिक जो महिलाएं तीन साल या उससे अधिक समय से नौकरी से दूर रहती हैं, उनकी कमाने की क्षमता 37 प्रतिशत कम हो जाती है.
प्रोफ़ेसर जेनिफ़र बेनेट कहती हैं, "एक के बाद एक हुए अध्ययन दिखाते हैं कि जो महिलाएं अंतराल के बाद वापसी कर भी चुकी हैं, उनकी कमाने की क्षमता कभी पहले जैसी नहीं हो पाई."
कुछ महिलाएं ऐसी भी होती हैं जो डिलीवरी के बाद फिर से नौकरी ही नहीं करती हैं.
वैतनिक कर्मचारियों की संख्या में महिलाओं की संख्या धीरे-धीरे गिरी है और साल 1999 में ये गिरावट अपने चरम पर थी.
राष्ट्रीय श्रम क़ानून केंद्र के अनुसार कोरोना वायरस महामारी के बाद से 23 लाख महिलाओं ने नौकरी छोड़ दी है. महिलाओं की श्रम भागीदारी दर उस स्तर पर पहुँच गई है जो साल 1988 के बाद से नहीं देखी गई थी.
प्यू की 2019 की रिपोर्ट के अनुसार, काम पर वापस लौटने वालीं लगभग एक तिहाई महिलाएं फ़ुल टाइम काम नहीं करतीं जबकि हैदर बोलेन की तरह कई और अपना ख़ुद का काम शुरू कर लेती हैं.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने वैतनिक पारिवारिक अवकाश और कम ख़र्च में बच्चों की देखभाल जैसी कोशिशों के ज़रिए इन मसलों को हल करने का वादा किया था. इससे जुड़ी कुछ घोषणाएं आने वाले समय में हो सकती हैं.

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'मुझे घर पर रहने में शर्मिंदगी होती थी'
काम पर वापस लौटने की सोच रहीं महिलाओं को नौकरी में आए उस अंतराल के साथ भी जूझना पड़ता है.
हैदर बोलेन बताती हैं, "इतना पढ़ने और नौकरी करने के बाद मुझे बच्चे पालते हुए घर पर बेरोज़गार रहने में शर्म महसूस होती थी. मुझे विश्वास ही नहीं होता था कि मुझे शर्म आती थी."
बोलेने कहती हैं कि वो उस अंतराल को छुपाना चाहती थीं.
प्रोफ़ेसर जेनिफ़र बेनेट कहती हैं कि नौकरी में आए अंतराल को छुपाने की इच्छा होना स्वाभाविक है.
प्रोफ़ेसर बताती हैं, "अधिकतर करियर काउंसलर महिलाओं को बच्चों की देखभाल में लिए करियर ब्रेक को छुपाने की सलाह देते हैं."
प्रोफ़ेसर जेनिफ़र ने अपने सहकर्मी प्रोफ़ेसर जोनी हर्श के साथ उन महिलाओं पर एक शोध किया जिन्होंने नौकरी में आए अंतराल को छुपाने की कोशिश की थी.
वह कहती हैं, "हमने देखा कि ये सलाह महिलाओं पर उल्टी पड़ जाती है. हमारा अध्ययन कहता है कि नौकरी के अंतराल के बारे में छुपाने की बजाए उसे स्पष्टता के साथ बताना ज़्यादा बेहतर है."
वहीं हैदर बोलेन की बात करें तो उन्होंने नौकरी ढूंढना छोड़ दिया और वो फ्रीलांस लेखक के तौर पर काम कर रही हैं. उन्होंने एक डिजिटल ट्रैवल एंड कल्चर साइट भी शुरू की है.
वो कहती हैं कि फ्रीलांस के काम में अपना करियर ब्रेक छुपाने की जद्दोजहद नहीं करनी पड़ती.
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